Board index JoyofSatan666 JoS Sermons in Hindi Full

JoS Sermons in Hindi Full

For those who wish to establish a relationship with Satan.

Topics of discussion include: Demons, Magick, Satanic Witchcraft and much more!

http://www.joyofsatan.org/

Post Fri Jun 17, 2016 2:17 am

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पायरोकेनेसिस

Source URL - http://web.archive.org/web/201509070417 ... nesis.html

पायरोकेनेसिस सामर्थ्य है नियंत्रित करने का , जलने का एवं बुझाने का अग्नि को , एक व्यक्ति के मन की शक्तिओं के माध्यम से .

यह खतरनाक है . एक व्यक्ति को निपुण होना चाहिए एवं अति अनुभवी होना चाहिए ऊर्जा को सँभालने में एवं निर्देशित करने में , क्यूंकि अनुभव की कमी होने से आपको खतरनाक जलने से होने वाले घाव हो सकते हैं , भले ही आपकी आभा अर्थात औरा शक्तिशाली ही क्यों ना हो . एक विशेषकर शक्तिशाली आभा की आवश्यकता पड़ती है पायरोकेनेटिक सामर्थ्य के लिए . इसमें अत्यधिक फोकस अर्थात ध्यान केंद्रण एवं एकाग्रता की भी आवश्यकता पड़ती है .

1 .) शुरूवात करें एक मोमबत्ती को जलाने से .

2 .) इसे सुरक्षित रूप से करने के लिए , आपको निपुण होना चाहिए आग को बुझाने में उसे जलाने के पहले . अपने दोनों हाथों को , हथेलियों को अंदर की और तकरीबन आधा इंच अंदर की ओर मुख करके रखें मोमबत्ती की लपट से प्रत्येक ओर से और निर्देशित करें आपकी ऊर्जा को लपट में , इच्छा करते हुए की वह बुझ रही है . यह अत्यन्त उन्नत है और आपकी एक आभा बहुत शक्तिशाली होनी चाहिए . कोशिश करें ध्यान केंद्रित करने की / एकाग्रित करने की अपने हथेलिओं के बेच में काली ऊर्जा पर जहाँ लपटों को होना चाहिए .

3 .) लपट को जलने के लिए : अग्नि का आव्हान करें एवं सुषुम्ना को विस्तृत करें और ऊर्जा को निर्देशित करें जिसे आप अपने हथेलिओं को चक्रों में उत्पन्न करे हैं .

4 .) मोमबत्ती बुझ दें . अपने दोनों हाथों को , हथेलिओं को मोमबत्ती के बाती ( जिसे पर एक चिंगारी होनी चाहिए. ) से प्रत्येक ओर से लगभग आधा इंच अंदर की ओर मुख करते हुए रखें ,

5 .) ऊर्जा को निर्देशित करें अपने हथेलिओं के चक्रों से और एकाग्रित करें प्रचण्ड गर्मी को चिंगारी पर और इच्छा करें की वह जल जाये. एकाग्रित करने की कोशिश करते जाएँ सफ़ेद गर्म ऊर्जा पर , अपने हथेलिओं के बीच . चिंगारी , अभ्यास के साथ , शुरू हो जाएगी चमकदार चमकना और अंततः , जल जाएगी .

6 .) लपट को बुझा दें , अपने हथेलिओं के बीच की ऊर्जा पर एकाग्रित करें ध्यान को बाती पर की चिंगारी पर और निर्देशित करें की वह फिरसे जल जाएँ . पर्याप्त हथेली चक्र की ऊर्जा एवं एकाग्रता के साथ , वह फिरसे जल जाएगी .

7 .) जैसे जैसे आप उन्नति करें अपने हथेलिओं को और दूर से दूर ले जाते जाएँ .

8 .) जब आप निपुण हो जाएँ 2 - 3 फ़ीट दूर से ऐसा करने में , ध्यान एकाग्रित करें मोमबत्ती की बाती को जलाने की बिना चिंगारी के . ठंडी बाती को जलाएं .

अपने हथेलिओं के चक्रों की ऊर्जा को उपयोग करने के साथ साथ, आप अपनी तीसरी आँख की ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं . तीसरी आँख में होती है एक प्रत्यक्ष रेखा ऊर्जा की शारीरिक / भौतिक आँख तक जहाँ ऊर्जा प्रक्षेपण करती है अर्थात प्रोजेक्ट करती है . एक बार आप ऊपर बताये व्यायाम में निपुण हो जाएँ , कोशिश करें की आप अपने हाथों का कम से कम उपयोग करें . फिरसे , यह महत्वपूर्ण हैं की आप आग को जलाने के पहले उसे बुझाएं .

अपनी आभा को विस्तृत करें की वह मोमबत्ती की लपट से जुड़ जाये . मोमबत्ती एक फुट या उससे कम की दूरी पर होनी चाहिए आपके सामने से . अपनी आभा को जोड़ें और लपट को बुझाएं .

एक बार आप निपुण हो जाएँ , यही करें एवं चिंगारी को जलाएं .

जब आप सिर्फ अपनी आभा के माध्यम से मोमबत्ती की लपट को जलने में समर्थ हो जाएँ , विस्तृत करें अपनी आभा को एक वस्तु से जोड़ने के लिए आपके सामने एक या उससे कम फुट की दूरी पर जो है एवं गर्मी को प्रक्षेपित करें जैसा की आपने अपनी हथेलिओं के साथ किया था . जैसे जैसे आप प्रगति करते हैं , वस्तु को और अधिक से अधिक दूर ले जाते जाएँ .

सिर्फ वोयड मैडिटेशन करने के बजाये , ऊपर बतलाये व्यायाम को किया जा सकता है क्यूंकि उनको करने में प्रचण्ड , स्थिर एकाग्रता की आवश्यकता पड़ती है .

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Post Fri Jun 17, 2016 3:34 am

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टेलीकायनेसिस

Source URL - http://web.archive.org/web/201509150336 ... nesis.html

टेलीकायनेसिस सामर्थ्य है मन का जिससे वस्तुओं को हिलाया जाता है , एकाग्रता के माध्यम से . यह बहुत उन्नत है और आपको एक बहुत शक्तिशाली आभा की आवश्यकता पड़ेगी . हम सब के पास यह सामर्थ्य होता है , परन्तु सदिओं के ईसाई एवं क्सायन (xian) के मन की शक्तिओं के पीढ़यों तक किये गए दमन के कारन , अब यह हमारे मस्तिष्क का एक निष्क्रिय हिस्सा हो गया है . जिमनास्टिक पैंतरेबाज़ी को सीखने के जैसे , उसको *महसूस * करने के लिए एवं उपयोग करने के लिए , यह बहुत आसान हो जायेगा समय के साथ , समर्पण एवं धैर्य के साथ .

इस पृथ्वी पर प्रत्येक चीज़ रखती है एक ऊर्जा क्षेत्र या आभा , यहाँ तक की अचेतन वस्तुओं में भी यह होता है . टेलीकायनेसिस करने के साथ , आपको अपनी आभा को जोड़ना है वस्तु की आभा से जिसे आप हिलना चाहते हैं . आपकी आभा की शक्ति आपकी सफलता का निश्चय करेगी .

निम्न व्यायाम सहायता करते हैं टेलीकायनेसिस को विकसित करने में, ऊर्जा के हस्तकौशल का आपको अनुभव होना चाहिए और आपके हस्त अर्थात हाथों के चक्र शक्तिशाली होने चाहिए , यहाँ तक पहुँचने के लिए , आधार मैडिटेशन / ध्यान एवं हाथ के चक्र वाला मैडिटेशन में महारत प्राप्त करनी चाहिए .

इस व्यायाम को सबसे अच्छा शक्ति मैडिटेशन / ध्यान अर्थात पावर मैडिटेशन के बाद किया जाता है जब आपकी आभा शक्तिशाली होती है ,

1 .) शुरू करने के लिए , एक पेंडुलम को अपने सामने लतकलें . यह कोई भी वस्तु हो सकती है एक छोटी पेन्सिल से लेकर या एक हलकी गेंद , जैसे की एक पिंग पांग बॉल . कोई भी छोटी , हलकी और समान चीज चलेगी . यह आपके सामने होनी चाहिए , आदर्शरूप से एक टेबल के ऊपर , जहाँ आप बैठ सकते हैं रिलैक्स कर सकते हैं . पेंडुलम को लटकाएं , ऐसा की उसे कोई नई चु रहा है या उसके भौतिक संपर्क में आ रहा है . उसे ऐसा लटकाएं की वह सरलता से एवं स्वतंत्रता के साथ चल सके .

2 .) पेंडुलम के प्रत्येक साइड के लगभग एक इंच पर अपने हाथ को रखें , हथेलिओं पेंडुलम की ओर मुख की होंगी . निर्देशित करें ऊर्जा को अपने हथेलिओं के चक्रों से .

3 .) आप कोशिश करें धकेलने और खींचने की . आप देखेंगे आपकी आभा धक्का दे रही है और खींच रही है वस्तु को . एक हाथ धकेलता है , दूसरा हाथ खींचता है . दृश्य बनायें / कल्पना करें अपनी आभा का की वह पेंडुलम की आभा के साथ जुड़ रही है . अपने हाथों को न हिलाएँ .

जब आप पेंडुलम को हिलाने में समर्थ हो जाएँ , अपने हाथों को और दूर से दूर करते जाएँ .

अगला कदम है की अब आपको पेंडुलम को अपनी ऊँगली के छोर से ऊर्जा का उपयोग कर हिलाना है . पहले तो , उसे खींचने की कोशिश करें अपने ऊँगली छोरों के शक्ति से .

कुंजी है की आपको स्वयं को दूर करते जाना है वस्तु के साथ . अगला कदम है , जो की अत्यन्त उन्नत है , की आप अपने तीसरी आँख की शक्तिओं का उपयोग करना शुरू करें और अपनी आभा के साथ वस्तु की आभा को जोड़ें और इच्छा करें इच्छा शक्ति के साथ की वह चले .

हताश होने की ज़रुरत नहीं है . इसमें प्रचण्ड एकाग्रता की आवश्यकता पड़ती है , एक शक्तिशाली मन एवं आभा की आवश्यकता पड़ती है , परन्तु पर्याप्त धैर्य एवं अभ्यास के साथ , आप जिस समय वस्तु को हिलाना सीखें , वह छोटा और छोटा होता जायेगा . जब आप मस्तिष्क के इस भाग को उपयोग करना सीखते हैं और उसे शक्तिशाली बनाते हैं (तो यह बहुत सरल और सरल हो जायेगा), पहले के कुछ सर्वाधिक कठिन होते हैं . इसमें कई सत्रों की आवश्यकता पड़ सकती है , कभी कभी हफ़्तों तक भी , परन्तु यह असम्भव नहीं है .

यहाँ कुछ उपयोगी टिप्स हैं :

यह रही टिप्स :

1 .) यह निश्चित ही सहायक होता है की आप आभा को देखें . जब हम हमारी तीसरी आँख को खोलते हैं , यह हमें सामर्थ्य देता है , परन्तु हमें सीखना चाहिए इस देखने के सामर्थ्य को उपयोग करना . यह एथलेटिक्स / खेलकूद के अनुरूप है . अगर एक व्यक्ति में शक्ति एवं लचीलापन है , वहां क्षमता है , सिर्फ एक व्यक्ति को इतना करना है की वह चाल को महसूस करे और उस चाल को मसल मेमोरी में डाले . मेमोरी में डालने से तात्पर्य है की वह एकाग्रित होते हुए कार्य करे और सामंजस्य बनाए .

2 .) हल्की वस्तुओं के साथ शुरू करें . मणि पत्थर जैसे की क्वार्ट्ज क्रिस्टल बढ़िया होते हैं , अगर वे हलके एवं छोटे हों तो . इनकी खुदकी आभा शक्तिशाली होती है .

3 .) टेलीकायनेसिस को सबसे अच्छा शक्ति ध्यान अर्थात पावर मैडिटेशन के बाद किया जाता है जब एक व्यक्ति की ऊर्जा सर्वाधिक दीप्तिमान होती है .

4 .) किसी अन्य कौशल के जैसे , टेलीकायनेसिस को प्रतिदिन किया जाना चाहिए जब तक महारत प्राप्त न हो जाये. भारी से भारी वस्तुओं का उपयोग करते जाएँ जैसे जैसे निपुण होते हैं . मुझे ऊपर बतलायी विधि से सफलता मिली थी .

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Post Fri Jun 17, 2016 3:39 am

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चक्रों को कम्पन्न की सहायता से समायोजित करना अर्थात लय में लाना


Source URL - http://web.archive.org/web/201509150337 ... uning.html

हमारे प्रत्येक चक्र एक निश्चित पिच (स्वरमान) के अंदर प्रतिक्रिया करते हैं एवं उस गहरी प्रतिबिंबित ध्वनि के साथ भर जाते हैं . एक सरल तरीका जिससे हम यह पता लगा सकते हैं की टोन राग / ध्वनि सही है वह तरीका है की हम उसे महसूस करें . जब हम सही राग को पकड़ लेते हैं , हम उसे अपने चक्र में महसूस करने लगते हैं . इसके परिणाम स्वरुप चक्र कम्पन्न होने लगता है एवं ऊर्जा को छोड़ने लगता है .

कृपया ध्यान दें - निम्न बतलाये गए कम्पन्न [शक्ति के शब्द ] इन्हे संशोधित किया गया है. संस्कृत में के जो परंपरागत शब्द हैं उन्हें भ्रष्ट कर दिया गया है और उनके प्रभाव कम हो गए हैं . नीचे दिए कम्पन्न केंद्रित हैं एवं विशेषकर शक्तिशाली हैं , एवं ये नए / अनुभवहीन मेडिटेटर्स अर्थात ध्यान करने वालों के लिए नहीं हैं . मैं पूरे ज़ोर के साथ सुझाव देती हूँ नए / अनुभवहीन लोगों को की वे सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन / ध्यान करें और शुरू करें कुछ मध्यम शक्ति के शब्दों से , जब तक उनकी आत्मा और अधिक शक्ति को संभालना सकती है .

*बेस अर्थात मूलाधार चक्र : लौम/Laum , कम्पन्न किया जाता है - ललआहहह -ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म 1 ( LLAHHH – UUU – MMM* )

*सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र : वौम/Vaum , कम्पन्न किया जाता है - वाहहह -ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म(VAHHH – UUU – MMM )

*सोलर प्लेक्सस "666" अर्थात मणिपूर चक्र : रौम/Raum , कम्पन्न किया जाता है - राहहह -ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म 2(RAHHH – UUU – MMM** )

*हार्ट अर्थात अनाहत चक्र :यौम /Yaum , कम्पन्न किया जाता है - ययाहहह -ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म ( YYAHHH – UUU – MMM )

*थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र : हौम/Haum , कम्पन्न किया जाता है - हाहहह - ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म ( (HAHHH – UUU – MMM ))

*छटवां चक्र : औम (ॐ) / Aum , कम्पन्न किया जाता है - आहहह - ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म (AHHH – UUU – MMM )

* सातवां चक्र : मौम/Maum , कम्पन्न किया जाता है - ममाहहह -ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म ( MMAHHH – UUU – MMM )

1 ऊ /U का उच्चारण किया जाता है अंग्रेजी शब्द 'ब्लू/blue ' के जैसे
2 'र/R ' को लुढ़कना है

नीचे दिए कम्पन्न विशेषकर शक्तिशाली हैं , और जैसा की ऊपर कम्पन्न दिए हैं , इन कम्पन्नों को भी नए / अनुभवहीन मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ता द्वारा उपयोग नहीं करना चाहिए . इस बात को समझ लें . चेतावनी - बेस अर्थात मूलाधार चक्र सैटर्न /शनि के कम्पन्न अप्रिय ऊर्जाओं को पुकार सकते हैं , तो आप इस बात को समझ लें और सोच समझकर आगे बढ़ें . यह सबके साथ नहीं हुआ है , और कुछ लोगों के अनुभव इसके साथ सकारत्मक थे , परन्तु फिर भी एक संभावना है . अगर आपको कोई भी समस्याएं आपके जीवन में प्रकट होती दिखती हैं , तो यह बहुत अच्छा हो सकता है की आप ऊपर बताये हुए कम्पन्नों का उपयोग करें , इसके बजाये की आप नीचे दिए कम्पन्न करें .

*बेस अर्थात मूलाधार चक्र : शनिश्वरा/Shaniswara , कम्पन्न किया जाता है - श - आह - नई - स्स - वाह -रर -आह (SH-AH-NEE-SS-VAH-RR-AH )


*सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र : भौमाया /BHAUMAYA , कम्पन्न किया जाता है - बब -आहह - ऊऊऊ- मम - आह - याह ( BB-AHH-UUU-MM-AH-YAH )


*सोलर प्लेक्सस "666" अर्थात मणिपूर चक्र : सूर्याऐ /सूर्ये , कम्पन्न किया जाता है - सूऊऊ (लंबा सू ) -रर-याह-यय (SUUU-RR-YAH-YAY )


*हार्ट अर्थात अनाहत चक्र : शुक्राया /SHUKRAYA , कम्पन्न किया जाता है - शह -ऊऊऊ -ककक -रर-आह-याह (SHH-UUU-KKK-RR-AH-YAH )


*थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र : बुधाया/BUDHAAYA , कम्पन्न किया जाता है - बूऊ (लंबा बू ) -दद-हाह-आह-याह (BUU-DD-HAH-AH-YAH )


*छटवां चक्र : चंद्रामासे /CHANDRAMASE , कम्पन्न किया जाता है - च -आह -नन - द -रर-आह-मम-आहसेय ( CH-AH-NN-D-RR-AH-MM-AHSAY )

* * सातवां चक्र : गुरुआवे /GURUAVE , कम्पन्न किया जाता है - गग -ऊऊऊ - रर- ऊऊऊ -आह - वेय (GG-UUU-RR-UUU- AH-VAY )

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Post Fri Jun 17, 2016 10:42 am

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तत्वों को एकाग्रित करना

Source URL - http://web.archive.org/web/201509151756 ... ments.html

1.) अपने मन को शांत करें .

2 .) अग्नि तत्व को अंदर सांस में लें , एवं सांस को बाहर छोड़ने पर , उसका सब कुछ को निर्देशित करें अपने बेस अर्थात मूलाधार चक्र पर , ताकि वह केंद्रीभूत रहे .

3 .) ऐसा पांच साँसों के लिए करें .

4 .) मैडिटेशन करें एवं अपने बेस चक्र में गर्मी को महसूस करें .

अगर आपको ऐसा करने में समस्या होती है , आप इसकी जगह जल तत्व को अपने स्वाधिष्ठान अर्थात सेक्रल चक्र में निर्देशित कर सकते हैं. या तो पहले वाला करें या दूसरा वाला . यह आपको एक तत्व पर ध्यान एकाग्रित करने में एवं उसको निर्देशित करने का अभ्यास कराता है .यह आपके शरीर से बाहर भी किया जा सकता है एवं उन्नत जादू के लिए , आपको इस कौशल की आवश्यकता पड़ेगी , हालाँकि इसे धीरे धीरे करना चाहिए , यह बहुत उन्नत है . अग्नि तत्व आपकी कुण्डलिनी / कुंडालिनि को उत्तेजित करेगा , तत्वों को शरीर के विशेष हिस्सों में निर्देशित करने का उपयोग चंगा करने में भी किया जा सकता है . कभी भी अग्नि तत्व को अपने दिल में या आपके मस्तिष्क में निर्देशित न करें !!! यह बहुत खतरनाक हो सकता है एवं स्थायी नुकसान कर सकता है इन दो अति संवेदनशील ग्रन्थिओं को . निपुण लोगों के लिए , मस्तिष्क या दिल को छोड़ के अन्य ग्रंथियां अक्सर समर्थ होती हैं घनीभूत तत्वों को झेलने में , ग्रंथियां चक्र नहीं हैं , जैसा की कुछ लोगों ने ई ग्रुप्स में भ्रमित किया है . तत्वों को अपने चक्र में अंदर सांस लेना सही है ,
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Post Fri Jun 17, 2016 11:57 am

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तत्वों को जागृत करना / पुकारना

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जब आपके लक्ष्य व्यक्तिगत होते हैं एवं आपसे सम्बंधित होते हैं , यह समय होता है की आप ऊर्जा का आव्हान करें एवं उसे स्वयं से प्रक्षेपित करें .

ऊर्जा को जागृत करना अलग होता है . जब स्पेल्स अर्थात जादू दूसरों के लिए होते हैं , यह महत्वपूर्ण है की ऊर्जा को जागृत किया जाये चूंकि ऊर्जा जिसे आप स्वयं से प्रक्षेपित करते हैं वह उस व्यक्ति से जिस पर आप उसे भेजते हैं , उससे एक सम्बन्ध स्थापित कर लेती है . दोनों में , चंगाई में एवं श्रापने में , ज़ाहिर कारणों के लिए , यह अनऐच्छक है . जिस ऊर्जा को आप उपयोग करते हैं , उसे ब्रम्हांड से लिया जाना चाहिए . यह बहुत महत्वपूर्ण है की आप तत्वों के उद्बोधन एवं आह्वान में निपुणता हासिल करें ताकि आप इस सामर्थ्य के उन्नत स्तरों तक पहुँच सकें .


अग्नि को जागृत करना

एक समाधी की अवस्था में जाएँ एवं दृश्य बनायें / कल्पना करें की आप आग के बीच में हैं . गर्मी को महसूस करें एवं सुने लपटों की फुफकार एवं तीखी आवाज़ को एवं जलने को महसूस करें . अब शुरू करें उस आग को इकठ्ठा करना एवं गाढ़ा करना एक गोले में आपके सामने . अग्नि तत्व को खींचे हर दिशा से एक गोले में / मंडल में आपके सामने . जितना अधिक अग्नि तत्व आप निर्देशों करते हैं आप उस मंडल में , उतना घना,वस्तुगत एवं गर्म वह बनेगा . आपको गर्मी महसूस होनी चाहिए जब आप यह कर रहे हों . उस आग को आप जितना सकेंगे एवं गाढ़ा करेंगे, उतनी ही गर्मी बढ़ेगी . आपको ऐसे अनुभूति होनी चाहिए की आप एक भट्टे में हैं .

अब अग्नि के मंडल को घोल दें ऐसी कल्पना करते हुए / दृश्य बनाते हुए की वह नष्ट हो रहा है - ठीक उसका उलट जब आप उसे साथ में लए थे . लगातार कार्य करते रहें ऐसा दृश्य बनाते हुए की वह नष्ट हो रहा है , उसकी शक्ति में कम हो रहा है , बल एवं गर्मी में कम हो रहा है और अंततः कुछ भी नहीं में घुल रहा है अर्थात कुछ नहीं बचा है .

**

वायु को जागृत करना

एक समाधी की अवस्था में जाएँ और दृश्य बनायें / कल्पना करें की आप वायु के मध्य में हैं , पूरा कमरा उससे भर दें . हवा को खींचे सभी दिशाओं से एक साथ , एक मंडल में , आपके सामने . भरे और पैक करलें अर्थात संकुल करें मंडल को वायु तत्व के साथ . आपको बहुत हल्का महसूस होना चाहिए जैसे की मानो आप तैर रहे हैं .

जब आपका वायु को संकुल करना हो जाये एक मंडल में , उसे नष्ट कर दें जैसा आपने अग्नि मंडल के साथ किया था .

**

जल तत्व को जागृत करना

एक समाधी की अवस्था में जाएँ और दृश्य बनायें / कल्पना करें की आप एक महासागर या झील के मध्य में हैं . सारी दिशाओं से जल तत्व को खींचे . महसूस करें जल को , पहले तो एक ठंडी वाष्प के रूप में , जितना पास उसे आप अपने शरीर के खींचते हैं. जितना अधिक आप जल को गाढ़ा करते हैं और अधिक से अधिक , आपको बर्फीला ठंडा महसूस होना चाहिए . अब जल तत्व को संकुल करें एक मंडल में आपके सामने और फिर उसे नष्ट कर दें , ठीक उसी तरह जैसा आपने वायु एवं अग्नि तत्व के साथ किया था . उसे शून्य में लुप्त हो जाने दें .

**

पृथ्वी तत्व को जागृत करना

एक समाधी के आवश्यता में जाएँ एवं एक भूरे पिंड को खींचे , जो की चिकनी मिटटी के जैसे हो , सभी दिशाओं से एक साथ . आप उसे जितना करीब लेट हैं अपने , वह और अधिक से अधिक भूरा होता जाता है . मिटटी के जैसे एवं और अधिक घना हो जाता है . कमरे को पृथ्वी तत्व के भारी हैं से भर दें एवं दृश्य बनायें / कल्पना करें की वह एक मंडल में संकुचित हो रहा है . भारीपन एवं गुरुत्वाकर्षण को महसूस करें एवं उसके दबाव को महसूस करें अपने शरीर पर . जब हो जाये , नष्ट कर दें उसे जैसा आपने अन्य तत्वों के साथ किया था .

**

अग्नि तत्व को पुनः जागृत करें , परन्तु इस बार आपके सामने गुनगुना पानी का गिलास रखें अपने सामने एवं अग्नि को खेंचे सभी दिशाओं से और उसे गाढ़ा करें पानी के गिलास में . यह सबसे अच्छा है की आप एक क्लियर अर्थात साफ़ गिलास का उपयोग करें इस व्यायाम में . कल्पना करें की पानी अग्नि तत्व के साथ अधिक से अधिक गर्म होता जा रहा है .

अगर आप सफल हो गए हैं , जल का तापमान कुछ डिग्रीज अर्थात उपाधि से बढ़ जायेगा . जब हो जाये , आप जल का स्वाद ले सकए हैं और उसका स्वाद असामान्य होना चाहिए अगर आप सफल रहे तो .

बाद में , जब आप पता लगा लें , आप गुनगुने जल का तापमान बढ़ा सकते हैं , फिर आप ठन्डे एवं और अधिक ठन्डे पानी के साथ यही अभ्यास कर सकते हैं .

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Post Sat Jun 18, 2016 9:21 am

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तत्वों को घुमाना

Source URL - http://web.archive.org/web/201509150636 ... ments.html

तत्वों को घुमाना अर्थात रोटेट करना बहुत उन्नत है . एक व्यक्ति को चाहिए की वह पहले से ही निपुण हो चक्रों में से होकर ऊर्जा को परिचालित / प्रसारित करने में . उन्नत मैडिटेशन अर्थात ध्यानों में सबसे महत्वपूर्ण कदम है तत्वों को प्रसारित करना प्रत्येक चक्रों में से होकर . यह बहुत उन्नत है और किया जाता है चक्र में तत्व को गाढ़ा करने के बाद जिस चक्र का वह स्वामी है , एवं फिर उसे प्रसारित करते हैं . कार्य करें प्रत्येक पर महारत प्राप्त करने का . आप निश्चित ही तत्व को महसूस करेंगे - एकदम गरम अग्नि के लिए , बर्फीला ठंडा जल के लिए , भारी पृथ्वी के लिए , एवं हल्का वायु के लिए . हीर उष्ण से लेकर तत्प्त होता है . यह बहुत उन्नत है और इसको करने का प्रयास केवल अनुभवी ध्यान करने वालों अर्थात मैडिटेशन करने वालों को ही करना चाहिए .

यह एक महत्वपूर्ण आधार देगा और अधिक उन्नत कार्यचालनों के लिए जिन्हे में यहाँ जल्दी ही बताउंगी .

प्राचीन समय के लोग उपयोग करते थे मौसम / कालों का जिससे उन्हें कार्यचालनो में सहायता मिले . यह चार बिंदुओं का एक भाग है . ग्रीष्म ऋतू गर्म होती है एवं अग्नि तत्व पर मैडिटेशन करना और उसका आव्हान करना सरल होता है नए लोगों के लिए. सिर्फ इस बात को निश्चित कर लें की आपके पास ठन्डे होने की एक जगह है . वसंत ऋतू वायु तत्व के साथ कार्य करने के लिए अच्छा समय है , पतझड़ / autum अच्छा समय है पृथ्वी तत्व के साथ कार्य करने हेतु , एवं ठण्ड अच्छा समय है जल तत्व पर कार्य करने हेतु , क्यूंकि वह ठंडी होती है .

अगल कदम होना चाहिए तत्वों को संयोजन करना अर्थात जोड़ना , जैसे की जल को प्रसारित करना अग्नि को प्रसारित करने के बाद और फिर हीर को प्रसारित करना . यह सब अत्यन्त शक्तिशाली हैं .

वैक्सिंग एवं पूर्ण चन्द्रमा / पूर्णिमा कार्य करते हैं सूर्य की उग्र किरणों को बदलने का जल तत्व में . जब चन्द्रमा नए से सम्पूर्ण की ओर जा रहा है और सरल शब्दों में जब चन्द्रमा अपनी रौशनी में बढ़ता है तो उसे वैक्सिंग या वैक्सिंग चन्द्रमा कहते हैं. ऊर्जा सूर्य एवं चन्द्रमा की , इनका भी आव्हान किया जाना चाहिए और प्रसारित करना चाहिए .

उदाहरण के लिए - अग्नि तत्व को घुमाना

1 .) अग्नि तत्व को अंदर सांस में लें अपने सम्पूर्ण शरीर में .

2 .) गाढ़ा करें अग्नि तत्व को एक छोटी गेंद में अपने बेस अर्थात मूलाधार चक्र में .

3 .) अब निर्देशित करें गेंद को अपने स्वाधिष्ठान अर्थात सेक्रल चक्र में , फिर अपने सोलर अर्थात मणिपूर चक्र में , फिर अपने थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र में , आपकी तीसरी आँख में , आपके क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र में और फिर अपने क्राउन चक्र से नीचे आपके छटवें चक्र में जो की आपकी तीसरी आँख के बीचे होता है और अपने सर के पीछे में - अपने पिछले छटवें चक्र से होकर और नीचे पर आपके रीढ़ में प्रत्येक चक्र पर .

4 .) जब हो जाये , तो या तो आप अग्नि की गेंद को निर्देशित करें अपने बेस चक्र में या उसे बाहर निकल दें अपने सोलर प्लेक्सस / सोलर चक्र में से होकर .

यही करें अन्य तत्वों के साथ , हीर अर्थात क्विंटेस्सेंस के साथ भी ऐसे ही करें . इसे ची /CHI या पीनियल स्राव के साथ करना भी अति शक्तिशाली एवं आनन्दमयी होता है .

शुरुआत में , आपको सिर्फ एक तत्व पर कार्य करना है और महारत हासिल करनी है . एक मैडिटेशन सत्र में केवल एक तत्व . अग्नि का आव्हान सूर्य से भी किया जा सकता है - जितना अधिक गर्म सूर्य , उतना बेहतर .

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Post Sat Jun 18, 2016 9:44 am

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आत्मा को विभाजित करना

Source URL - http://web.archive.org/web/201509150636 ... _Soul.html

यह मेडीटेशन्स /ध्यान अत्यन्त उन्नत हैं एवं नए लोगों के लिए खतरनाक हो सकते हैं. एक व्यक्ति को अनुभवी होना चाहिए मैडिटेशन में , ऊर्जा के हस्तकौशल में , तत्वों के आव्हान में और इस चीज को समझने में की वह क्या कर रहा है एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक स्तर पर .

इनमे से कोई भी मेडीटेशन्स को शुरू करने के पहले , एक व्यक्ति को पूर्णतः रिलैक्स्ड अर्थात आरामदायक रहना चाहिए . कोई अन्य लोग डिस्टर्ब करें , तेज आवाजें , फ़ोन बज रहा है , मेहमान या अन्य कुछ चीज , यहाँ तक की जानवरों द्वारा चूना भी बहुत खतरनाक हो सकता है .

आभा अर्थात औरा पर मैडिटेशन :

1 .) अपनी आभा की अनुभूति एवं उसे महसूस करने के लिए : अपनी जागरूकता को बढ़ाएं अपने भौतिक/ शारीरिक स्वयं के आगे कुछ इंच एवं अनुभूति लें अपनी आभा की ऊर्जा की .

2 .) अपनी आभा को महसूस करें एवं उस पर मेडिटेट करें अर्थात ध्यान लगाएं कुछ मिनिटों के लिए .

3 .) विस्तृत करें एवं अपनी आभा को सिकोड़ें .

4 .) ऊर्जा को अंदर सांस में लें और बाहर छोड़ें अपनी आभा के .

5 .) अगर आपको ऐसा लगता है की आप तैयार हैं , तो आप हर तत्व का आव्हान कर सकते हैं अपनी आभा में . यह धीरे किया जाना चाहिए , शुरू करने के लिए सात साँसों से अधिक नहीं . यह सबसे अच्छा होता है की प्रतिदिन एक ही तत्व पर कार्य करें .

6 .) प्रत्येक तत्व का अपनी आभा में आव्हान करने के बाद , उस अनुभूति पर मेडिटेट करें .

7 .) अगर आपको आरामदायक नहीं लगता , तो आप तत्व को वापस बाहर सांस में छोड़ दे .

प्रकाश वाले शरीर पर मैडिटेशन करना .

1 .) प्रकाश वाले शरीर को महसूस किया जा सकता है अपनी जागरूगता को अपने शरीर के अंदर की ऊर्जा में विस्तृत करने द्वारा . इसे महसूस किया जा सकता है .

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2 .) महसूस करें अपने प्रकाश वाले शरीर को एवं इस पर मेडिटेट करें .

3 .) ऊर्जा को अंदर सांस में लें एवं बाहर छोड़ें अपने प्रकाशित शरीर के .

अपने मानसिक शरीर पर ध्यान केंद्रित करना :

1 .) अंदर की ओर ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें अपनी जागरूगता के ऊपर . यह आपका मानसिक शरीर है .

2 .) जहाँ कहीं भी आप फोकस करें , यह आपका मानसिक शरीर है . जब हम अपनी जागरूगता को विस्तृत करते हैं , हम आत्मा के इस पहलू को विस्तृत करते हैं .

3 .) मेडिटेट करें अपने मानसिक शरीर के बारे में जागरूक होने पर .

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तीसरी आँख , पीनियल सांस लेने छोड़ने वाला मैडिटेशन / पीनियल ब्रीथिंग मैडिटेशन

Source URL - http://web.archive.org/web/201509150625 ... rd666.html

यह मैडिटेशन यह करता है की यह आपकी तीसरी आँख या पीनियल ग्रंथि पर दबाव डालता है , जिसे वह और अधिक शक्तिशाली हो जाती एवं खुल जाती है जिस किसी पर भी आप फोकस कर रहे / ध्यान केंद्रित कर रहे हैं . यह मैडिटेशन उन्नत है एवं नए लोगों के लिए नहीं है . आपके पास पर्याप्त अनुभव होना चाहिए की आप बिना किसी समस्या के नीचे बताये निर्देशों को समझे .

1 . ) ऊर्जा को अंदर सांस में लें , अपने रीढ़ के तल पर से होकर अपने थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र में .

2 . ) रोकें रहे जितनी देर तक आप आराम से रोके रह सकते हैं एवं फोकस करें अपनी तीसरी आँख में या पीनियल ग्रंथि में . आपको एक दबवा की से , वेदना या यहाँ तक की थोड़े दर्द की अनुभूति होनी चाहिए .

3 .) सांस को बाहर छोड़ें एवं दोहराएँ कुछ संख्यों के लिए .

उस मसले के लिए आप इस मैडिटेशन को या कोई अन्य को शुरू करें , आप को पहले ही योजना बन लेनी चाहिए की आपके मैडिटेशन / ध्यान में क्या रहेगा . इस मामले में , या तो आप अपने पीनियल ग्रंथि पर फोकस करेंगे या तो तीसरी आँख पर . मैंने यह दोनों में किया है की मैं शुरू किया फोकस करना मेरी तीसरी आँख पर फिर दूसरे आधे में मैंने फोकस किया पीनियल ग्रंथि पर .

अंततः जब आप पूर्ण रूप से खोल ले एवं सक्रिय कर लें पीनियल ग्रंथि को, आपका सिर प्रकाश से भर जायेगा . यह अत्यन्त शक्तिशैली एवं अति आनन्दमयी होता है . यह प्रकाश बहुत शक्तिशाली होता है आपकी इच्छाओं को प्रकट करने के लिए जब इसे उचित रूप से निर्देशित किया जा सके . पीनियल ग्रंथि से अनुभूति जब उसे सक्रिय किया जाता है वह अतुल्य होती है एवं शब्दों के परे. यह विशेषकर आनन्दमयी होती है एवं कई घंटो तक के लिए चलती है जब एक व्यक्ति शांत एवं धुन में रहता है .

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मैग्नम ओपुस

Source URL - http://web.archive.org/web/201509121803 ... _Opus.html

सेटन ने मुझे बताया की वे मुझे मैग्नम ओपुस का सूत्र देंगे . मैग्नम ओपुस सबसे बड़ा कार्यचालन है सेटनिज़्म में और अंतिम परिणाम है सभी वैध गुप्त विषयों / विधाओं / शिक्षाओं और सारी द्दष्टान्तकथाओं और भगवानो की किंवदंतियों का.

मैग्नम ओपुस शारीरिक भौतिक और आध्यात्मिक पूर्णता और अमरता है .

मैग्नम ओपुस के प्रभाव उम्र को पलटने वाले होते हैं - भूरे बाल अपने प्राकृतिक रंग में आ जाते हैं , खोये हुए दांत वापस मिल जाते हैं बीमारियां ठीक हो जाती हैं और उत्तम स्वस्थ बहाल हो जाता है अर्थात उत्तम स्वास्थ की प्राप्ति होती है .

मैं ज़ोर डाल कर सुझाव देती हूँ की कोई भी जो मैग्नम ओपुस को शुरू करना चाहता है उसे तारुण्य अवस्था अर्थात योवन अवस्था से बाहर होना चाहिए.

यह खंड निर्माणधीन है ... क्यूंकि सेटन और अज़ाज़ेल मेरे साथ अभी कार्य कर रहें हैं और, और अधिक जानकारी अभी आने को है . मै सभी को अपडेट कर दूंगी जब और अधिक जानकारी जोड़ी जा चुकी हो. डीमॉन्स जो धातु के कार्य चलन में विशेषज्ञ होते हैं - ये सब आध्यात्मिक है और धातु चक्र होते हैं . बहुत सरे डीमॉन्स विशेषज्ञ होते हैं मैग्नम ओपुस के मार्गदर्शन देने में . अगर आपके पास एक डीमॉन्स या डीमोनेस तो ये बहुत मददगार हो जाता है . हम डीमॉन्स वाले भाग में विस्तार से बताएँगे की डीमॉन्स या डीमोनेस के साथ सम्बन्ध कैसे स्थापित किये जा सकते हैं .


स्पष्टतः , मैग्नम ओपुस बहुत उन्नत है और कोई भी जो इस कार्य को शुरू कर रहा हो या है उसे पूरी तरह से वाकिफ रहना चाहिए पावर मैडिटेशन / ध्यान के ज्ञान और प्रतक्ष्य अनुभव में .

यह ऐसा कार्यचालन है जिसमे समय लगेगा . ध्यान यहाँ जो दिए गए हैं वे विशेषकर बहुत शक्ति शाली हैं और नए या उन लोगों के लिए नहीं हैं जिनकी पास अनुभव नहीं है . हवाला दिया जा चुका है , अंत में बहुत सरे लोग सत्य को बहुत देर से देखेंगे / पाएंगे की यहूद / ईसाइयत / इस्लाम और इनके मानने वाले साथी केवल एक झूठ और बहुत शातिर धोखा है , पर जब तक उन्हें पता चल पायेगा सच्चाई का तब तक बहुत देर हो चुकी होगी . मैग्नम ओपुस को हासिल करने में समय लगता है .

वहां निश्चित प्रारंभिक ध्यान हैं जिन्हे शुरू करने वालों को करना चाहिए ताकि वे अपनी आत्मा को और उन्नत कार्यचालणो के लिए तैयार कर सकें जो इन प्रारंभी ध्यानो पर बनेंगे. वे नीचे दिए गए हैं .

गहन अनुसन्धान करने पर पता चलता है की सेटन ने , उनके बच्चो को अमरता का तोहफा दिया है . सेटन ज्ञान के लाने वाले और ज्ञान के देने वाले हैं , डीमॉन्स मित्रो के साथ साथ . सेटन ही सिर्फ एक अकेले सच्चे भगवान और मानवता के रचनाकार हैं. यहूद / ईसाइयत / इस्लाम और इनके मानने वाले साथी अर्थात ज़ायंस(Xians) पूर्णता , अमरता , अनंत जीवन आदि की बात करते हैं .. इनका सब कुछ झूठ और मक्कारी से भरा हुआ है.

सेटन हमें रास्ता दिखाते हैं और सच बतलाते हैं .

सेटन की जय !!!!!

मै अपने मामलो को उन लोगो के हाथो में रखता हूँ जिनकी मैंने परीक्षा ली है और जो मेरी इच्छाओं के अनुरूप है.
- सेटन

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Post Sun Jun 26, 2016 6:17 am

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चक्रों का रेखा चित्र
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Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... agram.html

शरीर के माइनर / लघु /छोटे चक्र

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आध्यात्मिक/अलौकिक /मानसिक / पारलौकिक /नाक्षत्रिक अर्थात एस्ट्रल श्रवण हेतु बिंदु 1

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आध्यात्मिक/अलौकिक /मानसिक / पारलौकिक /नाक्षत्रिक अर्थात एस्ट्रल श्रवण हेतु बिंदु 2

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आध्यात्मिक/अलौकिक /मानसिक / पारलौकिक /नाक्षत्रिक अर्थात एस्ट्रल दृष्टि हेतु बिंदु

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पंजे

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हाथ

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पीनियल ग्रंथि

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आठवें एवं नवमें चक्र

कंधे के चक्रों को खोलना -


कन्धों के चक्रों को खोलना और आगे आत्मा को संरेखित करेगा और शक्ति के मार्गों को खोलेगा हथेलियों के चक्रों तक , इस प्रकार उन्हें अत्यधिक शक्तिशाली बना देगा. इसके साथ साथ , कन्धों के चक्र आत्मा के पंखों को रखते हैं . आत्मा के पंखों पर और अधिक जानकारी अगले लेख में विस्तार से बताई गई है .

उन लोगों के लिए जो सेटनिस्ट नहीं हैं - कभी नहीं भूलें - यह ज्ञान हेल (HELL) की शक्तियों / देवी / देवताओं से आया है ! यह ज्ञान सेटन से है !!!

अपने कन्धों के चक्रों को खोलने के लिए -
1 . उनकी कल्पना करें / दृश्य बनायें जैसा चित्र में नीचे दिया गया है
2 , उन पर एक सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) रौशनी का ध्यान केंद्रित करें , और सांस को अंदर लें , और फिर सांस को बाहर छोड़ने पर , कम्पन्न करें ज़ी-ज़ी-ज़ी-ज़ी-ज़ी-ज़ी-ज़ी-ज़ी और साथ में इस ध्वनि / कम्पन्न को उन चक्रों पर (ध्यान केंद्रित ) करें .
3 . यह नौ (9 ) बार करें .

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एक दर्द या दबाव का महसूस होना एक सकारात्मक संकेत है की आप ने कन्धों के चक्रों को सफलता पूर्वक खोल दिया है . यह अनुभूति आपकी भुजाओं तक विस्तृत / बढ़ सकती है और आपको ऐसा महसूस हो सकता है की वे (भुजाएं ) सुप्त अर्थात सोने वाली अवस्था में जा रही हैं .

अब अपने चक्रों को संरेखित करें अर्थात पंक्ति में लाएं -
*** चक्र कोन / पिरामिड के जैसे दिखते हैं . इसीलिए उन्हें हम कोन / पिरामिड के जैसे उनकी कल्पना करते / दृश्य बनाते हैं . उनका हमें 3d अर्थात तीन आयामी पिरामिड या कोन के जैसे ही कल्पना करनी दृश्य बनाना है . नीचे चित्र को देखें -
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1 . अपने बेस अर्थात मूलाधार चक्र से शुरू करें , और उस कोन को ऐसा घुमाए की उसका मुंख ऊपर की ओर हो .
2 . यही अपने सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र के साथ करें .
3 . अब अपने सोलर प्लेक्सस अर्थात मणिपूर चक्र के ऊपर ध्यान केंद्रित करें और उसके मुंख को नीचे की ओर संरेखित करें / पंक्ति में लाएं.
4 . अब अपना ध्यान सहस्रार अर्थात क्राउन चक्र पर केंद्रित करें और उसका मुंख ऊपर की ओर करते हुए उसे संरेखित करें / पंक्ति में लाएं .
5 . यही आपके छटवें चक्र और विशुद्ध अर्थात थ्रोट चक्र के साथ करें .
6 . अब अपना ध्यान अनाहत अर्थात हार्ट चक्र पर केंद्रित करें और कल्पना करें / दृश्य बनायें की दो बिंदु साथ में आ रहे हैं और एक दूसरे को काट रहे हैं जैसा की ठीक नीचे चित्र में बताया गया है .
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7 . अपने कन्धों के चक्र पर फिरसे ध्यान केंद्रित करते हुए और कल्पना करते हुए की वे अंदर की ओर इशारा / बिंदु कर रहे हैं आप इस ध्यान (मैडिटेशन ) को समाप्त करें .

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दसवें एवं ग्यारहवें चक्र
दसवें और ग्यारहवें चक्र ठीक देवालय / मंदिरों के पीछे होते हैं जैसा की नीचे चित्र में बतलाया गया है . ये कान के टिप / नोक / सिरे से थोड़ा सा आगे होते हैं और ये दसवें और ग्यारहवें चक्र छटवें चक्र का एक विस्तार / फैलाव हैं .

इन चक्रों को खोलने के लिए , आपको सिर्फ अपना ध्यान इन दोनों प्रत्येक पर केंद्रित करना है और इन (दोनों पर ) कल्पना करना / दृश्य बनाना है एक बिंदु का जो की अंदर की ओर मुंख किये हुए है ठीक वैसे जैसे नीचे चित्र में बताया गया है . यह आपको दूसरे चक्र पर करना है दूसरी ओर .{पहले एक चक्र की बिंदु एक रूप में कल्पना करिये ./ दृश्य बनायें एक बिंदु का जो की अंदर की ओर मुंख किये हो ,... फिर दूसरी ओर दूसरे चक्र की ऐसे ही कल्पना करिये ./ दृश्य बनायें एक बिंदु का जो की अंदर की ओर मुंख किये हो (जैसा चित्र में दिया है ) . } एक विचित्र अनुभूति दर्द, भारीपन , दबाव आदि एक सकारात्मक संकेत है की अपने इन चक्रों की ठीक स्थिति का पता लगा लिया है और उन्हें खोल दिया है . ये देवालय / मंदिर चक्र छटवें चक्र का विस्तार / फैलाव हैं .

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कलाकृति - टोम्मासो पोरटीनारी और उनकी बीवी ,.. हेन्स मेमलिंग द्वारा , लगभग १४७० (1470)

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बारहवें एवं तेरहवें चक्र
नितम्ब / कमर के चक्र समान होते हैं दोनों तरफ और कमर के बीच में ., यह बाजू में खड़े होते हैं ठीक वैसे ही जैसा नीचे चित्र में बताया गया है .
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इन चक्रों को खोलने के लिए , सिर्फ आपको अपना ध्यान इन प्रत्येक पर केंद्रित करना है और इनकी कल्पना करनी है / दृश्य बनाना है एक बिंदु जो की अंदर की ओर मुख किये हुए है (इस रूप में कल्पना करिये / दृश्य बनायें इनका ). जब आपने एक तरफ के चक्र का ऐसा दृश्य बना लिया है , तब यही आपको दूसरी तरफ के चक्र के साथ करना है .

एक विचित्र अनुभूति दर्द, भारीपन , दबाव आदि एक सकारात्मक संकेत है की आपने इन चक्रों की ठीक स्थिति का पता लगा लिया है और उन्हें खोल दिया है .ये नितम्ब / कमर के चक्र एक विसार / फैलाव हैं मूलाधार अर्थात बेस चक्र का , पर ठीक कन्धों के चक्र जैसे , दिल की निकटता (की तुलना में ) ये चक्र थोड़ी ओर ऊंचाई पर स्थित होते हैं .

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कलाकृति - "स्पिरिट ऑफ़ दि नाईट " जॉन एटकिंसन ग्रिमशॉ द्वारा , १८७९ (1879)

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हार्ट अर्थात अनाहत चक्र के विस्तार

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चेहरे के लघु चक्र

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सिर के ऊपर के टॉप / शिखर चक्र

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आत्मा के पहलू

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... _Soul.html


वहां बहुत सारे विभिन्न पहलू हैं जो मानव आत्मा को बनाते हैं . औरा अर्थात आभा , प्रकाश का शरीर , चक्र , आकाशीय प्रतिरूप , (एथेरिअल डबल ) - यह वह भूत होता है जो भौतिक शरीरकी छवि पर होता है , और बुद्धिमता / चेतना . मानव आत्मा तत्वों की बानी होती है - अग्नि , पृथ्वी , वायु , जल और क्विंटएसेंस (सबसे उत्तम गुणवत्ता) की .

अनुसन्धान में , मैंने पायी हैं प्रमुख विसंगतियों / विरोधों को लेखकों के बीच में , का (KA) , बा (BA) , अख (AKH) और साहू (SAHU) जैसे विशिष्ट पहलुओं को लेकर . ये का , बा , अख और साहू - ये आत्मा के भाग / हिस्से हैं प्राचीन मिस्रियों (इजिप्शियन ) द्वारा परिभाषित. जो की मैं समझ सकती हूँ , वास्तविक अर्थ रेन (REN) के मिस्री संकल्पना / सिद्धांत , होता है व्यक्तिगत कम्पन्न आत्मा का . इसका मिस्री अर्थात इजिप्शियन (Egyptian) काबलाह (का बा अख / KA BA AKH) से लेना देना है . मूल रूप से , काबलाह मिस्री था , और उद्देश्य था आत्मा के विभिन्न पहलुओं पर मैडिटेशन (ध्यान ) करना , अलग अलग और एक साथ दोनों संयोजनों / गुटों / जोड़ों में . यह अत्यंत , अत्यंत उन्नत है .

मानव आत्मा को इच्छा अनुसार विभाजित किया जा सकता है मैडिटेशन (ध्यान ) के दौरान . यही होता है इच्छापूर्वक नक्षत्रिक प्रक्षेपण करने के दौरान या अनैच्छिक "शरीर से बाहर के अनुभवों में ". जिस प्रकार आत्मा को इच्छा पर विभाजित किया जा सकता है , उसी प्रकार आत्मा का इच्छा पर पुनर्मिलन (फिर से एक कर देना ) किया जा सकता है . आत्मा का विलय किया जा सकता है दूसरे व्यक्ति की आत्मा के साथ .

आभा अर्थात औरा का विस्तार किया जा सकता है / बढ़ाया जा सकता है और उसे सिकोड़ा जा सकता है इच्छा पर. उसे क्रमोदेशित किया जा सकता है की वो किसी चीज़ को आकर्षित करे या पीछे धकेल दे , इच्छा पर. औरा अर्थात आभा को क्रमोदेशित किया जा सकता है इच्छा पर की , वो दूसरे (व्यक्ति ) की आभा पर कार्य करे बेहतरी या नुक्सान के लिए.

आत्मा का प्रत्येक पहलू के ऊपर अलग से मैडिटेशन (ध्यान ) किया जा सकता है और उसे शक्तिशाली बनाया जा सकता है . प्रत्येक पहलू आव्हान कर सकता है और पकड़ के रख सकता है तत्वों में से प्रत्येक को. यह अत्यंत उन्नत (क्रिया ) है और बहुत खतरनाक हो सकती है अगर एक (व्यक्ति ) नहीं जानता की वह क्या कर रहा है .

नीचे चित्र बतलाती हैं दो प्रमुख भाग आत्मा के . इसे समझ लें , प्रकाशमान शरीर का कोई आकार नही होता है. हालाँकि दोनों चित्र सफ़ेद प्रकाश वाले हैं नीचे , ये शरीर किसी भी रंग के हो सकते हैं और रंग बदल सकते हैं , ये निर्भर करता है मनोदशा , स्वास्थ , भावनाओं आदि पर . ये एक से अधिक रंग के भी हो सकते हैं.

ये जो ऊपर मैंने बताया है , ये मैंने अपने स्वयं के प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर बताया है और यह विचार नहीं है.

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Post Sun Jun 26, 2016 6:23 am

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आत्मा के पंख

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpentis666/Wings.html

सारी आत्माओं के पंख होते हैं , यहाँ तक जानवरों (की आत्माओं ) के भी . जब हमने 2002 -03 में डीमॉन्स को स्वतंत्र किया था , उन्होंने अपने पंखों को दृढ कर लिया अर्थात गूंथ लिया/लगा लिया जो दर्शाता है की उन्हें अपनी शक्तियां वापस मिलग गयी हैं . पंख आत्मा की शक्ति को भी दर्शाते हैं और ये पंख कंधे के चक्रों के होते हैं . कैड्यूसियस (Caduceus) का प्राचीन प्रतीक/ चिन्ह जो की ऊपर चित्र में बताया गया है इसका उपयोग अमरीकन मेडिकल असोसिएशन (American Medical Association) के द्वारा किया जाता है और एक सर्प कैड्यूसियस (Caduceus) का उपयोग पशुचिकित्सा की औषिधि
में भी किया जाता है .

इन पंखों को हिलाना सीखना और इन पंखो पर नियंत्रण करना सीखना आत्मा की उन्नति करने का ही एक हिस्सा है . जब हम ध्यान अर्थात मैडिटेशन में उन्नत होते हैं / उन्नति करती हैं , वे (पंख ) हमारे पास आएंगे , अक्सर एकाएक / अप्रत्याशित तरीके से . जब आत्मा के पंख प्रकट होते हैं , यह दर्शाता है आध्यात्मिक शक्ति को और आत्मा की स्वतंत्रता को .


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Post Sun Jun 26, 2016 6:25 am

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आत्मा के पंखों का ध्यान एन हराड्रेन अमलग द्वारा -

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... ation.html

यहाँ है एक सरल , परन्तु प्रभावी / असरदार , ध्यान (मैडिटेशन ) जिसे में आपको बता रही हूँ ताकि आपके पंख समर्थ / शक्तिशाली और मज़बूत बन जायेंगे. यह ध्यान (मैडिटेशन ) को मैं बता रही हूँ परन्तु इसका सुझाव मुझे अनूबिस (Anubis) ने दिया था. सेटन और एन्लिल (Enlil) ने सुझाव दिया है की मै इसे लिखूं ताकि आप सब जान सकें .

1 . अपने मन को शांत कर लें और एक ध्यान (मैडिटेशन ) की अवस्था में जाएँ .

2 .कल्पना करें / दृश्य बनायें अपने पंखों का और उन्हें महसूस करें . यह भी महसूस करें की ऊर्जा उनमे से होकर प्रवाहित हो रही / बह रही / गुजर रही है .

3 . सांस को अंदर लीजिये एक गिनती के लिए (जैसे चार , पांच छह आदि की गिनती तक ) उतनी ही गिनती के लिए करें जितने में आप आरामदायक हों. सांस को अंदर लेने पर , अपने पंखों को नीचे रखें रहें अपनी पीठ पर से. यह उनकी आराम दायक स्थिति होनी चाहिए और इससे कोई तनाव /खिंचाव / असुविधा नहीं होनी चाहिए.

4 . अपनी सांस को रोके रखें जब तब आप ऐसा करते हैं , धीरे धीरे अपने पंखों को फ़ड़फ़ड़ाएं , सिर्फ आपको आराम से उन्हें आगे पीछे हिलाना है . नए लोगों के लिए - यह तीन से पांच बार करें .

नोट - पहली बार अपने पंखों पर कार्य करना शुरू करने पर , वे उतने शक्तिशाली नहीं होंगे और इसीलिए वे अधिक तेज़ नहीं हिलेंगे . मैं सिफारिश करती हूँ की आप लगभग तीन (बार हिलाने ) से शुरुआत करें और फिर इसे और बढ़ाते जाएँ धीरे धीरे जितना भी आप कर सकते हैं अपनी सांस को रोके रखे हुए बिना तनाव / खिंचाव / असुविधा के . उन्नत ध्यान (मैडिटेशन ) अभ्यासियों को दस गिनती से अधिक सांस को नहीं रोकना चाहिए क्यूंकि इससे अधिक सांस रोकना अनावश्यक है .

5 . सांस को बाहर छोड़ने पर , अपने पंखों को फैलाएं जितना ऊंचा और दूर आप उन्हें फैला सकते हैं और इस (स्थिति ) को रोके रहें अपने सम्पूर्ण सांस को बाहर छोड़ने तक . और अपने पंखों को अपने आप ही गिरने दे उनकी प्रथम / पहली आरामदायक स्थिति में . (स्टेप तीन ).

यह एक दौरा है . पांच दौरे पर्याप्त हैं एक बैठक / ध्यान के लिए . अगर आपको कोई तनाव आदि का अनुभव होता है तो या तो आप दौरे काम कर दें या पंखों के फड़फड़ाने / हिलाने को . आपको स्वयं को धकेलना नहीं है और अपने पंखों पर अतिश्रम / आवश्यकता से अधिक कार्य नहीं करना है .

आपको कुछ तनाव की अनुभूति हो सकती है पीठ की मांसपेशियों में और यह (ध्यान / मैडिटेशन ) करने के बाद आप महसूस करिये की आपके (पंख ) ऊर्जा को आपके चारों ओर गतिमान कर रहे हैं .

अनूबिस (Anubis), एन्लिल (Enlil) और सेटन (Satan ) को धन्यवाद की उन्होंने मार्गदर्शन दिया , सहायता की और मुझे उत्साहित / प्रेरित किया की मैं यह लिखूं ताकि पाठक इससे लाभ उठा सकें.

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पंख 1 (चित्र )

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पंख 2 (चित्र )

सेटन की जय !
अनुबुस की जय !
एन्लिल की जय !
हेल (Hell) के समस्त सच्चे प्राचीन भगवानो / देवी / देवताओं की जय !

- एन हराड्रेन अमलग

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मूलभूत मैडिटेशन (ध्यान ) कार्यक्रम / प्रोग्राम

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... ogram.html

जब एक व्यक्ति नया होता है शक्ति ध्यान अर्थात पावर मैडिटेशन में , यह महत्वपूर्ण है की एक कार्यक्रम अर्थात प्रोग्राम के साथ शुरू किया जाये . इस पी डी ऍफ़ / साइट पर बहुत सारे मैडीटेशन्स बतलाये गए हैं विभिन्न प्रभावों के लिए . एक मूलभूत मैडिटेशन कार्यक्रम में वोयड अर्थात रिक्त ध्यान / शून्य ध्यान होना चाहिए क्यूंकि यह सहायता करता है हमें अनचाहे विचारों को नियंत्रित करने के लिए एवं हमारे मन को निर्देशित करने के लिए .

सांस लेने छोड़ने वाली अर्थात ब्रीथिंग एक्सरसाइजेज / व्यायाम महत्वपूर्ण हैं किसी भी मैडिटेशन प्रोग्राम के लिए .

फाउंडेशन / आधार मैडिटेशन बहुत महत्वपूर्ण है क्यूंकि इसको करने से हमें ऊर्जा को महसूस करने एवं सोखने का ज्ञान प्राप्त होता है की ऐसा कैसे किया जाये . यह अति आवश्यक है आपकी मन एवं आत्मा की शक्ति को उपयोग करने के लिए . अगर आप नए हैं , यह सबसे अच्छा है की आप मूलभूत सफ़ेद प्रकाश / रौशनी के साथ शुरू करें . सफ़ेद प्रकाश को उपयोग करना आसान होता है क्यूंकि वह स्पेक्ट्रम / वर्णक्रम के सारे रंगो को रखता है . आत्मा प्रकाश की बनी होती है . अनुभव के साथ आप उन्नति कर सकते हैं की आप रंगों के साथ कार्य करें विशेष चीजों के लिए . रंगों की ऊर्जा अति शक्तिशाली होती है .

चक्र पर कार्य , इसे प्रत्येक मैडिटेशन सेशन / सत्र में शामिल किया जाना चाहिए क्यूंकि यह आपकी आभा अर्थात औरा एवं आत्मा को शक्तिशाली बनने हेतु ज़रूरी है . मैंने पाया है की प्रत्यक्ष कामोत्तेजना अति असरदार होती है चक्रों को खोलने में . कामोत्तेजना अच्छा तरीका है एक मैडिटेशन को खोलने का , क्यूंकि वह प्राकृतिक रूप से आराम देने वाली / रिलैक्स पहुँचाने वाली होती है . अगर आपके चक्रों में कोई अवरोध है , सिर्फ आपको ऊर्जा को निर्देशित करना है चरम उत्कर्ष के दौरान , अपनी रीढ़ के ऊपर उस विशेष चक्र में . दृश्य बनायें / कल्पना करें उसकी एक चमकदार मेधावी प्रकाश / रौशनी की धरा के रूप में उसी रंग की जिस रंग का चक्र है जिसे आप खोलने का प्रयास कर रहे हैं , एक साथ दृश्य बनायें / कल्पना करें की वह अवरुद्ध चक्र खुल रहा है एवं ऊर्जा उसमे से होकर गुजर रही / बह रही / प्रवाहित हो रही है . इसमें महीने लग सकते हैं , परन्तु समाये में , एक स्थायी सर्किट / परिधि स्थापित हो जाएगी .

ईज़ी चक्र स्पिन / सरल चक्र घुमाव शुरू करने के लिए अच्छा है उन मैडिटेशन्स को करने के पहले जो अधिक शक्तिशाली हैं . याद रखें हम सब व्यक्ति हैं एवं जहाँ एक व्यक्ति को सुख एवं सकारात्मक परिणामों का अनुभव हो सकता है एक विशेष मैडिटेशन में , वहां अन्य व्यक्ति को ज़रूरी नहीं की ऐसा ही हो . हमेशा आप जैसे महसूस करें उसके अनुसार आगे बढे . अगर आपको एक निश्चित मैडिटेशन सही नहीं लगता है , तो आप उसे रोक दें एवं एक विभिन्न मैडिटेशन करें .

मैडिटेशन सत्र आदर्श रूप से पंद्रह से तीस मिनट तक होने चाहिए एक दिन में . अगर आपके पास समय काम है तो पांच से दस मिनट बेहतर है कुछ न करने के बजाये . दिनों को छोड़ देना आपको पीछे धकेल देगा एवं जब आप नए हैं अननुरूपता से आपको तनाव हो सकता है क्यूंकि आपका शरीर कोशिश करता है बढ़ी हुई जैव बिजली के प्रति समायोजित होने का . आभा को साफ़ करने वाला मैडिटेशन प्रतिदिन करना चाहिए . इसमें कुछ ही मिनट लगते हैं एवं लम्बे समय में , यह रोकता है किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को की वह आपकी आभा से जुड़ जाये . नकारात्मक ऊर्जा कारण बनती है दुर्घटनाओं का , बीमारी एवं तनाव का .

मैडिटेशन प्रोग्राम को बदला जा सकता है आराम से बहुत बार . एक लक्षण की आपको अपने मैडिटेशन प्रोग्राम को बदलने की आवश्यकता है वह यह है की आपको और अधिक अगर महसूस न हो की आप कोई ऊर्जा बढ़ा रहें हैं (आपको ऊर्जा बढ़ना महसूस नहीं हो रहा अपने अंदर उस मैडिटेशन से सम्बन्धी ऊर्जा का बढ़ना ) या कोई अधिक प्रगिति कर रहें हैं . जब तक की आप आरामदायक हैं एक निश्चित कार्यक्रम के साथ एवं उन्नति कर रहे हैं , वहां कोई आवश्यकता नहीं है बदलाव की जब तक आप बोर न हो जाएँ अर्थात ऊभ ना जाएँ .

मैडिटेशन का उद्देश्य है स्वयं को शक्तिशाली बनना एवं ऊर्जा को सम्भालना सीखना . पावर मैडिटेशन अर्थात शक्ति ध्यान खोलता है आत्मा के ऊर्जा के केंद्रों को जिन्हे [चक्र] कहते हैं , प्रत्येक चक्र की विशेष ऊर्जाएं होती होती हैं जो मन के विभिन्न क्षेत्रों को खोलती हैं [सेटनिज़्म अपने मस्तिष्क को पांच से दस प्रतिशत से कहीं अधिक उपयोग करने के बारे में है ]. चक्र हमें "अलौकिक/ अमानुषी /सुपरनैचुरल " सामर्थ्य भी देते हैं जब चक्र पूरे खुल जाएँ एवं सम्पूर्ण रूप से शक्तिशाली हो जाएँ , जैसे की उड़ने का सामर्थ्य , टेलीकायनेसिस [वस्तुओं को मन की शक्ति से हिलाना ], एवं पायरोकायनेसिस [वस्तुओं को गर्म करने एवं उन्हें आग लगाने का सामर्थ्य]. बहुत अधिक और सामर्थ्य आते हैं जब आत्मा पूर्ण रूप से शक्तिशाली हो जाती है .

जब आपके सारे चक्र सम्पूर्ण रूप से खुले हुए होते हैं , यह एक निर्बाध / फ्री मार्ग बनता है सेटन के सरपेंट / सर्प के लिए , जो रीढ़ के तल पर निष्क्रिय पड़ा रहता है . जब यह सरपेंट ऊपर उठता है , हम भगवान अर्थात गोड्स (GODS) जैसे हो जाते हैं . यही उद्देश्य / लक्ष्य है पावर मैडिटेशन अर्थात शक्ति ध्यान का .

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चक्र

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चक्र शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र होते हैं आत्मा के . प्रत्येक चक्र का एक अलग कार्य होता है निशिचित विशेष शक्तिओं (उनमे होने ) के साथ . हमारे चक्रों का स्वास्थ्य प्रभाव डालता है हमारे शारीरिक , भावनात्मक , एवं मानसिक स्वास्थ्य पर . आत्मा के बहुत सारे भाग होते हैं , चक्र आत्मा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं प्रमुख भाग होते हैं .

वहां सात प्रमुख चक्र हैं जो रीढ़ के साथ साथ स्थित हैं और ये सर्वाधिक शक्तिशाली होते हैं . इनमे से प्रत्येक चक्र कम्पन्न करता है प्रकाश स्पेक्ट्रम / वर्णक्रम के आवृत्ति पर . सेटनिजम विज्ञान को पुरजोर मानता है क्यूंकि सभी आध्यात्मिक एवं गुप्त ज्ञान को वैज्ञानिक रूप से समझाया जा सकता है . दोनों विज्ञान एवं आध्यात्मिकता एक दूसरे के पूरक हैं , एवं एक साथ कार्य करते हैं . निरंतर हमलों एवं वैज्ञानिक जांच को दबाने के कारण एवं ईसाई चर्चों अर्थात गिरिजाघरों द्वारा इस ज्ञान को दबाने के कारण , विज्ञान खतरनाक रूप से पिछड़ा हुआ यही एवं उस स्तर तक नहीं पहुँच पाया है की हम सम्पूर्ण ऑकल्ट अर्थात गुप्त / रहस्य्मयी ज्ञान को पूरा समझा सकें, परन्तु समय के साथ यह हो जायेगा . आत्मा प्रकाश की बनी होती है .
"प्रकाश शक्ति है "
-- लिलिथ


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छह छोटे , परन्तु बराबर शक्तिशाली चक्र स्थित हैं कूल्हों , कन्धों के प्रत्येक ओर [पर , एवं सिर के बाजू में देवालयों / टेम्पल्स पर . चक्र कार्य करते हैं आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए ऊर्जा के साथ . ये तरह चक्र महत्वपूर्ण हैं जीवन के लिए . कोई भी इनके बिना नहीं जी सकता है . क्यूंकि इतना अधिक प्राचीन ज्ञान व्यवस्थित रूप से नष्ट किया जा चुका है , एवं जो कुछ भी थोड़ा बचा है वह खंडित हो चुका है , जो कुछ भी (ज्ञान ) आज उपलब्ध है चक्रों के बारे में , दुर्भाग्यवश उसमे त्रुटि है . सेटन एवं हेल की शक्तियां बतलाती हैं / प्रकाशित करती हैं आध्यात्मिक ज्ञान को जैसे जैसे हम मैडिटेशन अर्थात ध्यान के माध्यम से उन्नति करते हैं .

बहुतों के अनुभवों के आधार पर , ऐसा प्रतीत होता है की तीन ग्रंथियां [वे गांठें जहाँ सम्बंधित चक्र का एक शक्तिशाली ऊर्जा रुकावट होता है जो सरपेंट अर्थात सर्प को ऊपर चढ़ने / उत्थित होने से रोकता है ] वो बेस (मूलाधार ) , हार्ट (अनाहत ) एवं छटवें चक्र पर नहीं होता जैसे आमतौर पर सिखाया जाता है , परन्तु वह दूसरे [सेक्रल /स्वाधिष्ठान ] चक्र , थ्रोट (विशुद्ध ) चक्र एवं क्राउन (सहस्रार) चक्र पर होता है . ऐसे वर्णन मिले हैं की एक व्यक्ति के हार्ट चक्र में जलने की सी अनुभूति हो रही है ; क्यूंकि सरपेंट अवरुद्ध थ्रोट चक्र के कारण और अधिक ऊपर उत्थान नहीं कर सकता .

अब , अगर हार्ट चक्र अवरुद्ध है एवं तीन में से एक ग्रंथि की रखता है , जलने वाली अनुभूति प्रकट होगी सोलर चक्र में, नाकि हार्ट चक्र में . और आगे जाते हुए , रेंगने की अनुभूति सहस्रार चक्र के पास मजबूती से यह बतलाती है की चक्र अवरुद्ध है . अगर वह छटवां चक्र था जैसा की हमें बहुत सारे स्त्रोत जानकारी के जो की उपलब्ध हैं बतलाते हैं , अनुभूति होगी थ्रोट चक्र पर या छटवें चक्र के नीचे . प्रत्यक्ष अनुभव से , ऐसा प्रतीत होता है की सातवां चक्र सरवधिक कठिन होता है पूरी तरह से खोलने के लिए . रेंगने की अनुभूति , ऐसी तुलना करने पर की चीटियां रेंग रही हैं , दर्शाता है की सर्पेंटाइन अर्थात सरपेंट वाली ऊर्जा सातवें चक्र के *चारों ओर * से जा रही है एवं उसमे से *होकर * नहीं जैसे उसे जाना चाहिए जब इस चक्र को पूर्ण खोल दिया जाता है . दूसरे लक्षणों में शामिल हैं दर्द एवं बेचैनी , विशेषकर जब एक व्यक्ति सर्पेंटाइन ऊर्जा पूर्णतः सक्रिय होती है .

सहस्रार को पूर्णतः खुला होना चाहिए ताकि सरपेंट उचित रूप से उत्थान कर सके . कामोत्तेजना अत्यधिक दर्दनाक हो सकते हैं , क्यूंकि यौनिक कामोत्तेजना चक्रों को खोलती है एवं सरपेंट को सक्रिय करती है . जब एक व्यक्ति नियमित रूप से मैडिटेशन करता है एक व्यक्ति की ऊर्जा बहुत अधिक शक्तिशाली होती है एवं इसीलिए ये लक्षण बहुत प्रत्यक्ष होते हैं .


बहुत सारी ग्रिमोइर् (जादू एवं आव्हानो की किताब ) में एवं प्राचीन ग्रंथों में , "चक्र /चक्रों" के लिए कोड वर्ड अर्थात संकेत शब्द है "गोड्स/गॉड " . उदहारण के लिए , हवाले निश्चित "शक्ति के शब्दों " की ओर , जो "आदेश देते हैं भगवानों / गोड्स को " जैसे की देखा जाता है प्राचीन इजिप्ट /मिस्र की आध्यात्मिक लिखवतों में . "गॉड " एक व्यक्ति के स्वयं के लिए भी एक संकेत-शब्द है .


यहूदी /ईसाई बाइबिल के लेखकों ने विकृत कर दिया एवं भ्रष्ट कर दिया सभी आध्यात्मिक ज्ञान को इस कोशिश में की वे ये सारी जानकारी आमजनों से हटा लें व्यवस्थित रूप से . इस ज्ञान को छुपा के रख गया है एवं इसका उपयोग "चुने " हुए कुछ करते हैं मानवता को नुक्सान पहुँचाने के लिए . उदाहरण के लिए , रीढ़ के साथ स्थित सात चक्र हैं - "सात गांठें / सेवन सील्स " जो की ईसाई बाइबिल की " प्रकाशित वाक्य" किताब में जिनके बारे में लिखा हुआ है . "ये आग के सात लैम्प्स / दीपक हैं जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने जलते हैं ." प्राचीन (लोगों ) ने निश्चित संकेत छोड़े हैं बाइबिल में . गहन अनुसन्धान की सहायता से , यह मजबूती के साथ प्रतीत होता है की बाइबिल को दबाव एवं धमकी के अंदर में लिखा गया था . अंक सात , जो बारम्बार प्रकट होता है , वह एक संकेत है सात चक्रों के लिए . इस पर और अधिक जानकारी आगे बतलाये जाएगी .

"जीवन का पेड़ " पिछड़ता है यहूद / ईसाईयत को कई हजार सालों द्वारा . "जीवन का पेड़ " वास्तव में मानव आत्मा का एक नक्शा है . तन प्रतीकात्मक है रीढ़ का एवं डगालें प्रतीकात्मक हैं 144,000 नाडिओं की जो ची / विच / जादुई शक्ति को परिचालित प्रसारित करती हैं . फल पुरूस्कार हैं मैडिटेशन के ; आत्मा को शक्तिशाली बनाना. कडुसीयस (caduceus ) में जो सरपेंट देखा जाता है जिसे दोनों अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन एवं वेटरनरी दवाई में उपयोग करते हैं , प्रतिनिधित्व करता है कुण्डलिनी शक्ति का . दुर्भाग्यवाश , यह सबसे पवित्र चिन्ह जो प्रतिनिधित्व करता है चंगाई का हर स्तर पर चंगाई का .... उसका जघन्यता के साथ तिरस्कार कर दिया गया एवं यहूद / ईसाईयत द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया .

चक्रों को "सील्स/ गाँठ / मुहर" के रूप में उल्लेखेित किया गया है क्यूंकि शत्रु परग्रहिओं ने उन्हें मानवता में सील बंद कर दिया है ताकि हम ईश्वरीय शक्ति एवं ज्ञान प्राप्त न कर सकें . हमें आध्यात्मिकता एवं एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक जगत से काट दिया गया है . हजारों साल पहले , हम भगवानों अर्थात गोड्स के जैसे थे , जब तक पृथ्वी पर हमला नहीं हुआ और वहां "स्वर्ग में युद्ध " छिड़ गया .

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हमारा स्वयं सील बंद हो गया है जिसके कारण मानव जाती का खूब पतन हुआ है . इस ऊर्जा में असंतुलन एवं रुकावटें , आभा में गड्ढों के साथ कारण बनते हैं दृगज एवं अलकोहल की लत का , तनाव का , अन्य लोगों एवं अन्य जीवन रूपों के प्रति भावना / चिंता की कमी होने के , अपमानजनक व्यवहार का एवं बहुत सारी चीज़ों का जो मानवता के कंटक हैं . सक्रियता के साथ यौनिक ऊर्जा पर हमला करने एवं उसे दबने के द्वारा , सर्व-महत्वपूर्ण सरपेंट को बेस अर्थात मूलाधार चक्र में फंसा के रख गया है , जहाँ वह निष्क्रिय पड़ा हुआ है . इसी कारण ईसाई चर्च यौन की निंदा करता है , ताकि मानवता को अँधेरे में , अज्ञान में एवं आध्यात्मिक गुलामी में रखा जा सके . दूसरे चक्र को जो यौन कामुकता एवं रचनात्मकता को नियंत्रित करता है उसे सक्रिय करने एवं खोलने के द्वारा सरपेंट जाग जाता है , एवं उठना शुरू होता है एवं सात प्रमुख चक्रों में से होकर उत्थित होता है , आत्मा को शक्तिशाली बनता है एवं प्रबोधन , समझ एवं जागरूकता लाता है , इसके साथ में कई मानसिक / अलौकिक / पारलौकिक / अधय्त्मिक तोहफे एवं सामर्थ्य लाता है .



वहां तरह प्रमुख चक्र हैं , उसमे से प्रमुख सात रीढ़ के साथ साथ स्थित एवं फैले हुए हैं - ये सर्वाधिक शक्तिशाली चक्र हैं ; फिर कन्धों के चक्र , एवं कमर / नितम्ब / कूल्हों एवं देवालयों के चक्र इन्हे सहायता देते हैं . जब सक्रिय हो जाते हैं , कन्धों के चक्र पंखों को कस्ते हैं , जो और अधिक शक्ति देता है आत्मा को एवं यह प्रतीक करता है आध्यात्मिक स्वतंत्रता की . देवालय , कमर एवं कन्धों के चक्र "खम्बो / स्तम्भों / पिल्लर्स " बनाते हैं "सोलोमन /सुलेमान (SOLOMON) के मंदिर" के . 666 सूर्य का कबलिस्टिक वर्ग है . "सोलोमन के मंदिर " का सच्चा अर्थ है "सूर्य का मंदिर " . "Sol/सोल " "Om /ओम " एवं "ऑन /On" ये सब सूर्य के लिए ही शब्द हैं . "Sol" सूर्य के लिए लैटिन शब्द है एवं यह अंग्रेजी शब्द "सोल /Soul" के अति करीब है .

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"ॐ /Om" एक नाम है जिसका उपयोग हिन्दू करते हैं आध्यात्मिक सूर्य के लिए एवं "ऑन /On" मिस्री अर्थात इजिप्शियन शब्द है सूर्य के लिए . अब , यहाँ एक अन्य भ्रष्टाचार है . om /OHM ने वास्तविक एवं प्राचीन कम्पन्न को पलट दिया है "ॐ /AUM / औम" के लिए . फिरसे , यह इसीलिए किया गया है ताकि सभी शक्ति एवं आध्यात्मिक ज्ञान को आम जनो से हटा दिया जाये . क्यूंकि हर चीज़ को नहीं दबाया जा सकता , पर जो कुछ बचा है आम मुखयधारा में उसकी शिक्षाओं को भ्रष्ट कर दिया गया है . इस पर और अधिक जानकारी के लिए ॐ वाले लेख को देखें जो आगे हम पोस्ट करेंगे .
चक्र त्रिमूर्ति का प्रतीक - कमर / नितम्ब के चक्र , कन्धोंे के चक्र एवं देवालय चक्र इन्हे टैरो ट्रम्प के हीरोफेंट (Hierophant) कार्ड में देखा जा सकता है कई डेक्स में , इसे प्रतीक करता है एक सेप्टर जो की हीरोफेंट के हाथ में है .
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सोलोमन के मंदिर का उचित सही प्रतीकात्मक है मानव आत्मा का ईश्वरत्व अर्थात गॉडहेड में बदल जाना , परिवर्तित हो जाना , परन्तु इसे चुरा लिया गया था एवं भ्रष्ट कर दिया गया था यहूदी लोगों द्वारा एवं इसे एक अन्य झूठा यहूदी पात्र बना दिया गया , जैसे की काल्पनिक नाज़रीन /यशु मसीह के साथ किया गया था . यहूदी / ईसाई बाइबिल में सब कुछ खंडित झूठ एवं चुराया हुआ है . सूर्य प्रतिनिधित्व करता है प्रबोधन , परिवर्तन , एवं शक्तिशाली आत्मा का , "666" सर्वाधिक पवित्र एवं महत्वपूर्ण अंक है .

नीचे एस्टेरोथ /Astaroth की सिजिल(अर्थात प्राचीन प्रतीक/ चिन्ह जिनमे जादुई शक्ति होती है ) में मानव आत्मा का रेखा चित्र देखा जा सकता है . प्रत्येक ओर जो दो बार्स / डंडे हैं वे ऊर्जा के सकारत्मक एवं नकारत्मक स्तम्भ हैं मानव आत्मा के दोनों साइड पर - काला एवं सफ़ेद यिन और यांग का एवं चेकेरबोर्ड /बिसात ; शुक्र के लिए ग्लिफ़ (चित्रलिपि / गुप्त निशान ) प्रतीक करता है हार्ट अर्थात अनाहत चक्र का . एस्टेरोथ की सिजिल के पांच बिंदु प्रतिनिधित्व करते हैं पांच तत्वों का - अग्नि , पृथ्वी , वायु , जल एवं हीर अर्थात क्विंटेस्सेंस का जिनका आत्मा की तीन गांठों (ग्रंथियां ) में आव्हान किया जाता हैं . टैरो /Tarot रखता है बहुत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक जानकारी एवं निर्देश आत्मा को शक्तिशाली बनाने एवं खोलने के लिए . ध्यान दें - AsTAROTh /एस्टेरोथ जिसे प्राचीन मिस्र के मूल से लिया गया था उसे भयानक रूप से भ्रष्ट कर दिया गया यहूदी "तोरह/Torah " में या "Pentateuch (इंजील में मूसा की बनाई पाँच पुस्तकों) " "मूसा की पांच पुस्तकें इस बकवास में . ध्यान दें कैसे Ashtaroth में Tarot शब्द आया है : AshTAROTh .

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जब मानव आत्मा को ठीक से संरेखित किया जाता है , यह इनवर्टेड / उलटे क्रॉस के आकार में रहते है . यह छुपा हुआ मतलब है "थॉर के हथोड़े " का . "चार क्वॉटर्स " द्वारा ह्यूमन आत्मा के क्रॉस आकर का प्रतिनिधित्व होता है . "चार दिशाएं " एवं चार प्रमुख राजकुमार हेल के अनुष्ठानों में .


* शरीर / आत्मा का सामने का हिस्सा उत्तर है , इसका स्वामी है पृथ्वी तत्व .
* शरीर का पीछे का हिस्सा दक्षिण है , इसका स्वामी है अग्नि तत्व .
* शरीर का उलटे अर्थात बाएं ओर का हिस्सा नकारत्मक सतबमह है . उलटे हाथ से हम ऊर्जा को अंदर लेते हैं . उलटे ओर साइड का स्वामी है जल तत्व एवं दिशा है पश्चिम .
* शरीर का दायां अर्थात सीधे ओर वाला साइड सकारात्मक खम्बा है और इसका स्वामी वायु तत्व है . हम हमारे सीधे हाथ से ऊर्जा को निर्देशित करते हैं .
*क्विंटेस्सेंस / हीर / व्योम केंद्र में है , एवं आभा में .
* अग्नि एवं वायु विद्युतीय हैं .
* जल एवं पृथ्वी चुंबकीय हैं .

सात प्रमुख चक्रों में से प्रत्येक का एक विशेष कार्य एवं शक्ति होती है , सभी चक्र , दोनों प्रमुख / बड़े एवं छोटे / लघु हमारे शरीर के अंगों पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालते हैं जिन अंगों के सामीप्य में वे रहते हैं . यह पारस्परिक सम्बन्ध है एक व्यक्ति के स्वास्थ्य के विषय में , जैसे की एक अस्वस्थ अंग चक्र की शक्ति पर असर करेगा एवं एक अस्वस्थ चक्र अंग की शक्ति पर असर करेगा . सरपेंट कुंडलित पड़ा रहता है रीढ़ के तल पर बेस अर्थात मूलाधार चक्र के नीचे जो टेलबोन पर स्थित है . टेलबोन मतलब आपके मलछिद्र के ऊपर जो हड्डी होती है वहां पर. सरपेंट निष्क्रिय पड़ा रहता है जब तक उसे पावर मैडिटेशन अर्थात शक्ति ध्यान से उत्तेजित / प्रोत्साहित नहीं किया जाता या दुर्लभ मामलों में वह दुर्घटना म या कोई शारीरिक चोट या कोई अन्य आघात जो टेलबोन वाले जगह होता है उससे उत्थित हो जाता है . प्रत्येक चक्र एक छोटी चिमनी / ट्यूब के आकर में होता है , जैसे की एक छोटा घूमता हुआ टोर्नेडो / चक्रवात एक कप के आकार में . टैरो में कप्स के सूट / सूट ऑफ़ कप्स प्रतीक करते हैं चक्रों का , क्यूंकि प्रत्येक चक्र ऊर्जा को पकडे रखता है उसके कप में . सर्वाधिक महत्वपूर्ण चक्र है सोलर प्लेक्सस अर्थात मणिपूर चक्र , जो की ग्रेल ( (कप ) है . सिर्फ इसके अल्वा के वह चक्रों के सही संरेखण का प्रतीकात्मक है , थॉर के हथोड़े के बारे में और भी कुछ है . कम्पन्न "TH /थ " छटवें चक्र एवं पीनियल ग्रंथि को सक्रिय करता है , जो सोलर चक्र का स्त्री समकक्ष है . पीनियल ग्रंथि से जीवन का अमृत निकलता है , जो सोलर चक्र में संग्रहित होता है , एवं सोलर चक्र का कम्पन्न है "रा/RA" . यह छुपा हुआ अर्थ है "थॉर/THOR" के पीछे जो की अति महत्वपूर्ण आध्यात्मिक सिद्धांत है . चक्र हमेशा घुमते रहते हैं जब तक एक व्यक्ति इच्छा नहीं करता की वे रुक जाएँ जैसे की नाक्षत्रिक प्रक्षेपण की कुछ विधिओं में होता है .

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बेस चक्र

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Source URL - http://web.archive.org/web/201509090714 ... hakra.html

पहला , बेस चक्र , "मूलाधार " अर्थात , "रुट / जड़ / मूल "

तत्व : पृथ्वी
रंग : लाल
पत्तीओं की संख्या : चार 4
गृह : शनि
लिंग : पुरुष
दिन : शनिवार
धातु : लेड अर्थात सीसा
कार्य : उत्तरजीविता अर्थात सर्वाइवल , मूल-सिद्धांतों की पूर्ण शिक्षा
अंदरूनी अवस्था / राज्य : स्थिरता

बेस /रुट चक्र को संस्कृत में "मूलाधार" कहते हैं यह आंत, मूत्राशय, निचला पेट, पैर, और अधिवृक्क ग्रंथि को नियंत्रित करता है . यह चक्र रंग में लाल होता है . इसका तत्व पृथ्वी है एवं इसका धातु सीसा है . इसका स्वामी शनि गृह है . यह चक्र स्थिरता एवं नींव प्रदान करता है , यह सर्वाइवल अर्थात उत्तरजीविता एवं मूल प्रवृत्तिओं पर राज करता है . बेस चक्र हमें ज़िंदा रहने की शक्ति देता है , एवं सुरक्षा की भावना देता है . क्रोध एवं रोष इस चक्र से निकलते हैं , इसीलिए मुहावरा "लाल देखना / लाल दिख रहे हो ". पहले के तीन चक्र बहुत प्रभावी होते हैं जादू के कार्यचालनों में , चीजें जिन्हे ऊपर के स्त्री चक्रों द्वारा प्रक्षेपित किया गया है उन्हें वास्तविकता में प्रकट करने के लिए .

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सेक्रल चक्र

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Source URL - http://web.archive.org/web/201509080833 ... hakra.html

स्थान : शिश्नरोम /जघनरोम अर्थात प्यूबिक /PUBIC हड्डी और नाभि के बीच का आधा रास्ता
तत्व : पृथ्वी
रंग : संतरा
पत्तीओं की संख्या : छह 6
गृह : मंगल
लिंग : पुरुष
दिन : मंगलवार
धातू : लोहा
कार्य : कामुकता, खुशी, उत्पत्ति, रचनात्मकता, यौन ऊर्जा की कुर्सी .
अंदरूनी अवस्था / राज्य : रचनात्मक क्षमता

सेक्रल चक्र को संस्कृत में "स्वाधिष्ठान " कहते हैं क्यूंकि यह एक यौनिक चक्र है . यह चक्र रंग में संतरे रंग का होता है एवं यह यौनिक काम वासना को नियंत्रित करता है , इसके साथ साथ यौनिक एवं प्रजनन अंगों को , निचला पेट एवं गुर्दों को . इसका तत्व जल है एवं धातु लोहा है . इसका स्वंय मंगल गृह है . यह सुख, भोग, कामुकता, और रचनात्मकता को प्रभावित करता है . सेक्रल एवं सोलर चक्र सेक्स जादू के कार्यचालनों को शक्तिशाली बनते हैं . आम मुखयधारा जानकारी के विपरीत , दूसरा चक्र पहली ग्रंथि की कुर्सी है . ग्रंथि वे अवरोध हैं जो सरपेंट के उत्थान में बाधा डालते हैं . एक व्यक्ति को चाहिए की वह किसी भी प्रकार के यौनिक डर एवं अवरोध से स्वतंत्र रहे इस चक्र के सम्पूर्ण शक्ति पर कार्य करने के लिए . सदिओं के ईसाई दबाव के एवं उसके मानव यौन कामुकता पर हमलों के कारण , सरपेंट बेस अर्थात मूलाधार चक्र पर निष्क्रिय पड़ा हुआ है . ईसाईयों ने ऐसा प्रयास इसीलिए किया ताकि वे सभी आध्यात्मिक शक्ति एवं ज्ञान आम जनों के पास से हटा ले . यौनिक कामोत्तेजना , जो की सबकी शारीरिक , मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है , यही सक्रिय करती है सरपेंट को एवं इस चक्र को यही पूरा खोलती है .

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Post Thu Jun 30, 2016 12:00 pm

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सोलर 666 चक्र

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Source URL - http://web.archive.org/web/201509150832 ... hakra.html

सोलर चक्र
तीसरा , सोलर चक्र (मणिपूर)

स्थान : नाभि के थोड़ा ऊपर सोलर प्लेक्सस के पास
तत्व : अग्नि
रंग : सफ़ेद -सुन्हेरा (सोने के रंग का ) [मेधावी चमकदार सूर्य के जैसे ]
पत्तीओं की संख्या : दस 10
गृह : सूर्य
लिंग : पुरुष
दिन : रविवार
धातू : सोना अर्थात गोल्ड
कार्य : यह चक्र शक्तिगृह है आत्मा का ; इच्छा शक्ति का , शक्ति का , हस्तकौशल अर्थात मैनीपुलेशन का
अंदरूनी अवस्था / राज्य : इच्छा शक्ति , समय निर्धारण . यह चक्र ग्रेल अर्थात (कप ) है लूसीफ़र का .
सोलर चक्र का स्त्री समकक्ष है छटवां अज्न चक्र , जो पीनियल ग्रंथि को रखता है

सोलर प्लेक्सस चक्र सरवधिक महत्वपूर्ण चक्र है . इसे संस्कृत में "मणिपूर " चक्र कहते हैं . यह चक्र है इच्छा (इच्छा शक्ति ) का, एवं सबसे महत्वपूर्ण , यह ग्रेल अर्थात कप है लूसीफ़र का जिसमे जीवन का अमृत होता है जिसे पीनियल ग्रंथि निकलती है / स्राव होता है इस अमृत का पीनियल ग्रंथि से . यह वहीँ है जहाँ से आत्मा की चंगा करने वाली शक्ति निकलते है . यह पाचन तंत्र , पेट , अग्न्याशय , मांस्पेशिओं पर राज करता है . सोलर चक्र का रंग सोने अर्थात गोल्ड का रंग होता है एवं इसका स्वामी सूर्य है . इसका तत्व अग्नि है एवं धातु सोना अर्थात गोल्ड है . यह वह चक्र है जिसका उपयोग एक व्यक्ति अपनी इच्छा शक्ति को प्रभावित करने के लिए करते है जादू टोने के कार्यचालन के दौरान . सोलर चक्र आत्मा का शक्ति गृह है . इसका प्रतीक / चिन्ह स्वास्तिक (स्वास्तिका ) है .

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हार्ट चक्र

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Source URL - http://web.archive.org/web/201509142219 ... hakra.html

चौथा , हार्ट चक्र का केंद्र [अनाहत ]

स्थान : सीने /छाती का केंद्र
तत्व : अग्नि / वायु
रंग : हरा
पत्तीओं की संख्या :बारह / 12
गृह : बुध
लिंग : अकर्मक
दिन : बुधवार
धातू : पारा
कार्य : हार्ट चक्र अकर्मक कनेक्टर अर्थात जोड़ने वाला है ऊपर के एवं निचले चक्रों को .
अंदरूनी अवस्था / राज्य : छिछोरापन , लघुता एस्ट्रल प्रोजेक्शन अर्थात नाक्षत्रिक प्रक्षेपण
अकर्मक हार्ट चक्र का कोई समकक्ष नहीं है .

हार्ट चक्र को संस्कृत में अनाहत कहते हैं एवं यह आत्मा का एक अकर्मक जोड़ने वाला है ; ये ऊपर के तीन स्त्री चक्रों को नीचे के तीन पुरुष चक्रों के साथ जोड़ता है . यह आत्मा के संचार प्रणाली को नियंत्रित करता है . हार्ट चक्र अलग होता है इसमें की इसका आकार एक योनि के जैसे होता है .

"सात मीनारें / खम्बे - सेटन के खम्बे / मीनारें (ज़िआरहस /Ziarahs) - उनमे से छह समलम्बाकार (चतुर्भुज के आकार के ) आकार में , और एक , लालेश पर्वत पर केंद्र , एक पैने बांसुरी के बिंदु के आकार का था "
-- दि सैटनिक रिचुअल्स बाय एंटन लावे

ऊपर दिया हुआ अंश भी एक रूपक / दृष्टान्त कथा है , क्यूंकि केंद्र एक अलग थलग है सबसे (ऊपर अंश में ) , वह हार्ट अर्थात अनाहत चक्र है . इसमें शक्ति तो है , परन्तु आत्मा के सबसे शक्तिशाली चक्र जितनी नहीं है जो की सूर्य के "666" चक्र में है . हार्ट अर्थात अनाहत चक्र की शक्तियां अल्पतम / कम हैं . इसीलिए शत्रु इसकी दलाली करता है आम मुख्यधारा की किताबों में और नए युग सिद्धांतवाद में जो की आम जनों को तैयार उपलब्ध है . मैं अपने स्वयं के अनुभव से कहती हूँ जानवरों को चंगा करने में , की ऊर्जा चंगाई करने वाले सोलर प्लेक्सस अर्थात मणिपूर चक्र से इसे बहुत प्रभावी रूप से हार्ट अर्थात अनाहत चक्र पर निर्देशित किया जा सकता है , चहेते को अपने सीने के करीब पकडे रखने के दौरान . मैंने पाया है की यह तकनीक कहीं अधिक शक्तिशाली एवं प्रभावी है हाथों के साथ चंगाई करने की अपेक्षा . और तो और , बहुत सारे लोग जो नाक्षत्रिक प्रक्षेपण कर सकते हैं वे अपने शरीर को हार्ट चक्र में से होकर ही छोड़ते हैं .

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थ्रोट चक्र

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Source URL - http://web.archive.org/web/201510250652 ... hakra.html

पांचवा ,थ्रोट चक्र [विशुद्ध]
स्थान : गला
तत्व : वायु
रंग : आसमानी नीला
पत्तीओं की संख्या : सोलह /16
गृह : शुक्र
लिंग :स्त्री
दिन : शुक्रवार
धातू : तांबा
कार्य : संपर्क / बातचीत , भावनात्मक स्व - अभिव्यक्ति
अंदुरनी अवस्था / राज्य : मानसिक / पारलौकिक / अलौकिक श्रवण (सुनना ) , भावनाएं

थ्रोट चक्र को संस्कृत में विशुद्ध कहते हैं , यह गरदन पर राज करता है , थायरॉयड ग्रंथि पर , गले , मुंख , आवाज़ , कान , सुनना एवं श्वासप्रणाल (ट्रेकिआ) पर राज करता है . यह चक्र रंग में आसमानी नीला होता है एवं मौखिक बातचीत , बुद्धिमता , भावनाएं, एवं आत्म अभिव्यक्ति पर राज करता है . सच आप जान लें , थ्रोट चक्र , न की हार्ट अर्थात अनाहत चक्र "भावनाओं की कुर्सी " है . थ्रोट चक्र है भावनाओं की कुर्सी . जब हमें दुःख होता है , जैसे की हम रो रहे हैं , हमें जोर गले से ही मिलता है . थ्रोट चक्र है चक्र रचनात्मक क्षमता का एवं यह सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र के साथ कार्य करता है . गला ग्रंथि रखता है .

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छटवां चक्र

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Source URL - http://web.archive.org/web/201510250721 ... hakra.html

छटवां चक्र [अज्न/Ajna]

स्थान : ठीक क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र के नीचे
तत्व : ईथर /Ether
रंग : इंडिगो /नीला - बैंगनी
पत्तीओं के संख्या : दो / 2
गृह : चन्द्रमा
लिंग : स्त्री
दिन : सोमवार
धातु : चांदी
कार्य : मानसिक /पारलौकिक / अलौकिक दृष्टि
अंदरूनी अवस्था / राज्य : अंतर्ज्ञान/प्रतिभाज्ञान

छटवें चक्र को संस्कृत में अज्न नाम से जाना जाता है एवं यह ठीक तीसरी आँख के पीछे होता है . तीसरी आँख इस चक्र का एक विस्तार है एवं स्वामी है अलौकिक / पारलौकिक / मानसिक दृष्टि की . यह चक्र अलौकिक / पारलौकिक / मानसिक कुर्सी होता है आत्मा की . जब पीनियल ग्रंथि सक्रिय हो जाती है अंदर में , यह अक्सर मेधावी तेज प्रकाश से चमकने लगेगा , सिर में सफ़ेद प्रकश की बाढ़ ल देगा , इसके साथ एक प्रचण्ड अवस्था आएगी अत्यन्त परमानन्द की की . जब पीनियल सक्रिय होती है , वह फूल जाती है वहां एक अंगूर के आकार के दबाव की अनुभूति होती है . छटवां चक्र आँखों का स्वामी है , दोनों शारीरिक एवं एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक दृष्टि का , एवं पीनियल ग्रंथि का . यह बैंगनी-नीला / नील के रंग का होता है , इसका तत्व है व्योम / ईथर . इसका धातु है चांदी , एवं इसका गृह है चन्द्रमा . यह चक्र वहीँ है जहाँ इडा/Ida एवं पिंगला /Pingala मिलते हैं . यह सर्व महत्वपूर्ण पीनियल ग्रंथि रखता है एवं यह आत्मा की पारलौकिक / मानसिक / अलौकिक कुर्सी है . कुछ कार्यचालनों में , ऊर्जा को ऊपर रीढ़ पर निर्देशित किया जाता है छटवें चक्र पर एवं तीरी आँख से बाहर प्रक्षेपित कर दिया जाता है , जैसे की बहुत सारे इजिप्शियन अर्थात मिस्र के चित्रलिपिओं में देखा जाता है .

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Post Thu Jun 30, 2016 12:10 pm

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क्राउन चक्र

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Source URL - http://web.archive.org/web/201510250702 ... hakra.html

सातवां क्राउन चक्र , ईश्वरत्व अर्थात गोडहेड [ईश्वर जैसे बन जाना ] की कुर्सी [सहस्रार] हज़ार बार (से )अधिक

स्थान : सिर के ऊपर
तत्व : पानी
रंग : बैंगनी
पत्तीओं की संख्या : हज़ार - पत्ती कमल
गृह : बृहस्पति
लिंग : स्त्री
दिन : गुरुवार
धातू : टिन /TIN
कार्य : प्रबोधन / आलोक
अंदरूनी अवस्था / राज्य : परमानन्द

क्राउन चक्र को "हज़ार-पत्ती कमल /लोटस " के नाम से जाना जाता है . लोटस अर्थात कमल को लिली /Lily भी कहते हैं . Lily = "लिलिथ / Lilith ." इसके अलावा की प्रत्येक डीमोन एक वास्तिवक जीवित जीव है , प्रत्येक डीमोन का उनका अपना आध्यात्मिक सन्देश होता है . लिलिथ क्राउन चक्र की स्वामी हैं . सेटन बेस अर्थात मूलाधार चक्र के स्वामी हैं . बेस और क्राउन चक्र दोनों पुरुष एवं स्त्री जोड़े हैं जो एक साथ कार्य करते हैं .

क्राउन चक्र को सहस्रार के नाम से जाना जाता है संस्कृत में एवं यह सिर के ऊपर होता है , ठीक ऊपर . यह रंग में बैंगनी होता है , मस्तिष्क के ऊपर राज करता है , पीयूषिका एवं तंत्रिका तंत्र पर राज करता है . एलेगोरी (एलेगोरी का अर्थ वे दृष्टान्त जिनमे छुपा हुआ अर्थ रहता है) में , इसका प्रतीक / चिंन्ह है एक हज़ार - पत्ती कमल. यह प्रतीक प्राचीन मिस्र / इजिप्ट तक को जाता है . सातवें चक्र को जब पूर्ण रूप से सक्रिय कर दिया जाता है एवं खोल दिया जाता है , तो यह परमानद की अवस्था में ले आता है / उभार देता है . डीमॉन्स ने मुझे बताया है की जल तत्व इसका स्वामी है . यह चक्र स्वामी है सभी पारलौकिक / अलौकिक / मानसिक संज्ञाओं (समझ ) का , एवं यह महत्वपूर्ण है टेलीपैथिक (दूर संवेदन ) बातचीत के लिए . यह चक्र , आम शिक्षाओं के विपरीत , इसी में तीसरी ग्रंथि होती है , जो अक्सर सर्वाधिक कठिन होती है सरपेंट के लिए तोड़ने को . जब यह चक्र अवरुद्ध होता है , एक व्यक्ति अक्सर अनुभव करता है अनुभूतियां जैसे की रेंगने की से , क्यूंकि सर्पेंटाइन अर्थात सर्प की ऊर्जा इस चक्र के चारों और जा रही होती है एवं उसमे से होकर नहीं जा रही होती जैसे उसे जाना चाहिए .

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बेस चक्र (Corrected*)

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Source URL - http://web.archive.org/web/201509090714 ... hakra.html

पहला , बेस चक्र , "मूलाधार " अर्थात , "रुट / जड़ / मूल "

तत्व : पृथ्वी
रंग : लाल
पत्तीओं की संख्या : चार 4
गृह : शनि
लिंग : पुरुष
दिन : शनिवार
धातु : लेड अर्थात सीसा
कार्य : उत्तरजीविता अर्थात सर्वाइवल , मूल-सिद्धांतों की पूर्ण शिक्षा
अंदरूनी अवस्था / राज्य : स्थिरता
बेस चक्र का स्त्री समकक्ष क्राउन चक्र है .

बेस /रुट चक्र को संस्कृत में "मूलाधार" कहते हैं यह आंत, मूत्राशय, निचला पेट, पैर, और अधिवृक्क ग्रंथि को नियंत्रित करता है . यह चक्र रंग में लाल होता है . इसका तत्व पृथ्वी है एवं इसका धातु सीसा है . इसका स्वामी शनि गृह है . यह चक्र स्थिरता एवं नींव प्रदान करता है , यह सर्वाइवल अर्थात उत्तरजीविता एवं मूल प्रवृत्तिओं पर राज करता है . बेस चक्र हमें ज़िंदा रहने की शक्ति देता है , एवं सुरक्षा की भावना देता है . क्रोध एवं रोष इस चक्र से निकलते हैं , इसीलिए मुहावरा "लाल देखना / लाल दिख रहे हो ". पहले के तीन चक्र बहुत प्रभावी होते हैं जादू के कार्यचालनों में , चीजें जिन्हे ऊपर के स्त्री चक्रों द्वारा प्रक्षेपित किया गया है उन्हें वास्तविकता में प्रकट करने के लिए .

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सेक्रल चक्र (Corrected*)

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Source URL - http://web.archive.org/web/201509080833 ... hakra.html

स्थान : शिश्नरोम /जघनरोम अर्थात प्यूबिक /PUBIC हड्डी और नाभि के बीच का आधा रास्ता
तत्व : पृथ्वी
रंग : संतरा
पत्तीओं की संख्या : छह 6
गृह : मंगल
लिंग : पुरुष
दिन : मंगलवार
धातू : लोहा
कार्य : कामुकता, खुशी, उत्पत्ति, रचनात्मकता, यौन ऊर्जा की कुर्सी .
अंदरूनी अवस्था / राज्य : रचनात्मक क्षमता
स्त्री समकक्ष सेक्रल चक्र है थ्रोट चक्र , दोनों रचनात्मक शक्तियां देते हैं .

सेक्रल चक्र को संस्कृत में "स्वाधिष्ठान " कहते हैं क्यूंकि यह एक यौनिक चक्र है . यह चक्र रंग में संतरे रंग का होता है एवं यह यौनिक काम वासना को नियंत्रित करता है , इसके साथ साथ यौनिक एवं प्रजनन अंगों को , निचला पेट एवं गुर्दों को . इसका तत्व जल है एवं धातु लोहा है . इसका स्वंय मंगल गृह है . यह सुख, भोग, कामुकता, और रचनात्मकता को प्रभावित करता है . सेक्रल एवं सोलर चक्र सेक्स जादू के कार्यचालनों को शक्तिशाली बनते हैं . आम मुखयधारा जानकारी के विपरीत , दूसरा चक्र पहली ग्रंथि की कुर्सी है . ग्रंथि वे अवरोध हैं जो सरपेंट के उत्थान में बाधा डालते हैं . एक व्यक्ति को चाहिए की वह किसी भी प्रकार के यौनिक डर एवं अवरोध से स्वतंत्र रहे इस चक्र के सम्पूर्ण शक्ति पर कार्य करने के लिए . सदिओं के ईसाई दबाव के एवं उसके मानव यौन कामुकता पर हमलों के कारण , सरपेंट बेस अर्थात मूलाधार चक्र पर निष्क्रिय पड़ा हुआ है . ईसाईयों ने ऐसा प्रयास इसीलिए किया ताकि वे सभी आध्यात्मिक शक्ति एवं ज्ञान आम जनों के पास से हटा ले . यौनिक कामोत्तेजना , जो की सबकी शारीरिक , मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है , यही सक्रिय करती है सरपेंट को एवं इस चक्र को यही पूरा खोलती है .

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Post Fri Jul 01, 2016 11:11 am

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हमारे अतीत को नष्ट करना

Source URL - http://web.archive.org/web/201507191346 ... r_Past.htm

हम में से अधिकतर जानते हैं की ईसाईयत एक चलवा है , परन्तु की हद तक यह दूसरा मामला है . यह छल है भयावह अनुपातों का . मध्यकालीन चित्रों का अध्यन बतलाता है की समस्या कितनी बड़ी है , वह सहायता के लिए पुकारता है . काल के बहुत सारे कलाकारों ने अपने सन्देश उनके कार्यों में छोड़े हैं . वहां बिलकुल थोड़ी ही चित्रकारियां / पेंटिंग्स हैं - सब ईसाई धार्मिक मामलों की (कलाकार के पास कोई विकल्प नहीं था क्यूंकि कैथोलिक चर्च का सम्पूर्ण नियंत्रण था , एवं लगभग कला का हर कार्य इस काल के दौरान ईसाई धार्मिक विषय पर होना होता था , अन्यथा कलाकार के ऊपर "हेरेसी /विधर्म " लगा दिया जाता जिसका अर्थ होता यातना एवं मौत ) जो बतलाते हैं उड़ती हुई तश्तरियाँ नाज़रीन / यशु मसीह के ऊपर मंडरा रही हैं एवं अन्य निशानियां की यह झूठा धर्म एक छल है एवं लोग इसे जानते है , इसे पुरजोर तरीके से इस्पे जुल्म किया गया . भूरे बादल सूरज को अँधेरा कर रहे हैं "कालिंग ऑफ़ दि फर्स्ट अपोस्टल्स" की पेंटिंग में जिसे डोमेनिको घिरलंडाओ 1481 द्वारा , बतलाती है एक निराशाजनक वायुमण्डल जो संकेत करता है एक दुःख वाले समय का एवं यह बहुत कुछ कहता है . कार्लो क्रिवेली की अननसीएशन (Annunciation) वाली पेंटिंग 1486 में की , बतलाती है एक यू ऍफ़ ओ को जो एक कुमारी अर्थात वर्जिन के ऊपर मंडरा रहा है एवं उसके सिर पर प्रकाश की एक किरण / धारा चमका रहा है . बहुत सारे कलकरें ने इशारा किया है उड़ते हुए तश्तरियानों की और , मसुराकार दाने के बादल को पेंट करने के द्वारा उनके कार्यों में .

लिओनार्डो का प्रसिद्ध "लास्ट सपर " पेंटिंग दिखती है नाज़रीन के अपोस्टल्स (ईसाई धर्म के प्रचारक ) को तीन के चार समूह में , यह राशि के चिन्हों को संकेत कर रही है एवं इसका निहितार्थ यह है की - वे जानते थे की ईसाईयत एक छल था . बहुत सारी अन्य पेंटिंग्स उस काल की , उनमे छुपे हुए सन्देश हैं ईसाईयत के छल के विषय में , अगर एक व्यक्ति उन्हें पढ़ने के लिए समय ले .

वहां बहुत सारे सन्देश मिले हैं जिनको मैंने नीचे लिंक्स में बताया है इस लेख के ठीक नीचे , की स्मिथसोनीअन इंस्टिट्यूट प्राचीन कलकृतिओं से भरी नावों को अटलांटिक महासागर में उतार रहा है. इनमे से बहुत सारे उत्पत्ति में इजिप्ट अर्थात मिस्र के थे और ये यूनाइटेड स्टेट्स में मिले . जो कुछ भी ईसाई धर्म को मतभेद में लाता है वह गहन जांच में आ जाता है . यहुदिओं के दौरान से , ईसाई एवं मुसलमान दवा करते हैं दुनिया में की वे लगभग 6000 साल पुराने हैं , वहां हमेशा से ही एक संघर्ष रहा है सच के साथ इस झूट को फैलाने में .

कोई भी जिसके पास आधा दिमाग ही हो वह जानता है की इराक में कोई भी "प्रचण्ड तबाही के हथियार " नहीं मिले . दुनिया भर में विरोध होने के एवं संयुक्त राष्ट्र द्वारा इराक़ को सफ़ेद चिट देने के बावजूद , जॉर्ज डब्लू बुश निर्दयता के साथ इराक पर हमले के लिए धकेला. हाँ ज़रूर , यह बहुत अच्छा है की इजराइल एवं यू एस ए के लिए सारे प्रचण्ड तबाही के हतियार हों जैसे वे चाहें और उसमे कोई भी बाहरी धकलंदाजी न हो . हम सब जानते हैं मिस्टर बुश एक "फिरसे पैदा हुआ " ईसाई है .

इसके पीछे का वास्तविक कारण यह लगता है , की सभी महत्वपूर्ण अवशेषों एवं दस्तावेजों को नष्ट कर दिया जाये जो *सिद्ध * करते हैं यहूद , एवं ईसाईयत झूठे हैं . सद्दाम हुसैन विश्वास करता था की वह खुद नेब्यूकदनेस्सर का पुनर्जन्म है . इस विश्वास के साथ , उसने कोई 500 मिलियन डॉलर दिए 1980 के दौरान प्राचीन बेबीलोन के पुनः निर्माण करने की कोशिश के लिए , जो नेब्यूकदनेस्सर की राजधानी थी . साठ मिलियन से अधिक ईंटों को बनाया गया था बेबीलोन की दीवालों में लगाने के लिए इस नक्काशी के साथ "सद्दाम हुसैन के राज्य में राज नेब्यूकदनेस्सर को " 1 .

वहां बहुत सारे प्राचीन मंदिर थे एवं अवशेष थे जो इराक़ की रेट के नीचे दबे हुए थे जो इस बात को साबित करते थे की मानवता की उत्पत्ति कैसी हुई . पता नहीं वे अब भी वहां है क्यूंकि अमरीका वहां सेना लेकर घुसा था . अमरीकी और ब्रिटिश जीआई /GI को अनुमति थी की वे जाएँ और नष्ट करदे और लूट ले जो कुछ भी वो चाहें इराक़ी संग्रहालयों से

सद्दाम हुसैन प्राचीन आशूरबनीपल संगरहलय की मरम्मत का भी कार्य कर रहा था , जो की सबसे पहले की इकठ्ठा की गयी एवं सूचीबद्ध संग्रहालय था दुनिया में . उसमे के पाठ / ग्रन्थ बाढ़ के पहले उत्पन्न हुए थे . ब्रिटिश पुरातत्व अधिकारिओं ने मध्य उन्नीसवीं सदी में निनेवाह पर 2500 कीलकार स्मरण-पुस्तकों को खोद के निकल जिसे राजा आशूरबनीपल ने संकलित किया था अब इन में से लगभग सब के सब ब्रिटिश संग्रहालय में हैं .

2002 के अप्रैल में , इराकी पुरातत्व अधिकारिओं ने ब्रिटिश संग्रहालय से पूछा की वे स्मरण-पुस्तकों के साँचे बनने की अनुमति देंगे . हालाँकि अतीत की निश्चित स्मरण-पुस्तकों की कॉपियां बनायीं गयी थी , यह पहला समय होगा की कोई महत्वपूर्ण संख्या में कॉपियां उपलब्ध कराई जाएँ .

निनेवाह पर प्रस्तावित पुनः निर्मित संग्रहालय में सभी स्मरण-पुस्तकों की कॉपियां होती ब्रिटिश संग्रहालय से जो प्राप्त होती , और ऐसी योजना बनायीं गयी थी की यह विद्वानों एवं पर्यटकों के आकर्षणों का केंद्र होता . संग्रहालय का अगला दरवाजा केंद्र होता किलकार (लिपि) के अध्यन हेतु . इस बात की भी योजना बनायीं गयी थी की राजा आशूरबनीपल के महल के एक पंख को खोदा जाता क्यूयुनजिक माउन्ड में जहाँ ऐसी आशा था की और भी अन्य गड़े हुए स्मरण-पुस्तकें मिल जाते .

वहां लगभग 10,000 पुरातत्व स्थल हैं जो पूरे इराक़ में बिखरे हुए हैं और उनमे से बहुत सारों को छुआ तक नहीं गया है . पुरातत्व अधिकारिओं के अनुसार , चोरों ने इराक़ी संग्रहालयों में चोरी की बार बार एवं सुमेरिया की कलाकृतियों (यह युद्ध के पहले भी हुआ है ) को चुरा लिया . महंगे सोने अर्थात गोल्ड के आभूषण / ज्वेलरी को पीछे छोड़ दिया गया था . वे क्या चाहते थे बस वह प्राचीन अभिलेख जो कीलकार स्मरण पुस्तकों एवं सिलिंडर के आकार में थे .

संयुक्त राष्ट्र के राहत कर्मचारी एवं विदेशी राजदूतों पर कई बार आरोप लगाए गए इराक़ी सरकार द्वारा की वे ये कलाकृतियों को देश के बाहर तस्करी कर रहे हैं . 2002 की गर्मी में , एक इराक़ी जमीन्दारक खाली घर को बघ्दाद (इराक़ की राजधानी ) में साफ़ कर रहा था जिसमे पहले एक विदेशी राजदूत रहता था . जमींदार को दो कार्टून मिले पुरातत्व टुकड़ों के . इराकी सरकार ने कभी भी उस राजदूत या उसके देश का नाम नहीं लिया .

"सद्दाम हुसैन विश्वासपूर्वक जनता था की दस्तावेजों के प्रकाशन से यहूदी एवं ईसाईयत झूठे साबित हो जायेंगे की यहूद एवं ईसाई धर्म प्राचीन सुमेरियन धर्म की कॉपियां है या इनकी उत्पत्ति प्राचीन सुमेरियन धर्म से हुई है एवं विश्व के मामलों में इसके विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं"2

"जब जॉर्ज डब्लू बुश वाशिंगटन स्मारक के सामने खड़ा हुआ जनवरी 2001 में , उसके उद्घाटनके दौरान उसने अतीत से एक चौंकाने वाली छवि को उधार लिया. अमरीका का दो बार जिक्र करते हुए उसने कहा" और एक फरिश्ता अर्थात एंजेल अभी भी बवंडर की सवारी करता है और इस तूफ़ान को निर्देशित करता है ."

यहूद एवं ईसाईयत के प्रकट होने के कई सदिओं भर तक , हर कोशिश की जा चुकी है आमजन के बड़ी संख्या में हत्या से लेकर के सम्पूर्ण शहरों को गिराने तक एवं सम्पूर्ण लोगों का नरसंहार करने तक ताकि ढक्कन लगा के रखा जा सके इस झूट पर . *डेविल /Devil* ना की यहूदी / ईसाई *God/भगवान* ने मानवता की रचना की अर्थात डेविल ने मानवता की रचना की है.

ऊपर दी हुई जानकारी के भाग , लिए गए थे इस किताब से :

1 "क्लॉक ऑफ़ दि इलूमिनाटी" विलियम हेनरी के द्वारा , 2003 . हालांकि इस किताब में बहुत सारी कीमती जानकारियां हैं अगर कोई पंक्ति के बीच में पढ़े , इसका लेखिक किन्तु मोहित है क्यूंकि वह काल्पनिक नाज़रीन (जीसस / यशु ) में विश्वास करता है.नाज़रीन जैसे की हम सब जानते है काल्पनिक है . जहाँ तक वर्जिन अर्थात कुमारी का सवाल है , इसने सब कुछ एस्टेरोथ /Astaroth से चुराया है जब एस्टेरोथ सीमित थीं .

2 आईबिड

निम्न दी हुई लिंक्स से कुछ अंश पुरातत्व सम्बन्धी बाते छुपाने के विषय में :

"स्मिथसोनीअन ने एक समय पर वास्तव में गैरमामूली कलाकृतियों (से भरे ) पूरे नाव को बाहर अटलांटिक में उतरा एवं उन्हें महासागर में फेंक दिया. "

"इतिहासकार एवं भाषाविद कार्ल हार्ट , वर्ल्ड एक्स्प्लोरर के संपादक , ने फिर ग्रैंड कैनियन के एक यात्री नक़्शे को प्राप्त किया शिकागो में एक बुक स्टोर से. नक़्शे को ताकने पर , हम हैरान होगये की कैनियन के उत्तरी भाग के अधिकतर भागों के नाम इजिप्शियन अर्थात मिस्री थे . नाइनटी-फोर (चौरंहवेह ) मील क्रीक एवं ट्रिनिटी क्रीक के एरिया के आस पास के एरिया (क्षेत्र ) [चट्टानों का बनना , ज़ाहिर तौर पर ] उनके नाम थे जैसे की सेट का टावर .रा का टावर . टावर का अर्थ होता है खम्बे / स्तम्भ . होरस का मंदिर , ओसायरिस का मंदिर , आईसिस का मंदिर. हौंटेड कैनियन क्षेत्र में नाम थे जैसे की चेपोस पिरामिड , बुद्धा क्लोइस्टर, मनु मंदिर एवं शिवा मंदिर. क्या इन स्थानों के एवं कथित तौर पर हुई इजिप्शियन खोजें जो हुई ग्रैंड कैनियन में , इनका कोई सम्बन्ध है "

"दि स्मिथसोनीअन "
"1909 का लेख साफ़ बतलाता है कीस्मिथसोनीअन अध्यन कर रहा था एवं स्थल में खुदाई कर रहा था . मगर , स्मिथसोनीअन इस बात से साफ़ मना करता है की ऐसी कोई खोज कभी हुई भी . यह एक बड़ा प्रश्न सामने ले आता है की अगर यह कहानी सच्ची है , तो स्मिथसोनीअन क्यों छुपेगा उस खोज को जो बीसवीं सदी की सर्वाधिक महत्वपूर्ण पुरातत्व खोज है ? विश्वास करें या नहीं , स्मिथसोनीअन के लिए तरजीह है की वह उन खोजों के बारे में जानकारी खो देगा जो इस समय के स्वीकृत सिद्धांतों / हठधर्मिता से मेल नहीं खाती , अमरीका के इतिहास एवं उसके बातचीत / प्रभावया या उसके अभाव में जो दूसरी प्राचीन सभ्यताओं पे हुए हैं उनसे . "

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लिंक्स -

इराक़ में प्राचीन कलाकृतियों की ज़ोरदार लूटपाट एवं उनका अनियंत्रित विनाश पर विवरण - http://web.archive.org/web/201507191346 ... m_Iraq.htm

बघ्दाद संग्रहालय का व्यवस्थित विनाश - http://web.archive.org/web/201507191346 ... eum/01.htm

पुरातत्व सम्बन्धी बात छुपाना - http://web.archive.org/web/201507191346 ... canyon.txt

ग्रैंड कैनियन में अतीत के सबूत को दबाना - http://web.archive.org/web/201507191346 ... anyon.html

http://www.exposingchristianity.com/

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Post Fri Jul 01, 2016 11:16 am

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औम ॐ

Source URL - http://web.archive.org/web/201509252147 ... 6/AUM.html

आध्यात्मिक ज्ञान को भ्रष्ट कर दिया गया है , इसका एक ज़बरदस्त उदाहरण यह है की संस्कृत "औम ॐ (AUM)" को 'ओम /OHM' में भ्रष्ट कर दिया गया . यह बहुत सारी आम मुख्यधाराओं की किताबों एवं सूत्रों में किया गया है . इसे हमें आहह -ऊऊऊऊऊ -म्म्म्म्म ('AHH - UUUUU - MMMM' ) ऐसा उच्चारण किया जाना चाहिए न की ओह्ह -मम (OHHH - MM') !!! . यह "ओम /Ohm" एक जान बूझ कर किया गया खंडन / भ्रष्टाचार है ताकि शब्द में कोई अधिक आध्यात्मिक शक्ति न रहे . ["UUU /ऊऊऊ " का उच्चारण किया जाता है जैसा की शब्द " ट्यून " में .]

यहीं विज्ञानं आध्यात्मिकता के साथ मिलता है . विशेष धन्यवाद पंडित /पुजारिन ज़िल्दार (Zildaar) को जिन्ह्नोने इसे रौशनी में लाया ,.. इस सर्व महत्वपूर्ण ॐ औम के मामले को . ) रसायनशास्त्र में एलिमेंट्स के पीरियाडिक टेबल में AU (ए यू ) सोने के लिए खड़ा होता है / उसका चिन्न्ह है .मैग्नम ओपुस के कार्य चालन में एक पूरी तरह से सम्पूर्ण उत्थित / चढ़े हुए सर्पेंट के साथ साथ "बेस मेटल्स / आधार (मूल ) धातुओं " को सोने में बदलना होता है . ये "बेस मेटल्स " चक्रों के "मेटल्स" अर्थात धातु होते हैं . आप में से वे लोग जिन्होंने सेटन को आमने सामने देखा है , वे जानते हैं की सेटन की आभा अर्थात और सुनहरी अर्थात सोने के रंग की है . AU /ए यू का आभा के साथ लेना देना है .

औम ॐ मिस्री अर्थात इजिप्शियन भगवान "आमोन रा /AMON RA" भी हैं . आमोन को "भगवानों के महाराज " के रूप में जाना जाता है . जैसा की आप में से अधिकतर जानते हैं , कोड वर्ड - "भगवन / गोड्स (Gods) " का अर्थ होता है चक्र . सर्व महत्वपूर्ण "666" चक्र , जो की सोलर प्लेक्सस चक्र है , यह "किंग ऑफ़ गोड्स " अर्थात "भगवानों का महाराज /राजा " है . यहीं से यहूदिओं एवं ईसाईयों ने उनका 'आमीन / आमेन' चुराया , इस "औम ॐ" को 'आमेन /आमीन' में भ्रष्ट कर दिया . चूंकि , यहूदी / ईसाई बाइबिल यहूदी जादूगरी की किताब है , तो एक संपर्क को बनाया जाना था . इस पर अधिक जानकारी के लिए http://www.exposingchristianity.com पर जाएँ . साथ ही यह भी देखें - http://www.angelfire.com/dawn666blacksu ... urder.html


"औम ॐ" का अर्थ यह भी होता है - "सो मोट इट बी " अर्थात तो यह हो सकता है निश्चित ही . मैं हमेशा "औम ॐ" का कम्पन्न करती हूँ किसी भी कार्यचालन के बाद में जहाँ मैं एक सेटेनिक माला का उपयोग कर रही होती हूँ या अन्य किसी भी चीज़ के साथ जहाँ मैं संस्कृत का उपयोग कर रही होती हूँ. लगभग सभी आधुनिक युग की किताबें और आम अनुदेश जिनका सम्बन्ध मन्त्रों के साथ है वे कहते हैं की मन्त्र को शुरू करने के पहले "औम ॐ" का उपयोग करें . इसका उपयोग मन्त्र को शुरू करने के पहले एवं समाप्त करने पर , वास्तव में अधिक शक्तिशाली है ; किसी भी कार्यचालन के अंत में .


संस्कृत एक आध्यात्मिक भाषा है और जैसा की मैंने पहले बतलाया , मैंने हमारे बहुत सारे गोएशिया डीमॉन्स के नाम संस्कृत शब्दकोशों में पाये हैं . उनके नामों को संस्कृत में देखने पर , यह आपको आध्यात्मिक स्तर पर कहीं अधिक जानकारी देता है .भगवानों की किंवदंतीयां / उपाख्यान अर्थात लेजेंड्स ये सब सारी महत्वपूर्ण एलेगोरीज़ अर्थात (एलेगोरी का अर्थ वे दृष्टान्त जिनमे छुपा हुआ अर्थ रहता है .) हैं जो छुपा हुआ ज्ञान रखती हैं .

खूब सारी संख्याओं में दोहराना , जैसा की बहुत सारी आम मुख्यधाराओं के सूत्रों में बतलाया जाता है , की हमें मन्त्र को खूब अधिक संख्याओं में दोहराना है , यह ज़रूरी नहीं होता . कारण की वे आपसे कहते हैं की आप हज़ारों बार दोहराएं वह है .... खंडित / भ्रष्ट ज्ञान . सेटन हमें बताते हैं की मन्त्रों को कम्पन्न करना है उनके एक के बाद एक शब्दांश को कम्पन्न करते हुए . नए ज़माने के लोग और दूसरे बेवकूफ वे सिर्फ मन्त्रों के सभी शब्दों को दोहराते रहते हैं और उसे कम्पन्न नहीं करते हैं . शक्ति कम्पन्न में है . वहां आपको कोई ज़रुरत नहीं है की आप मन्त्रों या शक्ति के शब्दों को बार बार कई सौ से लेकर हज़ारों बार दोहराएं .

"औम ॐ" को देखा गया था प्राचीन पश्चिम की बहुत सारी रस-विधा/ गुप्त कलाओं के कार्यों में . अब शत्रु ने [हमेशा की तरह ] कलाओं और अर्थों को खंडित / भ्रष्ट कर दिया है . शत्रु ने बहुत भारी कष्ट उठायें है की वो इस "ए/A " को प्राचीन चित्रों से हटा दे और आधुनिक समय में , "औम ॐ/AUM" को "ओम /OHM" के साथ बदल दिया .

एक और चीज़ , लगभग सभी शब्द संस्कृत में के अक्षर "ए /A" पर समाप्त होते हैं . मेरे पास एक किताब है लय योग पर . [लययोग - दि डेफीनेटिव गाइड टू दि चक्रास एंड कुण्डलिनी - श्याम सुन्दर गोस्वामी ] , और लेखक ने सारे मूल पाठ में , अक्षर ए /A को तिरछे अक्षर में अर्थात इटैलिक में लिखा है , जैसे की यह कोई कोड है .

अब इस प्राचीन चित्र को देखें , इसे "हाईएरोग्लिफिका साक्रा " 1764 डायोनिसियस एंड्रेअस फ्रेहर के द्वारा , से लिया गया है , जो की जैकब बोह्म [ये ईसाई और मनीषी दोनों था ] को मानने वाला था , यह रूब किताब में भी है ; ए /A को शीर्ष क्षेत्र से हटा दिया जा चुका है .
मैं यह इसीलिए जानती हूँ क्यूंकि मैंने समान चित्र देखें हैं जहाँ ए /A बराबर लगा हुआ है , जैसा की नीचे चित्र में बतलाया गया है . वहां सिर्फ एम /M और यू/U हैं .

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एलेग्जेंडर रूब ने उसकी किताब - "अल्केमी एंड मिटीसिस्म " में लिखा [मैं नहीं जानती की वह जान-बूझकर झूठ बोल रहा है , या सिर्फ एक ऐसा व्यक्ति है जो भ्रष्ट जानकारी देता है ]; उसने इन दो चित्रों के लिए शीर्षक में लिखा -

" शुरुआती स्थिति दिखती है दिव्य त्रिमूर्ति का निवास स्थान जिसमे स्वर्गीय मेज़बान की लपटें शामिल हैं . वे प्रधान स्वर्गदूतों - माइकल एम /M और उरीअल यू /U के पदानुक्रम (स्वर्गदूतों का का वर्ग) में विभाजित हैं " तीसरा और सबसे ऊपर का खुला हुआ है , क्यूंकि उसके पहले का निवासी , यशु मसीह का प्रतिनिधि , ने बहुत बड़ा राज-द्रोह कर लिया है उसकी मनमानी से . लूसिफ़र उत्थित होते अर्थात ऊपर चढ़ते हैं , उनकी अभिमान युक्त मनमानी के द्वारा नीचे जाते हुए , परन्तु माइकल और उरिअल उन्हें आग में से होकर नीचे डाल देते हैं. "

यह एक ज़बरदस्त खंडन / भ्रष्टाचार है और इन पवित्र अक्षरों का उपयोग यहूदी गंदगी के प्रतिनिधित्व के लिए उपयोग करना ; यही कारण है की वह कोई भी जो विश्वास करता है की यह सच है और /या वो इन यहूदी एसईई ऊर्जाओं में बंधता है वह कभी भी आध्यात्मिक शक्ति में उन्नति नहीं करता . ऐसे मोहित लोग शत्रु के नियंत्रण में रहते हैं जब वे इस भ्रष्ट और अपवित्र जानकारी में खुद को बांधते हैं .

यहाँ एक दूसरा चित्र हैं जिसमे ए / A गायब है . ध्यान दें - इस चित्र का आकार बिलाएल /Belial की सिजिल (अर्थात प्राचीन प्रतीक जिनमे जादुई शक्ति होती है ) के बहुत समान है :

Image

Image
बिलाएल /Belial

अन्य चित्रों को हिब्रू अक्षरों से भ्रष्ट किया गया है , और उन अन्य यहूदी प्रतीकों से भ्रष्ट किया गया है जो उनकी हर चीज़ की तरह चोरी के हैं . नाइन्थ गेट /Ninth Gate मूवी में , जो मेरी सबसे फेवरेट मूवी में से एक है , उस किताब में , वो चित्र जिनमे "एल सी ऍफ़ /लसफ" ये थे , ये वही थे जिनमे सटीक शुद्ध जानकारी है . हालाँकि भले ही यह मूवी एक उपन्यास / कल्पना थी , लेकिन वहां कुछ सत्य "हैं " इसमें . वह द्वार मार्ग जो की उस मेज़ / Maze (अर्थात भूल-भुलैया ) के अंत में जो था उसे ईंट लगा कर बंद कर दिया गया था एक चित्रण में , यह सन्देश देता है की सच्चाई का मार्ग बंद कर दिया गया था अर्थात उसे भ्रष्ट कर दिया गया था और वहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं है . इस मूवी को अवश्य देखें अगर आपने नहीं देखी है तो .उन्होंने एक सीन मिटा दिया था , बैरोनेस केस्लर एक जर्मन थीं और एक सेटनिस्ट थीं :

७६ केस्लर बिल्डिंग - ऑफिस ईंट / डे (दिन )

एक ब्लैक एंड वाइट फोटो स्क्रीन को भर देती है ; वह दिखाता है एक जवान और सुन्दर बैरोनेस केस्लर जो दो पुरुषों से घिरी हुई हैं ये पुरुष एसएस (SS) यूनिफार्म में हैं . उनमे से एक हेनरिक हिम्म्लर हैं .

बैरोनेस केस्लर भौं चढ़ाये हुए देख रही हैं एक युद्ध के समय के संख्या के "सिग्नल " पर , जो की नाज़ी प्रचार की पत्रिका है . यह उनकी डेस्क पर पड़ी हुई है और बलकन का लिफाफा उसके बाजू में रखा है .

वास्तविक लिपि के लिए देखें - sfy.ru/?script=ninth_gate

नाइन्थ गेट मूवी पर और अधिक जानकारी के लिए देखें - http://www.imdb.com/title/tt0142688/?ref_=sr_1

अब इन चित्रों को देखें - ...

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ए /A अभी भी तल पर है .

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दूसरी एक , जहाँ उन्होंने ए /A को नहीं मिटाया .

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और ... ध्यान दें ए /A पर जो मुकुट के नीचे है .


मैंने फ्रीमेसन /Freemason चित्रों पर भी औम ॐ को नोट किया है ; वे जिनमे आत्मा के खम्बे हैं . फ्रीमेसन का अर्थ उन लोगों से जो विस्तृत छुपे हुए समारोह करते हैं . शत्रु ने पहले भी और अब भी कार्य कर रहा है की आध्यात्मिक ज्ञान को हटाया जा सके , यह बहुत कठिन है की एक उदाहरण पाया जा सके यहाँ ऑनलाइन , मैंने कोशिश करने में कुछ समय व्यतीत किया . मैंने यह एक किताब में देखा . अगर आप अपनी स्वयं का अनुसन्धान करें , आप इसे या तो ऑनलाइन इंटरनेट पर या फिर किताबों में पा लेंगे .

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Post Sat Jul 02, 2016 11:53 pm

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स्वयं की सुरक्षा करना

Source URL -http://web.archive.org/web/20150915064144/http://www.angelfire.com/hailtosatansvictory666/Protecting_Yourself.html

बहुत सारे लोग चिंतित हैं वैश्विक अर्थात विश्व के मामलों को लेकर , जो दिन प्रति दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं , जैसे की अर्थव्यवस्था एवं उससे समबन्धित मामले .

सिर्फ आप यही कर सकते हैं की अपनी आत्मा की शक्तिओं को बढ़ा कर रखें, एवं कार्य करें उन्हें अधिक बढ़ाने का . भले आप कुछ भी करते हैं मेडीटेशन्स अर्थात ध्यानों के लिए [हम सब व्यक्ति हैं ] , मैडिटेशन /योग (योगा ) सेशन / सत्र करने के बाद एक व्यक्ति को एकदम शांत रहना चाहिए एवं उसे प्राप्त करना चाहिए जिसे मैं कहती हूँ "ऊर्जा की भनभनाहट " . यह वही हैं जहाँ आपको महसूस होना चाहिए की आप ऊर्जा के साथ चमक रहे हैं , उसके साथ कम्पन्न हो रहें हैं या आप महसूस कर सकते हैं अपने आत्मा की ऊर्जा को , जो अब अधिक बढ़ चुकी है उस कार्यचालन के कारण जिसे आपने अभी किया .

उन्नत मेडीटेटर्स / ध्यान करने वाले इस अनुभूति को जानते हैं . यह एक योगा सत्र करने के कुछ मिनटों बाद आ जाती है , ब्रीथिंग अर्थात सांस लेने छोड़ने वाले व्यायाम करने के बाद , ऊर्जा का सूर्य से आव्हान करने के बाद , और बहुत बार एक व्यक्ति की आभा एवं चक्रों को साफ़ करने के बाद यह अनुभूति होती है . केवल शांत बैठना एवं इस ऊर्जा की भनभनाहट पर मैडिटेशन करना सहायता करता है इसे और अधिक बढ़ाने में . यह आपके ऊर्जा है : आपकी शक्ति . जब आपको यह ऊर्जा की भनभनाहट प्राप्त होने लगे मैडिटेशन / योगा सत्र करने के बाद , तो यह समय होता है अपनी अफर्मेशन्स (दृढ़ता के साथ कहना ) का . अफर्मेशन्स कहते समय , इसे वर्तमान काल में होना चाहिए , एवं मुद्दे पर होना चाहिए . जैसे की: 'मैं हर प्रकार से सुरक्षित , सकुशल एवं संरक्षित हूँ .' 'मेरी नौकरी में मैं सफल हूँ ' 'मेरी नौकरी सुरक्षित एवं सकुशल है हर प्रकार से . ' 'अब मेरे पास एक सुरक्षित नौकरी है एवं तनख्वा पर्याप्त है मेरे लिए .'

सारे अफर्मेशन्स को वर्तमान काल में होना चाहिए क्यूंकि मन / आत्मा नहीं समझते हैं भविष्य काल को जैसे की "होगा " आदि . दृश्य बनायें / कल्पना करें सफ़ेद-सुनहरी (सोने के रंग की ) प्रकाश का अपने चरों और , क्यूंकि यह नाक्षत्रिक अर्थात एस्ट्रल ऊर्जा है जो कार्य करेगी आपके अफर्मेशन्स को प्रकट करने का . इस नाक्षत्रिक ऊर्जा को बनायें . आराम करें , परन्तु दृढ़ता के साथ कहें एवं केंद्रित रहें . अगर आपका मन भटकता है , नाराज न हों , अपने मन को वापस केंद्रित करते जाएँ .

जब तक की एक व्यक्ति शक्तिशाली नहीं होता , कार्यचालनों को प्रति दिन करना चाहिए ठीक चालीस दिनों तक के लिए. चालीस सेटन का नंबर / अंक / संख्या है . दुर्भागयवश , यह अंक , अंक सात (चक्रों के लिए ) के जैसे , इसे भी चुरा लिया गया है एवं खंडित कर दिया गया है शत्रु द्वारा , परन्तु इसकी चिंता ना करें एवं इसका उपयोग करें . इसका चन्द्रमा चक्र (cycle) से लेना देना है .

चन्द्रमा के वोयड अर्थात शून्य क्रम में कार्यचालन शुरू न करें . वे कार्यचालन जिनमे आप एक परिस्थिति को आकर्षित करना चाहते हैं , एक परियोजना का विकास और इस तरह के कार्यचालन इन्हे वैक्सिंग मून में शुरू करना चाहिए . जब चन्द्रमा अपनी रौशनी में बढ़ता है तो उसे वैक्सिंग या वैक्स चन्द्रमा कहते हैं . वर्तमान का मून अर्थात चन्द्रमा वाला डेटा अर्थात जानकारी इंटरनेट पर सब जगह हैं एवं इन समूहों में उन लोगों के लिए सदा सहायता उपलब्ध होती है जो इस बारे में अधिक नहीं जानते . वे कार्यचालन जो ख़त्म होने अर्थात एंडिंग के लिए हैं उन्हें जब चन्द्रमा की रौशनी / प्रकाश घट रहा अर्थात कम हो रहा होता है तो उसे वेनिंग चन्द्रमा कहते हैं . सरल शब्दों में ढलता चन्द्रमा .चन्द्रमा वाले अवस्था में चाहिए .

मैं जानती हूँ एक व्यक्ति को जो मेरे नज़दीक है , उसके गृह भयंकर स्थिति में थे , की पार करता हुआ शनि एक कठिन पतित हो रहा था उसके व्यक्तिगत ग्रहों के कई पहलुओं में ,और इसके साथ साथ पार करता हुआ शनि अर्थात ट्रांसिटिंग सैटर्न उसके पहले घर में था [एक व्यक्ति के जीवन का सबसे बदतर समय.] वह बिना रुके बिना एक भी दिन चोदे मैडिटेशन किया प्रति दिन [वह एक हफ्ते में 60 घंटे कार्य करता था , तो उसके पास बहुत सार खाली समय नहीं था ], परन्तु वह जानता था की गृह कितने बदतर हैं एवं उसमे सकारात्मक अफर्मेशन्स पर ध्यान केंद्रित किया , जैसे की मैंने ऊपर बताया . उसने सूर्य से भी ऊर्जा का आव्हान किया . जितनी अधिक मेधावी एवं चमकदार ऊर्जा , उतनी शक्तिशाली वह होती है . अविश्वसनीय रूप से , उसके साथ कुछ भी बुरा नहीं हुआ . छोटी समस्याएं प्रकट हुई , परन्तु कोई विनाशकारी विपत्ति नहीं आई .

मैं और कुछ भी जोड़ना चाहूंगी मेरे स्वयं के अनुभव के बारे में . मैं गाडी चला रही थी एवं एक पास के चौराहे पर पहुँच रही थी एक शांत सड़क पर . कोई चीज मेरे ऊपर आई एक सेकंड के भी बंटे हुए हिस्से में , अकारण , मैंने पैरों से ब्रेक लगाया . एक कार तेज़ी से सड़क पर क्रॉस हुई एवं स्टॉप / रुको वाले निशान पर जा भिड़ी . वहां निश्चित ही कोई कारण नहीं था की मैं ब्रेक मारूंगी या धीमे होंगी क्यूंकि मैं तो सीधे अपने रस्ते जा रही थी . अगर मैंने ब्रेक नहीं मारा होता तो वो कार जो स्टॉप निशान पर जा भिड़ी थी वह मुझसे भिड़ी होती . मैं कोई पचास से अधिक मील प्रति घंटे की रफ़्तार से जा रही थी एक 25 मील प्रति घंटे रफ़्तार वाले क्षेत्र में .

इसका इंतज़ार न करें की आपका जीवन आपके नियंत्रण से बाहर हो जाये और आपकी तबियत से लग जाये . मैंने सालो के अनुभव से जानती हूँ , एक विशेष समस्या की ओर आध्यात्मिक ध्यान देना , जैसे की चंगाई; अगर बहुत पहले की अवस्था में पकड़ लिया जाये , तो इसमें बहुत काम ऊर्जा एवं समय लगता है नियंत्रित करने में . और जब कोई चीज आपके जीवन में पंजे तक जड़ जमा ले , और हम उसके साथ आध्यात्मिक रूप से भिड़े , अपनी शक्तिओं का उपयोग करते हुए , तो इसमें कहीं अधिक समय लग सकता है , कहीं अधिक कठिन हो सकती है एवं इसमें और ऊर्जा की आवश्यकता पड़ेगी .

विश्व की समस्याओं से डरे नहीं एवं कभी भी अपने कार्यचालनों पर शक नहीं करें . अन्य चीजों के बारे में सोचे एवं अपना मन अपने कार्यचालन से निकाल लें ताकि वह अपना कार्य कर सके . आत्मा की ऊर्जा ऐसी है जैसे की एक बचत का होना . बहुत सारे लोगों के पास धन के संशय अर्थात बैक अप्स होते हैं कुछ प्रकार के . आपके आत्मा की ऊर्जा के लिए भी ऐसा ही करना चाहिए .

मैं यहाँ यह भी कहना चाहूंगी - मेडीटेशन्स को छोड़ना , छितराते हुए (अननुरूपता के साथ ) मेडिटेशन करना , कार्यचालनों को अव्यवस्थित रूप से करना और इस प्रकार से ; क्युकी सब कुछ मन में शुरू होता है - कंप्यूटर जिसे आप उपयोग कर रहे हैं , कुर्सी जिस पर आप बैठे हैं , वह डेस्क जिसपर आपका कंप्यूटर है ,सड़कें , बिल्डिंग्स , सुपरमार्केट्स , खिड़कियां लगभग सब कुछ इस जगत में भौतिक अर्थात मटेरियल है - इस भौतिक के प्रकट होने के पहले आईडिया / विचार आया ! किसी ने सोचा कुछचीज को एवं उसे उसके मन में बनाया इसके पहले की उसे वास्तविकता में बनाया .

यही चीज़ नाक्षत्रिक अर्थात एस्ट्रल पर कार्यचालनों के लिए लागू होती है . आप स्वयं के लिए एक परिस्थिति को बना रहे हैं , भले ही वह है नौकरी को सुरक्षित करना , व्यक्तिगत सफलता , आर्थिक स्थिति को सुरक्षित करना , व्यक्तिगत सुरक्षा , जो कुछ भी हो . जब आपकी ऊर्जाएं गिरती हैं , जैसे की मेडीटेशन्स को छोड़ने से होता है , छितराते ()हुए मेडीटेशन करने से होता है , यह दुर्भाग्यवाश एक दरवाजा खोल देता है आपके जीवन में दुर्भागयपूर्ण घटनाओं और परिस्थितिओं के लिए . ऐसा नहीं होने दें . अपने ऊर्जाओं को शक्तिशाली रखें एवं आप को कुछ नहीं होगा .

हठ [शारीरिक योगा /योग] का अविरोधी अर्थात रेगुलर अभ्यास कार्य करेगा मन को खोलने का एवं सहज बोध की वृद्धि करेगा . आपका सहज बोध एवं आंतरिक अनुभूतियां अत्यावश्यक सहायता प्रदान करेंगी आपको की आप विश्व के कठिन समय में सुरक्षित निकलने बिना किसी चोट एवं क्षति के .

समाप्ति में , हमेशा याद रखें - दूर संवेदन अर्थात टेलीपैथिक कम्युनिकेशन / बातचीत सब प्रकार के हस्तक्षेप का विषय है , यह ऊजा बोर्ड (Ouija ) से कुछ अलग नहीं है . सर्वप्रथम तो आप अपनी स्वयं के सामर्थ्य पर विश्वास करें . बहुत सारे लोग डीमॉन्स एवं आत्माओं पर निर्भर होते हैं . हेल की शक्तिओं व्यस्त हैं . सेटनइस्म (Satanism) का सन्देश है शक्तिशाली होना . इसमें बहुत सारी व्यक्तिगत शक्ति एवं चरित्र की आवश्यकता पड़ती है की आप सख्ती से एक मैडिटेशन प्रोग्राम अर्थात ध्यान कार्यक्रम का पालन करें . इसे एक आदत बनायें .

कन्फ्यूशियस कहते हैं : "जो व्यक्ति स्वयं के साथ सख्ती से पेश आता है वह शायद ही असफल होता है .

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Post Sun Jul 03, 2016 1:52 am

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अधिकतर कार्यचालन एक बार में ही नहीं होते (मोस्ट वर्किंग्स आर नॉट जस्ट अ 'वन शॉट डील ')

Source URL - http://web.archive.org/web/201509121808 ... agick.html

दुर्भागयवश बहुत सारा झूट फैलाया गया है आध्यात्मिक शक्तिओं के बारे में और इसे कैसे प्राप्त किया जाये एवं इसका कैसे उपयोग किया जाये. उदाहरण के लिए , स्पेल्स (मन्त्र/जादू ) के साथ काम करते समय , वे जो कुछ भी क्यों न हों , 99 परसेंट बार , यह एक बार में ही नहीं होता . सच जान लिया जाये , अधिकतर लोगों के पास आध्यात्मिक शक्ति नहीं होती है की उन लोगों की आत्माएं पर्याप्त शक्तिशाली नहीं होती , एक गॉड / भगवान के जैसे , की वे कुछ महत्वपूर्ण प्राप्त कर लें एक ही कार्यचालन में . वहां कुछ हैं जो सफल हो जाते हैं एक ही कार्यचालन में . कभी कभी गृह सम्बन्धी ऊर्जाएं संरेखित होती हैं निश्चित रास्तों में जहाँ एक पहुँचता है , परन्तु यह मानक नहीं है. अर्थात ग्रहों का कार्यचालनों पर प्रभाव पड़ता है परन्तु यह मानक नहीं हैं .

अन्य कारक , उदाहरण के लिए एक कोवेन अर्थात जादूगरों / जादूगरनियों का समूह , एक बहुत बड़ी सहायता होते हैं , अगर सभी सदस्यों की आत्मा शक्तिशाली है .

अधिकतर लोगों के लिए , जब एक महत्वपूर्ण कार्यचालन को लिया जाता है , तो वहां दोहराना अर्थात रिपिटीशन होना चाहिए . जितनी अधिक शक्तिशाली एक व्यक्ति की आत्मा होगी , उतने कम रिपिटीशन , परन्तु शायद ही एक रिपिटीशन पर्याप्त हो . ऊर्जा बनती है . इसीलिए एक मेडिटेशन अर्थात ध्यान या एक कार्यचालन को छोड़ने पर बड़ी समस्याएं हो जाती हैं .

स्पेल अर्थात जादू कार्यचालनों की प्राचीन लिखवटों को पढ़ने पर , जैसे की 1586 नेक्रोनोमिकन (1586 Necronomicon) , शब्द 'engrave (हिंदी अर्थ इसका होता है उत्कीर्ण करना )' इसका बहुत बहुत बार उपयोग किया गया है . शब्द 'metal(हिंदी अर्थ धातु ) ' का भी उपयोग किया गया है बहुत बार. सच जान लिया जाये , ये आध्यात्मिक संकेत शब्द हैं , शाब्दिक नहीं हैं .
अज़ाज़ेल को हमेशा से ही "धातु कार्य के मास्टर " अर्थात "मास्टर ऑफ़ मेटल वर्क " के रूप से जाना जाता है . "मेटल/Metal" का आत्मा के साथ लेना देना है . प्रत्येक सात प्रमुख चक्रों का एक विशेष मेटल अर्थात धातु होता है . जैसे की

1 .बेस अर्थात मूलाधार चक्र = लेड अर्थात सीसा
2 .सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र = आयरन अर्थात लोहा
3 .सोलर अर्थात मणिपूर चक्र = गोल्ड अर्थात सोना
4 .हार्ट अर्थात अनाहत चक्र = कॉपर* अर्थात ताम्बा
5 .थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र = मरकरी* अर्थात पारा
6 .छटवां चक्र : = सिल्वर अर्थात चांदी
7 .सातवां चक्र = टिन /TIN

*कृपया नोट करें की ऊपर बताई सूची चक्र प्रतीकात्मक का परंपरागत धातु है . हम प्रश्न करते हैं इन शिक्षाओं को , एवं शक करते हैं की इनमे से कुछ खंडित हो चुकी हैं , जैसे की हार्ट अर्थात अनाहत चक्र अकर्मक है एवं अन्य चक्रों से अलग है उसका आकार ,उनमे से जो भाग हैं पुरुष एवं स्त्री जोड़े का , ऐसे की पुरुषवाचक बेस चक्र एवं स्त्रीवाचक क्राउन चक्र . वहां एक प्रश्न है की "भावनाओं की कुर्सी " है थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र , न की हार्ट अर्थात अनाहत. यह भी हार्ट चक्र का स्वामी है मरकरी / ताम्बा / क्विकसिल्वर एवं थ्रोट चक्र का स्वामी है तम्बा . खुले रहें प्रयोग करने के लिए एवं व्यक्तिगत नोट्स रखें अपने मैडिटेशन अनुभवों के बारे में . सक्रिय अनुभव सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं ; सिर्फ थ्योरी अर्थात सिद्धांत से ही नहीं एक व्यक्ति सीखता है .

अब 'मेटल ' पर कुछ 'engrave/ एनग्रेव' करना अर्थात धातु पर कुछ उत्कीर्ण करना / खोदना इसका वास्तव में अर्थ है आत्मा पर उत्कीर्ण करना दोहराए हुए अफर्मेशन्स (दृढ़ता के साथ कहना ) के साथ , प्रकाश का उपयोग करते हुए . प्रकाश का रंग सफ़ेद - सुनहरा (सोने के रंग ) का हो सकता है या कोई अन्य रंग हो सकता है , क्यूंकि आत्मा प्रकाश की बनी हुई है . इस पर और अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ - http://groups.yahoo.com/group/JoSNewsletter/message/284

एक बार पर्याप्त नहीं होता है . सच में अपने भाग्य को बदलने के लिए , विशेषकर जब अन्यों के भाग्य भी शामिल हैं , जैसे की बहुत सारे लोग कठिन आर्थिक समयों में कोशिश कर रहें हैं एक अच्छी आय सुरक्षित करने का , एक व्यक्ति को शक्तिशाली होना चाहिए . आपकी आत्मा को शक्तिशाली होना चाहिए . ऐसा किया जाता है अपने चक्रों को शक्तिशाली बना कर , हठ [शारीरिक योगा/योग ] से , ताई ची या अन्य कोई अंदरूनी मार्शल आर्ट्स (लड़ने की कला / विभिन्न स्पोर्ट्स खेल कूद वाली कलाएँ ) से ,एवं ब्रीथिंग अर्थात सांस लेने छोड़ने वाले व्यायामों से . एक व्यक्ति को उसकी ऊर्जाओं को प्रतिदिन बढ़ाना चाहिए एवं शक्तिशाली रखना चाहिए .

सैटनिक माला बढ़िया होती है कोई भी कार्यचालनों केलिए जिनमे ऊर्जा की भारी महत्वपूर्ण मात्रा की आवश्यकता पड़ती है . एक व्यक्ति निश्चित ही माला के साथ अफर्मेशन्स कर सकता है , कोई भी भाषा में जो आप बोलते हैं . मैं यहाँ यह भी जोड़ना चौंगी , विषय से बाहर न जाएँ - सभी दूरसंवेदन बातचीत अर्थात टेलिपाथिक कम्युनिकेशन सार्वभौमिक / पूरे बर्ह्माण्ड में होने वाली हैं एवं विदेशी भाषाएँ कोई हस्तक्षेप नहीं करती , क्यूंकि मन एवं आत्मा बातचीतों पर प्रक्रिया करती हैं , एवं जो कुछ भी दिया जाता है ये दूरसंवेदन से अर्थात टेलीपेथीकली आपके पास वापस आएगा उस भाषा में जिसे आप बोलते हैं , जब तक की एक विदेशी भाषा को जान-बूझकर नहीं चुना जाये . तो आप भली ही किसी से बातचीत कर रहें हैं एक विभिन्न भाषा में या नहीं , आप उन्हें अपनी स्वयं की भाषा में सुनेंगे . मन एवं आत्मा इसी तरह से ट्रांसमिट करते अर्थात ब्रॉडकास्ट करते हैं . मैं यह अनुभव से जानती हूँ .


सैटनिक माला पर वापस आते हुए , एक व्यक्ति को चाहिए की वह एक अफर्मेशन को दोहराए - छोटा , वर्तमान काल में एवं मुद्दे पर ; सारी 108 बीड्स / मनके . ऐसा करते समय , केंद्रित करें प्रकाश को या आपके पसंद के रंग को जो उस कार्यचालन का पूरक है , जो भी कार्यचालन आप कर रहें किसी भी इच्छा को प्राप्त करने हेतु . यह शक्ति देता है . आपको वही रंग या प्रकाश को चुनना है जो आपके कार्यचालन का पूरक हो क्यूंकि इससे कार्यचालन को शक्ति मिलती है . सम्पूर्ण फोकस अर्थात केंद्रण यहाँ आवश्यक है .समाधी की अवस्था के लिए , आप पाएंगे की सिर्फ ऊपर जो बताया है वह करने से , आप समाधी की अवस्था में झट से पहुँच जायेंगे , एवं कोई भी प्रकार की ध्वनियां असुविधाजनक होंगी , जैसे की जब कोई एक व्यक्ति सोने के लिए धीरे धीरे बहता है .

एक व्यक्ति के मन की शक्ति भी अति महत्वपूर्ण होती है स्पेल के कार्यचालन में . आप सिर्फ आलस्य से दोहरा नहीं सकते अफर्मेशन्स को एवं अपने मन को भटकने नहीं दे सकते . यह बहुत प्रचंडता के साथ कम कर देगा जो कुछ भी आप प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं . केंद्रित मन एक लेज़र (laser) के जैसे होता है . बिखरी हुई ऊर्जा जो की विसरित अर्थात दूर तक फैली हुई है एवं केंद्रित नहीं है वह बहुत कम ही प्राप्त कर पाती है . यह समय , धैर्य एवं ज़िद के साथ अत है . हतोत्साहित न हों . अपने मन को लगातार रूप से लगाने पर , आपका फोकस अर्थात ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बेहतर होती चली जाएगी . कुछ लोगों में जिनका वृश्चिक बल अर्थात स्कार्पियो एम्फेसिस शक्तिशाली होता है या , मरकरी (बुध ) /प्लूटो (यम ) के पहलू होते हैं उनमे यह प्राकृतिक रूप से होता है . अन्य लोगों को इस पर कार्य करना होता है , परन्तु प्रत्येक कहीं न कहीं शुरू करता ही है . [जो हमने गृह स्थिति ऊपर बताई है यह पिछले जीवनों में किये गए कार्य के कारण आती है ].

वहां ऐसे समय होंगे जहाँ पर आपको अपने मन को फोकस करने में अधिक समस्या होगी अक्सर की अपेक्षा , परन्तु आप कार्यचालन को फिर भी समाप्त करें पूरा करके . महत्वपूर्ण कार्यचालनों के लिए , प्रत्येक को किया जाना चाहिए प्रतिदिन चालीस दिनों के लिए . चालीस सेटन का अंक / संख्या / नंबर है , जैसे की है नंबर 9; 108 [बीड्स/मनके सैटनिक माला में होते हैं ]; [1 + 0 + 8 = 9]. ये नंबर्स बहुत प्राचीन हैं एवं महत्वपूर्ण हैं , क्यूंकि इनमे एक विशेष कम्पन्न होता है .

प्रत्येक दिन अफर्मेशन्स के साथ साथ दृश्य बनायीं गयी / कल्पना किये हुए प्रकाश ऊर्जा एवं मन का फोकस बहुत कुछ प्राप्त करवाएंग आपको अपने व्यक्तिगत उद्देश्यों में अर्थात वे आपके व्यक्तिगत उद्देश्यों को पूरा करेंगे . अपने कार्यचालन पर कभी शक नहीं करना , तब भी नहीं जब कोई चीज में बाधा का अनुभव करती है . ऊर्जा को कोई भी प्रकार में लगाते रहें . इसमें कभी कभी एक हफ्ते से अधिक लगता है, यह निर्भर करता है आपके आत्मा की शक्ति के ऊपर की बड़ी चीजें बदलना शुरू हों आपके कार्यचालन से . एक व्यक्ति को कभी भी एक भी दिन नहीं छोड़ना चाहिए , क्यूंकि यह सारे कार्यचालन का कबाड़ा कर सकती है .

सुरक्षा की आभा बनने में , सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की) ऊर्जा को लगाएं स्वयं पर ऐसा करते समय 108 बार अफर्मेशन करें , अपने सैटनिक माला का उपयोग करते हुए , चालीस दिनों के लिए. निश्चित कार्यचालन जिनमे ऊर्जा की अत्यधिक मात्रा की आवश्यकता होती है उन्हें अगले चालीस दिन दोहराना चाहिए . आप पाएंगे की आप अपने स्वयं के भाग्य एवं जीवन को नियंत्रित करने में समर्थ हैं , परन्तु इसमें बहुत सारी निष्ठा की आवश्यकता पड़ती है एवं कार्य की आवश्यकता पड़ती है वहां पहुँचने में .

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बाधाओं को जीतना

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अगर आप अपनी ऊर्जाओं को दृढ़ता के साथ कोई चीज में लगा रहे हैं और वह चीज प्रकट नहीं हो रही है , या जैसा आपने सोचा था उससे वह बहुत भिन्न रूप से प्रकट हुई , तो यह महत्वपूर्ण है की पता लगाया जाये ऐसा क्यों हुआ .

इसके साथ साथ , यह बहुत महत्वपूर्ण है की आप *वास्तव * में चाहते हैं वह चीज को जिसे पाने के लिए आप कार्य कर रहे हैं . इस बात को निश्चित कर लें की आप अपनी ऊर्जाओं को उस में लगा रहे हैं जिसे आप वास्तव में चाहते हैं . आपको देखना है की आप जिन बदलवाओ को लाना चाहते हैं अपने जीवन में उनसे आपके जीवन में क्या असर होगा . इस बात को निश्चित कर लें की आप इन बदलावों के साथ सम्पूर्ण रूप से ठीक रहेंगे . कुछ मामलों में अचेतन अवरोध जैसे की बदलाव का डर , या और कुछ जो आपके इच्छा के वास्तविक जीवन में प्रकट होने के फलस्वरूप आएगा , यह एक कार्यचालन को बर्बाद कर सकता है , भले ही आप इसके बारे में सचेत रूप से जानते नहीं थे . यह बहुत आवश्यक है की आप स्वयं को जाने .

आम कारण जिसके कारण जादू में असफलता प्राप्त होती है -

* पर्याप्त व्यक्तिगत आध्यात्मिक शक्ति का न होना जिससे की आप कार्यचालन के फोकस अर्थात ध्यान केन्द्रन को प्राप्त कर सकें . जितनी अधिक शक्ति आपकी आत्मा के पास होती है , उतनी ही सरलता के साथ आप उसे प्राप्त करेंगे जो आप चाहते हैं . यह भौतिक / शारीरिक स्वयं के अनुरूप , उठाना या कुछ चीज को हिलाना . अगर आप पर्याप्त शक्तिशाली नहीं हैं , यह बहुत कठिन से लेकर असम्भव तक हो सकता है . यही जादू के कार्यचालनों में भी लागू होता है .

* जागरूकता की कमी के कारण, आप नष्ट कर देते हैं जिसे आप बनाने का प्रयास करते हैं .
मेरा इससे यह तात्पर्य है की आप निश्चित वाक्यों को बार बार दोहराते रहते हैं , जो उस चीज के विपरीत हैं जिसे आप प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं . प्रत्येक कोशिका /सेल हमारे शरीर में एक सोचने वाली जीवित इकाई है जो सम्पूर्ण के भाग को बनाती है. इसे हम "मन का शरीर / मानसिक शरीर अर्थात माइंड बॉडी " कहते हैं . यहाँ पर एक बहुत शक्तिशाली जोड़ होता है . आप वे हैं जो आप सोचते हैं आप हैं , विशेषकर , अगर आप पावर मैडिटेशन अर्थात शक्ति ध्यान का अभ्यास करते हैं और /या आपके पास एक अधिक शक्तिशाली आत्मा है .

वाक्यों से , मैं कह रही हूँ :
मेरा अलसर , मेरी सर्दी , मेरे दिल की स्थिति .... आदि
कभी भी बीमारी को *अपनाएं * नहीं !!!!! आप दिन में कितनी बार सुनते हैं लोगों को इस नकारत्मकता को दोहराते हुए ?? आप सम्पूर्ण चंगाई की आशा कैसे कर सकते हैं जब आप बीमारी को अपनाते हैं ? अर्थात कहते हैं की यार मुझे ये बीमारी है ?

इसके विपरीत कहें "अल्सर , "सर्दी" .... समझ गए??? कोई भी बीमारी को न अपनाएं .

* बॉडी लैंग्वेज अर्थात शारीरिक हाव - भाव का उपयोग नहीं करें .
एक आदमी कहता रहता है ,"मैं अपनी सीधी भुजा दे दुंगा अगर... " हाँ , यह एक अलंकार है , परन्तु उसने अपनी भुजा गवां दी एक कार दुर्घटना में एवं उसने जो मुझे व्‍यंग्‍यात्‍मक ढंग से कहा वह सच हो गया . अब , अधिकार आम लोग प्रतिदिन कह सकते हैं एवं सोच सकते हैं जैसा उन्हें लगे और नहीं तो उनका मन शक्तिशाली नहीं होता एवं बहुत थोड़े ही परिणाम अगर कुछ हों भी तो , प्राप्त होते हैं उनके विचारों से . यह बात उन लोगों के साथ नहीं होती जिनकी आभाऐं अर्थात औरा शक्तिशाली होती हैं , या तो पावर मैडिटेशन के कारण और/या उनके पिछले जीवनों के कारण . जागरूक रहें आप क्या सोचते हैं एवं आप क्या कहते हैं .

* बीमारी /रोग से स्वयं को अलग कर लें .
आपको 100 प्रतिशत होना होगा की आप उसे नहीं चाहते , एवं आपको निश्चित ही उसकी आवश्यकता नहीं है . मैंने नए युग अर्थात नई ऐज की किताबों में बढ़ा हैं जहाँ टट्टी लेखकों के मैल / चुतिया लेखक पाठकों से कहते हैं की वे "उनकी बीमारी से प्यार करें ". यह सबसे बड़ी आत्मघाती सलाह है !!

मैं चक्ति हूँ की कैसे ये चुतिया बेवकूफ उनके यहूदी /ईसाई /ज़ायन (zion) , खंडित एवं अपवित्र *जादूगरी * से केवल सीमायें पर सीमायें लगते हैं उनके रास्तों में एवं अन्य लोगों को प्रशिक्षित करते हैं केवल डर एवं चूतियापे के कारण ! यह बेकार है !!
जहाँ तक "कर्मा /कर्म " का सवाल है , सभी कर्मा को ज्ञान के माध्यम से जीता जा सकता है एवं उस ज्ञान को उपयोग कर जीता जा सकता है !
सेटन हमें यही ज्ञान देते हैं .

* ऐसा नहीं कहते रहना चाहिए "मेरे पास पैसे नहीं हैं" "मैं इसे नहीं जुटा सकता" "मैं टूट चुका हूँ " आदि . भले ही यह सच है , इसे आपको प्रबल नहीं करना है ., विशेषकर जब आप धन की ओर कार्य कर रहें है जो आपके पास आ रहा है . इसके अलावा , यह कहें स्वयं को , "मैं इसे कैसे जुटा सकता हूँ ?" अर्थात , जहाँ एक इच्छाशक्ति है , वहां एक रास्ता है एवं एक हल है उसे जुटाने का . नकारात्मक विचारों को बदल दें एवं उन्हें काउंटर करें इसके साथ "बहुत सार मुफ्त का एवं सरल धन मेरे पास आ रहा है सरलता के साथ एवं बिना किसी प्रयास के " - उदाहरण के लिए . एवं ऊपर बतलाये उदाहरण के लिए , की यह कहने के बजाये की "मैं उसे नहीं जुटा सकता खरीद सकता " उस चीज को जो आप सच में प्राप्त करना चाहते हैं , आप यह कहें , "यह मेरा है ." याद रखें , अफर्मेशन्स अर्थात दृढ़ता के साथ कहना , इन्हे वर्तमान काल में कहना चाहिए हमेशा .

अन्य बाधाओं में शामिल हैं अचेत अवरोध एवं बाधाएं. इस प्रकार की चीज के साथ , पहले तो आपको स्वयं को जानना है . जीवन अनुभव एवं कारण यहाँ व्यक्तिगत होते हैं एवं सितारों जितनी संख्या में होते हैं . पहला कदम बाधा को जीतने में है यहाँ पर की आप अपने मन से पूछें - क्यों ? "यह वैसा कार्य क्यों नहीं कर रहा जैसा मैं इसे चाहता हूँ की ये करे?" "मैं चंगा क्यों नहीं हो रहा हूँ ?" "धन मेरे पास क्यों नहीं आ रहा है?" एवं इस प्रकार से .

कुछ लोगों की बाधाएं ऐसे होती हैं की वे बचपने से होते हैं या यहाँ तक की पिछले जीवनों तक से भी . अपनी समस्या का मूल कारण ढूढ़ना एवं जानना की समस्या क्या है , ये आपने कर लिया तो आधी समस्या तो यहीं हल हो गयी . अगर समस्या में कोई अन्य व्यक्ति शामिल है , तो आपको वहां कार्य करना है एवं उन अवरोधों को घोल देना / नष्ट कर देना है मुख्य कार्यचालन पर कदम रखने के पहले .

अगर आप जानते हैं की अवरोध क्या है , तो आप अपने मेडीटेशन्स अर्थात ध्यान एवं शक्तिओं को लगाएं उस अवरोध को नष्ट करने में . उदहारण के लिए , अगर आप बचपन से स्वयं को चोट पहुंचाते हैं या जो कुछ भी , आप अपनी ऊर्जाओं को इसे नष्ट करने / अनकिया करने में लगा सकते हैं , उदाहरण के लिए , एक समाधी की अवस्था में जाना , एवं स्वयं को सम्पूर्ण सकारत्मक ऊर्जा से भरना एवं अफर्म करना अर्थात दृढ़ता के साथ कहना, "मैं मुक्त हूँ स्वयं को चोट पहुँचाने से . मैं स्वयं को माफ़ करता हूँ " (उन मामलों में जिनमे आप बहुत सारे दोष ले जा रहे हों )

हम में से वे लोग जिन्होंने ज्योतिषी एवं इस प्रकार की चीज गहराई से पढ़ी है , हम जानते हैं अधिकतर , भाग्य का एक हाथ होता है त्रासदी में . गलत समय में गलत जगह रहना गलत लोगों के साथ .... आदि , कुछ लोगों ने अपने जीवन दोष को साथ लेफ्ट हुए जिए एवं स्वयं को सजा देते हुए जिए कुछ चीज के लिए जिसमे उनकी गलती नहीं थी . ऐसा हमेशा मामला नहीं होता , परन्तु सौदा यह है , की अगर आप चंगाई में या कोई अन्य जादू में सफल होना चाहते हैं एवं आप जो इच्छा करते हैं उसे आकर्षित करना चाहते हैं , आप स्वयं से घृणा नहीं कर सकते ज़ाहिर कारणों के लिए!

अगर वहां अवरोध हैं , तब कार्य करने अपने जादू के साथ उन अवरोधों को नष्ट करने के लिए अपने मुख्य लक्ष्यों पर कार्य करने के पहले . एक सर्वागीण अफर्मेशन है: "कोई भी एवं सारे अवरोध जो मुझे ___________ होने /प्राप्त करने से रोक रहें हैं , वे नष्ट हो गएहैं एवं सम्पूर्ण तरह से नष्ट हो गए / बर्बाद हो गए / घुल गए हैं ."

समाप्त करते हुए , जैसा की मैंने पहले बतलाया , जितनी अधिक शक्तिशाली आपकी आभा / आत्मा होती है , उतना ही सरल होता है वह प्राप्त करना जिसे आप चाहते हैं वह भी और काम समय एवं प्रयास के साथ . मैं यहाँ अनुभव से कहती हूँ , जहाँ तक व्यक्तिगत शक्तिओं का सवाल है . तथाकथित "चमत्कारों " को करने के लिए सिर्फ एक शक्तिशाली आत्मा / आभा एवं ज्ञान की आवष्यकता पड़ती है उसे उपयोग करने के लिए .

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वापस लड़ना

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सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारणों में से एक की हम अपनी आभा अर्थात औरा को साफ़ करते हैं वह यह है की हम अपने आप को साड़ी नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा दिला दें जिनका हमसे से प्रतिदिन सामना होता है . इसमें से बहुत कुछ अन्यों से आता है जो हमारे तुरंत वातावरण में होते हैं . कार्य करने का विशेषकर समस्या देने वाला हो सकता है घर के जैसे ही बहुतों के लिए . नकारात्मक लोगों में शामिल हैं वे लोग जो हमेशा करहाते हैं और शिकायत करते हैं , परन्तु उनकी परिस्थितिओं को ठीक करने के लिए कुछ नहीं करते , वे लोग जो हमेशा दूसरों को नीचे दिखते हैं ताकि उनको खुदको अच्छा लगे या वे उनकी स्वयं की नाकामी से ध्यान भटका सकें , वे जो दूसरों को दोष देते हैं खुदके संकट के लिए , वे लोग जो अपना गुस्सा और खीज दूसरों को गाली देकर निकलते हैं और यह सूची अंतहीन है .

सेटनिस्ट्स कोई भी कुप्रथा नहीं करते .

यह बहुत ही सरल मेडिटेशन अर्थात ध्यान है . एक व्यक्ति जो अन्य के नकारात्मक उत्पादन के प्रभाव को महसूस कर रहा है वह यह कर सकते है:

1 .) अपनी आभा एवं चक्रों को अच्छे से सम्पूर्ण साफ़ करें , क्यूंकि आप नहीं चाहते की कोई नकारात्मक ऊर्जा में फंसे*

2 .) अपनी चेतना को अपनी आभा तक फैलाएं एवं अपनी आभा को *महसूस * करें .

3 .) रिलैक्स करें अर्थात आराम करें एवं अपनी आभा को धुन में लाएं .

4 .) दृश्य बनायें / कल्पना करें की आपकी आभा एक बाहरी रेखा / प्रारूप एवं सुरक्षा करने वाला घेर है . प्रारूप होना चाहिए चमकदार मेधावी सफ़ेद सूर्य के जैसे क्यूंकि सफ़ेद प्रत्येक चीज मोड़ देता है .

5 .) इस अफर्मेशन (दृढ़ता के साथ कहना ) को कहें: "मेरी आभा शक्तिशाली रूप से एवं सम्पूर्ण तरह से मोड़ रही है [अपराधी का नाम] की नकारत्मक ऊर्जा को हर तरीके से एवं उसे ठीक उसी को वापस भेज रही है."

इस मैडिटेशन को किया जाना चाहिए दृढ़ता के साथ एवं अफर्मेशन को दोहराना चाहिए जब आप एक अपराधी व्यक्ति के संपर्क में आएं . अपराधी व्यक्ति अर्थात वह जो नकारत्मक है . सिर्फ दृश्य बनायें / कल्पना करें अपनी आभा की , जैसा की ऊपर किया था एवं अफर्मेशन को दोहराएँ कुछ समय के लिए,[तीन बार अच्छा है यहाँ , एक बार आपने उसे क्रमादेशित अर्थात प्रोग्राम कर दिया है अपनी आभा में ] एवं देखे की व्यक्ति की नकारत्मकता उसका विनाश करती है , इसके बजाये की वह नकतरत्मक्ता आस पास के लोगों को जो सहते हैं उनपे प्रभाव करे .

किसी भी सेटनिस्ट को ना ही तो कुप्रथा में भाग लेना चाहिए न ही उसे सहना चाहिए . आम व्यक्ति नकारत्मक ऊर्जा को सोख लेता है एवं भुगतता है उसी प्रकार से जैसे जैसे नकारत्मकता बनती है . अपराधी व्यक्ति अक्सर इसे फायदा होता है शत्रुता या नकारत्मकता देने के द्वारा दूसरों पर और ऐसा व्यक्ति अक्सर इस पर पनपता है . लोग जो अनजाने में ऊर्जा को सोखते हैं उन्हें कुछ भी हो सकता है तन्वा से लेकर वे बीमार पड़ सकते हैं एवं नकारत्मक ऊर्जा के एक भंवर में फंस जाते हैं , इसके साथ साथ वे अपराधी व्यक्ति को एक नकारत्मक नजर मुहैय्या करते हैं . ऊपर बतलाया गया मेडिटेशन इसे रोक देता है , परन्तु याद रखें , इसे बारम्बार प्रबल बनाना चाहिए इसीलिए मेडिटेशन को दोहराते रहें .

ऊपर बतलाये गयी बात के अलावा , दृश्य बनायें / कल्पना करें नकारत्मक ऊर्जा का जो अपराधी भेज रहा है , वह भूरे रंग की है एवं निर्देशित करें उसे वापस उसकी आभा में , उसे आभा में चिपका दे . याद रखें ऐसा करने के बाद अपनी आभा को साफ़ करें .

*अपनी आभा को सम्पूर्ण साफ़ करने के लिए , सैटनिक माला को जपें , सूर्य के बीज मन्त्र के साथ , यह करने के दौरान आपको दृश्य बनाना है / कल्पना करनी है की आप एक चमकदार मेधावी सफ़ेद -सुनहरी (सोने के रंग की ) प्रकाश में घिरे हुए हैं . फोकस करें अर्थात ध्यान केंद्रित करें कम्पन्न का अपनी सम्पूर्ण आत्मा में . आप कोई भी मन्त्र चुन सकते हैं सूर्य के लिए जिसमे भी आपको आरामदायक लगे उस चुने हुए मन्त्र के साथ कार्य करना , क्यूंकि दोनों प्रभावी है : "सूर्य /सूर्या /SURYA" सू (लम्बा सू कम्पन्न करते हुए उच्चारण करना है ) -रर-याह-येय (SUUU-RR-YAH) या "रौम /RAUM" रर-आहह -ऊऊऊ-ममम (RAUM" RR-AHH-UUU-MMM). [र/R को लुढ़काना है ]. कम्पन्न कहीं अधिक प्रभावी होता है आभा को साफ़ करने के लिए .

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Post Tue Jul 05, 2016 2:56 am

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शक्ति

Source URL - http://web.archive.org/web/201509121801 ... ower2.html

एक व्यक्ति को ना ही तो कोई रंग मंच की सामग्री या कोई अन्य अनुष्ठान सामग्री चाहिए एक तथाकथित "स्पेल / जादू " को छोड़ने / करने के लिए . पावर मेडिटेशन्स अर्थात शक्ति ध्यान , जो पर्याप्त लम्बे समय तक किये गए हैं , ये एक व्यकि के सामर्थ्य से कहीं अधिक प्रभावी होते हैं की वे एक व्यक्ति के एवं अन्य के वातावरणों को प्रभावित कर सकें . जब एक व्यक्ति का क्षेत्र पर्याप्त शक्तिशाली होता है , तो अन्य लोगों के मनों में विचार , अनुभूतियां एवं अन्य प्रक्षेपणों को रखना सरल हो जाता है . कुछ लोग शक्तिशाली होते हैं अन्यों की अपेक्षा एवं प्रक्षेपण में कुछ प्रकार के अवरोध आ सकते हैं , हाँ ज़रूर यह इस बात पर निर्भर करता है की आप कितने शक्तिशाली हैं . शक्तिशाली लोगों के बचाव हालाँकि काफी कमज़ोर होते हैं जब वे सो रहे होते हैं .

कमज़ोर लोगों से आसानी से निपटा जा सकता हैं कोई भी जगह एवं प्रत्येक जगह . सिर्फ आपको एक हलके समाधी की अवस्था में जाना है फोकस एवं ध्यान केन्द्रन के और आप देखेंगे की वे लोग वहां है जहाँ आप उन्हें देख सकते हैं , एवं अपने प्रक्षेपणों के ज़ाहिर प्रभावों को भी आप देख सकते हैं .

हमेशा याद रखें , यह बहुत महत्वपूर्ण है क्रोध को नियंत्रित करना सीखना . जब एक व्यक्ति एक निश्चित स्तर पर पहुँच जाता है , अपराधी , भले ही वे बाहरी हैं या चहेते हैं उन्हें दुर्भाग्य प्राप्त होगा . यह बहुत दुखी करने वाला हो सकता है जब एक चहेता अर्थात जिससे आप प्रेम करते हों वो किसी दुर्घटना का शिकार हो जाये या फिर बीमार पड़ जाये आपके क्रोध के परिणाम स्वरुप . यह शक्ति से आता है एवं इसे नियंत्रित रखा जाना चाहिए . जब एक व्यक्ति का ऊर्जा क्षेत्र पर्याप्त शक्तिशाली होता है , वह अधिक नहीं लेता / अधिक कुछ नहीं लगता उसमे फिर . हमें हमेशा याद रखना चाहिए की हम दृढ हैं की हमारे अपराधी को सजा मिले . अनजाने में किये गए क्रोध के कारण , फिर अपराधी क्षमा मांग लेता है एवं हमारी उसके प्रति कड़ी भावनाएं चली जाती हैं फिर वह व्यक्ति का सामना विनाश से होता है , यह अति खेद का कारण बन सकता है .

मैं इन मेडिटेशन्स की शक्तिओं पर और अधिक बल नहीं दे सकती , जब उन्हें पर्याप्त लम्बे समय तक के लिए किया जाये अविरोधी तरीके से प्रति दिन .

निश्चित विशेष चीजों के लिए , जैसे के लिए बाँधने , रंग मंच की सामग्रियों का उपयोग किया जा सकता है ध्यान केंद्रित करने अर्थात फोकस करने के एक बिंदु के रूप में . अधिकतर समय , किसी चीज पर विराजमान होना इच्छा शक्ति के साथ , फोकस एवं इच्छा के साथ तो वह प्रकट हो जाएगी , अगर आप शक न करें या चिंतित न हों या बेकरार न हों तो .

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Post Tue Jul 05, 2016 3:09 am

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तत्वों पर और अधिक जानकारी

Source URL - http://web.archive.org/web/201509150637 ... ments.html

पुराने मेडिटेशन अर्थात ध्यान करने वाले ग्रंथों में बहुतायत चेतावनिओं के विपरीत , एक व्यक्ति को क्रमशः /धीरे धीरे उनकी सहनशीलता को बनना चाहिए तत्वों के प्रति . हमने पाया है की इन चेतावनिओं की विश्वसनीयता "थ्री फोल्ड " अर्थात तीन गुना बकवास से कहीं अधिक नहीं है . हम में से कुछ , जिसमे मैं भी शामिल हूँ , हमने अग्नि को अंदर सांस में लिया है 100 साँसों से अधिक के लिए , परन्तु हम इस स्तर तक धैर्य के साथ धीरे धीरे समय के साथ पहुंचे . अग्नि जादू को भयंकर प्रचंडता के साथ करने के लिए एक व्यक्ति को अग्नि तत्व को बड़ी मात्रा में झेलने / पकड़ने में समर्थ होना चाहिए एवं उसके प्रति सहनशील होना चाहिए . यही अन्य तत्वों के साथ लागू होता है . एक व्यक्ति जो उनके अग्नि तत्व को रोकने / पकडे रखने में समर्थ है वह काले जादू अर्थात ब्लैक मैजिक के शिकार को पूरी तरह से जलने में समर्थ होता है , क्यूंकि वह (शिकार ) इस तत्व के प्रति बिलकुल भी सहनशील नहीं है . यह समय के साथ आता है .

आकाश / ईथर अर्थात व्योम / क्विंटेस्सेंस अर्थात हीर को हमने पाया है की वह एक प्रधान है .खीर कोई भी कार्यचालन को प्रचण्ड बना देता है . यह तत्व अग्नि से बहुत करीब रूप से सम्बंधित है एवं जब उसके साथ हर दिन कार्य किया जाता है , एक व्यक्ति पाएगा की उसके शरीर का तापमान बढ़ गया है / बढ़ जाता है . शरीर में तापमान का बढ़ना ऐसा प्रतीत होता है की यह स्थायी रहता है . कोई चीज के होने की इच्छा करने पर , उसे खीर में अंकित किया जा सकता है , जिससे वह और अधिक शक्तिशाली हो जाता है . खीर को सोखने में , जो की पराबैंगनी प्रकाश है , इसका एक तरीक है की दृश्य बनाया जाये / कल्पना की जाये एक "काले प्रकाश अर्थात ब्लैक लाइट " की जो की लोकप्रिय था 1970 में जिससे पोस्टर्स को चमकाया जाता था . काले प्रकाश का रंग खीर का रंग है .

तत्वों एवं उनके विशेष उपयोग के बारे में और अधिक जानकारी आने वाली है . हम इस पी डी ऍफ़ को लगातार अपडेट करते रहेंगे .

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Post Tue Jul 12, 2016 10:27 am

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Wanted to let slothz know only , 10 - 15 articles are left from information section . Once they are finished then all of jos meditation section is 100 percent translated 8-)

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