Board index JoyofSatan666 JoS Sermons in Hindi Full

JoS Sermons in Hindi Full

For those who wish to establish a relationship with Satan.

Topics of discussion include: Demons, Magick, Satanic Witchcraft and much more!

http://www.joyofsatan.org/

Post Thu Nov 19, 2015 10:06 am

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I have revised and mailed the copy of translation of HP Hooded Cobra 666 for conversion of the same into pdf .

Thanks !

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Post Thu Nov 19, 2015 11:15 am

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GREAT WORK! :D Keep it up friend!
"To be afraid of ones creation is to fear imperfection."

Post Sat Nov 21, 2015 2:27 am

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लघु / छोटे चक्रों को खोलना [/size]

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... akras.html

छोटे / लघु चक्रों को खोलने के लिए यह महत्वपूर्ण है की आपने पहले ही अपने प्रमुख चक्रों को खोल लिया है और (आपमें ) एक ऊर्जा का प्रवाह है जिसे आप महसूस कर सकते हों.

अपने लघु अर्थात छोटे चक्रों को खोलने के लिए , सिर्फ निर्देशित करें और ध्यान केंद्रित करने अपनी ऊर्जा पर इन चक्रों में और दृश्य बनायें / कल्पना करें की ये चक्र ऊर्जा के साथ प्रकाशमान हो रहे हैं. आदर्श रूप से आपको इन चक्रों को महसूस करने में समर्थ होना चाहिए / है .

चक्रों का चित्र / आरेख

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... agram.html

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शरीर के छोटे चक्र -
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अलौकिक / मनोवैज्ञानिक / आत्मिक / नाक्षत्रिक अर्थात एस्ट्रल श्रवण के लिए बिंदु १ -
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अलौकिक / मनोवैज्ञानिक / आत्मिक / नाक्षत्रिक अर्थात एस्ट्रल श्रवण के लिए बिंदु २ -
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अलौकिक / मनोवैज्ञानिक / आत्मिक / नाक्षत्रिक अर्थात एस्ट्रल दृष्टि के लिए बिंदु -
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पैर -
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हाथ -
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पीनियल ग्रंथि -
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आंठवे और नौवें चक्र -
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दसवें और ग्यारहवें चक्र -
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बारहवें और तेरहवें चक्र -
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हार्ट अर्थात अनाहत चक्र के विस्तार -
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चहरे के लघु / छोटे चक्र -

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सिर के ऊपर के शीर्ष / शिखर के चक्र -
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Post Sat Nov 21, 2015 12:06 pm

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Xanthos666 wrote:
GREAT WORK! :D Keep it up friend!



Your welcome brother :)

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Post Sun Nov 22, 2015 10:29 am

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सेटेनिक माला


Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... osary.html

सेटेनिक माला एक बहुत अच्छा और बहुत प्रभावी तरीका है शक्ति को बढ़ाने का और ऊर्जा को अपनी इच्छाओं में लगाने के लिए. सेटेनिक माला का इस्तमाल एक काबलिस्टिक ध्यान (मैडिटेशन ) के साधन के रूप में भी किया जा सकता है जैसे की रियूनिक मैडिटेशन (ध्यान ) में . केवल आपको माला के मोतियों / मुनकों पर अपनी उँगलियाँ फिसलनी है और आपको गिनने की आवश्यकता नहीं है . आपका मैडिटेशन अर्थात ध्यान आराम से हो सकता है और इस प्रकार अधिक शक्तिशाली हो जाता है .

कैथोलिक अर्थात ईसाईयत / इस्लाम / यहूद आदि अन्य मालाएं तिब्बती माला मुनको से चुराई गई थी और उसे भ्रष्ट कर दिया गया था , इस कैथोलिक अर्थात ईसाईयत / इस्लाम / यहूद आदि की सभी चीज़ें भ्रष्ट / खंडित और झूठी हैं . तिब्बती माला में एक सौ आठ मुनके अर्थात बीड्स होते हैं जबकि कैथोलिक माला में केवल उसके आधे अर्थात ५४ (54) बीड्स / मुनके होते हैं .

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माला से कार्यचालन हेतु , प्रत्येक कार्य को शुरू किया जाना चाहिए ग्रहों की एक अनुकूल अवधि पर आपके लक्ष्य के सम्बन्ध अनुसार. इसका मानक है और यह बहुत प्रभावशाली है वह यह है की आप चालीस दिन सीधे लगातार करें . सर्वाधिक शक्ति के लिए , आपको दो बार सुबह और रात को माला जपना है चालीस दिन के लिए . यह "चालीस दिन " इसे चुराया गया था और भ्रष्ट कर दिया गया उस गन्दी अपवित्र यहूदी / ज़ायन (xian) बाइबिल में , परन्तु यह चालीस दिन का सिद्धांत प्राचीन मिस्र में उत्पन्न हुआ. इसका संख्याओं (अंकों ) से और चन्द्रमा के चरण / चक्र / परिक्रमा से लेना देना है. सेटन / एनकी का अंक चालीस है. एक कार्यचालन के लिए सबसे शक्तिशाली समय होता है आधी रात्रि का , बारह बजे दोपहर , छह बजे श्याम और सुबह के छह बजे . परन्तु इस बात को निश्चित करलें की जो भी कार्य किया जाना है , उस कार्यचालन के लिए वो घड़ी सहायक है , यह पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात है जिसे आपको ध्यान में रखना है .


अनुसन्धान ने साबित किया है की प्राचीन चाल्डीन (Chaldean) ग्रहों की घड़ियाँ (समय ) अत्यधिक शुद्ध और सही होते हैं . मैं ज़ोरदार तरीके से आपको प्रोत्साहित करती हूँ की आप क्रोनोस प्रोग्राम इस वेबसाइट से डाउनलोड कर लें -

http://chronosxp.sourceforge.net/en/

आपको माइक्रोसॉफ्ट डॉट नेट फ्रेमवर्क का २.० या इससे ऊपर का संस्करण डाउनलोड करना पड़ेगा और इनस्टॉल करना पड़ेगा अगर आपके पास न हो तो . इस वेबसाइट पर सारी जानकारी दी हुई है. यह प्रोग्राम बहुत शानदार है और यह आपके ग्रहों की घड़ियों की गणना कर लेता है जो आपके स्थान अर्थात जहाँ आप रहते हों उसके अनुसार. आपके कार्यचालन के परिणाम - अगर आपको चालीस दिन समाप्त करने के पश्चात भी परिणाम नहीं मिलते या आपके लक्ष्य के प्राप्ति नहीं होती , तो आप दूसरे अर्थात एक बार और चालीस दिन शुरू कर सकते हैं . अगर आप एक भी दिन छोड़ते हैं तो आप पहले दिन पर पीछे आजायेंगे. वहां एक चीज़ होती है जिसे हम "कर्मा / कर्म " कहते हैं जैसा की आप में से अधिक जानते होंगे. ये कर्मा / कर्म का स्वामी एक गृह है जिसे हम सैटर्न अर्थात शनि कहते हैं और इसे हराने का सिर्फ एक ही तरीका है की आपको इसका पता होना चाहिए और आपको इससे निकलने के लिए कार्य करना है. कर्मा / कर्म आपको मार मार कर तोड़ेगा और आपको ऐसे ही पटकता जायेगा लगातार जब तक आप उसके बारे में जान नहीं जाते और आप शक्तिशाली और दृढ संग्रहित हो नहीं जाते उससे लड़ने के लिए और उससे जीत कर निकल नहीं जाते. यह कमज़ोरों के लिए नहीं है . आपकी दृढ़ता /ज़िद यह दिखाती है की आपके मैडिटेशन अर्थात ध्यान काम कर रहे हैं . आप अपना मैडिटेशन (ध्यान ) रोज़ करते रहिये माला के साथ भले ही कुछ हो जाये . इस प्रकार की चीज़ें अक्सर मैडिटेशन (ध्यान ) चक्र के अंतिम तीस - चालीस दिन उत्पन्न होती हैं , और कोशिश करती हैं की आप ध्यान /मैडिटेशन बंद कर दें या रोक दें और फिरसे पहले दिन पर वापस खिसक जाएँ . तैयार रहें और जानकार रहें . एक (व्यक्ति ) को लड़ते रहना चाहिए . यहाँ पर सिर्फ मज़बूत ही जीवित रह पाते हैं और उनके लक्ष्यों की प्राप्ति करते हैं .

ऊर्जा को लगातार लागू किया जाना चाहिए बार बार जब तक परिवर्तन की प्राप्ति नहीं हो जाती . यह इसके समान है जहाँ एक वैध लगातार हड्डी को ठीक से बिठाने की कोशिश करता रहता है जब तक वह वहां नहीं बैठ जाती जहाँ उसे बैठना है .

चंगाई के लिए यह महत्वपूर्ण है की जब पुरानी बिमारियों में जब ध्यान (मैडिटेशन ) करने से लक्षण (बिमारी के ) समाप्त तो हो जाते हैं परन्तु जब मैडिटेशन करना छोड़ दिया जाये तो वे वापस प्रकट हो सकता है . एक (व्यक्ति ) जितने लम्बे समय से उस बीमारी से ग्रसित है इसका अर्थ यही है की मैडिटेशन की अवधी भी लम्बी होगी , कभी कभी कई महीनो या सालों तक भी मैडिटेशन करने की आवश्यकता पड़ सकती है की लक्षण दुबारा कभी भी वापस न प्रकट हों. जन्मजात समस्याएं सबसे बदतर होती हैं और सबसे कठिन होती हैं चंगाई हेतु . लेकिन ऐसा नहीं है की ये असंभव ही हैं बिलकुल . सिर्फ इनको ठीक करने में और अधिक शक्ति और प्रयास की आवश्यकता होगी .

सेटेनिक माला का उपयोग करने के द्वारा , हम हमारे सच्चे धर्म सेटनिज़्म की विरासत द्वारा दिए हुए इस महान तोहफे को स्वीकारते हैं अपने जीवन में और यह एक तमाचा है - झूठी भ्रष्ट और अपवित्र कैथोलिक चर्च की शिक्षाओं पर . मैंने पाया है की यह मैडिटेशन साधन - सेटेनिक माला , एकदम उत्कृष्ट है . हालाँकि की इसके महत्व पर ईसाइयत / यहूद / इस्लाम और उसके मानने वालों ने पर्दा दाल रखा हुआ है. लेकिन हमारे प्रयासों से यह पर्दा उठ रहा है और उठा है जिससे बहुतायत में लोग लाभ उठाये हैं. कम्पन्न एक ताल में बहते हैं और शक्ति प्रवर्धित हो जाती है अर्थात बढ़ जाती है जिसे हम किसी भी इच्छा (प्राप्ति ) में लगा सकते हैं .

सेटेनिक माला का उपयोग करने के लिए , आदर्शतः आपको काबलाह के साथ कार्य करना चाहिए. सच्चा काबलाह है कम्पन्नों का उपयोग करना , उदाहरण के लिए - रियोन्स को कम्पन्न करना , डीमॉन्स के नाम को कम्पन्न करना , शक्ति के मिस्री शब्द (इजिप्शियन वर्ड्स / Egyptian Words ) को कम्पन्न करना आदि ताकि आपकी ऊर्जा और शक्ति अत्यधिक बढ़ जाये. इस प्रकार का मैडिटेशन (ध्यान ) उन्नत है और अत्यंत प्रभावी होता है .


आप केवल कम्पन्न कर सकते हैं अपनी ऊर्जा और सतर्कता को बढ़ाने के लिए , या फिर आप एक विशेष चक्र या अपनी आत्मा के पहलू पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं , या फिर आप जादू क्रिया भी कर सकते हैं .

मै सुझाव देती हूँ की आप स्वयं अपनी एक सेटेनिक माला बनाये . इन्हे बनाना सरल होता है . दुकानों / स्टोरों में सामग्री बड़ी सस्ती उपलब्ध हो जाती है . हमारे यहाँ भारत वर्ष में बहुत मालाएं मिलती हैं हरिद्वार बदरीनाथ और हर जगह मंदिरों और पूजा की दुकानो में . आप केवल मुनके/ मोती खरीदें और डोरी खरीदें . बफोमेट कहीं भी खरीदा जा सकता है ऑनलाइन इंटरनेट पर या किसी भी बड़ी जादू सामग्री आदि की दूकान पर . मैं सुझाव दूंगी की आप डोरी पर थोड़ी सी जगह छोड़ना , ताकि आप अपनी उँगलियाँ फिसला सकें मुनकों / मोतियों पर जब आप हर मुनके पर कम्पन्न करेंगे . मैं इसका भी सुझाव दूंगी की आप एक अतिरिक्त मुनका / मोती रखें (मैं चौकोर आकार के मोती / मुनके उपयोग करती हूँ अतिरिक्त मोती / मुनके के लिए ) बड़े वाले प्रत्येक साइड / पक्षों पर जब आप पचास संख्या तक आजायें .[अर्थात आप पचास मुनके के बाद एक बड़ा मुनका रख सकते हैं ताकि आपको गिनती में ज़्यादा समस्या न हो ] इस तरह से आप महसूस कर सकते हैं की आप कहाँ पर हैं अपने मैडिटेशन (ध्यान ) या समाधी को बिना अवरोधित किये.

सेटेनिक माला का उपयोग करने के लिए , यहाँ एक उदाहरण है - आप बिलकुल स्वतंत्र हैं की आप अपने मैडिटेशन अर्थात ध्यान में फेरबदल कर सकते हैं ताकि वह आपके व्यक्तिगत उद्देश्यों के लिए उपयुक्त हो .


धन प्राप्ति हेतु -

1 . बड़े मुनके से शुरू करें जो बफोमेट के ठीक (नीचे ) में है (दूसरा मुनका नहीं ) और आप अपने मन में दृढ़ता के साथ कथन करें ; उदाहरण के लिए - " मैं बहुत सारा धन सरलतापूर्वक आसानी से आकर्षित कर रहा हूँ . यह धन मुफ्त है और सिर्फ मेरा है ताकि में इसे रख सकूँ और खर्च कर सकूँ जैसे में चहुँ . " अब ऊर्जा को निर्देशित करें , एक सफ़ेद - सुनहरे (सोने के रंग वाले ) प्रकाश/ रौशनी का दृश्य बनाते / कल्पनाकरते हुए अपने वॉलेट (पर्स ) पर और स्वयं पर खुद पर . [सफ़ेद सुनहरी रौशनी सर्वागीण / बहु उद्देश्य हेतु कार्य आती है ]

2 . ऊपर जो बताया है उसे दोहराएं चार बचे हुए मुनकों तक .

3 . आपकी सेटेनिक माला में एक सौ आठ १०८ मुनके / मोती होने चाहये , ताकि एक ओर की प्रमुख रेखा आठ के साथ समाप्त हो . आपको शुरू करना है उस पक्ष / साइड से जिसमे में नौ (९ ) है. सांस को अंदर लें और सांस को बाहर छोड़ने पर , कम्पन्न करें -

फफफफफ -फे- ए-ए -ए--ए -ह-ह-ह-हू-ऊ-ऊ-ऊ-ऊ

4 . मुनके पर ऊँगली फिसलायें और दूसरें मूंगे पर जाकर , सांस अंदर लें और कम्पन्न करें


फफफफफ -फे- ए-ए -ए--ए -ह-ह-ह-हू-ऊ-ऊ-ऊ-ऊ

5. यह हर मुनके / मोती के लिए करें नौ (9) के गुट / सेट में . फेहू रियून (Fehu Rune ) का ऐसा दृश्य बांयें / कल्पना करें - की फेहू रियून ऊर्जा के साथ चमक रहा है , जब भी आप कम्पन्न करें तब . (अगर आप एक डीमोन का नाम कम्पन्न कर रहे हैं तब आपक उसकी सिजिल की भी इसी तरह कल्पना करनी है .)

6 . जब आप बड़े दसवें मुनके पर पहुँच जाएँ , जो छोटे नौ मुनकों के गुट / सेट को अलग कर रहा है , .....आपको दृढ़ता के साथ कहना है फिरसे जो आपने स्टेप 1 में कहा था दृढ़ता के साथ , और आपको अपनी ऊर्जा को जो अभी आपने माला जपते हुए कम्पन्न करने के दौरान उत्पन्न की है उसे धन आकर्षित करने में लगा देना है , जैसा की ऊपर उदाहरण में बतलाया गया है . आप हर दसवें मुनके का उपयोग कर सकते हैं नार्मल सांस लेने के लिए अपने कम्पन्नों को फिरसे शुरू करने के पहले .


प्यार / काम वासना के लिए -

आपने चहिते को आपके जीवन में वापस लेन के लिए , आपको आपके द्वारा उत्पन्न की हुई ऊर्जा को उसके (लड़का या लड़की जिसे आप चाहते हैं उसके )चारों ओर दृश्य बनायें / कल्पना करें की वो ऊर्जा उस लड़का / लड़की के चारों ओर घेर ली है . आप ऐसी भी कल्पना कर सकते हैं की आप आपने चहेते के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना रहे हैं आदि . मैं सुझाव देती हूँ की आप कल्पना करें के रौशनी / प्रकाश (ऊर्जा ) आप दोनों को घेर ली हो , मैडिटेशन (ध्यान ) / कल्पना के दौरान . जब आपने ऐसा कर लिया हो , तब आप हस्तमैथुन कर सकते हैं और , और अधिक ऊर्जा निर्देशित कर सकते हैं कामोत्तेजना से आपके चहेते पर .

चंगाई के लिए -

दृढ़ता के साथ कहें चंगाई के लिए और फिर ऊर्जा को निर्देशित करें दृश्य बनाने / कल्पना करने के साथ और महसूस करते हुए आपके शरीर के रोग ग्रस्त / पीड़ित भाग में . अगर आप आपने किसी चहेते को चंगा कर रहे हैं , आप उसकी कल्पना करें और ऊर्जा को उसके शरीर के पीड़ित भाग में निर्देशित करें . मैडिटेशन के पहले पीड़ित भाग को साफ़ करना न भूलें ,.
याद रखें , चंगी में , ऊर्जा को दृढ़ता के साथ कहने अर्थात अफर्म करते हुए निर्देशित किया जाता है पीड़ित भाग में कोई दस से बीस बार दिन में . इसमें एक से दो मिनिट लग सकते हैं , परन्तु इसे जितनी बार भी संभव हो किया जाना चाहिए जब भी आप ध्यान केंद्रित कर सकते हैं , जब तक आप पूरी तरह चंगे नही हो जाते. चंगाई के ऊपर विस्तार से अगले लेख में बताया जायेगा.

काले जादू के लिए -
माला को इसी तरह से उपयोग करें , और अपने शत्रु पर नकारात्मक ऊर्जा निर्देशित करें .

महत्वपूर्ण -

काले जादू के लिए यह ज़रूरी है की आप एक अन्य माला का उपयोग करें . माला , ऊर्जा को इकठ्ठा करती है और यह और अधिक से अधिक शक्तिशाली हो जाती है प्रत्येक बार आप इसका उपयोग करें . स्पष्तः विरोधी ऊर्जाएं टकरा सकती हैं और एक दूसरे को कैंसिल अर्थात निरस्त कर सकती हैं .

मैंने सेटेनिक माला का उपयोग मेरी इच्छाओं की पूर्ती हेतु और सिर्फ ऊर्जा को बढ़ाने / उत्पन्न करने दोनों के लिए किया है . रियून के साथ कार्य करना अत्यंत शक्तिशाली होता है और मैडिटेशन (ध्यान ) के दौरान यह असामान्य नहीं है की आप अपनी आत्मा के निश्चित पहलुओं को देखें और महसूस करें की ऊर्जा स्वयं को संरेखित कर रही है अर्थात पंक्ति में ला रही है .

नोट 1 - ऊपर हमने जो माला में बताया की आपको जैसे धन को आकर्षित करने वाले भाग में की दसवें बड़े मोती पर रुकना है आदि . तो आप ये चिंता न करें की कोनसा मोती बड़ा रखा जाना चाहिए कोनसा नहीं . हमने हमारी माला में हर नौ मुनकों के बाद एक बड़ा मुनका लगाया था . बड़ा मुनका इसिलए लगाने को कहते हैं की आपको गिनती में आसानी जाये. अगर आप कोई मुनका बड़ा नहीं रखना चहते तो यह भी चलेगा . लेकिन कम से कम पहला मुनका जिसमे बफोमेट भी रहता है उसे बड़ा अवश्य रखना चाहिए. बफोमेट सेटनिज़्म का एक पवित्र चिन्ह है . इसे अंग्रेजी में Baphomet कहते हैं .

नोट 2 - रियून्स नक्षत्रों और अत्यंत प्राचीन वर्णमालाओं पर आधारित हैं . ये प्राचीन शक्ति के शब्द हैं .

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Post Mon Nov 23, 2015 8:18 am

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रियूनिक काबलाह

Source URL - http://dawn666blacksun.angelfire.com/Runic_Kabalah.html

बहुत थोड़े लोग ही समझते हैं , काबलाह क्या है क्यूंकि सदियों से ज्ञान को हटाया गया है और कैथोलिक चर्च द्वारा व्यापक हत्याएं की गयी हैं जिन्होंने सत्य को सामने रखने की कोशिश करी , ये लोग जिनकी हत्याएं की गयीं वे जेंटाईल पुरोहित थे और आध्यात्मिक लीडर्स भी .

बकवास को हटते हुए -

कई विभिन्न गुप्त / जादू विधाओं और जादू किताबों की ज्ञात पांडुलिपियों का अध्यन करने में , एक (व्यक्ति ) पायेगा की लगभग सबकुछ , अगर पूरा नहीं फिर भी अधिकतर शिक्षाओं को काफी बदल दिया गया है . ऐसा प्रतीत होता है की प्रत्येक महत्वपूर्ण पाण्डुलिपि के केसाथ , एक यहूदी अर्थात ज्यू (JEW) का हाथ था और है अनिवादों को बदलने में या सिर्फ मदद करने में ताकि अनिकाडों को एक साथ रखा जा सके. आमजनों में से बहुत थोड़े से लोग , ऐसा प्रतीत होता है की यो लोग हमेशा निर्दयीपूर्वक कार्य कर रहे हैं , ताकि निश्चित बिन्दुओं को नियंत्रण में रखा जा सके. इसका परिणाम यह है की जेन्टाइल आध्यात्मिक ग्रन्थ / लेख खंडित कर दिए गयी ताकि जादुई ज्ञान को जताया जा सके और जेंटाईल लोगों को सारे रहस्य्मयी / जादुई ज्ञान से वंचित कर दिया जाये. जेंटाईल अर्थात वे लोग जो यहूदी नहीं हैं .

ऐसा प्रतीत होता है की रियून्स कैथोलिक चर्च के लिए एक अत्यंत बड़ा खतरा रहें हैं , क्यूंकि रियून का उपयोग करने पर या सिर्फ उनका ज्ञान मात्र होने पर मृत्युदंड दिया जाता था. ज़ायनिटी जो की एक यहूदी साधन है , उसने शिकार किया और व्यापक हत्याएं की ड्रूइड पुरोहितों (Druid Priests )की , धर्म के लीडरों की ,और बहुत सारे जेंटाईल मूर्तिपूजक पंडितों / साधुओं की , ऐसी की इन सबका अस्तित्व संकट में पड़ गया . इसी कारन , जो कुछ भी आज आम किताबों और किताबों की दुकानो में रियूनिक जादू के बारे में बताया गया है वो त्रुटिपूर्ण है .

उदाहरण के लिए , रियून्स का सबसे महत्वपूर्ण उच्चारण प्रायः अमरीकन अंग्रेजी में दिया गया है . यह त्रुटि एकदम स्पष्ट है . रियून्स जर्मन (Germany) के और नॉर्स(Norse) के हैं उत्पत्ति में अर्थात उनकी उत्पत्ति इन्ही जगह पर हुई थी . तो फिर हम उन्हें अमरीका की अंग्रेजी में क्यों कम्पन्न करें ?? वैसे , रियून को कम्पन्न करना यह सबसे शक्तिशाली है और यह नींव हैं सच्चे रियूनिक काबलाह की . यह ज़ाहिर है जानकारी के साथ जो की वहां बाहर सहज उपलब्ध है की , जर्मन उम्लौट्स* (Umlauts) हटा दिए गए हैं , कई सारे अन्य कंठस्थ (कंठ से उच्चारण किये जाने वाले ) उच्चारण के साथ , जो की अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं रियून्स का सही ठीक तरह से उपयोग करने के लिए.

नोट* - उम्लौट्स एक निशान होता है जो स्वर के ऊपर इस्तमाल किया जाता है जर्मन (भाषा ) में.

जब मैं एक बार गहरे ध्यान (मैडिटेशन ) में थी और एक निश्चित रियून को कम्पन्न कर रही थी , सेटन मेरे पास आये और उन्होंने कहा मुझसे की मैं आर (अंग्रेजी वर्णमाला में R) को लुढ़काओं पूरी तरह से कम्पन्न करते हुए . इसमें उन लोगों को अभ्यास करना पड़ता है जिनकी यह मूल भाषा नहीं है , लेकिन समय के साथ आप इसे सीख जाते हैं , और जब एक व्यक्ति ठीक से कम्पन्नों को करने में महारत हासिल कर लेता है ; तो ऐसे में वह व्यक्ति पयेगा की उसके प्रयास जादू को लागू करने में बहुत तेज़ी के साथ परिणाम दे रहे हैं . कोण कितने सही तरह से और सुचारू तरह से रियून से सम्बंधित कम्पन्न करता है , लक्ष्य / कार्यचालन की शक्ति और सफलता इसी पर निर्भर करेगी .

बहुत सारे लोग अनजान है इस बात से , की वहां एक इजिप्शियन काबलाह है , एक गोथिक काबलाह है , एक फिनिशियन काबलाह है , और एक ग्रीक काबलाह है . वास्तविक / मूल इजिप्शियन (Egyptian) वाक्य : "आदि/शुरुआत में वचन था, " (बाइबिल का यहुन्ना चैप्टर १ आयत १ ) इसे प्राचीन मिस्र (Egypt ) से चुराया गया था . [नकली परमेश्वर यहोवा ने मिस्र के परमेश्वर पताः (PTAH) की जगह ले ली ] , * सन्दर्भ - १०१ मिथ्स ऑफ़ दी होली बाइबिल - गैरी ग्रीनबर्ग द्वारा © 2000 , पृष्ठ ११-१३ में . सारा संसार कम्पन्न करता है और कम्पन्न करके , हम अपनी आत्मा को अत्यंत शक्तिशाली बनाते हैं और हमारे जादू को परिवर्धित करते हैं अर्थात उसे बढ़ाते / उसका विस्तार करते हैं. वास्तविक वर्णमाला तारामंडल / नक्षत्र पर आधारित है . हर चीज़ की तरह , यहूदी हमेशा यह दावा करते हैं की "हिब्रू वास्तविक भाषा और वर्णमाला है " परन्तु ऐसा नहीं है . विश्वसनीय सेक्युलर (जो धर्म से सम्बंधित न हो ) सूत्रों और मूल पाठों का आवश्यक अनुसन्धान करने पर , एक (व्यक्ति ) पायेगा की "हिब्रू " फिनिशियन (Phoenician) और दूसरी भाषाओँ से ली गयी थी जो उससे पहले थीं . ऐसा भी प्रतीत होता ही की हिब्रू हिंदी से ली गयी थी और हिब्रू के कई शब्दों का उद्गम हिंदी में ही हुआ . कोई भी जिसके पास ज्ञान है , हम सब जानते हैं बाइबिल इसीलिए लिखी गयी थी ताकि यहूदियों को एक इतिहास और एक हैसियत मिले जो उनके पास कभी नहीं थी और ना ही वे उसके लायक हैं .

आप रियून का पता लगा सकते हैं की ये इतने पुराने हैं की आप प्राचीन फिनिशियन और कीलाकार लिपियों को देख लें . यह है उनकी शक्ति . बहुत सारे सही उच्चारण , दुःख के साथ , गुम गए हैं आध्यात्मिक ज्ञान के व्यवस्थित विनाश करने के करण और उसको हिब्रू बकवास के साथ प्रतिस्थापित करने के द्वारा . (अर्थात बकवास भ्रष्ट हिब्रू ने सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान की जगह ले ली है ).

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Post Mon Nov 23, 2015 11:09 am

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रियून्स को उपयोग करना -

Source URL - http://dawn666blacksun.angelfire.com/Runes.html

काबलाह वास्तव में बहुत स्पष्ट हो जाता है जब उससे व्यर्थ की यहूदी बकवास और संशोधन / तब्दीलियां हटा दी जाती हैं . काबलाह का जादू अक्षरों और अंको पर आधारित होता है , जिसमे प्रत्येक अक्षर एक अंक से सम्बन्ध रखता है / मेल खाता है . अक्षर के नाम को कम्पन्न किया जाता है एक विशेष ध्यान केंद्रण (ध्यान को केंद्रित करते हुए ) के साथ आपके चुने हुए (आप जो चक्र चुने ) चक्र पर , आपकी आत्मा के एक पहलू पर जिसे औरा अर्थात आभा कहते हैं.[ इसके बारे में विस्तार से अगले लेख में समझाया गया है.] , या एक शरीर के अंग पर (उसे शक्तिशाली बनाने के लिए या उसकी चंगाई के लिए ). इसका आधार है " योगिक हमिंग ब्रेथ अर्थात योगिक गिनगिनानेवाली सांस . "

उदाहरण एक -
चंगाई हेतु ध्यान -

1 . समाधी की अवस्था में जाएँ और ऊर्जा को सांस के साथ अंदर लें उस विशेष अंग में जिसे चंगाई की आवश्यकता है . इसका दृश्य बनायें / कल्पना करें एक सफ़ेद - सुन्हेरी (सोने के रंग वाली ) प्रकाश का सूर्य के जैसे.

2 . अपना अफर्मेशन (दृढ़ता के साथ कहने को अफर्मेशन कहते हैं अंग्रेजी में ) कहें जैसे की - "मैं एक शक्तिशाली चंगाई देने वाली ऊर्जा अंदर सांस में ले रहा हूँ / रही हूँ जो मेरे {अंग का नाम } के रोग से मुझे छुटकारा दिला रही है , और {उस अंग को } मज़बूत और स्वस्थ बना रही है हर तरीके में ." . ऐसा आपको दृढ़ता के साथ कहना है अपने मन में , हर सांस के साथ .

3 . आप ऊर्जा को सांस के साथ अंदर लें और सांस को बाहर छोड़ने पर , कम्पन्न करें उस रियून के नाम को जिसका आप उपयोग करना चाहते हैं. माना आप "उरूज़" (Uruz) रियून का उपयोग करना चाहते हैं , तो आप ऊर्जा को अंदर सांस में लेंगे और सांस को बाहर छोड़ते समय , आपको ध्यान केंद्रित करना है कम्पन्न पर ताकि आप उसे प्रत्यक्ष तौर से *महसूस * कर सकें. आपको उस अंग में जिसे आप चंगा करना चाहते हैं उसमे कम्पन्न करना है - ऊऊऊऊऊऊऊ -ररररर (र अर्थात R को लुढ़कना है ) - ऊऊऊऊऊऊऊ-ज़ज़ज़ज़ज़ज़ज़ज़ज़ .

4 . उरूज़ के लिए अंक है दो , तो आप इस रियून को कम्पन्न करेंगे उस अंक के लिए जो दो से मेल खाए , जैसे की बीस बार प्रत्येक सेशन / सत्र के लिए.

मैडिटेशन (ध्यान ) के दौरान आप कल्पना करें / दृश्य बनाये उरूज़ रियून का जैसा आप चाहें . समय के साथ , जब आप अपना मन खोल लेते हैं , यह सब एक साथ हो जाता है . रियून को शक्ति के साथ चमकना चाहिए.

उदहारण दो -
एक चक्र को शक्तिशाली बनाने के लिए -
माना आप अपने हार्ट अर्थात अनाहत चक्र को शकितशाली बनाना चाहते हैं , तो आप गेबो (Gebo) रियून का उपयोग करेंगे क्यूंकि यह रियून इस चक्र का स्वामी है .

1 . समाधी की अवस्था में जाएँ और सांस के साथ ऊर्जा को अंदर लें अपने हार्ट अर्थात अनाहत चक्र में और इसका दृश्य बनायें / कल्पना करें एक सफ़ेद - सुन्हेरी (सोने के रंग वाली ) प्रकाश का सूर्य के जैसे , क्यूंकि सूर्य गुप्त स्वामी है हार्ट अर्थात अनाहत चक्र का और और यह केंद्र है आत्मा की शक्ति का .

2 . गेबो रियून का कम्पन्न करें और महसूस करें उसे की वो कम्पन्न हो रहा है ठीक आपके हार्ट अर्थात अनाहत चक्र में - गगगगगग - [यह कंठस्थ (कंठ से उच्चारण होने वाला ) होता है और ध्वनि को लम्बा लिया / किया जाता है गले के पीछे जो की ऊर्जा की एक शक्तिशाली परिधि / सर्किट बना देता है ]- ऍऍऍयययययय - बबबबबबबबबबब (इसे होठों पर कम्पन्न किया जाता है ) -ओओओओओओहहहहहहहहहह .
गेबो रियून का अंक सात है . इसीलिए या तो आप इस रियून को कम्पन्न करेंगे सात बार प्रत्येक मैडिटेशन (ध्यान ) में या सात के गुणांक / गुणज में जैसे 70 , 77 आदि .

उदाहरण तीन -
अपनी ऊर्जा का उपयोग करना , अपनी औरा अर्थात आभा को शक्तिशाली बनाने के लिए ताकि किसी को / किसी चीज़ को आकर्षित किया जा सके .

1 . समाधी की अवस्था में जाएँ , अपनी आभा अर्थात औरा को महसूस करें और उसमे सांस के साथ ऊर्जा को अंदर लें .

2 . अपना अफर्मेशन (दृढ़ता के साथ कहने को अंग्रेजी में अफर्मेशन कहते हैं ) कहें जैसे की , - "मैं एक शक्तिशाली ऊर्जा मेरी आभा के अंदर सांस से ले रहा हूँ / रही हूँ जो {वस्तु / व्यक्ति का नाम } को मेरी ओर आकर्षित कर रही है .".

3 . जिस रियून को आप कम्पन्न करना चाहते हैं उसे कम्पन्न करें और कम्पन्न को अपनी और में महसूस करें .
इस दोहराये विशेष संख्याओं के लिए रियून के अंक के अनुसार. बहुत सारे रियून होते हैं और उनके अंक अलग अलग होते हैं. अगले लेख में आपको सभी रियूनो , उनके अंको और उपयोगों के बारे में विस्तार से बताया जायेगा.

नोट / टिप -

रियून को कम्पन्न करने में बहुत सारे अभ्यास और एकाग्रता की आवश्यकता होती है . यह सबसे अच्छा है की आप कहीं चले जाएँ , जहाँ आप अकेले हों और आपको कोई डिस्टर्ब न करे , जहाँ आप ज़ोर ज़ोर (ध्वनि के साथ / बोलकर ) से कम्पन्न कर सकते हैं . मैं म्यूजिक सुनती हूँ हेडफोन्स पर क्यूंकि यह मुझे मदद करता है कम्पन्न पर ध्यान केंद्रित करने में और ठीक से कम्पन्न को महसूस करने में जो अत्यंत आवश्यक है . आपको जो भी लगे आप वो करें क्यूंकि हम सब व्यक्ति हैं और सब के अपने व्यक्तिगत तरीके होते हैं.

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Post Mon Nov 23, 2015 11:41 pm

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आत्मा के पहलू


Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... _Soul.html

वहां बहुत सारे विभिन्न पहलू हैं जो मानव आत्मा को बनाते हैं . औरा अर्थात आभा , प्रकाश का शरीर , चक्र , आकाशीय प्रतिरूप , (एथेरिअल डबल ) - यह वह भूत होता है जो भौतिक शरीरकी छवि पर होता है , और बुद्धिमता / चेतना . मानव आत्मा तत्वों की बानी होती है - अग्नि , पृथ्वी , वायु , जल और क्विंटएसेंस (सबसे उत्तम गुणवत्ता) की .

अनुसन्धान में , मैंने पायी हैं प्रमुख विसंगतियों / विरोधों को लेखकों के बीच में , का (KA) , बा (BA) , अख (AKH) और साहू (SAHU) जैसे विशिष्ट पहलुओं को लेकर . ये का , बा , अख और साहू - ये आत्मा के भाग / हिस्से हैं प्राचीन मिस्रियों (इजिप्शियन ) द्वारा परिभाषित. जो की मैं समझ सकती हूँ , वास्तविक अर्थ रेन (REN) के मिस्री संकल्पना / सिद्धांत , होता है व्यक्तिगत कम्पन्न आत्मा का . इसका मिस्री अर्थात इजिप्शियन (Egyptian) काबलाह (का बा अख / KA BA AKH) से लेना देना है . मूल रूप से , काबलाह मिस्री था , और उद्देश्य था आत्मा के विभिन्न पहलुओं पर मैडिटेशन (ध्यान ) करना , अलग अलग और एक साथ दोनों संयोजनों / गुटों / जोड़ों में . यह अत्यंत , अत्यंत उन्नत है .

मानव आत्मा को इच्छा अनुसार विभाजित किया जा सकता है मैडिटेशन (ध्यान ) के दौरान . यही होता है इच्छापूर्वक नक्षत्रिक प्रक्षेपण करने के दौरान या अनैच्छिक "शरीर से बाहर के अनुभवों में ". जिस प्रकार आत्मा को इच्छा पर विभाजित किया जा सकता है , उसी प्रकार आत्मा का इच्छा पर पुनर्मिलन (फिर से एक कर देना ) किया जा सकता है . आत्मा का विलय किया जा सकता है दूसरे व्यक्ति की आत्मा के साथ .

आभा अर्थात औरा का विस्तार किया जा सकता है / बढ़ाया जा सकता है और उसे सिकोड़ा जा सकता है इच्छा पर. उसे क्रमोदेशित किया जा सकता है की वो किसी चीज़ को आकर्षित करे या पीछे धकेल दे , इच्छा पर. औरा अर्थात आभा को क्रमोदेशित किया जा सकता है इच्छा पर की , वो दूसरे (व्यक्ति ) की आभा पर कार्य करे बेहतरी या नुक्सान के लिए.

आत्मा का प्रत्येक पहलू के ऊपर अलग से मैडिटेशन (ध्यान ) किया जा सकता है और उसे शक्तिशाली बनाया जा सकता है . प्रत्येक पहलू आव्हान कर सकता है और पकड़ के रख सकता है तत्वों में से प्रत्येक को. यह अत्यंत उन्नत (क्रिया ) है और बहुत खतरनाक हो सकती है अगर एक (व्यक्ति ) नहीं जानता की वह क्या कर रहा है .

नीचे चित्र बतलाती हैं दो प्रमुख भाग आत्मा के . इसे समझ लें , प्रकाशमान शरीर का कोई आकार नही होता है. हालाँकि दोनों चित्र सफ़ेद प्रकाश वाले हैं नीचे , ये शरीर किसी भी रंग के हो सकते हैं और रंग बदल सकते हैं , ये निर्भर करता है मनोदशा , स्वास्थ , भावनाओं आदि पर . ये एक से अधिक रंग के भी हो सकते हैं.

ये जो ऊपर मैंने बताया है , ये मैंने अपने स्वयं के प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर बताया है और यह विचार नहीं है.

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Post Wed Nov 25, 2015 3:22 am

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Translation in progress , This article is BIGGGGGGGG :mrgreen:

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Post Thu Nov 26, 2015 4:37 am

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रियून्स के नाम -

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpentis666/Odin.html

फुठार्क/ओडिन (Futhark /Odin)

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फेहू (FEHU)
जर्मेनिक(Germanic) - फे अर्थात Fe (Fehu)
गोथिक (Gothic) - फैहू (Faihu)
नोर्स (Norse) - Fé
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - फिओ (Feo) , फेओह (Feoh)
आइसलैंडिक (Icelandic) - Fé
नॉर्वेजियन (Norwegian) - Fé

यह रियून फुठार्क (Futhark) वर्णमाला शुरू करता है और यह तीन ættir में से पहला है . यह चित्रण करता है बीस्ट ऑफ़ बर्डन का (बीस्ट ऑफ़ बर्डन प्राचीन मिस्र का एक पालतू जानवर है ) . परिश्रमी / दास सम्बन्धी , बेवकूफ , धीमा , पालतू और कोमल / सौम्य. कायर . यह भेजा जाने वाला रियून है जिसका हम जादू में उपयोग करते हैं . बढ़ने के लिए , विनाश करने के लिए भटकने के लिए .

सकारात्मक पहलू - सफ़ेद / सकारात्मक / अच्छा जादू :
लक्ष्मी ,संपत्ति, सम्मान, जायदाद , धन, विस्तार. एक (व्यक्ति ) के वातावरण में शक्ति प्राप्ति , धन का बढ़ना , प्रजननशक्ति , गतिशीलता बढ़ाता है .

काला/नकारत्मक जादू - डरपोंक बनाता है , सुस्त करता है , आत्मा / भाव / साहस को तोड़ता है , शत्रु को बांधता है ; डर पैदा करता है और शत्रु को किसी के आश्रय में जाने पर मज़बूर करता है .


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उरूज़ (ÜRUZ), औरोच्स (AUROCHS )
जर्मेनिक(Germanic) - उर (UR )
गोथिक (Gothic) - उरज़ (उरूज़)
नोर्स (Norse) - Úr
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - उर (Ur)
आइसलैंडिक (Icelandic) - Úr
नॉर्वेजियन (Norwegian) - उर (Ur)

औरोच्स (AUROCHS ) जंगली बैल की एक प्रजाति है जो यूरोपियन जंगलों में रहती थी . १६०० के द्वारा , इसका विलुप्त होने तक शिकार किया गया. यह रियून ब्रह्मांडीय / अलौकिक बीज, शुरुआत एवं उत्पति है. यह प्रकृति में पुरुषवाचक है और शक्ति , स्थिरता / सहनशक्ति और योद्धा बनाता है . यह रियून है साहस और दिलेरी का , स्वतंत्रता और विद्रोह का . उर (UR ) प्रतिनिधित्व करता है उत्थित शिश्न शिश्न का , जी उठने का (प्रलय के दिन ) , जीवन का मृत्यु के बाद . आना , रहना और चले जाना .
सफ़ेद / सकारात्मक / अच्छा जादू : कर्म को उत्तेजित करता है , योन शक्ति का विस्तार करता है . स्वतंत्रता .

काला/नकारत्मक जादू : उपयोग किया जाता है धमकाने और विनाश करेने के लिए

जादू - ऊर्जा का हस्तांतरण करने में , ऊर्जा को डालने / प्रक्षेपित करने और खींचने के लिए. इस रियून का लगातार प्रयोग क्रमशः / धीरे-धीरे ऊर्जा की मात्रा बढ़ा देता है जिसे एक (व्यक्ति ) नियंत्रित कर सकता है / संभाल सकता है एक दिए हुए समय में. एक (व्यक्ति ) के ऊर्जा के भण्डार को बढ़ने में मदद करता है . जब दुसरे रियून के साथ फा (Fa) का उपयोग किया जाता है , तो यह कार्य करता है किसी भी अन्य रियून की ऊर्जा बढ़ाने का जिसके साथ इसका (फा Fa का )उपयोग किया जाता है अच्छे बुरे दोनों के लिए . अर्थात अगर आप कोई अन्य रियून का उपयोग अच्छे कार्य के लिए कर रहे हैं और फा का उपयोग करते हैं उसके साथ , तो वो अच्छा कार्य की ऊर्जा शक्ति बढ़ेगी . इसी तरह कोई अन्य रियून का उपयोग बुरे कार्य के लिए कर रहे हैं और फा का उपयोग करते हैं उसके साथ , तो वो बुरे कार्य की ऊर्जा शक्ति बढ़ेगी. अच्छे का अर्थ यहाँ - स्वयं या स्वयं के चहेतों की सहायता आदि , दूर अर्थ यहाँ - शत्रु का नुकसान , विनाश आदि . निपुण (व्यक्ति / अभ्यासी ) फा लो शक्तियों को ईसा (Isa) अर्थात [अग्नि और बर्फ / हिम ] की शक्तियों के साथ मिला सकते हैं , परन्तु यह उन लोगों के लिए जो नए और अनुभवहीन हैं , यह ऐसे लोगों के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है . हरा और जगमगाता हुआ सोना (गोल्ड ) बहुत अच्छा कार्य करता है इस रियून की शक्तियों के साथ .


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थुरीसाज़[THURISAZ] (थोर्न )[THORN] -
जर्मेनिक(Germanic) - थिथ (Thyth) थुरीसाज़ [Thurisaz ]
गोथिक (Gothic) - थॉरिस (THAURIS)
नोर्स (Norse) - Þurs
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - Þurs
आइसलैंडिक (Icelandic) - Þurs
नॉर्वेजियन (Norwegian) - थुर्स

यह रियून है कटाई का , तीखेपन / कुशाग्रता और दर्द का . निर्दयी शक्ति , विनाशक शक्ति अराजकता और विध्वंस की . यह रियून मृत्यु और पुनर्जन्म का भी है , साथ ही परिवर्तन और अवरोधों को तोड़ने वाला भी है . इस रियून की शक्ति अति अधिक हैं और एक मज़बूत मन / इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है इसे निर्देशित करने के लिए. उर (Ur) सहायता करता है दूसरे रियून्स की ऊर्जाओं की ताकि वे अपना कार्य कर सकें . एक चमकती हुई बिजली की झरी /खम्भे के जैसे , थोर्र (Thorr) लता है ऊर्जाएं बेरसेर्कर (बेरसेर्कर / Berserker एक महान नॉर्स योद्धा हैं . बेरसेर्कर का हिंदी में अर्थ होता है निडर ) की . इतनी अधिक शक्तिशाली ऊर्जाओं का उपयोग केवल युद्ध अथवा हमले में ही होना चाहिए. यह थंडरस्टॉर्म्स अर्थात बिजली और वज्रध्वनि के साथ वाली आंधी को प्रकट कर सकता है और उस बिजली को निर्देशित करता है . बहुत सारी जर्मन (जर्मन देश की ) पारी कथाओं में , जैसे के "स्लीपिंग ब्यूटी " , एक कांटें का चुभना , एक पिन का चुभना या धुरा का चुभना (धुरा एक प्रकार का औजार होता है ) इससे एक जादू निकलता / गिरता था शिकार पर. ब्लडस्टोन (Bloodstone) जो की एक प्रकार का रत्न है , इसका उपयोग किया जा चुका है इस रियून के साथ ताकि थन्डरस्टॉर्मस को शुरू किया जा सके. हीमटाईट (Hemtite) यह भी एक प्रकार का खनिज/धातु है जब इसका उपयोग किया जाता है इस रियून के साथ तो यह विद्युत चुंबकीय ऊर्जाओं के विरुद्ध एक ढाल बन जाता है और इसिलए ये श्रापों को मोड़ने / खदेड़ने में मददगार साबित होता है . इस रियून का उपयोग करना एक नुकीले क्रिस्टल / Crystal अर्थात जिसको माणभ भी कहते हैं , तो यह ऊर्जा को केंद्रित करता है और ऊर्जा का प्रक्षेपण करता है .

काला/नकारत्मक जादू - यह विनाश लाता है और भ्रम उत्पन्न करता है . थोर्र (Thorr) का उपयोग शत्रुओं के विनाश के लिए और श्रापों में किया जाता है. यह दूसरे को नियंत्रण में रखने के लिए या व्यक्ति को अनरक्षित अर्थात बिना बचाव के रखने के लिए किया जाता है . सरल शब्दों में ऐसा व्यक्ति अपना बचाव नहीं कर पाता.

सफ़ेद / सकारात्मक / अच्छा जादू : चंगाई देने वाला रियून है . बुद्धिमता बढ़ाता है, साहस देता है , भौतिक / शारीरिक शक्ति देता है , स्वावलंबन / स्वतंत्रता और नेतृत्व क्षमता देता है .


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अन्सुज़ (ANSUZ) [गॉड / GOD]
जर्मेनिक(Germanic) - अजा (Aza) अन्सुज़ (Ansuz)
गोथिक (Gothic) - अनसुस (Ansus)
नोर्स (Norse) - Óss, Áss
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - Aesc, (Os, Ac)
आइसलैंडिक (Icelandic) - Óss, Áss
नॉर्वेजियन (Norwegian) - अस

यह रियून है भाषा / भाषण की शक्ति का , विनाश करता है उत्पीड़न / अत्याचारी शासन का, ; "तुम्हारी आध्यात्मिक शक्ति तुम्हे स्वतंत्र (अर्थात बंधनो ) से मुक्त करती है " - वाली व्यवस्था , अराजकता का उल्टा , रचनात्मक प्रेरणा , जादुई वाक चातुर्य क्षमता / सामर्थ्य और दूसरों को और सुनने वालों को / दर्शकों को राज़ी करवाना भाषण के द्वारा. आत्म अभिव्यक्ति के प्रवाहको खोलता है और हर प्रकार के अवरोधों को तोड़ देता है और आपको आगे बढ़ाता है . बंधनो को हटाने के लिए उपयोग किया जाता है . सहायता करता है एक (व्यक्ति ) की आध्यात्मिक / आत्मिक / अलौकिक और जादुई सामर्थ्य को बढ़ाने में . आव्हान के कार्य में भी उपयोग किया जाता है . लापीस लज़ूली (Lapis Lazuli) जो की एक प्रकार का पत्थर होता होता है , उसके साथ जब इस रियून का उपयोग किया जाये तो यह डीमॉन्स से बातचीत / संपर्क स्थापन हेतु कार्य आता है .



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रायढो (RAIDHO) - (आरोहण / सवारी , सफर )
जर्मेनिक(Germanic) - रेडा / Reda (रायढो )/(Raidho)
गोथिक (Gothic) - रायडा (Raida)
नोर्स (Norse) - Reið, Reiðr
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - राड / Rad
आइसलैंडिक (Icelandic) - Reið
नॉर्वेजियन (Norwegian) - रेड / Reid, रेडर / Reidr

यह रियून है सफर , यात्रा और शारीरिक सहनशक्ति का . इस रियून का उपयोग यात्रिओं के लिए एक आकर्षण के रूप में किया जा चुका है , इसमें एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक यात्रायें शामिल हैं इसके अलावा रैढ/Reidh एक मार्गदर्शक का भी कार्य करता है मृतकों के लिए उनकी यात्रा में दूसरी दुनिया की . यह स्थानांतरण का भी रियून है जैसे की चलता हुआ घर.रैढ/Reidh का अर्थ खोजना एवं प्रयास करना / उद्यम करना भी होता है ; एक खोज / अनुसंधान को और अज्ञात में कदम रखने को . यह रियून ऐसा जादू करता है की जब इसकी शक्तियां किसी अन्य (व्यक्ति ) को निर्देशित की जाती हैं तो वह व्यक्ति (जिस पर निर्देशन किया गया है ) वह बेचैन और असंतुष्ट हो जायेगा. यह जीवन में परिवर्तन लाता है अच्छा और बुरा दोनों जो इस बात पर निर्भर करता है की इस रियून का उपयोग किस अन्य रियून के साथ किया गया था कार्यचालन में . रैढ/Reidh सोलर अर्थात सूर्य का रियून भी है और यह आमोन रा (Amon Ra) के रथ का भी प्रतीकात्मक है . अमोना रा मिस्री (Egyptian) भगवान हैं सूर्य के और प्रतिनिधित्व करते हैं ग्रेटर सब्बात के अष्टांग चक्र / परिक्रमा को . (ऐटफोल्ड साइकिल ऑफ़ दी ग्रेटर सब्बात ) . रैढ/रीढ़ एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक यात्राओं में भी सहायता देता है . यह रियून है ताल का और म्युज़िक का . रैढ/Reidh एक (व्यक्ति को ) जीवन में प्राकृतिक तालों की भी जानकारी देता है और मदद करता है की वो एक (व्यक्ति ) अपने समय को बेहतर संगठित / व्यवस्थित कर ले . यह रियून प्रतिनिधित्व करता है न्याय का और क़ानून के सार / अर्क का . और Tyr (टिर ) अक्षर है कानून का . इस रियून का अनुष्ठान में उपयोग किया जा सकता है गति को शक्ति देने के लिए - ड्रमिंग (ढोलक बजाना ), नाचना , ताली बजाना आदि .


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केनाज़ (KENAZ) [टोर्च / Torch]
जर्मेनिक(Germanic) - चोज़मा / Chozma (केनाज़ / Kenaz)
गोथिक (Gothic) - कौन (Kaun)
नोर्स (Norse) - कौन (Kaun)
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - सेन (Cen) , केन (Ken)
आइसलैंडिक (Icelandic) - कौन (Kaun)
नॉर्वेजियन (Norwegian) - कौन (Kaun)

यह रियून है रौशनी / प्रकाश का . आत्मा के प्रकाश का , और बुद्धिमता का . यात्रीगण दूसरी दुनिया के सफर पर कौन /Kaun रियून ले जाते हैं (रास्ता ) उजागर करने और मार्गदर्शन के लिए. इस रियून का आकार एक डेल्टा /Delta के जैसे होता है और भेदने वाला (नुकीला ) होता है शांत सुगम उड़ान हेतु . काले जादू अर्थात नकारत्मक जादू में , इस रियून का उपयोग किया जाता है (शत्रु की ) मूर्खता को बढ़ाने के लिए और यह (रियून ) ऐसा काम करता है की शिकार को इसकी जानकारी न हो. यह रियून सूजन ,दाह , घावों और फोड़ों का भी प्रतिनिधित्व करता है . यौन शक्तियों को नियंत्रित करने और यौन शक्तिओं को तैयार करने / उपयोग करने में इस रियून का उपयोग होता है . यह यौन जादू कार्यचालनो (कार्यों ) में कार्य करता है , इसका अक्सर दूसरे अग्नि ( तत्व ) रियून्स के साथ उपयोग किया जाता है शक्ति के स्थानो में आत्माओं को छोड़ने / रिहा करने के लिए. इस रियून का उपयोग दूसरों के भावों / भावनाओं को निर्देशित करने और नियंत्रित करने के लिए भी किया जा सकता है. प्रतिभा प्रदान करता है जो की यौन शक्तिओं से जुडी होती है . यह रियून कुंडलिनी के उत्थान में उपयोगी है . अग्नि अगट (agat) एक प्रकार का पत्थर और अग्नि ओपल (Opal) जिसे दूधिया पत्थर भी कहा जाता है , इन दोनों का इस रियून के साथ उपयोग किया जा सकता है , विशेषकर जब यौन जादू पर कार्य किया जा रहा हो .



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गेबो /GEBO (तोहफा / Gift)
जर्मेनिक(Germanic) - गेऊआ / Geuua (गेबो / Gebo)
गोथिक (Gothic) - गिबा / Giba
नोर्स (Norse) - Giöf
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - गीओफू / Geofu (Gyfu)
आइसलैंडिक (Icelandic) - Giöf
नॉर्वेजियन (Norwegian) - गिओफ (Giof)

यह रियून है बलिदान का और दान / देने का . कोई चीज़ जिसका व्यक्तिगत मूल्य जो फ्री (मुफ्त )में दे दी गयी हो , जैसे की हमारा खून , जब हम रियून को पवित्र करने की इच्छा करते हैं इस तरीके में . यह रियून है पहल / प्रारम्भ / आरम्भ का जब हम व्यक्तिगत बलिदान देते हैं , ज्ञान प्राप्त करने , शक्ति प्राप्त करने और बुद्धिमता प्राप्त करने के लिए. दर्द नहीं , लाभ नहीं .

जादुई तौर पर , गिप्ट / Gipt तोहफों का देने वाला है / दाता है . गिप्ट / Gipt संबंधित है शादियों और गठबंधनों से. गिप्ट / Gipt का यौन जादू में और बाँधने वाले जादू में भी उपयोग किया जाता है . इस रियून का उपयोग किसी दूसरे (व्यक्ति ) को एक अनचाहे कर्तव्य में बांधने के लिए किया जा सकता है और इस रियून का उपयोग प्रेम (अभिभूत करने ) वाले जादू में भी किया जा सकता है . एमराल्ड (Emrald) और जेड (Jade) दो जवाहरात / कीमती पत्थर हैं जिनका इस रियून के साथ उपयोग किया जाता है. जब काले / नकारत्मक जादू में इस रियून का उपयोग किया जाता है , तो यह रियून दर्द और बलिदान लता है शिकार के ऊपर बिना किसी इनाम के . जब ईसा / Isa रियून के साथ इस रियून का उपयोग किया जाता है तब , इनका संयोग / मिलना शक्तिशाली होता है शत्रुओं को बांधने में.


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वुन्जो / WUNJO
जर्मेनिक(Germanic) - Uuinne (Wunjo)
गोथिक (Gothic) - विंजा / Winja
नोर्स (Norse) - वेण्ड / Vend
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - विन्न (Wynn)
आइसलैंडिक (Icelandic) - विन / Vin
नॉर्वेजियन (Norwegian) - विन्न (Wynn)

वुन्जो /Wunjo रियून है सम्मान और पुरस्कार का . हमारे प्रयास पुरुस्कृत होते हैं. रौशनी / प्रकाश के साथ मिलने पर वेण्ड / Vend परमानंद है. अधिकार, आदर और शक्ति. यह रियून अति उत्तम है तनाव को बाँधने के लिए. यह मदद कार्य है परिवार के सदस्यों को एक रहने में और मित्रता सुधारता है. एक (व्यक्ति ) के स्वयं के और दूसरों के अवरोधों को तोड़ता है. जब इस रियून को काले जादू के लिए , निर्देशित किया जाता है तो यह रियून का उपयोग अति आत्मविश्वास पैदा करने के लिए और गलत चीज़ों में विश्वास पैदा करने के लिए किया जा सकता है शिकार पर , जिससे उनका पतन होने लगता है. वेण्ड / वेण्ड चंगाई देने वाला भी रियून है क्यूंकि यह मन और शरीर दोनों की चंगाई प्रदान करता है. यह रोगों को दूर रखता है / भगा देता है . यह हार्ट अर्थात अनाहत चक्र पर कार्य करने के लिए भी अच्छा है. टोपाज़ (Topaz) जो की एक कीमती पत्थर है , वह इस रियून की (क्षमताओं ) का विस्तार करता है. रोज़ क्वार्ट्ज़ / ROSE QUARTZ जो की एक प्रकार का पत्थर है वो भी इस रियून की क्षमताओं की वृद्धि करता है. आत्मा सम्मान और आत्मा विश्वास बढ़ाने के लिए यह रियून अच्छा है .

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हगल / HAGL (हेल / HAIL)
जर्मेनिक(Germanic) - हाल / Haal (हगलज / Haglaz)
गोथिक (Gothic) - हगल (Hagl)
नोर्स (Norse) - हगल्ल / Hagall
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - Hægl
आइसलैंडिक (Icelandic) - हगल्ल / Hagall
नॉर्वेजियन (Norwegian) - हगल (Hagl) , हगल्ल / Hagall

यह रियून हेलस्टोन्स / Hailstones (ओलों ) का प्रतिनिधित्व करता है. अनैच्छिक बलिदान बिना पुरूस्कार के ; यह एक रियून है पीड़ा और अन्याय का . यह एक रियून है विनाश , आपदा और हिंसा का . इस रियून का मुख्य उपयोग काले जादू में किया जाता है - किसी भी रूप में विनाश भेजने के लिए (जो भी रियून इसके साथ उपयोग किये गए थे उनकी विनाश ऊर्जा भेजने के लिए ) , प्रचंड नुक्सान और दर्द भेजने के लिए. हगल /Hagl एक रियून है सम्पूर्णता का और अंक नौ (9) का. नौ (9 ) सबसे महानतम जर्मन (जर्मन देश का ) अंक है शक्ति का और यह नौ अंक सेटन का भी अंक है , क्यूंकि यह अंक मुख्य अंकों की संख्या के बराबर है .

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नॉथइज़ / NAUTHIZ(आवश्यकता / Need)
जर्मेनिक(Germanic) - Noicz (नॉथइज़ / Nauthiz)
गोथिक (Gothic) - नॉथ्स / Nauths
नोर्स (Norse) - Nauð, Nauðr
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - नाइद/ Nied (निद/ Nyd)
आइसलैंडिक (Icelandic) - Nauð
नॉर्वेजियन (Norwegian) - नौद्र / Naudr , नौद / Naud

नॉथइज़ /Nauthiz एक रियून है सहनशक्ति और इच्छा / इच्छाशक्ति का . मानसिक शक्ति जो आखिरी तक रहे . यह आत्मा की काली रात्रि का प्रतिनिधित्व करता है . यह हगल / Hagl रियून से जुड़ा हुआ होता है. जब सफ़ेद / सकारत्मक जादू में इस रियून का उपयोग किया जाता है , तो यह रियून ललकारता है और शक्ति देता है जब साड़ी आशाएं समाप्त होती प्रतीत होती हैं . यह रियून है उत्तरजीविता (जीवन विरुद्ध स्थिति में जीवित रहने का ) और मृत्यु की घडी में निर्भयता / निडरता का . जब किसी दूसरे (व्यक्ति ) पर इस रियून को निर्देशित किया जाता है , तो यह रियून आध्यात्मिक शक्ति दे सकता है की वो (व्यक्ति ) आपदा की घडी में आगे बढ़ता रहे और टीके रहे . जब काले / नकारत्मक जादू में इस रियून का उपयोग किया जाता है , तो यह पीड़ा और कठिनाई लता है. नौध /Naudh एक रियून है संघर्ष / घर्षण और प्रतिरोध का. यह रियून है निर्वासित करने और अग्नि द्वारा शुद्धि का . नौध / Naudh का उपयोग काउंटर स्पेल्स अर्थात जदुओं को पलटने के लिए किया जा सकता है. इच्छा / इच्छाशक्ति और आत्मा निर्भरता प्रदान करता है. यह रियून है इम्तहान और परिक्षण का. ओब्सीडियन (Obsidian) जो की एक रत्न है वह इस रियून के साथ उपयोग किया जाता है. ओब्सीडियन (Obsidian) शनि ग्रह का भी रत्न है जो कठनाई और सहनशक्ति प्रदान करता है.

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ईसा / ISA (बर्फ / Ice)
जर्मेनिक(Germanic) - Icz (ईसा / Isa)
गोथिक (Gothic) - Eis
नोर्स (Norse) - Íss
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - इस / Is
आइसलैंडिक (Icelandic) - Íss
नॉर्वेजियन (Norwegian) - इस / इस

यह रियून है बंधन / बांधने का . यह प्रतिनिधित्व करता है स्टील्थ (जिसका पता न लगाया जा सके ) और स्नीकिनेस्स (चुपके से जाना ) और उपयोग किया जाता है उन जगह जहाँ पर एक (व्यक्ति ) इच्छा करता है की वह बिना दिखे / पकडे आगे बढे. इस्स/Iss अदर्शन (अदृश्यता ) प्रदान करता है / प्रकृति में बर्फ धरती पर फ़ैल जाती है , चुपचाप जमते हुए और उसके रास्ते की हर चीज़ को स्थिर / गतिहीन कर देती है. अनजान इसके शिकार बन जाते हैं. जादुई रूप से , इस्स / Iss एक रियून है बांधने / बंधन का और छुपे हुए तरीकों से कर्म / कार्यों को रोकने का . यह एक योजना / परियोजना को रोक सकता है और किसी चीज़ के विकास को भी रोक सकता है . यह रियून छुपाने के लिए उपयोग किया जाता है और एक शिकार को अनजान बना सकता है की उसके ऊपर कैसी व्यक्तिगत आपदा आने को है और उस शिकार को कोई भी कार्य उस आपदा को रोकने के लिए वो जो करेगा उसमे तब तक बहुत देर हो गयी होगी . यह रियून किसी कार्य / कर्म को रोकने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है और यह किसी भी परियोजित / योजनाबद्ध गतिविधि को रोक सकता है . ईसा/ Isa कर्म / प्रयासों / कार्यों को जमा देता है और यह रियून है ठण्ड / निरुत्साह का, व्यर्थ (बिना कोई काम की ) स्थिरता का और मृत्यु का . ईसा / Isa फेहु /Fehu का ठीक विपरीत है . फेहु / Fehu गतिशीलता का रियून है , ईसा / Isa बंधन / बाँधने का रियून है . जब किसी अन्य (व्यक्ति ) पर उपयोग किया जाता है यह ईसा रियून तो , यह लाता है - बंध्यता / दरिद्रता , समृद्धि को रोकता है , तनाव का कारण बनता है और कोई भी कार्य के लिए बाधा बनकर खड़ा हो जाता है. इस रियून का उपयोग लकवा मार देने वाला डर पैदा करने , सनक / मनोग्रस्ति पैदा करने और या गतिशीलता को रोकने दोनों की - विकास और विघटन दोनों की गतिशीलता को रोकने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है. एक और अधिक सकारात्मक टिप्पणी पर , यह रियून रिक्त ध्यान में सहायक होता है क्यूंकि यह एकाग्रता , शांति और मार्गदर्शन लाने में और मन को रिक्त करने में मदद करता है . ध्यान रखने की आवश्यकता होती है क्यूंकि यह रियून उपयोगकर्ता को सनकी / मनोग्रस्त और सुस्त बना देता है . यह रियून हिस्टीरिया (Hysteria) जो एक एक बीमारी होती है , बेचैनी , और अति सक्रियता उसको शांत करने का कार्य करता है . यह प्रतिशोध लेने वाले जादू और रक्षा करने में अक्सर उपयोग किया जाता है , यह उपयोगकर्ता की इच्छा / इच्छाशक्ति को केंद्रित रखने / करने में सहायता करता है . जब दूसरे रियून के साथ उपयोग किया जाता है , यह ऊर्जाओं को बाँधने और कवच की तरह कार्य करता है ताकि ऊर्जाएं एक दूसरे से अलग थलग रहें और एक दूसरे (ऊर्जाओं ) पर प्रभाव न डाल सकें .



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जेरा / JERA (साल / Year)
जर्मेनिक(Germanic) - गार / Gaar (Jera)
गोथिक (Gothic) - जर / Jer
नोर्स (Norse) - Ár
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - गेर / Ger (जारा / Jara )
आइसलैंडिक (Icelandic) - Ár
नॉर्वेजियन (Norwegian) - (जारा / Jara ) , अर/Ar

जेरा/Jera एक रियून है चक्रों / आवर्तन / परिक्रमा का और प्रतीकात्मक है फ़सल/ पैदावार का जहाँ रोपण के प्रयास और खेतों में म्हणत पुरस्कृत होती है फसलों से . अर/Ar प्रतिनिधित्व करता है परविर्तन के चक्रों (cycles ) का .जीवन चक्र , चन्द्रमा चकर , ऋतु चक्र और परिवर्तन चक्र . अर / Ar ईस्स/Iss के उलट में हैं . ईस्स में सब कुछ रुक जाता है . यह रियून प्रतीकात्मक है सूर्य की वापसी का और यह रियून कर्म लाता है . अर / Ar प्रतीकात्मक है चक्रात्मक /गतिमान (cycling) ऊर्जा के भंवर का ; जीवन के अष्टांग पहिये का., वृत्त के अंदर के बिंदु , जो की चित्रसंकेत हैं सूर्य के लिए जिसका अर्थ होता है पुनर्जन्म (फिरसे उत्पन्न होना ) . जब जादुई उपयोग किया जाता है इस रियून का , तो यह व्यक्तिगत भाग्य को पलट सकता है . टैरो कार्ड के जैसे , भाग्य का पहिया , अर / Ar परिस्थितियों को पलट सकता है ताकि दुर्भाग्य सौभाग्य हो जाये . इसी प्रकार यह परिस्थितियों को पलट सकता है ताकि सौभाग्य दुर्भाग्य में बदल जाये. यह धैर्य और जानकारी / जागरूकता का रियून है , यह प्राकृतिक चक्रों के साथ सामंजस्य/ एकता में चलता है . यह रियून बहुत अच्छा है प्रकृति के साथ कार्य करने में और यह एक रियून है परिपूर्णता /उपजाऊपन का . इंग्वाज़ / Ingwaz एक बीज है जिसे बोया जाता है , बरकानो /बरकानो पृथ्वी है जो इस बीज को प्राप्त करती है , और जेरा / Jera वृद्धि और फसल है . यह रियून है एक दीर्घकालिक योजना और दृढ़ता का और निश्चित करता है योजना सफल हो . यह रियून सहायक भी होता है क्यूंकि यह एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है अनुष्ठानों के सही समय में (अर्थात अनुष्ठान का सही समय कोनसा है ), विशेषकर आरंभन / प्राम्भ करने में . जब काले / नकरात्मक जादू में में इस रियून को उपयोग किया जाता है , तो यह रियून उस (व्यक्ति / शिकार ) के भाग्य के सबसे बदतर संभव पहलुओं को ला सकता है और उसकी स्वयं विनाश की शक्तियों का विकास कर उस व्यक्ति का विनाश कर सकता है . इस रियून का पत्थर है मोस अगट .


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EIHWAZ / ऐइहवाज़
जर्मेनिक(Germanic) - Ë
गोथिक (Gothic) - Ezck (ऐइहवाज़ /Eihwaz)
नोर्स (Norse) - Eiws
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - यर /Yr (ईओह /Eoh )
आइसलैंडिक (Icelandic) - उपलब्ध नहीं
नॉर्वेजियन (Norwegian) - ईओ/ यो

इस रियून का उपयोग नेक्रोमैन्सी (मृतकों के साथ संपर्क स्थापित करना ) में उपयोग होता है . यह रियून है मृत्यु का और मृतकों के ऊपर के शक्ति का . ऐइहवाज़ / Eihwaz इच्छा / इच्छाशक्ति को मज़बूत बनता है और इसका उपयोग पिछले जन्म में वापसी / प्रतीपगमन हेतु किया जा सकता है ताकि बुद्धिमता और ज्ञान प्राप्त किया जा सके पहले के जीवनो से . यह कुण्डलिनी ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है . यह रियून आत्मा की रक्षा करता है ढाल बनकर सब प्रकार की कठिनायों से . प्लूटो (Pluto) गृह के तरह यह रियून है परिवर्तन का मृत्यु और पुनर्जन्म में से होकर और स्वामी है हर स्टार पर गहरे और शक्तिशाली परिवर्तनों का . स्मोकी क्वॉर्ट्ज़ (Smoky Quartz) जो की एक प्रकार का पत्थर है , वह इस रियून के साथ उपयोग किया जाता है . दोनों का उपयोग किया जा सकता है कुंडलिनी को सक्रिय करने और कुंडलिनी के उत्थान के लिए.



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पर्थ्रो /PERTHRO
जर्मेनिक(Germanic) - परत्रा/Pertra (Perthro/पर्थ्रो )
गोथिक (Gothic) - पैरथ्रा (Parithra)
नोर्स (Norse) - Perð
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - पीओर्द्ध /Peordh (परत्रा/Pertra )
आइसलैंडिक (Icelandic) - Perð , (Plástur)
नॉर्वेजियन (Norwegian) - (परत्रा/Pertra )

पर्थ्रो /PERTHRO रियून का उपयोग भविष्य ज्ञान प्राप्ति हेतु किया जाता है . इस रियून की सहायता से , एक (व्यक्ति ) दूसरे रियून्स के बारे में ज्ञान और बुद्धिमता प्राप्त कर सकता है . यह रियून कुछ निश्चित रियून्स की विनाशकारी शक्तियों से सुरक्षा करने का कार्य करता है . पर्थ्रो की सहायता से , हम अंतर्ज्ञान के माध्यम से हर रियून का गुमा हुआ ज्ञान खोज सकते हैं . पर्थ्रो रियून है मैडिटेशन (ध्यान ) का . ओनिक्स (Onyx) एक पत्थर होता है जो इस रियून के साथ उपयोग किया जाता है .



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अलगीज़ /ALGIZ
जर्मेनिक(Germanic) - अलगिस/Algis , अलगीज़ ,Algiz या एलहाज़ / Elhaz
गोथिक (Gothic) - अलगस / Algs
नोर्स (Norse) - उपलब्ध नहीं
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - ईओल्ह/Eolh
आइसलैंडिक (Icelandic) - उपलब्ध नहीं
नॉर्वेजियन (Norwegian) - एल्गर /एल्गर

इस रियून का उपयोग सुरक्षा करने हेतु किया जाता है . इस रियून का उपयोग पवित्रीकरण (पवित्र करना ) और नकारत्मक ऊर्जाओं को बांधने में भी होता है . यह बहुत अच्छा है की उपयोगकर्ता इसे धारण करे जब खतरनाक अनुष्ठान कर रहा हो तब , क्युकी यह नकारत्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा करता है . ब्लैक टौरमलीन ( BlackTourmaline) एक प्रकार का पत्थर होता है जिसका इस रियून के साथ उपयोग किया जाता है .



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सोविलो/SOWILO
जर्मेनिक(Germanic) - सुगिल /Sugil (सोविलो /Sowilo)
गोथिक (Gothic) - सॉइल /Sauil
नोर्स (Norse) - Sól
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) सिगल/Sigel
आइसलैंडिक (Icelandic) - Sól
नॉर्वेजियन (Norwegian) - सोल / Sol
ओल्ड डेनिश (Old Danish) - सुलु / Sulu
ओल्ड जर्मन (Old German) - सिल/Sil , सिगो / Sigo , सुलहिल /Sulhil

सोविलो/SOWILO सूर्य का रियून है और इसका उपयोग पुरुषवाचक जादू में किया जा सकता है . सोविलो/SOWILO अपार्जिता / अजेय और अंतिम जीत का रियून है . यह रियून गतिमान है (प्रकृति में ) और कर्म है और इच्छाशक्ति प्रदान करता है कर्म करने के लिए . यह प्रतीकामक है चक्रों का और बिजली की झरी / खम्भों का (जैसा आस्मां में बिजली चमकती है वैसा ) , जीवन की चिंगारी का . कुण्डलिनी वह बिजली की (झरी है ) जो मस्तिष्क में चमकती है जब वह छटवें चक्र से जुड़ती है . सोविलो/SOWILO का उपयोग किया जाता है इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास को शक्तिशाली बनाने के लिए. इस रियून में दोनों ढाल बनकर सुरक्षा करने वाले और युद्ध जैसे हमला करने वाले गुण होते हैं. इसका संसार की और एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक जगत की ऊर्जा शक्तिओं को समझने में उपयोग किया जाता है . जब दूसरे रियून्स के साथ इस रियून का उपयोग किया जाता है , तो यह रियून दूसरे रियून्स को सक्रिय करता है और उन्हें शक्तिशाली बनाता है . इस रियून का उपयोग मैडिटेशन (ध्यान ) में किया जा सकता है और चक्रों को शक्तिशाली बनाने के लिए किया जा सकता है . एक (व्यक्ति ) की नेतृत्व क्षमता / सामर्थ्य को बाहर लाता है . यह रियून एक (व्यक्ति ) की दूसरों को को प्रेरित करने / प्रभाव डालने के सामर्थ्य को भी बाहर लाता है अर्थात बढ़ाता है . एक (व्यक्ति ) की आत्मा की शक्ति को बढाता है . हीरा इस रियून के साथ उपयोग किया जाने वाला पत्थर है .



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टिवाज़ /Tiwaz
जर्मेनिक(Germanic) - टिस/Tys (टिवाज़/Tiwaz)
गोथिक (Gothic) - Teiws
नोर्स (Norse) - Týr
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - टिर/Tir , टिव/Tiw
आइसलैंडिक (Icelandic) - Týr
नॉर्वेजियन (Norwegian) - टि/तय

साहस और सम्मान देता है . Tyr रियून है न्याय का . यह रियून स्थिरता प्रदान करता है और अराजक ऊर्जाओं को बांधता है . यह सुरक्षा करने के लिए अच्छा है और प्रतिशोध लेने के कार्यों हेतु अच्छा है क्यूंकि यह न्याय का प्रतिनिधित्व करता है . ब्लडस्टोन (Bloodstone) और हेमाटाईट (Hematite) दोनों एक प्रकार के पत्थर होते हैं जो इस रियून के साथ उपयोग किया जाते हैं .



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बीजोर्क/BJÖRK
जर्मेनिक(Germanic) - Bercna (बरकानो/Berkano)
गोथिक (Gothic) - बैरकान/Bairkan
नोर्स (Norse) - Bjarkan /बीजारकन
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - Beroc
आइसलैंडिक (Icelandic) - Bjarkan /बीजारकन
नॉर्वेजियन (Norwegian) - Bjarkan /बीजारकन

इस रियून का उपयोग किया जा सकता है स्त्री प्रजनन क्षमता के लिए , स्त्रीवाचक जादू के लिए और पालन-पोषण के लिए. इस रियून का उपयोग आश्रय और सुरक्षा देने के लिए किया जाता है . यह रियून प्रतीकात्मक है स्त्रीवाचक ऊर्जाओं का . यह पूर्णि पैगन (मूर्तिपूजकों को पैगन कहते हैं ) प्रथा है की बरकानो /barkano की सुरक्षात्मक ऊर्जाओं के साथ बच्चे को जोड़ दिया जाये , जो उस बच्चे / बच्ची के साथ सदा उसके सम्पूर्ण जीवन तक साथ रहेंगी .



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एहवाज़ /EHWAZ
ध्वनि - Ë
जर्मेनिक(Germanic) - Eys (एहवाज़/Ehwaz)
गोथिक (Gothic) - ऐहवा/Aihwa
नोर्स (Norse) - ईहोल/Ehol , Ior
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - ईओह ,Eoh
आइसलैंडिक (Icelandic) - Eykur
नॉर्वेजियन (Norwegian) - एह/Eh , ईओल /Eol

यह रियून घोड़े का प्रतिनिधित्व करता है . इस रियून की कैस्टर और पोलक्स जो की जैमिनी जुंड़वा हैं , उनसे भी इस रियून की निकट पहचान है (कैस्टर और पोलक्स दो जुंड़वा भाइयों के नाम हैं ).इस रियून का उपयोग किया जाता है भविष्य देखने के लिए और अलौकिक / आध्यात्मिक / पारलौकिक संपर्क करने में . चौंथे चक्र की तरह , यह रियून विपरीतों को एक करता है . यह रियून अनुबंध / सम्बन्ध बनता है और इसका उपयोग शादियों और मित्रता पर मुहर लगाने के लिए किया जाता है . इस रियून का उपयोग दूसरों के विचारों और कर्मो को बाँधने के लिए , इस रियून को उपयोग करने वाले की इच्छानुसार , भी किया जा सकता है . आध्यात्मिक ज्ञानप्राप्ति के लिए इस रियून का उपयोग किया जाता है ताकि भगवानो की इच्छा को समझा जा सके . थॉटफॉर्म्स को शक्तिशाली बनाने में उपयोगी है . थॉटफॉर्म्स के बारे में विस्तार से आगे के लेखों में बताया जायेगा. यह रियून थॉटफॉर्म्स को जादूगर / उपयोगकर्ता की इच्छा के नियंत्रण में रखता है . जब दूसरे रियून्स के साथ उपयोग किया जाता है , तो एहवाज़ सामंजस्य के साथ ऊर्जाओं के एक / एकजुट कर देता है .


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मन्नाज़/MANNAZ
जर्मेनिक(Germanic) - मन्ना /Manna (मन्नाज़/Mannaz )
गोथिक (Gothic) - मन्ना /Manna
नोर्स (Norse) - Maðr
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - मन्न /Mann
आइसलैंडिक (Icelandic) - Maður
नॉर्वेजियन (Norwegian) - मड्र/Madr

यह रियून है तर्क का (तर्कशक्ति का ) और मस्तिष्क के उलटे तरफ के भाग का . इसका उपयोग बुद्धिमता बढ़ाने और स्मृति शक्ति को शक्तिशाली बनाने के लिए होता है . यह मदद करता है की एक (व्यक्ति ) जो इसका उपयोग कर रहा है वह व्यक्ति स्वयं को और अच्छे से जान सके और स्वयं / आत्म ज्ञान प्राप्त कर सके स्वयं के बारे में . यह बहुत आवश्यक है जादू से काम लेने के लिए की आप अपनी क्षमताओं को जाने . आप जाने की आप स्वयं कौन हैं और आपमें कितना ज्ञान है स्वयं का . ऐमेथिस्ट (Amethyst) एक पत्थर होता है जो इस रियून के साथ उपयोग किया जाता है .


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LÖGR
जर्मेनिक(Germanic) - लाज़ / Laaz (लगुज़ /Laguz)
गोथिक (Gothic) - लगुस/Lagus
नोर्स (Norse) - Lögr
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - लगु/Lagu
आइसलैंडिक (Icelandic) - Lögur
नॉर्वेजियन (Norwegian) - लौक्र/Laukr

गुप्त रखता है और प्रतीकात्मक है अज्ञात का . ज़हरों / विषों को प्रकाशित करता अर्थात विशोने के बारे ज्ञात करवाता है और विषों की रोकथाम करता है . जो छुपा हुआ था वह अब उसका पता चल चुका है . ऊर्जाओं की जानकारी प्राप्त करने में सहायता करता है और एक (व्यक्ति ) की संवेदनशीलता को बढाता है . डाऊज़र (एक प्रकार का तरीका होता है जिसमे बिना वैज्ञानिक उपकरण के गड़े धन , पानी आदि का पता लगाया जाता है ज़मीन में ) और पेंडुलम (pendulam ) पर कार्य करने वालों के लिए अच्छा है . एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक कार्य में सहायता करता है . इसका उपयोग शारीरिक और अलौकिक / आध्यात्मिक / पारलौकिक शक्ति को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है . इसका उपयोग स्त्रीवाचक जादू में होता है और दूसरे रियून्स की शक्तियों को छुपाने के लिए किया जाता है .

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इंग्वाज़ /INGWAZ
जर्मेनिक(Germanic) - एंगुज़ /Enguz (इंग्वाज़ /Ingwaz)
गोथिक (Gothic) - इग्गव्स /Iggws
नोर्स (Norse) - इंग/Ing , इंग्वारर्/Ingvarr
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - इंग /Ing
आइसलैंडिक (Icelandic) - इंग /Ing
नॉर्वेजियन (Norwegian) - इंग / Ing

इस रियून का वैकल्पिक प्रतीक अज़ाज़ेल के सिजिल (जादुई शक्ति वाले पवित्र चिन्ह ) से बहुत मिलता जुलता है . यह रियून पुरुष / पुरुषवाचक है बरकानो / Berkano के समकक्ष. यह प्रतिनिधित्व करता है भगवान "इंग" ("Ing" ) का . इंग्वाज़ /Ingwaz वह रियून है जिसमे शक्ति संग्रहित रहती है . यह सक्रिय शक्ति को संभावित शक्ति में बदलता है . यह एक पुरुष का पौरुष छीन सकता है या किसी को भी पुरुष या स्त्री की जीवन ऊर्जा छीन सकता है / उससे वंचित कर सकता है . एक क्रिस्टल (crystal) के जैसे , यह रियून ऊर्जा को संग्रहित रखता है जब तक उसकी आवश्यकता नहीं होती . यह एक जादुई संशय / भण्डार है . इस रियून के साथ जो पत्थर उपयोग किया जाता है वह है आइवरी (Ivory).


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डगज़ / DAGAZ
जर्मेनिक(Germanic) - डाज़/Daaz (डगज़ /Dagaz )
गोथिक (Gothic) - डग्स/Dags
नोर्स (Norse) - डग्र/Dagr
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon) - डैग/Daeg
आइसलैंडिक (Icelandic) - डगुर/Dagur
नॉर्वेजियन (Norwegian) - डग्र/डगर

यह प्रतिनिधित्व करता है कामोत्तेजना के चरमोत्कर्ष का जहाँ कार्यचालन / कार्य / कर्म का लक्ष्य प्राप्त हो गया है . यूरेनस (Uranus) गृह के जैसे , यह रियून अंतर्ज्ञान और ज्ञान की दीप्ति (चमक )देता है. यह कुंडलिनी के उत्थान में उपयोगी है . यह सबसे अच्छा कार्य करता है जब इसका ऐसे रियून्स के साथ उपयोग किया जाये जो बुद्धिमता और जानकारी बढ़ाते हैं .

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ÖDHAL
जर्मेनिक(Germanic) - उटाल /Utal (ओठाला/Othala )
गोथिक (Gothic) - Othal /ओठल
नोर्स (Norse) - Oðal
एंग्लो-सैक्सन (Anglo -Saxon)
आइसलैंडिक (Icelandic) - Oðal
नॉर्वेजियन (Norwegian) - Öदाल

यह रियून है संपत्ति (प्रॉपर्टी ) और जमीन का . यह रियून है वंशावली / पुरखों और विरासत का . यह उपयोग किया जाता है पैतृक ज्ञान हेतु नस्लीय /जातीय स्मृति में घुसने के लिए एक (व्यक्ति ) की . यह उपयोग होता है धन संपत्ति प्राप्त करने में प्रॉपर्टी और जायदाद के रूप में . फेहु / Fehu के उलट , यह रियून प्रतिनिधित्व करता है उस प्रॉपर्टी का जो गतिमान नहीं रहती परन्तु स्थिर रहती है . इसका उपयोग नस्लवाद और सांस्कृतिक पक्षपात पैदा करने हेतु किया जा सकता है . ओठाला / Othala प्रतिनिधित्व करता है वृत्त/क्षेत्र का; सीमा . सख्त लकड़ी (Petrified वुड / पेट्रीफाईड वुड अर्थात जो लकड़ी पत्थर जैसे सख्त बना दी जाती है ) ओठाला के साथ अच्छा कार्य करती है ; यह पिछले जीवनो की स्मृतिओं को सामने लाती है , पिछले जन्मो की प्रतिभा और बुद्धिमता को सामने लती है .

नोट - मैंने जिस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया है इस मूलतः अंग्रेजी लेख का अनुवाद हेतु वो उतना शक्तिशाली नहीं है की कई विदेशी शब्दों को भी अनुवाद करदे .रियून्स के सही उच्चारण हेतु आप सब josministries .prophpbb .com पर हमसे संपर्क करें . धन्यवाद

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सन्दर्भ -

टीओटोनिक मैजिक , दी मैजिकल एंड स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेज ऑफ़ दी जर्मेनिक पीपल बी क्वेल्डुल्फ़ गंडारसन ©1990

दी सीक्रेट किंग : कार्ल मारिया विलिगट : हिम्मलेर्स् लार्ड ऑफ़ दी रियून्स बाय कार्ल मारिया विलिगट ; ट्रांस्लेटेड एडिशन बाय स्टीफेन ई फ्लावर्स ; माइकल मोनिहन

दी सीक्रेट ऑफ़ दी रियून्स बी गुइडो वोन लिस्ट ; ट्रांस्लेटेड एडिशन बाय स्टीफेन ई फ्लावर्स

फुठार्क , ए हैंडबुक ऑफ़ रियून मैजिक बाय एड्रेड थॉरस्सन ©1984

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HAIL SATAN AND ALL GODS OF HELL !!!!!

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Hail Satan Hail Peacock Lord Hail Shiva Hail Kartikey HAIL all demon friends

“It is necessary that I should die for my people; but my spirit shall rise from the grave, and the world will know that I was right.” -Adolf Hitler.
Heil mein Führer I know you were right -roadtorevolution
Contact ME - proudpaganproudpast@gmail.com
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HEY HAVE
Image Poo people...

Post Fri Nov 27, 2015 11:55 am

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रियून्स का उच्चारण एवं कम्पन्न -

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... ation.html

रियून्स के प्रत्येक अक्षर की ध्वनिओं में विवधताएं हैं . उमलाओट्स (Umlauts) अर्थात जर्मन भाषा में ¨  निशान लगाया जाता है स्वर के स्थान पर उन्हें उमलाओट्स कहे हैं . उमलाओट्स का उच्चारण निम्न दिया गया है

Ä ä - अमेरीकन अंग्रेजी में ए (A) को जैसे बोलते हैं "Add" (ऍड ) में और जैसे छोटा ई (E) बोला जाता है जैसे की (Hen) / हैन में .

Ö ö - इसका उच्चारण वैसे किया जाता है जैसे की ब्रिटिश लोग "Fur" (फर ) शब्द को कहेंगे .

Ü ü - अपने होठों को गोलाकार / गोल करें " ओह /OH " कहने के लिए , परन्तु आप कहेंगे ई (e) जैसे की सी (See) में कहते हैं.

एंग्लो - सैक्सन और गोथिक का उच्चारण निम्न किया जाता है -

Æ - अमेरीकन अंग्रेजी में ए (A) को जैसे बोलते हैं जैसा की "कैट(Cat)" का उच्चारण करने के दौरान .

Þ þ - अंग्रेजी "TH" (थ ) शब्द की शुरुआत या अंत में , थ जैसे थिंग(Thing) में , और यदि शब्द के बीच में (का ) उच्चारण हो तो ऐसे करेंगे जैसे थ/TH There / देअर में करते हैं . तो यहाँ पर थ को द उच्चारण करेंगे .

C - ई (e) के पहले , आई (i) के पहले , आई (i ) के बाद , इसका च (CH) के जैसे उच्चारण होता है जैसे की "चैनल /चैनल "

Ð ð - अंग्रेजी "TH" (थ ) शब्द की शुरुआत या अंत में , थ जैसे थिंग(Thing) में , और यदि शब्द के बीच में (का ) उच्चारण हो तो ऐसे करेंगे जैसे थ/TH There / देअर में करते हैं . तो यहाँ पर थ को द उच्चारण करेंगे .


ए (a) जैसा की हैट (hat) में उच्चारण किया जाता है , कभी कभी "अह /ah " जैसा की फादर /father में उच्चारण किया जाता है .

ई (e) जैसा की सैट / set में उच्चारण किया जाता है .

é जैसा के पे (pay )में ए/a का उच्चारण किया जाता है .

आई (i) जैसा की सिट/sit में आई / i का उच्चारण किया जाता है .

í जैसा की सीट /seat में ई का उच्चारण किया जाता है .

ओ (o) जैसा की हॉट / hot में ओ / o का उच्चारण किया जाता है .

ó जैसा की रोल / role में ओ /o का उच्चारण किया जाता है .

यू (u) जैसा की पुल्ल /pull में यू / u का उच्चारण किया जाता है.

ú जैसा की पूल / pool में ऊ का उच्चारण किया जाता है .

वाए /y : यह जर्मन उमलाओट Ü के समान ही उच्चारण किया जाता है .
ý : यह उसी तरह उच्चारण किया जाता है जैसे की जर्मन शब्द für / (फ्यू..र )

ea /ईए : इसका उच्चारण Eh -ah अर्थात एह-आह के जैसे किया जाता है . छोटा ई /E , जैसा की अमरीकन अंग्रेजी में शब्द लैट /let कहते हैं , और अह /ah को जैसा फादर /father कहते समय उच्चारण करते हैं वैसे किया जाता है .

éa : इसका उच्चारण Ay -ah अर्थात ऍय -आह के जैसे किया जाता है . लम्बा ए /A , जैसा की हैय /Hay में उच्चारण होता है ए का वैसे ही और आह /ah का उच्चारण वैसे किया जाता है जैसे की फादर /father में ए का होता है .

ei /ईआई : इसका उच्चारण ऐह - आई /Eh-eye के जैसे किया जाता है . (जैसे की शब्द eye / आई में आई (i) का करते हैं वैसा. छोटा ई /e छोटा ई /E , जैसा की अमरीकन अंग्रेजी में शब्द लैट /let कहते हैं . लम्बा आई (I) जैसा की अंग्रेजी शब्द "लाइट /Light " में कहते हैं ,

eo / ईओ : eh - o अर्थात ऐह - ओ (छोटा ओ (o) जैसा के हॉट / hot में) उच्चारण होता है EH -ah अर्थात एह-आह के जैसे , "EH /ऐह " . छोटा ई /E जैसा की अमरीकन अंग्रेजी में शब्द लैट /let कहते हैं . आह /ah का उच्चारण वैसे किया जाता है जैसे की फादर /father में ए का होता है .

éo : ay - o अर्थात ऍय - ओ (छोटा ओ (o) जैसा के हॉट / hot में) उच्चारण होता है AY -आह अर्थात ऍय -आह के जैसे, "AY /ऍय ". लम्बा ए /A , जैसा की हैय /Hay में उच्चारण होता है ए का वैसे ही और आह /ah का उच्चारण वैसे किया जाता है जैसे की फादर /father में ए का होता है .

ew /ईडब्लू : oo -ua अर्थात ऊ - उअ जैसा की "truant / ट्रू अंट " उच्चारण करते हैं वैसा.

ऍफ़/f , शब्द के शुरआत में या अन्त में उच्चारण किया जाता है ऍफ़ / f ही .
शब्द के बीच में ऍफ़ /f का उच्चारण होता है वी /v .

अनुच्चारित व्यंजन के बाजू में , इसका उच्चारण होता है ऍफ़ / f . (अनुच्चारित व्यंजन उसे कहते हैं , उदाहरण के लिए अंग्रेजी शब्द "knight" को नाइट उच्चारण करते हैं . यहाँ पर के /k , जी/g और एच /h अनुच्चारित हैं . )

दो (ऍफ़ऍफ़ /ff) , उन्हें उच्चारण करना है ऍफ़ / f .

जी /g का उच्चारण सामान्यतः होता है ग (जी /g का उच्चारण ) जैसा की ग (g) गार्डन /Garden में ; ई (e) के पहले , आई (i) के पहले और आई (i) के बाद , इसका उच्चारण होता है अक्षर वाय/Y के जैसे , जैसे की वाय / Y अंग्रेजी शब्द यार्न /Yarn में उच्चारण करते हैं. शब्द के बीच में उच्चारण होता है जीएच (gh) के जैसे , जैसे की जर्मन शब्द "nacht / नाच्चट " .

जीऍच /gh : इसका उच्चारण जर्मन "ich/इच " के जैसे होता है . यह अंग्रेजी शब्द "फिश /fish" कहने के समान है परन्तु sh /श को गले के पिछले ऊपर भाग से बोला जाता है .

ऍच / H : जैसे की जर्मन शब्द "nacht / नाच्चट " .में / यह "इच /ich" के जैसे है परन्तु यह थोड़ा और गले के पीछे से बोला जाता है / उच्चारण किया जाता है .

आई-ई/ie : ih - eh अर्थात आईह - ऐह (छोटा आई (i) जैसा की सिट / sit में ) उच्चारण होता है Ih - eh अर्थात आईह - एह के जैसे ; छोटा ई /E , जैसे की अमरीकन अंग्रेजी में शब्द लैट /let कहते हैं .

íe : ee - eh अर्थात ई - ऐह उच्चारण किया जाता है ई - ऐह के जैसे ही .

एनजी /ng : जी /g को जैसे मज़बूती के साथ बोलते हैं फिंगर /finger में , लिंगर / linger में लेकिन सिंगर / singer में जैसे नहीं , भले ही शब्द के अन्त पर हो .

ऍस / s शब्द के शुरुआत या अन्त में , उच्चारण किया जाता है ऍस / S जैसे ,जैसे की "सेटन / Satan ".

शब्द के बीच में ऍस का उच्चारण किया जाता है ज़ी / z जैसे , जैसे की ज़ेब्रा / Zebra
अनुच्चारित व्यंजन के बाजू में , उच्चारण किया जाता है ऍस / S जैसे ,जैसे की "सेटन / Satan ".
दो (ऍसऍस /SS ) उच्चारण किया जाता है ऍस / S जैसे ,जैसे की "सेटन / Satan ".

ऍस-सी/SC : सामन्यतः उच्चारण किया जाता है "SH /श " जैसे की शब्द "Shine /शाइन " में.

जर्मन का उच्चारण निम्न दिया गया है . (ऊपर उमलाओट्स को भी देखें )

च /ch - : इसका उच्चारण जर्मन "ich/इच " के जैसे होता है . यह अंग्रेजी शब्द "फिश /fish" कहने के समान है परन्तु sh /श को गले के पिछले ऊपर भाग से बोला जाता है , या गले के और निचले भाग से बोला जाता है जैसे की जर्मन शब्द "nacht / नाच्चट ".(कोई अंग्रेजी समकक्ष नहीं ).

आर / R अथवा R 's / आर्स (एक से अधिक आर को आर्स /R's कहते हैं ) इनको हमेशा लुडख़ाना चाहिए.

वी / V का उच्चारण किया जाता है ऍफ़ / F .

डब्लू/W का उच्चारण किया जाता है वी / V .

ज़ी /Z - का उच्चारण किया जाता है "त्ज़" जैसे की "Pizza /पिज़्ज़ा" में .

काबालिस्टिक स्पीच (काबालिस्टिक बोली ) में , प्रयेक अक्षरों को सही कम्पन्न करना होता है . काबालिस्टिक ध्वनियाँ प्रत्येक अक्षरों की थोड़ी अलग होती हैं हम सब की आम बोली से .

रियून्स को कम्पन्न करने के लिए , ऊपर दिए हुए उदाहरणों का उपयोग करें . अक्षरों की मूल काबालिस्टिक ध्वनियाँ जो ऊपर नहीं दी गयीं है वे निम्न बतलायी गयी हैं . (नोट - यह महत्वपूर्ण है की आप रियून्स का वैसा उच्चारण करें जैस ऊपर बोलियों में बतलाया गया है ), नीचे मूल काबालिस्टिक बोलियाँ बतलायी गयी हैं -

ए /A - ऊपर उदाहरणों को देखें .
बी / B को कम्पन्न किया जाता है ओंठों को सिकोड़ कर / बंद कर .
सी / C को कम्पन्न किया जाता है गले के पीछे , जैसे की एक कड़ी(तीव्र ) बिल्ली की हिस्स/Hiss अर्थात सिसकार.
अक्षर डी / D के लिए , ऊपर दिए हुए गोथिक उदाहरणों के नियमो का पालन करें .

Ð ð - अंग्रेजी "TH" (थ ) शब्द की शुरुआत या अंत में , थ जैसे थिंग(Thing) में , और यदि शब्द के बीच में (का ) उच्चारण हो तो ऐसे करेंगे जैसे थ/TH There / देअर में करते हैं . तो यहाँ पर थ को द उच्चारण करेंगे .

ई /E का उच्चारण गले की पीछे किया जाता है वाय / Y अक्षर की ध्वनि बनाते / निकलते हुए , उदाहरण के लिए - "यी ..... /Y-E-E-E-E-E-E-E-E" गले में वाय / Y ध्वनि को लगातार कम्पन्न करते हुए लम्बा खींचे "यी " को .

ऍफ़ /F को हलके "वी / V" के जैसे कम्पन्न किया जाता है .

जी/G को गले के पीछे कम्पन्न किया जाता है और यह कण्ठस्थ है अर्थात कंठ से उच्चारण किया जाने वाला , कोमलता से गरारे करने जैसा ., परन्तु सौम्यता और संतुलित / स्थिरता के साथ .

अक्षर ऍच /H के लिए , जर्मन नियमों का पालन करें -

ऍच/H , h /ऍच - जैसे की जर्मन शब्द "nacht / नाच्चट " .में / यह "इच /ich" के जैसे है परन्तु यह थोड़ा और गले के पीछे से बोला जाता है / उच्चारण किया जाता है .

अक्षर आई /I को सही से कम्पन्न करने के लिए , कम्पन्न करें "आह/ah " और फिर लम्बे आई /I पर चले जाएँ ताकि आप महसूस कर सकें , यह भी गले के पीछे से किया जाता है .

जे /J इसका कम्पन्न किया जाता है या तो सौम्यता के साथ जैसे फ्रेंच शब्द "जैकुइस/Jacques " में या फिर कुछ शब्दों में कठिन अंग्रेजी शब्द जे /J के जैसे . पर आप निश्चित करलें की आप कम्पन्न को महसूस कर सकते हैं .

के / K को कम्पन्न किया जाता है थूक को हैक करते हुए अर्थात थूक को जैसे गले से आवाज़ के साथ निकालते हैं वैसे.

एल /L , एम /M और ऍन/N को आम अंग्रेजी के जैसी ही कम्पन्न किया जाता है जैसे के एल ,एम और ऍन .

ओ /O को लम्बे अंग्रेजी O /ओ के जैसे ही कम्पन्न किया जाता है . लम्बे से आशय लम्बा खीचने से है .
पी /P थोड़ा मुश्किल है . इसको अक्षर बी / B के जैसे कम्पन्न करें (बी अक्षर को होंठ को सिकोड़ कर किया जाता है ), लेकिन उसी समय , आप अक्षर वी / V का कम्पन्न करें .

क्यू /Q का अक्षर सी/C के जैसे ही कम्पन्न किया जाता है .

आर /R को सामन्यतः लुढ़काना होता है , पर यह अंग्रेजी का आर/R भी हो सकता है जैसे की आर गोथिक वाला भी और पुरानी अंग्रेजी वाला भी.


ऍस / s शब्द के शुरुआत या अन्त में , उच्चारण किया जाता है ऍस / S जैसे ,जैसे की "सेटन / Satan ".

शब्द के बीच में ऍस का उच्चारण किया जाता है ज़ी / z जैसे , जैसे की ज़ेब्रा / Zebra
अनुच्चारित व्यंजन के बाजू में , उच्चारण किया जाता है ऍस / S जैसे ,जैसे की "सेटन / Satan ".
दो (ऍसऍस /SS ) उच्चारण किया जाता है ऍस / S जैसे ,जैसे की "सेटन / Satan ".

टी /T मुश्किल है . कम्पन्न करें "थ/TH "और उसी समय ज़ी / Z को कम्पन्न करें . यह टी का कम्पन्न इन दोनों के बीच में होता है .

TH /थ को कम्पन्न किया जाता है थ / TH जैसे की "The /द/दि " में होता है .

यू/U को कप्म्पन्न किया जाता है जैसा की शब्द "ooze /ऊज़" .

वी /V को कम्पन्न किया जाता है जैसा की "वैरी/Very ".

डब्लू /W को कम्पन्न किया जाता है अंग्रेजी W अर्थात डब्लू के जैसे.

ऍक्स/X को कम्पन्न किया जाता है के /K की तरह समान .

वाय /Y को कम्पन्न किया जाता है अंग्रेजी Y की तरह अर्थात वाय .

ज़ी /Z को कम्पन्न किया जाता है अंग्रेजी Z की तरह अर्थात ज़ी .

अब उदाहरण के लिए , रियून "ÜRUZ." को लेते हैं . इसको ठीक से कम्पन्न करने के लिए , आपको ऐसा कम्पन्न करना है -

Ü-Ü-Ü-Ü-Ü-Ü-Ü-Ü-Ü - ररररररररररर - ओ-ओ-ओ -ओ-ओ-ओ-ओ-ओ-ओ-ओ-ओ-ओ - ज़-ज़-ज़-ज़-ज़-ज़-ज़-ज़-ज़ -ज़

नोट अंग्रेजी में ज़ /ज़ी को Z कहते हैं .

R's अर्थात आर को आपको लुढ़काना है और दूसरा फिर यू / U को आपको उच्चारण करना है जैसा की शब्द ऊज़ /ooze में होता है . एक मन्त्र की तरह , रियून को कम्पन्न करना , किया जाना चाहिए बार बार और किया जाना चाहिए रियून के अंक / संख्या के अनुसार उतनी ही बार , या रियून की उस संख्या / अंक के गुणांक में भी उस निश्चित रियून को कम्पन्न किया जा सकता है . एक बार आपने एक निश्चित रियून के साथ कार्य करना शुरू कर दिया , आप प्रत्येक सत्र / सेशन उतनी ही संख्या के लिए रियून को कम्पन्न करेंगे अर्थात रियूनिक मैडिटेशन (ध्यान ) करेंगे. उदाहरण के लिए , आप "ÜRUZ" रियून के साथ कार्य कर रहे हैं , जिसका अंक / संख्या दो (2) है तो आपको रियून को बीस बार कम्पन्न करना है या अगर आप बीस बार करते हैं क्यूंकि बीस जो है वह दो का गुणांक है . इसीलिए आपको इस रियून को बीस बार कम्पन्न करना है हमेशा निश्चित कार्य / उद्देश्य के लिए .

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Post Sun Nov 29, 2015 2:29 am

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चक्रों को संरेखित करना

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मैं यहाँ कुछ चीज़ एकदम स्पष्ट कर देना चाहती हूँ. कोई भी व्यक्ति या लोग जो सेटनिस्ट नहीं हैं और इस लेख को पढ़ रहे हैं , आप भले ही तथाकथित नए ज़माने (के विश्वासों ) को मैंने वाले , या कोई मनीषी अर्थात स्वयं जादू विद्या सीखे हुए हैं या और कोई भी हों , अगर आप आगे इस लेख को पढ़ने को हैं , कभी नहीं भूलें - यह ज्ञान सेटन और मिस्री अर्थात इजिप्शियन भगवान थोथ से आया हैं . थोथ हेल की शक्तियों के साथ हैं .

हर आध्यात्मिक ज्ञान की तरह , क्रॉस को ईसाईयत ने चोरी छुपे भ्रष्ट और अपवित्र कर दिया है . समान भुजा वाला क्रॉस प्रतिनिधित्व करता है चार कोनों / चतुर्थांशों को और दिशाओं को , जैसे की जब हम हेल के चार प्रमुख राजकुमारों का आव्हान करते हैं अनुष्ठान के दौरान .

क्रॉस एक संकल्पना / सिद्धांत है , और यह बहुत सारी डीमॉन्स की सिजिल (सिजिल अर्थात जादू वाले अति शक्ति /ऊर्जा के चिन्ह ) में देखा जा सकता है . चक्रों का सही संरेखण / पंक्ति में लाना , होता है एक उलटे लैटिन क्रॉस (इनवर्टेड लैटिन क्रॉस ) के आकार में . ईसाईयत का क्रॉस एक भ्रष्टाचार है और एक निंदा है. अगर आप एक शीशे की ओर मुख करके खड़े हुए हैं , आपके चक्रों को एक उलटे क्रॉस के आकार में कतार बनानी चाहिए, सोलर [666] चक्र के साथ जहाँ भुजाएं विस्तृत / बढ़ी हुई / फ़ैली हुई होती हैं , जैसा की नीचे चित्र में दिया गया है .

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एक बहुत अच्छा कारण है की जो उल्टा क्रॉस है वो सेटनिज़्म का बहुत लम्बे समय से चिन्ह अर्थात प्रतीक रहा है . तीसरा चक्र , जिसे सोलर चक्र भी कहा जाता है , सूर्य चक्र भी कहते हैं , यह सर्व महत्वपूर्ण "666" चक्र भी है ,[क्यूंकि 666 सूर्य का काबालिस्टिक वर्ग भी है ]; स्वास्तिक /स्वास्तिका भी इसका प्रतिनिधित्व करता है . स्वास्तिका सूर्य का प्राचीन प्रतीक है . आत्मा का शक्ति ग्रह हार्ट अर्थात अनाहत चक्र नहीं परन्तु 666 चक्र है . यही कारण है की प्राचीन धर्म जो ईसाईयत से पहले से थे , वे सूर्य पर केंद्रित थे . नए ज़माने की अर्थात आज की शिक्षाएं और इससे सम्बंधित शिक्षाएं हार्ट अर्थात अनाहत चक्र पर केंद्रित होती हैं ताकि हर व्यक्ति आध्यात्मिक शक्तियों से वंचित हो जाये और बदतर हो जाये. हार्ट चक्र अकर्मक होता है , और यह ऊपर के और निचे के चक्रों को मुख्यतः जोड़ता है . थॉर का हथौड़ा भी एक उल्टा क्रॉस है , और इस सिद्धांत / संकल्पना का प्रतीकात्मक है . सही मूल कम्पन्न छटवें चक्र / पीनियल ग्रंथि का है "था/THA" [थौम/THAUM ] और सही मूल कम्पन्न 666 चक्र के लिए है "रा/RA" [रौम/RAUM ]. जब एक (व्यक्ति ) इन दोनों कम्पन्नों को मला लेता है आबद्धित अर्थात बंधे हुए रियून के जैसे , तो इसके परिणाम स्वरुप कम्पन्न होता है "थोर/THOR". सोलर चक्र लूसिफ़ेर की ग्रेल (ग्रेल कर अर्थ होता है प्राचीन कप ) है जिसमे जीवन का अमृत रहता है .
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आम जानकारी जो तैयार उपलब्ध है चक्रों पर वह केवल खतरनाक ही नहीं परन्तु अत्यंत त्रुटिपूर्ण हैं . दूसरे तीन चक्र पुरुष और स्त्री जोड़े हैं जिनका मेल /मिलान किया जाना चाहिए क्यूंकि वे साथ में कार्य करते हैं .

जैसा की हम जानते हैं , क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र को कमल की हज़ार पत्तियां कहा जाता है . लोटस अर्थात कमल को लिली भी कहते हैं . लिली अर्थात Lily = लिलिथ अर्थात "Lilith". प्रत्येक डीमन एक जीवित जीव है इसके साथ , प्रत्येक डीमन का उनका स्वयं का एक आध्यात्मिक सन्देश होता है . लिलिथ क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र की स्वामिनी हैं . सेटन बेस अर्थात मूलाधार चक्र के स्वामी सेटन हैं . ये दोनों मूलाधार और सहस्रार चक्र एक पुरुष और स्त्री जोड़े हैं और साथ कार्य करते हैं . यह उनका एक सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संदेशों में से एक है . यह स्त्री और पुरुष का मिलान प्रतीकात्मक है बैफोमेट /Baphomet के उदाहरण / दृष्टान्त के पीछे , जिसके स्त्री और पुरुष दोनों अंग होते हैं , और प्राचीन मिस्री अर्थात इजिप्शियन आखेनातोन एक अन्य द्विलिंगीय अर्थात दोनों लिंग वाले थे (स्त्री पुरुष दोनों के लिंग ).

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अब ये जो बार बार ज़ोर दिया जाता है हार्ट अर्थात अनाहत चक्र पर नए युग के मोहित(किये गए ) बेवकूफों द्वारा [यह जानबूझ कर ऐसा किया जाता है ताकि लोगों को सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान से दूर रखा जाये और सबसे महत्वपूर्ण कोई भी आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने से रोक जा सके . ] , परन्तु जब कोई मैडिटेशन (ध्यान ) में और आत्मिक / आध्यात्मिक / पारलौकिक सामर्थ्य में आगे उन्नति करता है / बढ़ता और , तो वह (व्यक्ति ) पायेगा की योनि के जैसे के आकार का हार्ट अर्थात अनाहत चक्र अकर्मक है . नीचे चित्र में योनि का आकार दिया हुआ है जिसे एक टैरो कार्ड के द्वारा दर्शाया गया है . ईसाइयों ने इसे भ्रष्ट कर दिया है , और इसे अपनी ओर घुमाकर वो चूतिया और झुंझलाने वाले मछली वाले प्रतीक में पलट दिया है , जो की सच्ची आध्यात्मिकता की निंदा है . ईसाईयत के कार्यक्रम में सब कुछ चोरी किया हुआ , भ्रष्ट किया हुआ और झूठा गलत है .

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"... साथ खम्बे - सेटन के खम्बे [ज़ियाराह्स /Ziarahs ] - उनमे से छह समलम्बाकार हैं आकार में , और एक , "केंद्र " पर्वत लालेश (Mount Lalesh ) पर , उसका आकार है एक पैने , बांसुरी बिंदु की तरह "
-- दि सेटेनिक रिचुअल्स बी एंटन लावै.

ऊपर दिया हुआ अंश भी एक रूपक / दृष्टान्त कथा है , क्यूंकि केंद्र एक अलग थलग है सबसे (ऊपर अंश में ) , वह हार्ट अर्थात अनाहत चक्र है . इसमें शक्ति तो है , परन्तु आत्मा के सबसे शक्तिशाली चक्र जितनी नहीं है जो की सूर्य के "666" चक्र में है . हार्ट अर्थात अनाहत चक्र की शक्तियां अल्पतम / कम हैं . इसीलिए शत्रु इसकी दलाली करता है आम मुख्यधारा की किताबों में और नए युग सिद्धांतवाद में जो की आम जनों को तैयार उपलब्ध है .

ऊर्जा का ग्रहण प्रत्येक चक्र का होता है चौंड़े छोर पर और ऊर्जा का उत्पादन होता है एक बिंदु पर.
तो यही कारण है की चक्र जैसे की तीसरी आँख [भ्रमित नहीं हों की यह छटवां चक्र है , छटवां चक्र तीसरी आँख के पीछे होता है ] को आवश्यकता होती है की उनके चौंड़े छोर बाहर की ओर मुख किये हुए हैं ताकि ऊर्जा को सोख सकें .
निश्चित ही सारे छोटे चक्र इसमें शामिल हैं . आप पाएंगे की जब आपने अपने सारे चक्र ठीक से संरेखित कर लिए अर्थात पंक्ति में ले आये हैं , आप स्वयं को ओर केंद्रित महसूस करेंगे और चंगाई और जादू का कार्यचालन और सरलता से हो जायेगा / होने लगेगा.

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एक (व्यक्ति ) को केवल इतना करना है की उसे सोलर 666 चक्र को घुमाना है ऐसा की बिंदु नीचे की ओर मुख हो जाये . यह स्वास्तिका चक्र है , सूर्य चक्र . सारे पैगन (प्राचीन मूर्तिपूजक ) धर्म जो ईसाईयत से पहले से थे , वे तीव्रता / प्रचंडता से सूर्य के ऊपर केंद्रित थे . यह आत्मा का शक्ति गृह है . थोर का हथौड़ा भी उलटे क्रॉस के आकार में था मूलतः .हमारी सबसे शुरूआती / प्रारंभिक उत्त्पातियां और जीवन हमारी नाभि से आता है , और सूर्य चक्र जो की शक्ति और जीवन का दाता है वह नाभि के पीछे केंद्रित होता है / स्थित है . यह वहीँ है हा जहाँ हमारे जीवन शक्ति / जादू शक्ति / व्रिल/ ची उपस्थित होती हैं . सूर्य चक्र , छटवें चक्र और तीसरी आँख से जोड़ा जाता है , इसे हम "नियंत्रण केंद्र " भी कहते हैं जो की स्त्रीवाचक होता है .

अब आम लिखावटें दलाली करती हैं की हार्ट अर्थात अनाहत चक्र "भावनाओं की कुर्सी है ". यह एक प्रमुख मिथ्या / गलतफहमी है . थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र भावनाओं की कुर्सी होती है . जब हम दुखी होते हैं और रोने वाले ही होते हैं , तब यह अनुभूति थ्रोट अर्थात विशुद्ध से आती है , हार्ट से नहीं . ख़ुशी के मामले में भी अक्सर यही होता है . इस बात को समझ लें . दोनों भावनाएं विशुद्ध अर्थात थ्रोट चक्र से आती हैं .



Imageआम तथाकथित हार्ट अर्थात अनाहत का आकार , यह परन्तु अनाहत चक्र का आकार नहीं है . इसकी जानबूझ कर दलाली की जा रही है की यह अनाहत अर्थात हार्ट चक्र है , परन्तु यह सिर्फ एक भ्रष्टाचार झूठ है . सर्पेंटस अर्थात सर्प (एक दूसरे को ) क्रॉस करते हैं , यह आत्मा की इडा और पिंगला (ida और pingala ) नाड़ियों का प्रतीकात्मक हैं . ये थ्रोट अर्थात विशुध्द चक्र पर क्रॉस करते हैं और झपटते हैं एक उत्तम हार्ट अर्थात अनाहत के आकार में , नाक की नोक पर मिलने के लिए , और चहरे (के ऊपर ) अनाहत अर्थात हार्ट का आकार बना देते हैं . एक और आपने देखा होगा दिल में से एक तीर गुजर रहा है , यह प्रतीक है ऊर्जा को फिक्स करने का अर्थात ऊर्जा को प्रतिष्ठापित करने का जो प्रतिनिधित्व करता है सेटन के उत्थित / उठे उए सर्पेंट अर्थात सर्प का .

अंक 666 , उल्टा क्रॉस और सेटन के सारे प्रतीक / चिन्ह अत्यंत पवित्र हैं और एक छुपा हुआ संदेश रखते हैं .

अब , जैसा की आप जादू के कार्यचालन में ऊर्जा को निर्देशित करते हैं , या मन के कोई अन्य कार्यचालन / उद्देश्य में आप ऊर्जा को निर्देशित करते हैं , उसी तरह चक्रों को भी कुछ समय के लिए अस्थायी रूप से उल्टा जा सकता है ताकि उनके बिंदु बाहर की और मुख हो जाएँ ताकि वे ऊर्जा को दे सकें / पहुंचा सकें . याद रखें , कभी भी कोइसी नकारात्मक ऊर्जा से ना जुड़ें , जैसी की आप जॉब काले जादू का कोई कार्य / कार्यचालन / उद्देश्य से कर रहे हैं . दूसरे शब्दों में , नकारात्मक ऊर्जा कभी भी आप के अंदर से होकर नहीं जानी चाहिए / गुजरनी चाहिए और हर समय बाहर ही रहना चाहिए , जब आप सकारात्मक ऊर्जा के साथ कोई कार्य कर रहें हैं , जैसी की आप अपनी इच्छाओं को आकर्षित कर रहे हैं (अर्थात आप जो चाहते हैं उसे प्राप्त करने के लिए जादू / ऊर्जा का उपयोग करना ) , तो यह अनुकूल होगा की आप चक्रों के बिंदु को बाहर की ओर करें और फिर कार्य करें . आप हमेशा याद रखें की कोई भी कार्य के बाद आपको अपने चक्रों को ठीक से फिरसे पंक्ति में लाना है अर्थात संरेखित करना है . चक्रों को अगर आप गलत संरेखित करते हैं तो इससे आपकी जादू शक्ति कम होगी .


थोथ (Thoth) के अनुसन्धान और रहस्योद्घाटन से पता चल पाया है की सच्चे आंठवे और नौवें चक्र कन्धों के चक्र होते हैं . इनको खोलने से आत्मा संरेखित होगी और यह ऊर्जा के मार्गों को बहुत अत्यंत खोल देगा जो की हथेली के चक्रों पर जाती हैं और इससे वे अत्यंत शक्तिशाली होगी . अपने कन्धों के चक्र खोलने के लिए , सिर्फ आपको उनकी कल्पना करनी / दृश्य बनाना है जैसा के नीचे चित्र / उदहारण में दिया है . उन पर ध्यान केंद्रित करें और मैडिटेशन (ध्यान ) कारण कुछ मिनिटों के लिए . दर्द या और दबाव की सी अनुभूति एक सकारात्मक संकेत है की आपने उन्हें सफलतापूर्वक खोल दिया है . यह अनुभूति आपकी भुजाओं तक जा सकती है और आपके ऐसा लग सकता है की आपकी भुजाएं सो सी गयी हैं . जब कंधे के चक्र सम्पूर्ण शक्तिशाली हो जाते हैं , तो आत्मा के पंख प्रकट हो जाता हैं .

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हमेशा याद रखें जब आपके चक्र सफलतापूर्वक खुल जाते हैं और सक्रिय हो जाते हैं , तो आप उन्हें मासूस करेंगे / करने लगेंगे . यह अनुभूति अक्सर एक दबाव , हलके दर्द , या झुनझुनी के रूप में होती है . चक्रों को ठीक से संरेखित करने अर्थात पंक्ति में लाने से आपकी आध्यात्मिक शक्ति बहुत अत्यंत बढ़ जाएगी .

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1 . शुरू करें अपने बेस अर्थात मूलाधार चक्र से और उस कोन /पिरामिड को (चक्र कोन/पिरामिड जैसे होते हैं ) घुमाएं ताकि बिंदु ऊपर की ओर मुख किये हो जाये एक पिरामिड के जैसे.

2 . सैक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र के साथ भी ऐसे ही करें .

3 . अब अपने सोलर "666 " चक्र पर ध्यान केंद्रित करें और उसे घुमाएं ताकि उसका बिंदु नीचे की ओर मुख किये हो .
666 चक्र वह कप है जो पकडे रखता है और सनग्रहित रखता है जीवन के अमृत को .

4 . यही चीज़ अपने छटवें और थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र के साथ करें - उन्हें घुमाएं ताकि उनका बिंदु नीचे की ओर हो .

5 . अब अपने हार्ट अर्थात अनाहत चक्र पर ध्यान केंद्रित करें और कल्पना करें / दृश्य बनायें दो बिंदु एक साथ आ रहे हैं और एक दूसरे को काट रहे हैं ठीक वैसे ही जैसा नीचे चित्र में दिया गया है .

[list=]http://www.angelfire.com/empire/serpentis666/Heart_Chakra2.gif[/list]

6 . अब अपना ध्यान अपने क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र पर केंद्रित करें और बिंदु को नीचे की ओर मुख हो जाये ऐसा घुमा दें .

7 . अपने कंधे के चक्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए और उनकी नीचे के ओर बिंदु किये हुई कल्पना करते हुए / दृश्य बनाते हुए समाप्त करें .

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अज़ाज़ेल की सिजिल भी हार्ट अर्थात अनाहत चक्र के आकर का प्रतिनिधित्व करती है .
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चक्रों को संरेखित करने / पंक्ति में लाने पर और अधिक जानकारी -

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... ment2.html

Imageतीन समान भुजा वाले क्रॉस जैसा की सेट (Set) की सिजिल में दिख रहे हैं बाईं ओर , ये प्रतिनिधित्व करते हैं चक्रों के तीन जोड़ों का. मेरा यह भी विश्वास है की यह सन्देश था गीज़ा(Giza),मिस्र अर्थात इजिप्ट (Egypt) के तीन पिरामिडों का , क्यूंकि वे चक्रों के जैसे आकार के हैं . एस्टेरोथ (Astaroth) की सिजिल जिसका चित्र नीचे है , दिखाती है / व्याख्या करती है इस सिद्धांत / संकल्पना की , सिजिल के प्रत्येक ओर के बार्स अर्थात सलाखों के साथ .

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नितंब /कमर के चक्र हर ओर और केंद्र / बीच में समान होते हैं , यह बगल / बाजू में खड़े होते हैं अर्थात (स्थित) रहते हैं जैसा की नीचे चित्रों में दिखाया गया है .

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मंदिर /देवालय चक्र ठीक मंदिर के पीछे स्थित होते हैं , कान से थोड़ा सा आगे की ओर , जैसा नीचे चित्र में बताया गया है. जब आप इन चक्रों को सफलतापूर्वक खोल लेते हैं और पंक्ति में ले आते हैं अर्थात संरेखित कर लेते हैं , आपको तब एक दबाव जैसी अनुभूति होगी या मंद दर्द की सी अनुभूति होगी , जैसी तीसरी आँख या अन्य चक्रों के साथ हुआ करती है . यह सकारत्मक सूचक / संकेत है की उनकी सही स्थिति का पता लगा लिया गया है और उन्हें सक्रिय कर लिया है .

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Post Mon Nov 30, 2015 10:01 am

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परोक्षश्रवण (उन्नत श्रवण सामर्थ्य ) बिन्दुओं को खोलना

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... nters.html

अपने परोक्षश्रवण केन्द्रों पर मैडिटेशन अर्थात ध्यान करने से आपकी एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक सुनने का सामर्थ्य / श्रवण शक्ति शक्तिशाली होगी . इस सामर्थ्य को आत्मिक / अलौकिक / पारलौकिक श्रवण भी कहा जाता है . यह उपयोगी होता है जब हम डीमॉन्स के साथ बात चीत करते हैं या संपर्क स्थापित करते हैं . सिर्फ आराम करें और प्रत्येक केंद्र पर ध्यान केंद्रित करें , हर केंद्र की एक चमकीले / मेधावी सितारे / तारे की कल्पना करते / दृश्य बनाते हुआ . हर केंद्र पर कुछ क्षण ध्यान केंद्रित करे रहें .

इन प्रत्येक छोटे चक्रों को खोलने के लिए , सिर्फ उन पर ध्यान केंद्रित करें और उनका दृश्य बनायें / कल्पना करें की वे एक तारे / सितारे के जैसे खुल रहे हैं और , और अधिक चमकीले / मेधावी होते जा रहे हैं . आपको कई मैडिटेशन अर्थात ध्यान सत्र / सेशन करने पड़ सकते हैं ताकि वे स्थायी रूप से सदा के लिए खुल जाएँ . बिंदु एक जैसे होते हैं सिर के दोनों ओर हालाँकि नीचे बतलाया हुआ चित्र आपको केवल चहरे का एक हिस्सा ही दिखा रहा है .

आप अपनी जागरूकता (सामर्थ्य ) में और अलौकिक / पारलौकिक / आत्मिक सामर्थ्यों में बदलाव महसूस करेंगे जब आप इस व्यायाम को करना शुरू कर देते हैं .

जैसे जैसे आप उन्नति करते हैं , आप "चक्र सांस " भी कर सकते हैं , जिसमे आप ऊर्जा को प्रत्येक सांस अंदर लेने के साथ सोखेंगे और अपने प्रत्येक चक्र को थोड़ा सा फैलाएंगे / विस्तृत करेंगे और प्रत्येक चक्र को और चमकीला करेंगे जब आप उन
पर ध्यान केंद्रित करते हैं , ऐसा आपको सांस बाहर छोड़ने के दौरान करना है .

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***जिस कलाकृति का इस उदहारण / दृश्य / चित्र में उपयोग किया गया है -
"दि लैंड बेबी " , हॉन जॉन कोलियर द्वारा , उन्नीसवीं शताब्दी .

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Post Mon Nov 30, 2015 10:34 am

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अपने दिव्य दृष्टि बिन्दुओं पर मैडिटेशन अर्थात ध्यान -

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अपनी अलौकिक / पारलौकिक / आत्मिक नेत्रों पर मैडिटेशन अर्थात ध्यान करने से आपकी एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक दृष्टि शक्तिशाली होगी . यह सरल है . सिर्फ अपने आँखों को बंद करिये और "देखें " अपनी तीसरी आँख पर आपके माथे के मध्य में . यह महत्वपूर्ण है की आप आरामदायक स्थिति में रहें और अपनी आँख की मांसपेशियों पर तनाव न डालें , भले ही आपकी आँखे बंद क्यों न नो . पहले पहले तो आपको अधिकतर एक अँधेरा सा ही दिखेगा सिर्फ , यह इस बात पर निर्भर करता है की आपकी तीसरी आँख कितनी सक्रिय है , फिर संभवतः घुमते हुए रंग और आकार नज़र आएंगे. एक शीशे में इसक्राय (scry - यह एक सामर्थ्य होता है जिससे हम शीशे में भविष्य देख लेते / बता लेते हैं ) करने के जैसे , रंग और आकार चित्रों / छविओं में आने लगेंगे जब आप नियमित और पर्याप्त लम्बे समय तक मैडिटेशन अर्थात ध्यान कर लेते हैं . याद रखें की आप अपना ध्यान सौम्य और आरामपूर्वक लगाएं .

अपनी तीसरी आँख पर ध्यान करने के बाद , कल्पना करें / दृश्य बनायें अपनी तीसरी आँख का की वो (आपकी तीसरी आँख ) चमकदार / मेधावी होती जा रही है और एक सूर्य के जैसे चमक रही है बाहर की ओर और आप इस ऊर्जा को निर्देशित करें आपकी प्रत्येक आत्मिक / अलौकिक / पारलौकिक आँखों पर ,अपनी पहली और दूसरी आत्मिक / अलौकिक / पारलौकिक आँख से शुरू करते हुए आप उसे अपनी तीसरी आँख पर निर्देशित करें और फिर अपनी चौथे , पांचवें और छटवें नेत्र बिंदु पर ऊर्जा का निर्देशन करें . आप फिर अपनी ऊर्जा को प्रसारित कर सकते हैं ऊपर और नीचे एक चमकदार मेधावी रौशनी / प्रकाश के प्रवाह / धारा के रूप में .

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दूसरी तकनीक जो की थोड़ी उन्नत है वह यह है की आप "चक्र सांस " करें अपने प्रत्येक केंद्र पर . ऊर्जा को अंदर खींचे एक विशेष केंद्र अर्थात नेत्र बिंदु पर या तो एक बिंदु पर एक बार या फिर सभी बिन्दुओं पर एक साथ ऊर्जा को अंदर खींचे सांस को अंदर लेने के दौरान . दृश्य बनायें / कल्पना करें प्रत्येक केंद्र / बिंदु प्रकाशित हो रहा है (सांस अंदर लेते समय ) और सांस को बाहर छोड़ते समय , प्रत्येक केंद्र / बिंदु को थोड़ा सा फैलाएं / विस्तृत करें एक मेधावी चमकदार सितारे / तारे के जैसे . अगर आप सभी केन्द्रो / बिन्दुओं पर एक साथ कार्य कर रहे हैं , तो यह महत्वपूर्ण है की आप उन सब को एक साथ एक समय पर ही दृश्य बनाये / कल्पना करें .

*** जिस पिक्चर का उपयोग किया गया है ऊपर वह एक प्राचीन फिलिस्तीनी अन्थ्रोपोइड अर्थात मानवाकार ताबूत है .

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Post Tue Dec 01, 2015 6:41 am

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Post Tue Dec 01, 2015 9:07 am

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सेटेनिक चंगाई

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कई साल पहले , पिता सेटन ने मुझसे चंगाई के बारे में बात की . मुझे एक समस्या थी और उन्होंने उस समय मुझसे कहा "तुम पर्याप्त शक्तिशाली नहीं हो ". मेरे बाजू में एक भारी रेडियो रखा था और उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा - "उस रेडियो को कागज़ की शीट से हिलाने का प्रयास करो ". जाहिर है , पेपर / कागज़ मुड़ - तुड़ जाता .

प्रभावशाली चंगाई के लिए , आपकी आत्मा में शक्ति होनी चाहिए. यह लगातार अविरोधी तरीके से किये गए शक्ति ध्यान अर्थात पावर मैडिटेशन इस संभव होता है .

एक बार आपकी आत्मा शक्तिशाली हो जाये , चंगाई फिर बड़ी सरलता के साथ हो जाती है .

इसके पहले में और आगे बढूँ . मैं यह बता देना चाहती हूँ की जो कोई भी अगर , किसी डॉक्टर की देखभाल में है या फिर दवाईयां आदि ले रहा है आपको उन दवाइयों को लेना बंद नहीं करना है जो आपके चिकित्सा उपचार से सम्बंधित हैं जैसे की एंटीबायोटिक्स आदि , जब तक आपको किसी प्रतिष्ठित लाइसेंस्ड डॉक्टर से दवाई बंद करने की अनुमति नहीं मिल जाती तब तक दवाई लेते रहें नियमित रूप से . हम ज़ायंस (यहूदी / ईसाई / इस्लामी ) नहीं हैं ! एंटीबायोटिक्स और यह दवाएं जीवन रक्षक होती हैं !

मैं , स्वयं खुद बहुत आभारी हूँ आधुनिक चिकित्सा तकनीक के लिए . स्वयं को चंगा करना स्वयं की शक्तिओं के साथ यह बहुत उन्नत है और अनुभव की आवश्यकता होती है इसमें . अगर आपको कोई एक डॉक्टर की सलाह अच्छी नहीं लगती हो तो आप एक दूसरे डॉक्टर से सलाह लें , आप सिर्फ आत्मिक / अलौकिक / मानसिक चंगाई के भरोसे ही न रहें , इससे आप अपने बच्चों को . अपने चाहने वालों को तकलीफ देंगे . कभी भी दवाइयाँ आदि जो आपके डॉक्टर ने आपको बताई हैं उन्हें लेना बंद ना करें जब तक डॉक्टर न कहे .


स्वयं को चंगा करने के लिए -

1 . यह निश्चित कर लें की आपके चक्र ठीक तरह से संरेखित हैं . यह निश्चित करता है की आवश्यक ऊर्जा उन तक पहुँच रही है . बीमारी अक्सर पहले हमारे एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक शरीर / आत्मिक शरीर में प्रकट होती है और र फिर उसके लक्षण हमारे भौतिक शरीर पर प्रकट होते हैं . यह अधिकतर हमेशा इसीलिए होता है क्यूंकि अंगों तक ऊर्जा अच्छे से प्रसारित नहीं हो पाती और एक्सीडेंट या चोट के कारण अंगो से (ऊर्जा ) कट जाती है .

2 . जैसे आप अपनी आभा अर्थात औरा को साफ़ करते हैं , उसी तरह आपको अपने रोग ग्रस्त भाग को साफ़ करना है . रोग ग्रस्त भाग को दिन में कई बार साफ़ करना चाहिए प्रत्येक दिन चंगाई ऊर्जा को लगाने के ठीक पहले .

3 . अधिकतर समस्याओं के लिए चंगाई का मूल है - की ऊर्जा को उठाया जाये / बढ़ाया जाये और ऊर्जा को निर्देशित किया जाये और ऊर्जा को लगताअर भेजा जाये पीड़ित अंग में , ऊर्जा को क्रमोदेशित करने के दौरान . जब आप अपनी ऊर्जा को प्रचंडता /तीव्रता के साथ महसूस करें , सिर्फ आप उस ऊर्जा को निर्देशित कर दीजिये आपके शरीर के पीड़ित / रोग ग्रस्त भाग में . पूरे दिन आप अपनी , ऊर्जा को लगातार निर्देशित कर सकते हैं और कल्पना करें / दृश्य बनायें सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) रौशनी / प्रकाश का , जो आपके उस अंग को चमका रही है और आप फिर अपना अफर्मेशन कहें . (दृढ़ता के साथ कहने को अफर्मेशन कहते हैं . ) स्टेप दो (2) के साथ जोड़ कर आप यह कर सकते हैं .

4 . स्टेप दो को प्रत्येक दिन कई बार दोहराना है , जब तक चंगाई पूरी नहीं हो जाती .

5 . आप रियून्स का उपयोग कर भी चंगाई कर सकते हैं . कम्पन्न करना विशेषकर शक्तिशाली होता है ऊर्जा को बढ़ने / उठाने और शक्तिशाली बनाने दोनों के लिए. रियून और चंगाई पर विस्तार से आने वाले लेख में बताया जायेगा .

6 . आपको जानना है की यह कार्य कर रहा है और आपको कोई शक नहीं होना है . दूसरे शब्दों में आपके सामर्थ्य पर आपको आस्था रखनी है .

7 . हमेशा याद रखें की आप अपने अफर्मेशन्स (दृढ़ता के साथ बोलना ) को वर्तमान काल में कहें . "यह (बीमारी ) मेरे शरीर को छोड़ रही है [ या रोग ग्रस्त अंग को छोड़ रही है मेरे इस शरीर के ], पूरी तरह से और हमेशा के लिए . मेरा शरीर शक्तिशाली और स्वस्थ है हर तरीके से . "

8 . खुले हुए हों , कई बार यह चंगाई (का कार्यचालन जो आप करते हैं ) , यह आपको निश्चित आहार या हमें किस चीज़ की आवश्यकता है चंगे होने के लिए , इस ओर ले जाएगी . यह बहुत सारे तरीकों में हो सकता है .

एक चहेते को चंगे करने के लिए , निर्देशित करें एक सूर्य के जैसी चमकदार मेधावी सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) रौशनी /प्रकाश उस (आपके चहेते ) में और ऊर्जा को क्रमोदेशित करें .

आधात्मिक सेटनिज़्म का आधार / मूल और लक्ष्य है ज्ञान और उस ज्ञान को लगान / उपयोग में लाना हमारी स्वयं की शक्तिओं का उपयोग करते हुए . कुछ समय पहले मेरी एक ऐसी परिस्थिति थी . मेरी पालतू पशु एक मारक बीमारी से ग्रस्त हो गयी था , यह सब कुछ अचानक हुआ . उस समय , मेरे पास एक वेट /पशु चिकित्सक के लिए पैसे नहीं थे . पिता सेटन मेरे पास आये. वे मेरे पीछे खड़े हो गए और अपने दोनों हाथ मेरे कन्धों पर रख दिए और मुझसे कहा की मैं "उसमे सांस के साथ ऊर्जा को अंदर सांस लूं . " मैंने ऊर्जा का दृश्य बनाया / कल्पना करी एक सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) रौशनी / प्रकाश में और मेरे पालतू पशु को उस रौशनी से चमका दिया / प्रकाशित कर दिया एक सूर्य के जैसे चमकदार / मेधावी और के अफर्मेशन कहा "_______ स्वस्थ है , सुरक्षित है और संरक्षित है हर तरीके से "

मैंने ऐसा बीस बार किया . पिता सेटन ने मुझसे बोला , नहीं , दो सौ बार करो . पिता सेटन ने मुझसे यह भी कहा की मुझे अपने पालतू पशु की सर्जरी करवानी पड़ेगी और पैसे की व्यवस्था पिता सेटन स्वयं कर देंगे . मैं रोने लगी . उन्होंने मुझसे कहा की रो मत , क्यूंकि यह आस्था की कमी प्रकट कर रहा था .

ऊर्जा जो मैंने मेरे पालतू पशु के अंदर रखी , उससे वो स्थिर हो गयी . मुझे ऐसा बार बार करना पड़ता था और फिर उसके बाद बहुत कम समय में , मेरे पास सर्जरी करवाने के पैसे हो गए , जो बहुत महंगी थी . मेरी पालतू पशु की अब सर्जरी हो गयी है और वह अब अच्छी है .

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Post Wed Dec 02, 2015 10:31 am

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चहेतों को चंगा करना - अर्थात जिन्हे आप प्यार करते हैं उनकी चंगाई

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जब हम सेटेनिक चंगाई का उपयोग हमारे चहेतों की चंगाई के लिए करते हैं , यह एकदम अलग होता है हमारी स्वयं की चंगाई से . सबसे अच्छा यह है की पृथ्वी से / की चंगाई ऊर्जा का उपयोग किया जाये और उसे उस व्यक्ति को जिसे आप चाहते हैं उस पर प्रसारित कर दिया जाये.

यह करने के लिए , यह बहुत आवश्यक है की चक्र शक्तिशाली और सक्रिय हैं , विशेषकर आपके हथेली और पैरों में .

आपकी आत्मा पर्याप्त शक्तिशाली होनी चाहिए . यह लगातार अविरोधी तरीके से बार बार मैडिटेशन अर्थात ध्यान करने से आता है . बीमारी या समस्या की तीव्रता पर निर्भर करते हुए , अक्सर एक से अधिक चंगाई सत्र / सेशन की आवश्यकता पड जाती है . यह इस बात पर भी निर्भर करता है की आपकी स्वयं की शक्तियां कितनी शक्तिशाली हैं .

अब , मैं यहाँ अपने अनुभव से बोलती हूँ . अगर आपके अंदर एक वायरस अर्थात परजीवी है और अभी तक आपने उसके लक्षणों को महसूस नहीं किया है , और आप किसी दूसरे को चंगा करने के लिए चंगाई ऊर्जा भेज रहे हैं या भेजते हैं , या उस दूसरे व्यकि के चारों ओर सुरक्षा की आभा बनाते हैं तो आपको लक्षण प्रकट हो जायेंगे क्यूंकि आपने अपनी ऊर्जा दूसरे पर खर्च कर दी है . इससे और बदतर स्थिति में , अगर आप थोड़े से भी बीमार हैं , आप कभी भी चंगाई या अन्य ऊर्जा कार्यचालनों किसी अन्य के ऊपर कभी भी ना करें . मैंने पाया है की आपके चहेते की आत्मा आपसे जुड़ जाएगी और आपने जितना सोचता था उससे कहीं ज़्यादा ऊर्जा ले लेगी , विशेषकर निराशाजनक परिस्थितिओं में . एक बूढा आदमी मर रहा था और उसके मरने के दो दिन पहले , उसके बेटे को बहुत ज़्यादा कमज़ोरी और थकन महसूस हुई . बूढ़े आदमी की आत्मा ने उसकी ऊर्जा ले ली .


एक चहेते को प्रभावी तरीके से चंगा करने के लिए , आपको स्वयं स्वस्थ और चेंज रहना चाहिए. इसमें यह भी शामिल है - की आपमें लगातार एक बाहरी स्त्रोत से ऊर्जा का प्रसारण होता रहना चाहिए. यह भी समझ लें की अगर आपको कोई छोटी बीमारी है , और आप किसी अन्य को चंगाई की ऊर्जा भेजते हैं तो आपकी छोटी बीमारी बदतर हो जाएगी . कृपया इसके प्रति सावधान रहें .

मैंने मेरे एक पालतू पशु को चंगा किया था मेरे हाथ उसके ऊपर रखकर जब वह समस्या से ग्रस्त थी . मैंने अपने दोनों हाथ और पैरों के चक्र खोले और मेरे पैरों से ऊर्जा को खींचना शुरू किया [मैं मेरे घर में थी ] और मैंने चंगाई की ऊर्जा को मेरे हथेली के चक्रों से निर्देशित किया , और पूरे समय मैं सफ़ेद सुनहरी (सोने के रंग की ) प्रकाश / रौशनी की कल्पना करती रही / दृश्य बनाती रही उसके ऊपर , और यह अफर्म (अर्थात दृढ़ता के साथ अखना ) करती रही की वह चंगी हो गयी है . मेरी शक्तियां उस समय उनकी उंचाईओं पर थी क्यूंकि मैंने यह एक हठ योग सत्र और शक्ति ध्यान अर्थात पावर मैडिटेशन के बाद किया था . इस उदहारण में , मुझे सिर्फ एक ही सत्र अर्थात सेशन करना पड़ा और वह ठीक हो गयी थी .

वहां कुछ दिशा निर्देश हैं चहेतों को चंगा करने के लिए -

1 . इस बात को निश्चित कर लें की आप स्वयं अच्छे शक्तिशाली हैं और यह सबसे अच्छा है की आप स्वयं की ऊर्जा का उपयोग ना करें . पृथ्वी से ऊर्जा खींचना (यह आपका फर्श भी हो सकता है ), या सूर्य यान कोई अन्य स्रोत से ऊर्जा खींचना सबसे अच्छा है . हमेशा ऊर्जा को अपने अंदर प्रसारित करें / दौड़ाएं .

2 . इस बात को निश्चित कर लें की आप चंगाई क्रिया के बाद अपने चक्रों और अपनी आभा अर्थात औरा को साफ़ करें .

3 . गंभीर दुर्घटनाओ या इससे सम्बंधित मामलों में , जितने अधिक लोग चंगाई के कार्य में जुड़ेंगे , उतनी ही बेहतर संभावनाएं होंगी आरोग्य प्राप्ति की . मित्र , रिश्तेदार और वगेरह , अगर वे सब खुले मन वाले हैं तो उन्हें संगठित किया जा सकता है ऊर्जा खींचने में और उसे पीड़ित पर लगाने के लिए एक आपात स्थिति में . भले ही वे लोग इसमें अभ्यस्त नहीं हैं , परन्तु कुछ न करने से अच्छा कुछ करना बेहतर होता है . जितने अधिक लोग , उतनी उधिक ऊर्जा.

4 . दूसरे जादू और या कार्यचालाओं के जैसे , आपको आत्मविश्वास और विश्वास होना चाहिए की आरोग्य प्राप्ति / चंगाई निश्चित होगी .

5 . अफर्मेशंस (अर्थात दृढ़ता के साथ कहना ) हमेशा आवश्यक होते हैं क्यूंकि ऊर्जा वही करती है जो उसे करने को कहा जाये. अफर्मेशंस हमेशा वर्तमान काल के सकारत्मक वचन / वाक्य होने चाहिए.

6 . एक बार चंगाई का सत्र / सेशन शुरू हो जाये , बीमारी की तीव्रता पर निर्भर करते हुए , चंगाई के सत्रों को दोहराया जाना चाहिए जब तक चहेते की सम्पूर्ण और पूरी आरोग्य प्राप्ति न हो जाये.

7 . क्षेत्र या शरीर को एक चमकदार मेधावी सफ़ेद रौशनी / प्रकाश से साफ़ करना , चंगाई ऊर्जा के पहले , यह भी सहायक होता है .

8 . गंभीर मामलों में , चंगाई के कई सत्रों की आवश्यकता पड़ सकती है हर दिन . यह इस बात पर भी निर्भर करता है की आप कितने शक्तिशाली हैं स्वयं . आप जितने अधिक शक्तिशाली होंगे स्वयं , उतनी ही शक्तिशाली और प्रभावी होगी आपकी चंगाई ऊर्जा .

9 . जितना क्रोनिक अर्थात पुराना रोग होगा , वह उतना ही कठिन होता है चंगा होने में , और उसमे कहीं और अधिक समय लगेगा जितना नवीन संक्रमण में लगता है उसकी अपेक्षा . जन्मजात समस्याएं सर्वाधिक कठिन होती हैं . असंभव कुछ भी नहीं होता ! मनुष्य का मस्तिष एक नए अंग / हाथ / भुजा को उगाने तक में समर्थ है . कुंजी है - अत्यधिक व्यक्तिगत शक्ति लगातार अविरोधी ढंग से बार बार किये मैडिटेशन (ध्यान ), धैर्य , दृढ़ता और इन सबसे ज़्यादा - अविरोधी ढंग से बिना रुके मैडिटेशन अर्थात ध्यान करने से .

10 . दूसरों पर कार्य करने के बाद , वैकल्पिक नथुनी [सूर्य / चन्द्र ] सांस [अनुलोम विलोम ] के कुछ दौरे करना चाहिए , इसकी ज़ोरदार सिफारिश की जाती है ताकि आत्मा फिरसे संतुलित हो जाये. इसमें आपको ऊपर पर रोकना है , और नीचे के व्यायाम पर नहीं रोकना है .{अगर आपको समझ नहीं आया हम क्या कहना चाह रहे हैं तो दुबारा आप वैकल्पिक नथुनी [सूर्य / चन्द्र ] सांस [अनुलोम विलोम ] वाला लेख देखें } जब आप वैकल्पिक नथुनी सांस कर रहे हैं , तो यह महत्वपूर्ण है की आप प्रत्येक प्रत्येक सांस अंदर लेने के दौरान उसके साथ आपको "ऊर्जा " को अंदर सांस में लेना है .


इस बात को भी जान लें . उच्चतर मन और आत्मा आपको निर्देशित कर सकते हैं की आप चिकत्सीय सहायता ले लें कुछ मामलों में . यह अक्सर तब होता है जब एक (व्यक्ति ) इतना शक्तिशाली नहीं होता की वह एक रोग को चंगा कर सके . दूसरे मामलों में आपको निर्देशित किया जा सकता है की आप ये निश्चित सप्लीमेंट्स अर्थात खुराकें या ये विटामिन या ये अन्य पदार्थ का सेवन करें जिससे आपको चंगे होने में सहायता मिलेगी . काम समय में किसी गंभीर बीमारी को चंगा करना हमेशा संभव नहीं होता . अपने उच्चतर मन को सुने . दुर्भाग्य से , ऐसा समय आता है जब हमारा चहेता बहुत दूर जा चूका होता है , और , और अधिक ज़्यादा नहीं किया जा सकता जब तक ऊर्जा विशेषकर शक्तिशाली न हो जैसा की एक कॉवन (अर्थात जादूगरों का समूह ) होता है . आप जितना अधिक चंगाई ऊर्जा के साथ कार्य करेंगे और स्वयं को शक्तिशाली बनाने कर जितना अधिक कार्य करेंगे , उतने ही अधिक प्रभावी आप होंगे .

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Post Wed Dec 02, 2015 12:13 pm

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मणिपूर चक्र द्वारा चंगाई

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चंगाई का चक्र है तीसरा चक्र जिसे कहते हैं सोलर प्लेक्सस चक्र अर्थात मणिपूर चक्र

इस चक्र का उपयोग कर चंगाई करने के लिए जो की बहुत प्रभावी है -

1 . अपनी पीठ पर लेट जाएँ .

2 .आपके हाथ और उंगलिओं के चक्र पूरी तरह से खुले होने चाहिए इस तकनीक के लिए .
अपनी उंगलिओं के टिप / छोर / नोक को अपने मणिपूर चक्र पर हलके से रखें . बहुत धीरे से सांस अंदर लें और कल्पना करें / दृश्य बनायें एक प्रचंड चमकदार मेधावी सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) रौशनी / प्रकाश का जो आपके नथुनो में से होकर आपके मणिपूर चक्र में अंदर जा रही है और फिर आपकी उंगलिओं के नोक में से होकर आपकी फोरआर्म्स अर्थात आपकी भुजा का कोहनी से कलाई तक वाला भाग , में जा रही है .

3 . अपनी सांस को रोकें और फिर अपनी उंगलिओं की नोक को पीड़ित क्षेत्र में ले जाएँ और बहुत धीरे से ऊर्जा को बाहर सांस में छोड़ें अपनी फोरआर्म्स से , हाथ और उंगलिओं की नोक से पीड़ित क्षेत्र में . उदाहरण के लिए , गले की खराश को चंगा करने के लिए , अपनी उंगलिओं की नोक को हिलाएं/ ले जाएँ [ऐसा करते समय आपको एक चमकदार मेधावी रौशनी / प्रकाश की कल्पना करनी / दृश्य बनाना है ],अपने गले पर और फिर बहुत धीरे धीरे अपने गले में ऊर्जा को सांस के साथ बाहर छोड़ें , उस ऊर्जा का दृश्य बनाते हुए और उसे महसूस करते हुए की वह ऊर्जा आपकी फोरआर्म्स को छोड़ रही है आपके हाथों और आपकी उंगलिओं की नोक को छोड़ रही है और आपके गले में प्रवेश कर रही है और एक चमकदार मेधावी सूर्य की तरह चमक रही है . नोट - ऊर्जा को सांस के साथ बाहर छोड़ने का अर्थ है की आपको सांस को बाहर छोड़ते समय यह कल्पना करनी है की ऊर्जा उस जगह जहाँ भी आप चाहें जा रही है .


4 . जब आपने सांस को बाहर छोड़ लिया है , अपनी सांस लेने छोड़ने को कुछ समय के लिए रोक दे और इस समय आप अपनी उंगलिओं के नोक को मणिपूर चक्र पर फिरसे रख दें . ऊपर जो दिया है उसे दोहराएं .

यह जो ऊपर दिया गया है , सबसे अच्छे प्रबह्व के लिए इसे दस से बीस बार दोहराएं . अगर एक बड़ी प्रमुख चंगाई करनी है तो आपको बीच में ब्रेक लेना है अर्थात रुकना और फिर दूसरे दस से बीस बार दौरे करने है .

मैंने इस तकनीक को बहुत सफलता के साथ उपयोग किया है . यह महत्वपूर्ण है की ज़ुकाम , पर्वजीवी , सर्दी आदि को नवीन अवस्था में ही इनका पता लगा लिया जाये . ऐसा करने से , कम ऊर्जा का उपयोग होता है इन्हे चंगा करने में .

अगर कोई एक (व्यक्ति ) बीमार है की उसकी स्वयं की ऊर्जा नहीं है चंगा करने के लिए , तो फिर इस व्यायाम को सूर्य से ऊर्जा लेकर और उपयोग कर किया जा सकता है . सूर्य की ऊर्जा अत्यंत शक्तिशाली होती है . सिर्फ आपको सूर्य से सांस के साथ ऊर्जा अंदर लेनी है आपके नथुनो से होकर और ऊपर दिए हुए निर्देशों का पालन करना है .

यह बहुत स्पष्ट है की अब और आने वाले नज़दीकी भविष्य में , हमारा सामना मारक विषाणुओं और परजीवी विपत्तिओं से होगा . बहुत सारे लोग एंटीबायोटिक्स और दूसरी चिकित्साओं के प्रति प्रतिरोधी रहते हैं . बहुत साड़ी जगहों पर जीवन रक्षक चिकित्सा दवाइयाँ आदि बहुत महंगी होती हैं और उन्हें प्राप्त करना मुश्किल होता है . यही हाल चिकत्सा का भी है . कुछ दवायें तो असरकारक भी नहीं होती हैं .सभी समर्पित सेटनिस्ट्स को शक्ति ध्यान अर्थात पावर मैडिटेशन करना चाहिए अनिवार्य रूप से और सेटेनिक चंगाई तकनीकें सीखनी चाहिए .

मुझे अधिक सफलता मिली जो मैंने आपको ऊपर बताया है इससे और दूसरी चंगाई तकनीको से जिसके बारे में मैंने आपको बताया है इस लेख में और पिछले / आने वाले लेखों में . स्वयं को चंगा करने की शक्ति एक अद्भुद तोहफा है पिता सेटन की तरफ से . कोई भी समर्पित सेटनिस्ट जो अविरोधी तरीके से लगातार ध्यान करता है वह इसे कर सकता है . इस दुनिया में चीज़ें बहुत गन्दी होती जा रही हैं और आने वाले समय में बहुत कुछ बदतर हो जायेगा . हम मे से वे जो निपुण हैं और सेटेनिक ज्ञान का उपयोग करते हैं वो इन समयों में आराम से पूर्णतः जीवित निकल जायेंगे .

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Post Wed Dec 02, 2015 1:23 pm

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स्वस्थ और सुरक्षित रहना

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महमारिओं की सम्भावनाओ को देखते हुए एक पुरानी कहावत कहती है : " एक रत्ती भर रोकथाम एक किलो इलाज के बराबर है " यह निश्चित ही जादूगरी के लिए भी लागू होती है . एक समस्या को नासूर बनने के पहले रोकना कहीं ज़्यादा आसान होता है .

नीचे में एक कार्यचालन बता रही हूँ आपकी सुरक्षा करने के लिए उन समयो में जब मार्क परजीवी दुनिया में फैलने वाले ही रहेंगे . बीमारी को देखा जा सकता है और महसूस किया जा सकता है आभा में , अक्सर एक (व्यक्ति ) के बीमार पड़ने के कई दिनों पहले ! . आभा भूरे से रंग की हो जाती है . हम में से वे लोग जो हमारी आभा अर्थात औरा को देख सकते हैं और दूसरों की आभा अर्थात औरा को देख सकते हैं , वे इस चीज़ को अच्छी तरह जानते हैं . आभा और आत्मा को क्रमोदेशित किया जा सकता है की वह हमारे भौतिक शरीर को किसी भी बीमारी से बचा ले . कार्यचालन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए , क्यूंकि ये मारक परजीवी फ़ैल रहे हैं / या फैलने को ही हैं और ये कितने खतरनाक हो सकते हैं इसे देखते हुए हमें अनिवार्य रूप से कार्यचालन करने हैं .

नीचे बतलाया हुआ कार्यचालन आपके चहेतों के लिए भी किया जा सकता है . बच्चों या / कोई अन्य जिनकी आप परवाह करते हैं , सिर्फ आपको दृश्य बनाना है / कल्पना करनी है रौशनी की और अफर्मेशन (अर्थात दृढ़ता के साथ कहना ) करने है उनके नाम को लेकर .

इसे सबसे अच्छा तब करना चाहिए जब चन्द्रमा वैक्स हो रहा है [अर्थात चन्द्रमा नए से सम्पूर्ण की ओर जा रहा है और सरल शब्दों में जब चन्द्रमा अपनी रौशनी में बढ़ता है तो उसे वैक्सिंग या वैक्स चन्द्रमा कहते हैं ] जिन दिनों आपको यह कार्यचालन करना है वे आदर्श दिन हैं - रविवार [सूर्य एक (व्यक्ति )की जीवन शक्ति है ] बुध , शुक्र या गुरु के घंटे में ; या बुधवार [बुध चंगाई देता है ], सूर्य बुध , शुक्र या गुरु के घंटे में ; या गुरुवार {गुरुवार शुभ / उपकारवाला गृह है }, सूर्य , बुध या शुक्र के घंटे में ; या शुक्रवार को [शुक्र थोड़ा कम उपकार करने वाला गृह है ], सूर्य , बुध , शुक्र या गुरु के घंटे में .

इस कार्यचालन को प्रति दिन किया जाना चाहिए सूर्य , बुध , शुक्र या गुरु के घंटों में . इन घंटो को प्राप्त करने के लिए कृपया इस वेबसाइट पर जाकर यह मुफ्त सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर लें अगर आपने अभी तक डाउनलोड नहीं किया है . यहाँ से - http://chronosxp.sourceforge.net/en/
समय और गृह ही कार्यचालन के प्रभाव को बनाते या बिगाड़ते हैं . मैं हमेशा ही सारे महीने के लिए घंटों का प्रिंट निकलवा लेती हूँ और उन्हें एक स्थान पर रख लेती हूँ .

इस कार्यचालन को दिन में एक बार करना चाहिए ठीक चालीस दिनों के लिए, एक भी दिन को मिस नहीं करना है अर्थात छोड़ना नहीं है . अगर आप एक दिन को छोड़ देते हैं , तो आपको अगले दिन कार्यचालन को दो बार करना है , मगर कोशिश करें की आप कोई दिन न छोड़ें क्यूंकि ऊर्जा हर दिन और उसके पहले के दिन बनेगी .

1 .) आराम करें और अपनी औरा अर्थात आभा को महसूस करें . नए लोग - सिर्फ अपनी औरा अर्थात आभा पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें . हम में से वे लोग जो अपनी और अर्थात आभा को हेर फेर नहीं कर सकते , अपनी आभा को आप लोग थोड़ा सा फैला लें / विस्तृत कर लें इतना की आप उसे महसूस कर सकें और उसका दृश्य बनायें / कल्पना करें की वह एक चमकदार मेधावी सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) रौशनी / प्रकश से भर गयी है .

2 . कल्पना करते / दृश्य बनाते समय अफार्म करें अर्थात दृढ़ता के साथ कहें :
" मैं हमेशा अत्यधिक शक्तिशाली और स्वस्थ रहता हूँ / रहती हूँ हर तरीके में . मेरी रोग प्रतिरोधक प्रणाली हमेशा शक्तिशाली और स्वस्थ है हर तरीके में . मैं हमेशा कोई भी बीमारी , रोग , परजीवी से सुरक्षित रहता हूँ /रहती हूँ हर तरीक में . "

ऊपर एक सुझाव है की आपको क्या अफर्मेशन अर्थात दृढ़ता के साथ कहना है . आप इसे बदल सकते हैं इसमें ओर कुछ जोड़ सकते हैं अगर आप चाहें तो , मगर इस बात को आप निश्चित कर लें की आप सभी चीज़ों को मिलाएं कुछ छोड़ें नहीं और आपकी अफर्मेशंस अर्थात आप जो दृढ़ता के साथ कहते हैं वो वर्तमान काल में हो .

3 . इसे दस से बीस बार बोलें . इस बात को निश्चित कर लें की आपका ध्यान केंद्रित है.

एक चहेते की सुरक्षा करने के लिए , कल्पना करें / दृश्य बनायें एक चमकदार मेधावी रौशनी / प्रकाश का जो आपके चहेते को घेरी हुई है और घेर रही है और अफर्म करें अर्थात दृढ़ता के साथ कहें -

"[आपके चहेते का नाम ]" हमेशा स्वस्थ और शक्तिशाली है हर तरीके में . [चहेते का नाम ] की रोग प्रतिरोधक प्राणी हमेशा शक्तिशाली और स्वस्थ है हर तरीके में . [चहेते का नाम ] हमेशा सुरक्षित है कोई भी बीमारी , रोग या परजीवी से हर तरीके में ".

यह आपको चालीस दिन तक करना है लगातार . और हाँ , आप स्वयं पर और अपने चहेते पर कार्य कर सकते हैं , परन्तु एक ही समय पर नहीं , मतलब की पहले या तो आप अपने लिए यह करें फिर उसके बाद अपने चहेते के लिए , या आप पहले उसके लिए ये करें और फिर अपने लिए. कम से कम तीस मिनिट का अंतर रखें कार्यचालनो में . ऐसा इसीलिए की आप अपनी ऊर्जाओं को मंद न कर लें .

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Post Thu Dec 03, 2015 5:59 am

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महत्वपूर्ण जानकारी सेटेनिक चंगाई के बारे में -

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... _Info.html

चंगाई करने के दौरान , यह महत्वपूर्ण है की आप अपने अफर्मेशंस (दृढ़ता के साथ कहना ) को और विशेष तकनीकें जिनका आपने उपयोग किया है वह लिख लें . हालाँकि यह आपको हर जादूगरी और कार्यचालनों के दौरान करना चाहिए , परन्तु विशेषकर चंगाई वाले कार्यचालनों में इसे विशेष रूप से करें .

पुरानी बीमारिओं , या रोग जो आपके जीवन में कई सालों से या हमेशा से थे , वे लगातार कार्यचालनो ले बाद ख़त्म हो जायेंगे , परन्तु कुछ मामलों में , ऊर्जा में उतार चढ़ाव / अस्थिरता के कारण वे बाद में वापस आ सकते हैं परन्तु वे अत्यंत मामूली होंगे.

आपको जो करने की आवश्यकता है वह यह है की आप चंगाई के कार्यचालनों को दोहराएं ,सूर्य के जैसी सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) चंगा करने वाली ऊर्जा की कल्पना करें / दृश्य बनायें , रोग ग्रस्त भाग पर और अफर्मेशंस (दृढ़ता के साथ कहना ) को दोहराएं .

यह इसीलिए भी हो सकता है अगर आप कई पुराने और गंभीर रोगों से ग्रस्त हैं और आप एक रोग को ख़त्म करने के लिए चंगाई कर कार्यचालन कर रहे हैं . यह थोड़ी बहुत ऊर्जा को निराश कर सकता हैं आपकी आत्मा में और पहली समस्या वापस आ सकती है .

आपको इस परेशानी को फिरसे खत्म करने के लिए दिन में एक अन्य समय चुनना पड़ेगा , जहां आप इस पहली परेशानी को जो दुबारा वापस आ गयी है उसे ठीक करें . इससे यह जल्दी चले जाएगी .

किसी भी स्थति में जीवन रक्षक दवाओं का उपयोग लेना बंद नहीं करें , उदाहरण के लिए इन्हेलर्स [उन लोगों के लिए जिन्हे दमे की शिकायत है ] या अन्य कोई चीज़ , क्यूंकि जब समस्या दुबारा आती है वह मारक हो सकती है .


चंगाई के कार्यचालनो को बार बार दोहराया जाना चाहिए और उन्हें समय समय पर सुदृढ़ करना अर्थात शक्तिशाली बनाना चाहिए . जितनी अधिक गंभीर और पुरानी बीमारी रहेगी , उतना अधिक समय वह लेगी सदा / हमेशा के लिए चंगा होने में . इसके साथ , दृढ़ता आवश्यक है . जन्मजात समस्याएं सबसे बदतर होती हैं , क्यूंकि यह वह चीज़ है जिसके साथ आत्मा इस दुनिया में आई है , परन्तु ऐसा नहीं है की इन्हे चंगा करना असंभव है . सेटन हमें बताते हैं की लगभग सब कुछ संभव है .

हर चीज़ की तरह , आपकी आत्मा की शक्ति ही इस बात को निश्चित करती है कितना समय और प्रयास की आवश्यकता होगी की आपको सम्पूर्ण सफलता मिले . कुण्डलिनी और हठ योग करना सबसे अद्भुद व्यायाम होते हैं जादू शक्ति / व्रिल अर्थात चंगाई शक्ति बढ़ने के लिए .

कुण्डलिनी के कुछ अच्छे आसन यहाँ दिए हुए हैं - http://www.pinklotus.org/-%20KY%20Kriya ... s%20fp.htm

हठ योग के आसन आने वाले लेखों में विस्तार से बताये जायेंगे .
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Post Fri Dec 04, 2015 5:24 am

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योग

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpentis666/Yoga2.html

शारीरिक योग , ताई ची (एक चायनीज़ मार्शल आर्ट कला है ) के साथ आपकी शक्तिओं को बहुत बढ़ा सकता है . नीचे एक बुनियादी सत्र / सेशन है जिसे आप प्रति दिन कर सकते हैं .

नोट - ९/२९/११ -

किसी भी मैडिटेशन अर्थात ध्यान या मैडिटेशन से सम्बंधित व्यायामों जैसे की हठ / शारीरक योग [जो नीचे दिया गया है ] का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है ऊर्जा की भुनभुनाहट हो प्राप्त करना . कोई भी प्रभावशाली आध्यात्मिक व्यायाम इस ऊर्जा की भनभनाहट को प्राप्त करने के लिए होना चाहिए. आप में से वे लोग जो नए हैं , ऐसा करने में आपको कुछ हफ़्तों तक लगातार अविरोधी ढंग से व्यायाम करने पड़ सकते हैं प्रतिदिन , परन्तु आप निश्चित ही इस ऊर्जा की भनभनाहट को जान जायेंगे और उसे महसूस करेंगे. ये व्यायाम इसी के लिए बने हैं - जादूगरी की शक्ति को बढ़ाने के लिए / उत्थान के लिए और आत्मा की शक्ति को बढ़ने अर्थात परिवर्धित करने के लिए.

यह मायने नहीं रखता , विशेषकर जब आप कुशल / प्रवीण हो गए हैं इन व्यायामों में , की भले ही आपके पास टीवी , रेडियो , स्टीरियो साउंड सिस्टम या और कुछ भी हो , जब तक यह आपकी गति या आपके जादूगरी शक्ति को बढ़ाने के सामर्थ्य आदि से छेड़छाड़ नहीं करता तब तक कोई समस्या नहीं है . अक्सर मेरे ईअर बड्स (कान साफ करने वाले बड्स )मेरे कानो में ही होते थे और मेरा सी डी प्लेयर तेज़ बजता रहता था जब मैं योग के आसन कर रही होती थी . बाद में , मैं फिर भी म्यूज़िक को सुनते रहती थी - मेटल म्यूज़िक तक भी ! , जब मैं मेरे ऊर्जा की भुनभुनाहट अर्थात एनर्जी बज्ज को महसूस करने के लिए बैठी होती थी . सिर्फ यही एक महत्वपूर्ण चीज़ है की आपको इन व्यायामों को करने के बाद बैठे रहना है शांत बिना हिले डुले ताकि आप अपने ऊर्जा की भुनभुनाहट को महसूस कर सकें , और फिर उस पर ध्यान केंद्रित कर सकें .

यह महत्वपूर्ण है की आप किसी भी प्रकार के खिंचाव आदि (आसनो के दौरान ) स्वयं पर दबाव ना डालें . योग एथलेटिक (जो ओलंपिक्स आदि खेलों में प्रतियोगी जैसा करते हैं ) खींचाव से बहुत भिन्न है . इसे एक आराम दायक स्थिति में किया जाना चाहिए और कभी ज़ोर ज़बरदस्ती के साथ नहीं . इसमें हमारे मस्तिष्क का सीधा हाथ वाला हिस्सा उपयोग होता है और इसका उद्देश्य है स्वयं को हमको शक्तिशाली बनाना . एक आम धारणा होने के बजाये की एक गुरु की आवश्यकता पड़ती है इसके उलट , कोई भी शारीरिक योग स्वयं सीख सकता है . जब मैं तेरह साल की थी तो मैंने स्वयं योगा सीखा रिचर्ड हीट्टलमैन की पुस्तक से जिस नाम है (योगा 28 डे एक्सरसाइज प्लान ) से . सबसे महत्वपूर्ण चीज़ योग में जो है वह यह है की आपको इसे *महसूस करना है *.


शारीरिक योग को तब भी किया जाना चाहिए जब एक मेडिटेटिव अर्थात ध्यान की अवस्था में हों , ताकि सर्वाधिक शक्ति की प्राप्ति हो . अगर आपको एक हल्केपन , बढ़ी हुई जीव ऊर्जा जिसे बायो इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं की अनुभूति हो , यो आप आसनो को ठीक से कर रहे हैं . योग सबसे अच्छा तब करना चाहिए जब आप अकेले हों , क्यूंकि अधिक लोगों में ध्यान ज़्यादा भटक सकता है . योग को एक अनुक्रम में करना चाहिए - या तो खड़े रहने से बैठने तक से लेटने तक से उलटे होने तक , या , उलटे होने तक से लेटने तक से बैठने तक से खड़े होने तक . प्रत्येक आसान को एक मिनिट के लिए रोके रखना चाहिए , या और अधिक कठिन आसनो के लिए दस , बीस या तीस की गिनती तक रोके रखना चाहिए और उन्हें दो या दीं बार करना चाहिए. जैसे जैसे आप महसूस करें , वैसे वैसे आप आगे बढ़ें . जैसे जैसे आप प्रगति करते हैं , वैसे वैसे आप लम्बे समय तक रोक सकते हैं . कुछ निपुण लोग हैंडस्टैंड अर्थात अधोमुखवृक्षासन और दूसरे आसनों को दस मिनिट और उससे अधिक तक रोके रखते हैं . याद रखें , हम सब व्यक्ति हैं . स्वयं के समय निर्धारण के लिए , उदहारण के लिए जब आप एक मिनिट तक के लिए रोकते हैं तो आप साठ अर्थात 60 तक के लिए गिनती करें , जैसे एक हज़ार एक , एक हज़ार दो , एक हज़ार तीन , एक हज़ार चार .... ऐसा . आपको आराम दायक स्थिति में होना है और एकदम शांत बिना हिले डुले रहना है प्रत्येक आसन में . कभी भी तनाव न दे , खींचे नहीं , शक्ति न लगाये अधिक और झटके ना दें - वैसे ही करें जिसमे आप आरामदायक हों .

जो नीचे अनुक्रम दिया गया है उसे क्रम में ही करना है .

*उलटे आसन अर्थात वे आसन जिसमे उल्टा होना पड़ता है , इन्हे उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिनको मस्तिष्क की समस्याएं हों , नेत्रपटल की समस्या हो , गर्दन की समस्या हो ,या वे लोग जिनका वज़न बहुत अधिक हो या ऐसी कोई भी अवस्था हो जिसमे रक्त चाप सिर और गर्दन में बहुत बढ़ जाये .ऐसे लोग अन्य आसन कर सकते हैं और उलटे आसन छोड़ सकते हैं .


इतना ही करें जिसमे आप मोच / तनाव / खिंचाव नहीं दें और आराम से कर सकें . योग एथलेटिक्स (शारीरिक खेल )*नहीं * है !

हमेशा सामने के झुकाव को पीछे के झुकाव के साथ संतुलित करें / पूरक करें . योग में हमेशा एक उल्टा मूव (गति ) होती ही है . अगर आप अपना उलटे हाथ वाला हिस्सा मोड़ते हैं , तो आपको अपने सीधे हाथ वाला हिस्सा भी मोड़ना चाहिए.

प्रत्येक योग कार्यक्रम में निम्न होना चाहिए -

खड़े होने वाले आसन
बैठने वाले आसन
सामने झुकने वाले आसन
पीछे झुकने वाले आसन
साइड तो साइड अर्थात आजु बाजू झुकने वाले आसन
मोड़ने वाले आसन (जैसा की मैंने बताया , वे लोग जिन्हे चिकत्सीय समस्याएं हैं , वे इन्हे छोड़ सकते हैं )
उलटे आसन
लेटने वाले आसन

हैंडस्टैंड अर्थात अधोमुखवृक्षासन

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जब पहली बार मैंने इस आसन को सीखा , मैं बहुत छोटी थी और हाँ ज़रूर यह बहुत आसान था उस समय क्यूंकि मैं बच्ची थी . मैं आराम से पैर ऊपर करके दीवाल की ओर उलटी हो गयी . कोई भी व्यक्ति किसी भी उम्र का हो और वह अच्छे स्वास्थ और वज़न का है तो वो आसानी से
हैंडस्टैंड अर्थात अधोमुखवृक्षासन करना सीख सकता है . बाद में , आप सीख सकते हैं की आप दीवाल से दूर अपनी हाथों की सहायता के साथ चलते हुए दीवाल से दूर और दूर जाएँ .
हैंडस्टैंड अर्थात अधोमुखवृक्षासन को सिर्फ इतना ही रोकें जितना आपको आरामदायक लगे , परन्तु हर हफ्ते आप कोशिश करें की इसे रोकते समय थोड़ी थोड़ी गिनती बढ़ाते चलें अर्थात ज़्यादा रोकने का प्रयास करें पहले की अपेक्षा . मैं हैंडस्टैंड अर्थात अधोमुखवृक्षासन करना पसंद करती हूँ एक हेडस्टैंड करने के बजाये (हेडस्टैंड मतलब सिर के दम पर खड़े होना ) क्यूंकि हैंडस्टैंड अर्थात अधोमुखवृक्षासन मैं गले की हड्डी पर काम दबाव पड़ता है और इससे भुजाएं और कलाइयां मज़बूत होती हैं और यह ज़्यादा प्रबह्वषाली भी है . इसे आप दीवाल की आड़ में कर सकते हैं सपोर्ट के लिए जब तक आप इसे बिना दीवाल के स्वयं नहीं करना सीख जाते .



http://www.yogajournal.com/pose/handstand/

शोल्डरस्टैंडअर्थात सर्वान्घासन - मैंने इसमें कम्बल का उपयोग कभी नहीं किया . यह ऐच्छिक है .

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विधि:- इस आसन का अभ्यास स्वच्छ व साफ हवादार जगहो पर करें। आसन के लिए नीचे दरी या चटाई बिछाकर पहले पीठ के बल लेट जाएं। इसके बाद दोनो पैरों को मिलाकर व पूरे शरीर को सीधा तान कर रखें। अब सांस अन्दर लेकर धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं। इस क्रिया में पैरों को सीधा रखें। इसके लिए पहले पैरों को ऊपर उठाएं, फिर कमर को ऊपर उठाएं, फिर छाती तक के भाग ऊपर उठा लें। इसके बाद अपने दोनों हाथों को कोहनी से मोड़कर कमर पर लगाकर कमर को थामकर रखें। आसन की इस स्थिति में पूरे शरीर का भार कंधों पर रहना चाहिए। इस स्थिति में कंधे से कोहनी तक के भाग को फर्श से सटाकर रखें तथा ठोड़ी को छाती में सटाकर रखें। अब पैरों को तान कर ऊपर की ओर खींचकर रखें। इसके बाद शरीर को स्थिर करते हुए इस स्थिति में 30 सैकेंड तक रहें और सामान्य रूप से सांस लेते और छोड़ते रहें। धीरे-धीरे इसका अभ्यास बढ़ाकर आसन की स्थिति में 3 मिनट तक रह सकते हैं। इसके बाद शरीर को ढ़ीला छोड़कर घुटनों को मोड़कर धीरे-धीरे शरीर को हथेलियों के सहारे से सामान्य स्थिति में ले आएं। इसके बाद 10 सैकेंड तक आराम करें। इसके बाद पुन: इस आसन को करें तथा इस तरह से इस क्रिया को 3 बार करें।

http://www.yogajournal.com/pose/support ... lderstand/

प्लफ अर्थात हाहलासन

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1. हलासन को करने के लिए सबसे पहले नीचे पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों को बगल में सीधा व जमीन से सटाकर रखें।
2. फिर दोनों पैरों को आपस में मिलाकर रखें तथा एड़ी व पंजों को भी मिलाकर रखें।
3. अब दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाएं, पैरों को उठाने के क्रम में पहले 30, 60 फिर 90 डिग्री का कोण बनाते हुए पैरों को सिर के पीछे की ओर जमीन पर लगाएं और पैरों को बिल्कुल सीधा रखें।
4. अपने हाथ को सीधा जमीन पर ही टिका रहने दें। इस स्थिति में आने के बाद ठोड़ी सीने के ऊपर के भाग पर अर्थात कंठ में लग जायेगी।
5. हलासन की पूरी स्थिति बन जाने के बाद 8 से 10 सैकेंड तक इसी स्थिति में रहें और श्वास स्वाभाविक रूप से लेते व छोड़ते रहें।
6. फिर वापिस सामान्य स्थिति में आने के लिए घुटनों को बिना मोड़े ही गर्दन व कंधों पर जोर देकर धीरे-धीरे पैरों को पुन: अपनी जगह पर लाएं।

http://www.yogajournal.com/pose/plow-pose/

फिश अर्थात मत्स्यासन

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मत्स्य का मतलब होता है मछली। क्योंकि इस आसन को करने पर शरीर को मछली की तरह रखना होता है, इसलिए इसे मत्स्यासन कहा जाता है। मत्स्यासन करने के लिये सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाकर पद्मासन लगाकर बैठ जाएं। अब पीठ को जमीन से उठाएं तथा सिर को इतना पीछे ले जाएं कि सिर की चोटी का भाग जमीन से सट जाए। इसके बाद दाएं हाथ से बाएं पैर का अंगूठा और फिर बाएं हाथ से दाएं पैर का अंगूठा पक लें। अपने घुटनों को जमीन से लगाकर पीठ के हिस्से को ऊपर उठाएं ताकि शरीर का केवल घुटने और सिर का हिस्सा ही जमीन को छूए। इस आसन का नियमित छोड़ी देर अभ्यास करने से गैस और असिडिटी की समस्या दूर होती है और कब्ज का नाष होकर भूख बढ़ती है। इससे पाचन शक्ति भी बेहतर बनती है।


http://www.yogajournal.com/pose/fish-pose/


फॉरवर्ड बेंड अर्थात पश्चिमोत्तानासन

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विधि:-

1. जमीन पर चटाई या दरी बिछाकर इस आसन का अभ्यास करें। चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों पैर को फैलाकर रखें। दोनों पैरों को आपस में परस्पर मिलाकर रखें तथा अपने पूरे शरीर को बिल्कुल सीधा तान कर रखें।

2. दोनों हाथों को सिर की ओर ऊपर जमीन पर टिकाएं। अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाते हुए एक झटके के साथ कमर के ऊपर के भाग को उठा लें। इसके बाद धीरे-धीरे अपने दोनों हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़ने की कोशिश करें। ऐसा करते समय पैरों तथा हाथों को बिल्कुल सीधा रखें।

3. अगर आपको लेट कर यह आसन करने में परेशानी हो तो, इस आसान को बैठे बैठे भी किया जा सकता है। यह करते समय अपनी नाक को छूने की कोशिश करें। इस प्रकार यह क्रिया 1 बार पूरी होने के बाद 10 सैकेंड तक आराम करें और पुन: इस क्रिया को दोहराएं इस तरह यह आसन 3 बार ही करें। इस आसन को करते समय सांस सामान्य रूप से ले और छोड़ें।
http://www.yogajournal.com/pose/seated-forward-bend/

कोब्रा अर्थात बूजान्घासन

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एक स्वच्छ और समान जगह पर चटाई / दरी बिछाकर यह आसन करे।
सबसे पहले पेट के बल लेट जाईए।
पैरो को सीधा, लम्बा फैला कर रखना हैं।
अपने हथेलियों को कंधो के निचे जमीन पर रखे।
माथा (Forehead) को जमीन से लगाकर रखे।
अपने कुंहनियो की दिशा ऊपर आसमान की ओर रखे।
अब धीरे-धीरे सिर को और कंधो को जमीन से ऊपर उठाइये। सिर को ऊपर उठाते समय श्वास अंदर लेना हैं।
हाथो का अंदरूनी हिस्सा शरीर से स्पर्श कर रखे।
हाथो पर अधिक दबाव न आने दे।
अब धीरे-धीरे हाथों को कुंहनियो से सीधा कर, पूरी पीठ को पीछे की ओर झुकाना हैं। नाभी को जमीन से लगाकर रखे। इस स्तिथि में श्वास सामान्य रखे। इस स्तिथि में 20 से 30 सेकण्ड तक रुके और अभ्यास के साथ अंतराल बढ़ाये।
इस अंतिम स्तिथि में कुछ देर रुकने के बाद धीरे-धीरे निचे आइए तथा पूर्व स्तिथि में विश्राम करे। यह क्रिया श्वास को बाहर छोड़ते हुए करना हैं।


http://www.yogajournal.com/pose/cobra-pose/

लोकस्ट अर्थात शलभासन आसन

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सर्वप्रथम एक स्वच्छ और समतल जगह पर चटाई या दरी बिछा दे।
अब पेट के बल लेटे तथा अपने दोनों हाथो को जांघो (Thighs) को निचे रखे।
ठोड़ी को जमिनपर टीकाकार रखे।
अब दोनों पैरो को बिना मोड़े हुए धीरे-धीरे ऊपर उठाये।
अपने क्षमतानुसार कुछ क्षण तक इसी स्तिथि में रहे।
धीरे- धीरे पैरो को निचे लाए और पुर्वस्तिथि में आए।
जमींन पर लेटते समय श्वास लेना है और पैरो को ऊपर उठाते समय श्वास को रोककर रखना हैं। पैरो को निचे लाते समय श्वास छोड़ना हैं।
http://www.yogajournal.com/pose/locust-pose/

बौ अर्थात धनुरासन

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विधि-

चटाई बिछा कर पेट के बल लेट जाएँ। श्वास को छोड़ते हुए दोनों घुटनों को एक साथ मोड़ें, एडियों को पीठ की ओर बढ़ाएं और अपनी बाँहों को पीछे की ओर तानें फिर बाएं हाथ से बाएं टखने को एवं दायें हाथ से दायें टखने को पकड़ लें। अब श्वास भरकर यथासम्भव उसे रोके रखें।
अब सांसों को पूरी तरह निकाल दें और जमीन से घुटनों को उठाते हुए दोनों टाँगें ऊपर की ओर खींचें और उसी समय जमीन पर से सीने को उठायें। बांह और हाथ झुके हुए धनुष के समान शरीर को तानने में प्रत्यंचा के समान कार्य करते हैं।
अब अपने सिर को ऊपर की ओर उठायें एवं यथासम्भव पीछे की ओर ले जाएँ ।
टाँगे ऊपर उठाते समय घुटनों के पास उन्हें सरकने न दें अन्यथा काफी ऊँचाई तक टाँगें उठ नहीं सकेंगी। अब टांगों घुटनों और टखनों को सटा लें।
इस दौरान श्वास की गति तेज होगी लेकिन इसकी चिंता न करते हुए यथाशक्ति १५ सेकंड से १ मिनट तक रुकें और आगे- पीछे, दायें -बाएं शरीर को हिला डुला सकते हैं।
अब श्वास छोड़ते हुए धीरे धीरे टखनों को भी छोड़ दें और दोनों टांगों को सीधी कर लें,किन्तु यह ध्यान रहे क़ि पहले घुटनों को जमीन पर रखें फिर तुड्डी को जमीन स्पर्श कराएँ और इसके बाद पैरों को छोड़ते हुए उन्हें जमीन तक धीरे धीरे आने दें। अपने कपोल को जमीन पर रखकर विश्राम करें।
यह अभ्यास ५ सेकेण्ड से आरम्भ करें और प्रतिदिन समय को तब तक बढ़ाते रहें जब तक बिना किसी दबाव के १५ से ३० सेकेण्ड तक न हो जाये।

इसे प्रातःकाल खाली पेट करें और अधिक से अधिक ३ बार कर सकते हैं। इस आसन के दौरान ध्यान विशुद्धि चक्र पर केन्द्रित होना चाहिए। जो व्यक्ति यक्ष्मा ,आंत उतरने की बीमारी या पेप्टिक अल्सर एवं उच्च रक्त चाप से ग्रस्त हों, वे इसे कदापि न करें।


http://www.yogajournal.com/pose/bow-pose/

ट्विस्ट अर्थात अर्ध-मत्स्येन्द्रासन - आप इस आसान को अपने पैर को फैलाकर कर सकते हैं ताकि यह सरल हो जाये .

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1. दोनों पैरों को लंबे करके चटाई पर बैठ जाइये। बायें पैर को घुटने से मोड़कर एड़ी गुदाद्वार के नीचे जमाएं।
2. पैर के तलवे को दाहिनी जंघा के साथ लगा दें। अब दाहिने पैर को घुटने से मोड़ कर खड़ा कर दें और बायें पैर की जंघा से ऊपर ले जाते हुए जंघा के पीछे जमीन के ऊपर रख दें।
3. अब बायें हाथ को दाहिने पैर के घुटने से पार करने अर्थात घुटने के बगल में दबाते हुए बायें हाथ से दाहिये पैर का अंगूठा पकडे़।
4. सिर को दाहिनी ओर मोडे़ जिसमें दाहिने पैर के घुटने के ऊपर बायें कंधे का दबाव ठभ्‍क से पडे़।
5. अब दाहिना हाथ पीठ के पीछे से घुमा कर बायें पैर की जांघ का निम्‍न भाग पकड़े।
6. सिर दाहिनी ओर इतना घुमाएं कि ठोड़ी और बांयां कन्‍धा एक सीधी रेखा में आ जाए।
7. छाती बिल्‍कुल तनी हुई होनी चाहिये।
8. कुछ देर इसी पोजिशन में रहने के बाद रिलैक्‍स हो जाएं।

http://www.yogajournal.com/pose/half-lo ... shes-pose/

स्टैंडिंग फॉरवर्ड बेंड - उत्तानासन

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स्टेप 1 सीधा खड़े हो जाएं.
स्टेप 2 सांस लेते हुए हाथों को सिर के ऊपर ले जाएं.
स्टेप 3 शरीर को ऊपर छत की ओर खींचे. इस स्थिति में कंधों को रिलैक्स रखना चाहिए.
स्टेप 4 हिप्स से शरीर को आगे की ओर झुकाएं. इस अवस्था में पैरों को ज़मीन पर दृढ़ता के साथ टिकाए रखना चाहिए.
स्टेप 5 सिर और गर्दन को आराम की मुद्रा में ज़मीन की ओर रखें और हिप्स को छत की तरफ उठाएं.
स्टेप 6 हथेलियों को पैरो के दोनों ओर रखें. स्टेप 7 सांस छोड़ते हुए पार्श्व भाग को आगे ले जाएं और तलवों को जमीन की ओर दबाएं.
स्टेप 8 इस मुद्रा में 10 सेकेण्ड से 1 मिनट तक बने रहें.

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http://www.yogajournal.com/pose/standing-forward-bend/

ट्रायंगल अर्थात उत्थितात्रिकोणासन

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स्टेप 1 सीधा तनकर खड़े हो जाएं. स्टेप 2 दाएं पैर को 2 से 3 फीट दायीं ओर ले जाएं. स्टेप 3 बाएं पैर को बायीं ओर 45 डिग्री और दायें पैर को दायीं ओर 90 डिग्री घुमाएं. स्टेप 4 दाएं घुटने को दायें टखने के ऊपर मोड़ें. स्टेप 5 शरीर के ऊपर भाग को दायें घुटने की ओर घुमाएं. स्टेप 6 बांहों को कंधों की ऊंचाई में ले जाएं. हथेलियों को ज़मीन की दिशा में रखें. स्टेप 7 सांस छोड़ते हुए हिप्स को आगे की ओर झुकाएं. स्टेप 8 बायीं हथेली से दाएं पैर के बगल में ज़मीन का स्पर्श कीजिए. स्टेप 9 दायीं ओर मुड़कर और दायें हाथ को छत की दिशा में ले जाइये. स्टेप 10 सिर को दायीं ओर घुमाकर दायें हाथ की उंगलियों की ओर देखिए. स्टेप 11 इस अवस्था में 15 से 30 सेकेण्ड तक बने रहिए. स्टेप 12 धीरे धीरे सामान्य स्थिति में लौट आइये.


आप इसे इतना कर सकते हैं जब तक आपके हाथ आपके घुटने पर रहें . यहाँ पर आपको अपने साइड्स अर्थात ओरों को खींचना है . चित्र उन्नत है . उन लोगों के लिए ज़्यादा लचीले नहीं हैं या नए हैं ,वे फर्श पर उन्नत तरीके से इस आसन को करने के बजाये आप शुरू कर सकते हैं अपने हाथ को अपने घुटने पर रखते हुए और झुकते हुए . फिर , जैसे जैसे आप उन्नति करते हैं , सिर्फ आपको अपने हाथ को अपने काल्फ अंग्रेजी में CALF अर्थात पिंडली की मांसपेशी पर फिसलना है फिर टखने पर और फिर फर्श पर .

सवासन

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सवासन की स्थिति में रहें पांच से पंद्रह मिनिट तक के लिए और फिर रिक्त ध्यान अर्थात वोयड मैडिटेशन करें अपने ऊर्जा के क्षेत्र पर .

विधि-

1. पीठ के बल लेट जाएँ और दोनों पैरों में डेढ़ फुट का अंतर रखें। दोनों हाथों को शरीर से ६ इंच(१५ सेमी) की दूरी पर रखें। हथेली की दिशा ऊपर की ओर होगी। सिर को सहारा देने के लिए तौलिया या किसी कपड़े को दोहरा कर सिर के नीचे रख सकते हैं। इस दौरान यह ध्यान रखें कि सिर सीधा रहे।

2. शरीर के सभी अंगों को ढीला छोड़ दें। आँखों को कोमलता से बंद कर लें। शवासन करने के दौरान किसी भी अंग को हिलाना-डुलाना नहीं है। आप अपनी सजगता (ध्यान) को साँस की ओर लगाएँ और उसे अधिक से अधिक लयबद्ध करने का प्रयास करें। गहरी साँसें भरें और साँस छोड़ते हुए ऐसा अनुभव करें कि पूरा शरीर शिथिल होता जा रहा है। शरीर के सभी अंग शांत हो गए हैं।

3. कुछ देर साँस की सजगता को बनाए रखें, आँखें बंद ही रखें और भू-मध्य (भौहों के मध्य स्थान पर) में एक ज्योति का प्रकाश देखने का प्रयास करें।

4. यदि कोई विचार मन में आए तो उसे साक्षी भाव से देखें, उससे जुड़िए नहीं, उसे देखते जाएँ और उसे जाने दें। कुछ ही पल में आप मानसिक रूप से भी शांत और तनावरहित हो जाएँगे।

5. आँखे बंद रखते हुए इसी अवस्था में आप १० से १ (या २५ से १) तक उल्टी गिनती गिनें। उदाहरण के तौर पर "मैं साँस ले रहा हूँ १०, मैं साँस छोड़ रहा हूँ १०, मैं साँस ले रहा हूँ ९, मैं साँस छोड़ रहा हूँ ९"। इस प्रकार शून्य तक गिनती को मन ही मन गिनें।

6. यदि आपका मन भटक जाए और आप गिनती भूल जाएँ तो दोबारा उल्टी गिनती आरंभ करें। साँस की सजगता के साथ गिनती करने से आपका मन थोड़ी देर में शांत हो जाएगा।
http://www.yogajournal.com/pose/corpse-pose/
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Post Sat Dec 05, 2015 6:17 am

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सेटन का नाम

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कई सालों की गहन एवं प्रचंड अनुसंधान के चलते , यह सब साथ आ गया है -

1 . बाइबिल का अविष्कार इसीलिए किया गया ताकि सारा गुप्त ज्ञान और मन / आत्मा की शक्तियां केवल चुने हुए लोगों के हाथ में रहे .

2 . ईसाईयत , जिसकी शुरुआत कैथोलिक चर्च के साथ हुई , इसका अविष्काार इसीलिए किया गया था एक तो , आपको हम ने जो ऊपर बताया है इस लिए , और वास्तविक धर्मों को बर्बाद और तबाह कर बदलने के लिए . वास्तविक धर्म सर्पेंट अर्थात सर्प के चारों ओर केंद्रित थे . सर्प कुण्डलिनी का प्रतीक है / चिन्ह है . "ज्ञान का पेड़ " अंग्रेजी में जिसे ट्री ऑफ़ नॉलेज कहते हैं वह वास्तविकता में मानव आत्मा का नक्शा है . इसे लगभग हर उस प्राचीन धर्म में जो यहूद / ईसाईयत से पहले से था ,उसमे (उन प्राचीन धर्मो में ) देखा जा सकता है .
तन रीढ़ का प्रतीकात्मक है , और डागलें प्रतीक करती हैं चक्रों का और कुण्डलिनी के मार्गों का . वहां १४४,००० नाड़ियाँ होती हैं मानव आत्मा के अंदर . (नाड़ियाँ मार्ग है कुण्डलिनी जीवन शक्ति के लिए ).

बुद्ध " बो वृक्ष" (Bo ट्री )के नीचे बैठे थे और उन्होंने आलोक / प्रबोधन की प्राप्ति की . बो का अर्थ होता है सर्प अर्थात सर्पेंट , जैसे की बो - आ या बू - टा " *** . ईसाई चर्च ने चुराया , तोड़ा- मरोड़ा , और सब कुछ भ्रष्ट कर दिया जो वे कर सकते थे प्राचीन धर्मों में . फिग का पेड़ अर्थात अंजीर का पेड़ इसको "बुद्धिमता का पेड़" इसका वैज्ञानिक नाम है Ficus रिलिजियस***. ईसाई चर्च ने इसे भ्रष्ट कर दिया आदम और ईव के गुप्तांग के ऊपर फिग की पत्तियों को रख कर .

3 . "सेटन " का हिब्रू भाषा में अर्थ होता है "शत्रु " और "प्रतिद्वंदी ".

अब , ये शब्द "सेटन " , हिब्रू की परिभाषा से बहुत बहुत पुराना है , - इस लिंक को सबको देखना चाहिए - http://www.viewzone.com/matlock.html
इसमें आप भारत के नक़्शे के ऊपर उत्तर पश्चिम कोने में देखें , वहां एक शहर है जिसका नाम है "सतना " (Satana ).

"सतनाम " और "सा ता ना मा " ये पवित्र मन्त्र हैं जिनका उपयोग कुण्डलिनी मैडिटेशन अर्थात ध्यान में किया जाता है . पांच मौलिक ध्वनियां प्राचीन संस्कृत की, जो की सबसे पुरानी जाने जानी वाली भाषाओँ में से एक है , वो हैं - "सा - ता - ना - मा ". "सा " का अर्थ होता है अनंत /अनन्तता" , ता का अर्थ होता है जीवन , ना का अर्थ होता है मृत्यु , और मा का अर्थ होता है पुनर्जन्म . "सेटन " के नाम की संस्कृत में की सारी विविधताओं का अर्थ होता है "सत्य " संस्कृत में , जो की संसार की सबसे पुरानी और सबसे प्राचीन भाषाओँ में से एक है .


इन सबका हमारे अंदर की कुण्डलिनी जीवन शक्ति अर्थात सर्पेंट से लेना देना है . "रंगो वाला जैकब अर्थात याकूब का कोट / coat" बाइबिल में , औरा अर्थात आभा है / के लिए कहा गया है . संख्या सात चक्र हैं . पुरानी जादूगरी और आव्हान की किताबों के व्याख्याकारों ने"सप्त ग्रहों " के बारे में एकदम गलत ढंग से पेश किया है . प्राचीन पूर्वज कहीं अधिक जानते थे खगोल /नक्षत्र विधा के बारे में जितना उन्हें श्रेय दिया जाता है उससे कहीं अधिक वे जानते थे .


कोई भी व्यक्ति जो की चायनीज़ चिकत्सीय पद्धति और उन्नत मार्शल आर्ट्स से परिचित है , वह जनता है की ची क्या होती है . (ची कुण्डलिनी की तरह ही जीवन शक्ति है ) और वह यह भी जानता है की ची शरीर के निश्चित मार्गों में अधिक सक्रिय रहती है निश्चित दिनों और घंटो पर . मैं आपको एक चार्ट अगले लेख में दूंगी इसी सम्बन्ध में . उन दिनों में रस - विधाओं के लेखक अपनी लिखावटों को कोड्स (ऐसी लिखावट जिसे आसानी से कोई समझ ना पाये ) में डालते थे , ताकि वे चर्च के उत्पीड़न से बच सकें .

सूर्य भी एक उपासना की वास्तु थी वास्तिवक धर्मों में . ऐसा इसीलिए था क्यूंकि सूर्य जीवन देने वाला है , सूर्य शुद्ध कच्ची ऊर्जा का भण्डार है जिसे वह देता है हम लोगों को . सितारों या चन्द्रमा से ऊर्जा सोखना / खींचना यह सूर्य के साथ क्या किया जा सकता है , उसकी तुलना में यह कुछ भी नहीं हैं , आवश्यकता इस बात की है की आम जन के पास ज्ञान और प्रशिक्षण रहना चाहिए. जॉय ऑफ़ सेटन के मेंबर्स अर्थात सदस्य इसे जानते हैं . आभा अर्थात औरा के गढ्ढे चंगे कर दिए जाते हैं और जीवन शक्ति को प्रवर्धित अर्थात विस्तृत कर दिया जाता है / बहुत बढ़ा दिया जाता है जैसा बिजली के कोई अन्य स्रोत के साथ संभव नहीं .


"लूसीफर " भी एक नाम है जो हमारे पिता सेटन को दिया गया है . लूसीफर वास्तविकता में एक रोमन भगवान थे जिनका हमारे पिता सेटन / ईए से कोई सम्बन्ध नहीं था . उपसर्ग Luc ,Lucifer में , का रौशनी / प्रकाश से लेना देना है . आत्मा को प्रकाश की आवश्यकता पड़ती है . सुबह का सितारा , शुक्र , प्राचीन पूर्वजों के लिए प्रकाश का एक स्रोत था , क्यूंकि उसका उत्थान (वह उगता पहले था )सर्व महत्वपूर्ण सूर्य से पहले होता था . शुक्र हार्ट अर्थात अनाहत चक्र के स्वामी हैं .


पिता सेटन (मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से , सेटन कहना पसंद करती हूँ ), ने मुझे बताया है की उन्हें कोई समस्या नहीं हैं की लोग उन्हें उस नाम से बुलाएँ जिन नामों से वे सदिओं से जाने जाते रहे हैं , भले ही वे (नाम ) त्रुटि पूर्ण हैं . मैं उन्हें पिता सेटन ही कहती हूँ जब भी मैं उनसे बातचीत करती हूँ या उन्हें किसी चीज़ के लिए धन्यवाद देती हूँ . मेरे लिए हमेशा "सेटन " का अर्थ रहेगा "प्रतिद्वंदी ", शत्रु के झूठ - यहूदी / ईसाईयत के प्रतिद्वंदी .

कैथोलिक चर्च इस बात को जानता था की वास्तविक धर्मों को बदलना है किसी चीज़ के साथ और यहीं से बाइबिल की सारी कहानियां आती है . वे सब वास्तविक धर्मों की चुराई हुई हैं , और उनकी उत्पत्ति इतने पहले हो चुकी थी जब यहूदी / ईसाईयत का बदसूरत सिर ही नहीं पला था .

वर्जिन मैरी अर्थात कुमारिनि मर्री , इसे चुराया गया था एस्टेरोथ से , और फिर एस्टेरोथ की जगह बदल दिया गया , और इस मैरी (marry) को "स्वर्ग की महिला " के रूप में चढ़ा बिठा दिया गया है . एस्टेरोथ एक बहुत पसंद की जाने वाली देवी थीं , ईसाईयत के पहले के संसार में . काल्पनिक यहोवा ने एन्लिल / बीलज़ेबब/ बाल की जगह ले ली , और ये एन्लिल / बीलज़ेबब/ बाल (Enlil/Beelzebub/Baal) बहुत पसंद किये जाने वाले भगवान थे संसार में ईसाइयत के आने के पहले , और फिर हमारे प्यारे रचनाकर्ता पिता सेटन / ईए इन्हे सर्पेंट और डेविल बना दिया गया.

लैंगिकता/ कामुकता जो की जीवन ऊर्जा का प्रमुख /प्राथमिक पहलू है , यह अपने आप चर्च की प्रचंड समीक्षा अर्थात जांच में आगया. कामोत्तेजना प्रत्यक्ष रूप से कुण्डलिनी सर्पेंट / सर्प को उत्तेजित अर्थात प्रोत्साहित करती है रीढ़ के तल पर .जो रचनात्मक ऊर्जा , जिसकी आवश्यकता एक अन्य दूसरे मानव जीवन को बनाने के लिए होती है , वही ऊर्जा का उपयोग एक(व्यक्ति ) की जीवन शक्ति को सुधरने हेतु उपयोग लायी जा सकती है जिससे एक (व्यक्ति ) की आत्मा शक्तिशाली होती है और उन्नति करती है .


ज़ाहिर है , यौन गतिविधिओं को प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता , तो दर का उपयोग किया गया ताकि इसे कठोर अधिनियम के तहत रखा जा सके . ईसाई धर्मों में , कैथोलिक चर्च ने , हर यौन सुख को पाप करार दे दिया और इसे चर्च ने प्रतिबंधित कर दिया. सम्भोग केवल बच्चे पैदा करने हेतु स्वीकार्य था और कुछ नहीं . नग्ण्ता पाप बन गयी क्यूंकि यह लालसा (कामोत्तेजना की ) की ओर ले जाती थी . हस्तमैथुन एक दूसरा "नश्वर पाप " बन गया. वो कोई भी चीज़ , जिससे कुण्डलिनी का उत्थान होता , बुरी तरह से उस पर हमला किया गया चर्च द्वारा . एक मात्र उद्देश्य ईसाई चर्च का रहा है की ज्ञान हटाया जाए , और इससे अधिक कुछ नहीं .

जब आम जानो से ज्ञान और शक्ति छीन ली जाती है , तब चुने हुए थोड़े जिन्होंने इस ज्ञान को हटाने के लिए काम किया वे , उसे आराम से उपयोग करते हैं ताकि अनजान संसार को गुलाम बना लिया जा सके . जेसुइट हत्यारे (जेसुइट एक रोमन कैथोलिक चर्च की गैंग है ) उड़ जाने तक लिए जाने जाते हैं क्यूंकि वे आत्मिक / मानसिक शक्तियां खींच लेते हैं उनको अनजान पीड़ितों की प्रार्थनाओं से .



***क्लोएक ऑफ़ दि इलूमिनाटी बाय विलियम हेनरी , २००३
***आईबिड.

हालांकि इस किताब में बहुत सारी महत्वपूर्ण जानकारी है , परन्तु आप और ठीक से बीच में वाक्यों के पढ़ें तो आप समझ जायेंगे की इसका लेखक भी सम्मोहित है क्यूंकि वह काल्पनिक नाज़रीन अर्थात यशु मसीह में विश्वास करता है .

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Post Sun Dec 06, 2015 6:25 am

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सेटनिज़्म और कुण्डलिनी सर्पेंट /सर्प

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जैव बिजिली , यह क्या है और यह क्या करती है -

जैव बिजिली को जीवन शक्ति भी कहा जाता है , इसे ची , शरीर की बिजिली , प्राण , औरा अर्थात आभा , आत्मा , जादू शक्ति आदि भी कहते हैं . इस ऊर्जा के कई नाम हैं .

हमारा शरीर जैव बिजिली पर चलता है इसे अंग्रेजी में बायो इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं . विचार विद्युतीय आवेग होते हैं मस्तिष्क में . मस्तिष्क जैव बिजिली पर चलता है . जब यह बिजिली असंतुलित हो जाती है , तो एक (व्यक्ति ) को मानसिक संग्रहण / मिर्गी आदि जैसे रोग हो जाते हैं .

एक व्यक्ति में जैव ऊर्जा की मात्र , निर्धारित करती है की , उस व्यक्ति की शारीरिक , मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ कैसा है . लोग , जो तनाव में या बीमार रहते हैं , उनमे जैव बिजिली की कम मात्रा होती है . तनाव स्वयं , कम जैव बिजिली का एक लक्षण है .

जैव बिजिली हमारी ऊर्जा को बढ़ाती है , हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढाती है ताकि हम रोगों से बचे रहें , हमारी प्रतिभा बढाती है , एक सकारात्मक दृष्टिकोण का स्वामी बनती है , और हमारी विचार शक्ति को शक्तिशाली बनती है . बढ़ी हुई जैव बिजिली के साथ , हमारे विचार ( विद्युतीय आवेग ) शक्तिशाली हो जाते हैं कहीं अधिक और वे वास्तविकता में प्रकट होने में और समर्थ हो जाते हैं अर्थात आपकी इच्छाएं पूरी होने लगें .

जैव बिजिली के कुछ उदाहरण -

बौद्ध भिक्षु . जो सड़कों पर बैठे थे अर्थात धरना / विरोध कर रहे थे उनमे पेट्रोल डाल कर आग लगदी गयी . वे लगातार शांत बैठे रहे और जल कर मर गए.

मार्शल आर्टिस्ट (युद्ध कला जाने वाले लोग ) - वे अपने मुक्कों से कंक्रीट को तोड़ देते हैं , कराटे चॉप की सहायता से वे बड़ी मात्र में , तोड़ देने वाले जानलेवा हमले कर लेते हैं , सह लेते हैं बिना किसी नुक्सान के .

डिम मैक - यह यह एक कला है विशेष हलके हमले करने की ची के शिरोबिंदु पर (ची जैव बिजिली का एक रूपांतर है ) विशेष समय पर , जससे मौत रुक कर आ सकती हैं , कभी कभी पांच महीनो बाद .

डर , घबराहट में या जब एक व्यक्ति जीवन और मौत की परिस्थिति में फंस गया है , तो मन की शक्ति से वो अत्यंत भारी वस्तुओं को उठा लेने में समर्थ हो जाता है , जैसे की - एक कार का पिछला हिस्सा , ऐसा करना आम परिस्थिति में असंभव होगा .

टेलिकायनेसिस - यह एक कला है जिसमे हम मन की शक्त्यिों से वस्तुओं को हिलाते हैं .

पायरोकायनेसिस - यह एक कला है जिसमे हम मन की शक्तिओं से वस्तुओं को आग लगा सकते हैं .

इलेक्ट्रोकायनेसिस - यह सामर्थ्य है उन वस्तुओं को नियंत्रित करने का जैसे कम्प्यूटर्स जो की बीहली से चलते हैं .

लेवीटेशन - कुछ मार्शल आर्ट्स वाले और योग गुरुओं के पास सामर्थ्य होता है की वे अपने शरीर को हवा में उड़ा सकते हैं .

एक व्यक्ति की जैव बिजिली की शक्ति ही सारी जादुई सफलता का आधार है . पुराने जादू जिनमे अजीब ओ गरीब घातक होते हैं , उनका जादुई कार्यचालन की सफलता से बहुत थोड़ा या कुछ भी लेना देना नहीं है , सफलता तो मन और आभा अर्थात और जो की जैव बिजिली का क्षेत्र है , इनकी शक्ति पर निर्भर करती है और जब ये सही केंद्रण / एकाग्रता और निर्देशन के साथ इन्हे निर्देशित किया जाता है तो ये एक (व्यक्ति ) के वातावरण और दूसरों पर निश्चय ही प्रभाव डालेंगी .

वे , जिन्हे हम भगवान के रूप में जानते हैं (ये बहुत ही शक्तिशाली और उन्नत दुसरे लोकों के जीव हैं जिन्होंने अपने डी एन ए को आनुवंशिक रूप से संशोधित कर लिया है इसीलिए वे बूढ़े नहीं होते ), उनमे बहुत सारी यही ऊर्जा रहती है . लूसीफर को "वह एक जो प्रज्वलित/ प्रकाशमान / चमकदार है " के रूप में जाना जाता है . इनमे से बहुत सारे भगवानों को "डीमॉन्स के रूप में जाना जाता है " और ये डीमॉन्स इसी ऊर्जा से दीप्तिमान / उज्जवल रहते हैं . मिस्र अर्थात इजिप्ट के मंदिरों, मकबरों और मिस्र के पिरामिडों के अंदर बनी चित्रलिपि इस बात को समझती हैं की एक भगवान बनने के लिए यह ऊर्जा कितनी अधिक महत्वपूर्ण है .

सच्चे ईश्‍वरत्‍व की प्राप्ति करना कठिन होता है और ऐसा करने में अविरोधी रूप से लगातार कठोर परिश्रम और समर्पण की आवश्यकता होती है . मन की महारत हासिल करना आवश्यक है . जब तक आप ज़िंदा हैं , आत्मा शारीरिक स्वयं का एक हिस्सा है . हाँ , हम में से बहुत सारे नाक्षत्रिक प्रक्षेपण अर्थात एस्ट्रल प्रोजेक्शन कर सकते हैं (अर्थात हमारे शरीर को स्वेच्छा पर छोड़ देते हैं ), परन्तु हमारा शारीरिक स्वयं हमारी आत्मा को शक्तिशाली बनाने का कार्य करता है जब तक हम जीवित हैं . मेरा अनुभव मृतकों के साथ यह है की वे मृतक शक्तिओं में और अधिक विकसित नहीं होते , उनमे उतनी ही शक्तियां रहती हैं जितनी उनमे थी जब वे जीवित थे . एक आत्मा एक आत्मा हे रहती है जब तक वह फिरसे जन्म न ले ले . सिर्फ आत्मा की शक्ति (शक्तिशाली जैव बिजिली ) से ही एक व्यक्ति ईश्‍वरत्‍व की प्राप्ति करेगा .


कुण्डलिनी और चक्र -

कुण्डलिनी योग का सबसे ऊँचा रूप है . यह भगवान वाली चीज़ है हिन्दूइज़्म, बौद्धिज़्म , योग आदि और सारे पश्चिमी धर्मों के सिद्धांत सीखते हैं - बेबसी , एक व्यक्ति को निर्देशित करते हैं की कैसे तुम सम्पूर्ण गुलाम बन जाओ और इस बात को निश्चित करते हैं की इन विधाओं से अगर कोई परिणाम प्राप्त हों वे कठोर नियंत्रण में रखे जाएँ . पवित्र लिखावटें [हीएरो /hiero का अर्थ होता है "पवित्र " और ग्लिफ /glyph का अर्थ होता है "प्रतीक / चिन्ह " ] जो हमारे लिए मिस्र में छोड़ी गयीं [जो की सच्चे सेटनिज़्म के वास्तविक केन्द्रों में से एक है ] वो निर्देश हैं भगवान बनने के .

आमधारा वाले धर्मों का दोनों पूर्व और पश्चिम के आम धारा वाले धर्मों का उद्देश्य है की , वे मानवता को गुलाम और शक्तिहीन रखें . ये धर्म डर का उपयोग करते हैं एक साधन की तरह . यह "कर्म "
, और वह "कर्म ". सेटनिज़्म बेबसी नहीं सिखाता . सेटन प्रतिभाशाली मेधावी हैं , अत्यंत शक्तिशाली हैं , निडर हैं और विद्रोही हैं (अधर्म के प्रति ) . वे विद्रोह करते हैं स्वतंत्रता के ऊपर लगायी गई पाबंदिओं के खिलाफ .

चक्र -

वहां सात चक्र स्थित हैं रीढ़ के साथ जो की बहुत शक्तिशाली हैं . ये "सात मुहरें अर्थात सेवन सील्स " हैं , इनका ज़िक्र आपको ईसाई की बाइबिल की बुक ऑफ़ रेवेलेशन अर्थात अगर आप बाइबिल का हिंदी संस्करण देखें तो उसमे आपको प्रकाशित वाक्य नाम की किताब में इसका ज़िक्र मिलेगा . ये हैं "सात दीपक आग के जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने जल रहे हैं ". इनको "सील्स " के नाम से सम्बोधित किया गया है क्यूंकि शत्रु परग्रही अर्थात शत्रु एलियंस ने उनको सील कर दिया अर्थात मुहर लगा बंद कर दिया है मानवता में (के अंदर ) ताकि हम ईश्वरीय शक्ति और ज्ञान प्राप्त न कर सकें . हमें आध्यात्मिकता और एस्ट्रल वर्ल्ड अर्थात नाक्षत्रिक संसार से काट दिया गया है . हज़ारों साल पहले , हम भगवान जैसे थे , जब तक पृथ्वी पर हमला नहीं हुआ , और वहां स्वर्ग में "युद्ध छिड़ गया ". हमारी इन मुहरों का बंद हो जाना / सील हो जाना ही मानव जाती के पतन का कारण बना . इस ऊर्जा में असंतुलन और रुकावटें , साथ साथ औरा अर्थात आभा में छेद , ये कारण बंडे हैं - शराब ,अलकोहल आदि की लत का , तनाव का , दूसरों की भावनाओं और दूसरे जीवन चक्रों के प्रति चिंता की कमी का , अपमानजनक व्यवहार का और बहुत सारी ऐसी चीज़ों का जो मानवता को आचार भ्रष्ट कर देते हैं .

कुण्डलिनी -

आग का सर्पेंट अर्थात आग का सर्प कुंडलिनी का प्रतीक / चिन्ह है . वह निष्क्रिय रहता है , रीढ़ के तल पर कुंडलित रहते हुए , मूलाधार चक्र के नीचे . उद्देश्य यह है की इस सर्पेंट अर्थात सर्प को जो की ऊर्जा का शक्ति गृह है इसका उत्थान किया जाये रीढ़ के तल पर से , सारे सात चक्रों में से होकर और इसे सहस्रार अर्थात क्राउन चक्र में से जो सिर के ऊपर (की ओर ) होता है , वहां से बाहर निकाल दिया जाये. इसे सुरक्षित ढंग से करने के लिए , सारे साथ चक्रों को सम्पूर्ण खुला रहना और अबाधित (बाधा नहीं रहनी चाहिए ) होना चाहिए.

आप इतने अधिक मात्र में जैव बिजिली को झेल सकें , इसिलए यह महत्वपूर्ण है की आपका शरीर शक्तिशाली होना चाहिए और आपके सारे सात चक्र सम्पूर्ण खुले होने चाहिए.

कुण्डलिनी जीवन शक्ति है और यह प्रकृति में बहुत कामुक / यौनिक है . यही कारण है की ईसाई चर्च और दूसरे सीधे मार्ग वाले धर्म हस्तमैथुन , या सेक्स (यौनिक क्रियाओं ) के सभी रूप को प्रतिबंधित कर दिया . सेक्स रचनत्मक शक्ति है ; यह एक व्यक्ति के जीवन शक्ति का उपयोग है जिससे दूसरा मनुष्य बनता है . जब एक व्यक्ति अभ्यस्त और निपुण होता है , तो इस शक्ति के उपयोग को कई उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु इसे लगाया जा सकता है .

हठ [शारीरिक ] योग बहुत सहायक हो सकता है चक्रों को प्रोत्साहित / उत्तेजित करने में और खोलने में . हठ योग करने की पुरज़ोर सिफारिश की जाती है . हमारे शारीरिक लचीलेपन के स्तर को बढ़ने के द्वारा , जीवन ऊर्जा बहुत सरलता से बहती है / प्रवाहित होती है . सिर्फ एक व्यक्ति को आवश्यकता है की वो देखे की बुढ़ापे में शरीर में कितनी कठोरता आ जाती है और उसके साथ स्वास्थ्य खराब हो जाता है , मृत्यु के पहले बुढ़ापा ही आता है .

वहां बहुत सारे तरीके हैं इस शक्ति को जागृत करने के लिए . इनमे से कुछ तरीकों में शामिल है -

गुंजन करना जपना अर्थात चांटिंग - कम्पन्न बहुत शक्तिशाली होता है . ध्वनि की शक्ति , कांच को तोड़ सकती है , स्टील और सीमेंट संरचनाओं को कमज़ोर कर सकती है . कम्पन्न चक्रों को खोलते हैं और रीढ़ के तल पर कुण्डलिनी को उत्तेजित / प्रोत्साहित करते हैं .

नियंत्रित सांस (प्राणायाम ) - नियंत्रित सांस की विभिन्न विधियां प्रत्येक चक्र के लिए विशेष होती हैं अर्थात विशेष विधि विशेष चक्र के लिए. हम सब इस बात को जानते हैं की सांस जीवन शक्ति के लिए कितनी महत्वपूर्ण है . मिस्री अर्थात इजिप्शियन भगवान थोथ /THOTH ने कई बार कहा है - "सांस में जीवन है ".

कल्पना करना / दृश्य बनाना एवं एकाग्रता अर्थात ध्यान केंद्रित करना - हमारे मन में प्रत्येक चकर का दृश्य बनाने / कल्पना करने और चक्रों पर ध्यान केंद्रित करने से , हम चक्रों को खोल सकते हैं , बंद कर सकते हैं और नियंत्रित कर सकते हैं .

जैव बिजिली में सुधार करना , आदर्शतः इसे धीरे धीरे और क्रमशः अर्थात क्रम बद्ध तरीके से किया जाना चाहिए. एक व्यक्ति का शारीरिक / भौतिक स्वयं एवं आध्यात्मिक स्वयं, जैव बिजली के एक निश्चित वोल्टेज अर्थात विद्युत दाब पर संचालित होने का आदि है .

बढ़ी हुई जैव बिजिली -

प्रचंड परम आनंद ला सकती है .

आभा अर्थात औरा को शक्तिशाली बनती है एवं तेज़ घनिष्ट करती है .

एक हलकेपन की , तैरने की , चमक की अनुभूति देती है और एस्ट्रल प्रोजेक्शन अर्थात नाक्षत्रिक प्रक्षेपण में सहायता करती हैं . (नाक्षत्रिक प्रक्षेपण में एक व्यक्ति की आत्मा शरीर को छोड़ देती है उस व्यक्ति की इच्छा पर और फिर वापस लौट आती है उस व्यक्ति के शरीर में इच्छानुसार.)

यह एक व्यक्ति के मन को खोलती है ताकि वह आत्माओं से संपर्क कर सके और टेलिपाथिक अर्थात दूर संवेदन कर सके (स्वयं के विचारों को संचारित कर सके ). यह एक व्यक्ति को रोग / बीमारियां से लड़ने में समर्थ बनता है और एक व्यक्ति को स्वयं को चंगा करने की शक्तियां भी प्रदान करता है .

रोगप्रतिरोधक प्रणाली की सुरक्षा करता है .

जादू कार्य करे , इसके लिए शक्ति प्रदान करता है - सच्चा जादू बिना किसी रंगमंच की सामग्री के - खाली हाथ . यही सच्चे निपुण की कला है . समारोह / रस्म अनावश्यक है .


सीमायें सेटनिज़्म का हिस्सा नहीं हैं .

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Post Mon Dec 07, 2015 9:36 am

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चक्रों की गतिविधि

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpentis666/Hours.html

हमारे चक्रों के कुछ घंटे होते हैं जब वे अधिक सक्रीय रहते हैं , ऐसा प्रति दिन होता है . ये चार प्रधान बिन्दुओं और हफ्ते के सात दिनों के अनुरूप होते हैं . बहुत सारे पुराने जादूगरी के ग्रंथों ने इनके बार में उल्लेख किया है ग्रहों के रूप में . प्रत्येक चक्र एक विशेष गृह और हफ्ते के दिन के अनुरूप है . यह अधिकतम गतिविधिओं का समय महत्वपूर्ण है क्यूंकि इन समयों में हम एक विशेष चक्र पर ध्यान अर्थात मैडिटेशन कर सकते हैं या कार्य कर सकते हैं या अनुष्ठानों में ऊर्जाओं का उपयोग कर सकते हैं . नीचे जो समय दिया है वह चौबीस घंटे वाली घडी का दिया है . आप में से वे लोग जो इससे अनजान हैं उनके लिए -

१३:०० - १ pm
१४:०० - २ pm
१५:०० - ३ pm
१६:०० - ४ pm
१७:०० - ५ pm
१८:०० - ६ pm
१९:०० - ७ pm
२०:०० - ८ pm
२१:०० - ९ pm
२२:०० - १० pm
२३:०० - ११ pm

CHart is uploaded here - >>>>>>>>>> http://1drv.ms/1RzMZZj

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Post Tue Dec 08, 2015 10:50 am

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आभा

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpentis666/AURA.html

प्रत्येक चीज़ की आभा अर्थात औरा होती है , भले ही वह जीवित हो या निर्जीव निः सार हो . आभा एक ऊर्जा क्षेत्र है जो परमाणुओं और अणुओं से (जो सारे पदार्थों में रहते हैं अर्थात हर जगह रहते हैं ) उनके कम्पन्न से बनी होती है . यह ब्रम्हांड / संसार स्वयं एक निश्चित आवृत्ति में कम्पन्न करता है और यह गुर्त्वाकर्षण बल जो सब कुछ एक साथ पकडे रखता है वह प्रकृति में विद्युत चुम्बकीय होता है.


हर व्यक्ति की आभा अर्थात औरा उसके उँगलियों के निशान की तरह ही अनोखी / अद्वितीय होती है . कोई भी दो आभाएँ एक जैसी नहीं होती . औरा अर्थात आभा का उपयोग सुरक्षा करने , आकर्षित करने , प्रभाव डालने , पंगु बनाने और यहाँ तक मारने तक के लिए किया जा सकता है . जैव बिजिली का यह क्षेत्र जो जीवित वस्तुओं को घेरे रहता है , इसे क्रमोदेशित किया जा सकता है (एक व्यक्ति के / आपके ) मन की की शक्तियों का उपयोग करके .
वे लोग जो अभ्यस्त हैं और उनकी तीसरी आँख सक्रिय है वे औरा अर्थात आभा को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं और बहुत सारी व्यक्तिगत जानकारी का पता लगा सकते हैं सिर्फ , रंग , शक्ति , ऊंचाई और आकार देख कर , एक (व्यक्ति ) के आभा की .

स्वयं की आभा को देखने के लिए , आपको एक समाधी की अवस्था में जाकर शुरुआत करनी चाहिए. आपकी तीसरी आँख खुली हुई होनी चाहिए.
अपने हाथों को अपने सामने ले आएं , आदर्शरूप से अगर संभव हो तो एक काले पृष्ठभूमि में अर्थात अँधेरा होना चाहिए . शुरुआत में , आपको कुछ धुंधली लाइन्स दिखेंगी आपके हाथों और उंगलिओं को घेरे हुए . हर चीज़ की तरह , आप यहां इसको जितना ज़्यादा समय देंगे / लय मिालयेंगे , [अभ्यास और दृढ़ता की आवश्यकता होती है यहाँ ], उतने बेहतर आप हो जायेंगे . जितने बेहतर आप अपनी स्वयं की आभा देखने में होंगे , उतने ही अच्छे से आप दूसरों की आभाओं को भी जल्द देख पाएंगे , सिर्फ उनमे (उन व्यक्तिओं की जिनकी आभा देखना चाहते हैं ) ध्यान केंद्रित कर / लय मिलाके. बाद में , आप रंग , परत और आकार देखने में भी समर्थ हो जायेंगे.

आभा को महसूस करना , उसे देखने से कहीं ज़्यादा सरल होता है . पावर मैडिटेशन अर्थात शक्ति ध्यान , जब इसे अविरोधी तरीके से लगातार किया जाये , तो यह आपकी ऊर्जा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ा देता है . ऊर्जा का हस्तकौशल अर्थात उसे सँभालने / जोड़ने - बदलने की कला बहुत महत्वपूर्ण होती है ताकि जादू और टोन - टोटके कार्य करें . अपनी ऊर्जा महसूस करने के लिए , आपको अपने हाथ एक दुसरे के ऊपर चलने हैं , या अपनी बांहों की कलाई पर इसे अंग्रेजी में फोरआर्म्स कहते हैं . यह वह हिस्सा होता है जो आपकी भुजा की कोहनी से आपकी उँगलियों के नोक या कलाई तक फैला होता है . आपको ऊर्जा महसूस करनी चाहिए.
आप अपने मित्रों या परिवार के सदस्यों की अभाओं को भी महसूस करने का अभ्यास कर सकते हैं , अगर वे आपको ऐसा करने की अनुमति दें . इससे आपकी छूने की संवेदनशीलता का विकास होगा.

अपनी आभा को शक्तिशाली बनाने और बढ़ाने के लिए , आपको अंदर ऊर्जा लेनी चाहिए. यह पावर मैडिटेशन अर्थात शक्ति ध्यान से किया जा सकता है . ऊर्जा ध्यान अर्थात एनर्जी मैडिटेशन बहुत उत्तम है आपकी ऊर्जा को शक्तिशाली बनाने / बढ़ाने / चार्ज करने का .
हठ [शारीरिक ] योग और ताई ची (प्राचीन चायनीज़ मार्शल आर्ट्स / युद्ध कला ) भी आपकी आभा को शक्तिशाली बनने और बढ़ाने में सहायक होती हैं . ये दोनों विधाओं से आपकी आभा , ऊर्जा संतुलित भी होती हैं .

यह अति महत्वपूर्ण है की आप अपनी आभा अर्थात औरा को साफ़ करें . एक स्वच्छ स्वस्थ आभा रोगप्रतिरोधक प्रणाली को शक्तिवान बनती है और हानिकारक ऊर्जाओं को रोकती है एक (व्यक्ति ) के शरीर में प्रवेश करने से. लगभग सभी नकारत्मक जीव नंगी आँखों से नहीं देखे जा सकते . ऊर्जाएं , जैसा के बहुत से भौतिक विज्ञानी जानते हैं , की ऊर्जाओं को उपपरमाण्विक अर्थात सब अटॉमिक कणों में तोडा जा सकता है , रौशनी / प्रकाश को फोटोन्स (Photons) में तोडा जा सकता है . ऊर्जा का विकिरण एक शक्तिशाली औरा अर्थात आभा द्वारा , इन नकारत्मक ऊर्जाओं और जीवों को जला देता है इसके पहले की वे कोई नुकसान कर सकें .


औरा अर्थात आभा [शक्तिशाली सफ़ेद - सुनहरी अर्थात सोने के रंग की रौशनी / प्रकाश ]साफ़ करना अनिवार्य है किसी भी ऐसे अनुष्ठान के बाद जिसमे काले / नकारत्मक जादू का उपयोग किया गया हो , श्राप देने के बाद . इससे फर्क नहीं पड़ता की ये श्राप कितने छोटे थे या कितने बड़े , आपको कोई भी व्यायाम करते हों जिनमे नकारत्मक या विनाशकारी शक्तियां सम्मिलित / शामिल हुई हों , आपको ऐसी स्थिति में आभा को अनिवार्य रूप से साफ़ करना है . आपको अपने चक्र भी साफ़ करने चाहिए और शक्तिशाली बनाने चाहिए. ऐसा प्रत्येक चक्र पर एक शक्तिशाली और प्रचंड तीव्र सफ़ेद रौशनी रख कर किया जाता है . इसकी आवश्यकता उन अवशिष्ट अर्थात शेष नकारत्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा के लिए पड़ती है जो नुकसान पहुंचा सकती हैं . यह ऊर्जा को स्वयं पर प्रतिघात करने या उलट आने से भी रोकता है . कभी भी जल्द बाज़ी न करें , आप अपना समय लें जितनी आपको आवश्यकता लगे . रोकथाम हमेशा से ही अधिक बेहतर है इसके बजाये की आप बाद में समस्या से उलझें .

एक शक्तिशाली आभा अर्थात औरा स्वास्थ्य , ख़ुशी , प्रतिभा , सुख और ऊर्जा प्रदान करती है . जिन लोगों की आभा कमज़ोर होती है वे अक्सर स्वास्थ्य में कमज़ोर और तनाव युक्त रहते हैं . हमारी व्यक्तिगत ऊर्जाएं हमारे वातावरण पर कार्य करती हैं और हमारे भाग्य को निर्देशित करती हैं . जिन लोगों की आभाएँ कमज़ोर होती हैं वे अक्सर दुर्भाग्य के शिकार हो जाते हैं .

आभा को हिप्नोसिस अर्थात सम्मोहन की सहायता के साथ कर्मोदेशित किया जा सकता है . यहाँ मैं आगे जो कार्यचालन आदि बता रही हूँ , उनका उत्तम लाभ लेने के लिए सम्मोहन के ऊपर मेरा लेख भी पढ़ें . यह लेख आगे विस्तार से बतलाया गया है . अब जहाँ तक आभा और अवचेतन मन का सवाल है , तो आपको यहाँ पर हमेशा सौ प्रतिशत स्पष्ट रहना है की आप क्या इच्छा रखते हैं . प्यार के साथ , हम वह (व्यक्ति )नहीं चाहते जो उपलब्ध नहीं है . पैसे के साथ , हम नहीं चाहते की पैसा बर्बादी आदि के साथ आये - या कोई ऐसी चीज़. जब आत्मा और मन के साथ कार्य किया जा रहा हो , तो ऊर्जा सबसे जल्दी वाला और सबसे सरल रास्ता लेती है हमें हमारा इच्छित परिणाम प्रदान करने के लिए , और अगर हर पहलू पर गौर नहीं किया गया हो , तो फिर कोई भी अनिर्देशित ऊर्जा वह लाएगी जो उपलब्ध है . रंग विशेषकर महत्वपूर्ण होता है जब हम आभा को क्रमोदेशित कर रहे होते हैं . रंगों के बारे में भी लेख आगे विस्तार से बतलाया गया है . नीचे उदाहरण हैं की हम कैसे हमारी आभा अर्थात औरा को प्रभावी ढंग से क्रमोदेशित कर सकते हैं चीज़ें करवाने के लिए. याद रखें की आपको अपने अफर्मेशंस (दृढ़ता के साथ कहने को अफर्मेशंस कहते हैं ) वर्तमान काल में रखने हैं क्यूंकि अवचेतन मन और आत्मा "होगा / होगी " नहीं समझते हैं. कल्पना करें / दृश्य बनायें की वह (चीज़ ) पहले ही हो गयी है और वर्तमान में है .


उदाहरण के लिए -
जब आपको जीवन में प्यार चाहते हैं :
अपनी औरा अर्थात आभा की कल्पना करें / दृश्य बनायें जब आप समाधी की अवस्था में हों , जितनी गहरी समाधी अवस्था उतना बेहतर . ऊर्जा को अंदर लें सांस के साथ और अफर्म करें अर्थात दृढ़ता के साथ कहें कई बार वर्तमान काल में :
"मेरी आभा आकर्षित कर रही है मेरे सबसे अच्छे / परफेक्ट प्यार / यौनिक साथी / मित्र / जो भी हो ". आप अपनी व्यक्तिगत इच्छा अनुसार अफर्मेशन को बदल सकते हैं . इसे दृढ़ता के साथ कहें पांच से दस बार सांस के साथ ऊर्जा अंदर सांस में लेने के दौरान .

प्यार / काम वासना या किसी विशेष व्यक्ति के ध्यान को आकर्षित करने के लिए :
दृढ़ता के साथ कहें - मैं मेरी आभा को क्रमोदेशित कर रहा हूँ की वह कार्य करे और आकर्षित करे ____________ की आभा पर . मैं उसे बहुत आकर्षित लगता हूँ और यौन संबंध बनाने की दृष्टि से वह मुझे सबसे उत्तम मानता /ती है .

आपको सुरक्षा की आवश्यकता हो -
शक्तिशाली सफ़ेद सुनहरी अर्थात सोने के रंग की रौशनी / प्रकाश को सांस के साथ अंदर लें . सांस के साथ अंदर लेते समय आप उस ऊर्जा को अपने शरीर के मध्य में मिलाएं और उसे और चमकीला और चमकदार बनाते जाएँ . सांस को बाहर छोड़ने पर , उसका विस्तार करते रहें (अर्थात ऊर्जा बादहएं / विस्तृत करें ) ऊर्जा और चमकदार मेधावी होती जाये.

दृढ़ता के साथ कहें - मेरी आभा बहुत शक्तिशाली है और मेरी हर समय सुरक्षा कर रही है .
यह बहुत अच्छा व्यायाम है जिसे आप रोज़ कर सकें और एक शक्तिशाली , सुरक्षात्मक ऊर्जा का क्षेत्र बना सकें अपने चारों ओर.


आप एक अच्छा प्रभाव छोड़ना चाहते हैं -
एक शक्तिशाली आभा अक्सर प्रभाव डालेगी दूसरों पर जिससे वे आपका सदा पक्ष लेंगे.
दृढ़ता के साथ कहें - मेरी आभा एक बहुत सकारत्मक छाप छोड़ रही है _______ पर . अगर यह जॉब इंटरव्यू है , [यह आभा बहुत सकारत्मक छाप छोड़ रही है .... उस व्यक्ति पर जो कल मेरा इंटरव्यू लेगा , या उन पर जो मुझे सुनेंगे वहां , आदि ]
हमेशा वर्तमान काल में कहना है . अवचेतन मन नहीं समझता शब्द जैसे की "होगा / होगी " आदि और ये होगा कभी आता नहीं .

अनचाहे लोगों को दूर रखने के लिए -
सूर्य के जैसे सफ़ेद रौशनी / प्रकाश को अंदर सांस में लें . सफ़ेद रौशनी / प्रकाश प्रतिबिंबित करता है और पीछे हटा / खदेड़ देता है .

दृढ़ता के साथ कहें - मेरी आभा पीछे खदेड़ रही है . [डर / दह्शत डाल रही है ] ______ में और ____ को दूर रख रही है मुझसे हर समय .

स्वयं को चंगा करने के लिए -
बहुत सारी ऊर्जा की आवश्यकता होती है चंगाई में . स्वयं की औरा अर्थात आभा को शक्तिशाली बनाने के लिए सूर्य से ऊर्जा को सांस लेना अति उत्तम है . सूर्य चक्रों के सारे रंगों को रखता है उनके सबसे पवित्र और सबसे जीवंत अवस्था में . सूर्य [666] ऊर्जा के सबसे शक्तिशाली स्रोतों में से एक है . जब एक (व्यक्ति ) बीमार होता है , उसके चक्रों में असंतुलन खड़ा हो जाता है जो उन विशेष शरीर अंगो के स्वामी होते हैं जो बीमार हो जाते हैं या घायल हो जाते हैं . चंगाई के लिए , आपको कार्य करना है स्वामी चक्र के रंग के साथ और उसके उलटे के साथ ताकि एक संतुलन बनाया जा सके .

वह चक्र जो उस घायल या बीमार शरीर के भाग का स्वामी है , आपको उस चक्र की ऊर्जा का रंग अंदर सांस में लेना है और दृढ़ता के साथ कहना है -
"मैं [रंग का नाम ] ऊर्जा अंदर सांस में ले रहा है जो मेरे [चक्र का नाम ] को संतुलित कर रही है और मेरे [अंग का नाम ] को चंगा कर रही है "
जब आपने ऐसा कर लिया हो , तो सांस के साथ अंदर सफ़ेद ऊर्जा को सांस के साथ अंदर लें अपनी आभा को संतुलित करने के लिए .

दूसरों की आभाओं पर भी कार्य किया जा सकता है और उन्हें क्रमोदेशित किया जा सकता है .

ऊपर के अफर्मेशंस को पढ़ कर अर्थात दृढ़ता के साथ कैसे कहते हैं आप समझ गए होंगे और अपने स्वयं के अफर्मेशंस को सुधार करने में समर्थ हो गए होंगे .

चहेतों की सुरक्षा के लिए -
एक शक्तिशाली सफ़ेद - सुनहरी अर्थात सोने के रंग की रौशनी / प्रकाश का घेरा बनायें उस व्यक्ति के चारों ओर . और शक्तिशाली बनाने के लिए , सबसे अच्छा है की आप यह एक गहरी समाधी की अवस्था में जाकर करें .
दृढ़ता के साथ कहें - मैं एक शक्तिशाली सुरक्षा करने वाली आभा रख रहा हूँ ________ के चारों ओर . ऐसा नियमित रूप से किया जाना चाहिए और इसे तब भी किया जा सकता है जब आपका चहेता सो रहा / रही हो .इसे सबसे अच्छा तब करना चाहिए जब चन्द्रमा वैक्स हो रहा है [अर्थात चन्द्रमा नए से सम्पूर्ण की ओर जा रहा है और सरल शब्दों में जब चन्द्रमा अपनी रौशनी में बढ़ता है तो उसे वैक्सिंग या वैक्स चन्द्रमा कहते हैं ]. ऐसा इसीलिए क्यूंकि ऊर्जाएं बढ़ेंगी जैसे जैसे चन्द्रमा रौशनी / प्रकाश में बढ़ेगा . अत्यंत शक्तिशाली बनाने के लिए , आपको यह कार्यचालन प्रतिदिन करना है और दस बार दृढ़ता के साथ कहना है अर्थात अफर्म करना है .

काम वासना पैदा करने के लिए -
एक शक्तिशाली लाल या संतरे रंग की आभा उस व्यक्ति के चारों ओर डालें / घेरा बनायें .
दृढ़ता का साथ कहें -
"______________ एक प्रचंड रोक न जा सकने वाला शारीरिक सम्बन्ध बनाने का जूनून , इच्छा / काम वासना का अनुभव कर रहा है मेरे प्रति. ""______ मुझे पाता है / पाती है की मेरे साथ योन सम्बन्ध बनाये रहा नहीं जा सकता ." आप हस्त मैथुन कर सकते हैं सेक्स जादू का उपयोग करते हुए और ऊर्जा को आपके इच्छित व्यक्ति की आभा में ले जा सकते हैं . इसे सबसे अच्छा शुरू करें रविवार को या मंगलवार को वैक्सिंग चन्द्रमा के दौरान . हालांकि इसे कभी भी न करें जब चन्द्रमा कन्या राशि के अविवाहित / कुंवारे स्थान में हो तो .

प्यार प्रकट करने के लिए -
एक शक्तिशाली हरी आभा उस व्यक्ति के चारो ओर रखें / बनाये. प्यार की प्रचंड भावनाओं को महसूस करें जैसे जैसे आप उसे क्रमोदेशित करते हैं .
दृढ़ता के साथ कहें -
"_______________ प्रचंडता और अनियंत्रण के साथ मेरे साथ प्यार में पड़ रही / रहा है ."
"_______________ मेरे लिए पागल है / जुनूनी है बहुत ." आदि . आप यहाँ पर सेक्स मैजिक / सेक्स जादू का भी उपयोग कर सकते हैं जैसा ऊपर वाले कार्यचालन में दिया है . इसे सबसे अच्छा शुक्रवार के दिन करना चाहिए वैक्सिंग चन्द्रमा के दौरान .

सेक्स मैजिक के बारे में विस्तार से आगे लेख में .

दूसरों को चंगा करने के लिए -
आप जिसको चाहते हैं चंगा करना , उसके चारों ओर एक शक्तिशाली सफ़ेद सुनहरी अर्थात सोने के रंग की आभा का दृश्य बनायें / कल्पना करें जो उस चहेते को घेरे हुए है और चमक रही है . आपको रंगों की ऊर्जाओं का भी उपयोग करना चाहिए [स्वयं को चंगा करने वाला अंश देखें ऊपर ]
दृढ़ता के साथ कहें - मैं एक शक्तिशाली चंगा करने वाली ऊर्जा डाल रहा / रही हूँ ______ की आभा में ; यह ऊर्जा प्रभावशाली रूप से _______ बीमारी से लड़ रही है और उसके उत्तम स्वास्थ्य को लौटा रही /बहाल कर रही है . गंभीर बीमारी के मामलों में , इसे प्रति दिन किया जाना चाहिए. दूसरों को चंगा करने में बहुत शक्ति चली जा सकती है . अगर आप अनुभवहीन हैं , तो दूरस्थ अर्थात दूर से की जाने वाली चंगाई सबसे अच्छी होती है . हस्त चक्रों अर्थात हाथ के चक्रों की तरह प्रत्यक्ष संपर्क अर्थात जब आप हाथ के चक्रों से सीधे ऊर्जा को लगते हैं रोगी व्यक्ति में , तो यह खतरनाक हो सकता है . बीमारी चंगा करने वाले के शरीर में सोखी जा सकती है . ऐसा प्रत्यक्ष कार्य करने के लिए , एक व्यक्ति की आभा अति शक्तिशाली होनी चाहिए और उसे अच्छे से अपनी आभा को साफ़ करना चाहिए प्रत्येक चंगाई सेशन / सत्र के पश्चात . सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करना सर्वाधिक प्रभावशाली होता है यहाँ पर .

काला/ नकारत्मक जादू और मारण प्रयोग -

मारण प्रयोग -
इसे सबसे अच्छा तब करना चाहिए जब शत्रु सो रहा हो . एक काली आभा रखें व्यक्ति के चारों ओर / अर्थात बनायें काली आभा . इससे उसकी स्वयं की आभा विनाशकारी ऊर्जा को सोखेगी . ऐसा करने के बाद आप अपनी नफरत / घृणा उस पर निकाल सकते हैं . आप इस बात को समझ लेन की आपको बार बार अनुभूति के साथ कल्पना करना / दृश्य बनाना है की आप कैसे चाहते हैं की यह व्यक्ति मरे .
दृढ़ता के साथ कहें -
मैं एक शक्तिशाली विनाशकारी आभा __________ के चारों ओर रख रहा हूँ जो लगातार उसे मारने के लिए कार्य कर रही है . यह सबसे अच्छा शनिवार या मंगलवार को करें वेनिंग चन्द्रमा के दौरान . जब चन्द्रमा की रौशनी / प्रकाश घट रहा अर्थात कम हो रहा होता है तो उसे वेनिंग चन्द्रमा कहते हैं . सरल शब्दों में ढलता चन्द्रमा . इस बात को निश्चित कर लें की आप अपनी आभा साफ़ करें और चक्रों को साफ़ कर हर कार्यचालन के बाद .

दुर्भाग्य पैदा करने (शत्रु के लिए ) / या हानि करने हेतु -
अगर आपकी आभा पर्याप्त शक्तिशाली है , तो सिर्फ बैठना और व्यक्ति के बारे में रटने से ही (की तेरा बुरा हो , सर्वनाश हो आदि ) पर्याप्त होता है . मैंने पाया है की यह महत्वपूर्ण है की आप कल्पना करें / दृश्य बनायें एक विशेष दुर्भाग्य का बार बार परन्तु आरामदायक और साथ ही क्रोध के साथ .

काले / नकारत्मक जादू के परिणाम निर्भर करते हैं आभाओं की शक्ति पर जिनका उपयोग कर काला जादू किया गया . शिकार की आभा कमज़ोर *होनी चाहिए * जादूगर की तुलना में . अगर शिकार की आभा अधिक शक्तिशाली हुई , तो आपका कार्यचालन पलट जायेगा क्यूंकि एक अधिक शक्तिशाली आभा प्राकृतिक रूप से नकारात्मक ऊर्जा को मोड़ देती / खदेड़ देती है . कुछ लोगों की प्राकृतिक रूप से ही शक्तिशाली आभाएँ होती हैं . ऐसा पिछले जनम के जीवन से आ सकता है / या के कारण हो सकता है . अगर आपके शत्रु की आभा आपसे अधिक शक्तिशाली हुई तो आप एक गतिरोध महसूस करेंगे . समय के साथ अपनी आभा बनायें और अधिक शक्तिशाली ऐसे किसी भी प्रकार के कार्यचालन करने के पहले .

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HAIL SATAN AND ALL GODS OF HELL !!!!!!!!!

Image

Hail Satan Hail Peacock Lord Hail Shiva Hail Kartikey HAIL all demon friends

“It is necessary that I should die for my people; but my spirit shall rise from the grave, and the world will know that I was right.” -Adolf Hitler.
Heil mein Führer I know you were right -roadtorevolution
Contact ME - proudpaganproudpast@gmail.com
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HEY HAVE
Image Poo people...

Post Wed Dec 09, 2015 10:16 am

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रंगों के जादुई गुण

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpentis666/Color.html

काला
काला रंग सबसे शक्तिशाली रंगों में से एक है . यह सोखता है , छिपाता है , भ्रम और अराजकता पैदा करता है , नई शुऱुआतें करता है , छुपी वस्तुओं का ज्ञान भण्डार है , रौशनी / प्रकाश को रखने वाला है . स्वयं को नियंत्रण करने हेतु , धैर्य और सहनशक्ति के लिए उपयोग किया जाता है . शत्रुओं में फूट अर्थात कलह कराने और शत्रुओं में भ्रम पैदा करने के लिए भी काला एक अच्छा रंग है . इस रंग का उपयोग सुरक्षा हेतु , नकारत्मक ऊर्जाओं को बाँधने हेतु , बाधाओं और अड़चनों को तोड़ने के लिए , और नकारत्मक थॉटफॉर्म्स (इनके बारे में आने वाले अध्याय में विस्तार से बताया जायेगा . ) को तोड़ने और पलटने के लिए भी किया जा सकता है . सबसे अच्छा तब होता है जब इसे दूसरों पर उपयोग किया जाये.

काला रंग मूलाधार चक्र का स्वामी है , इसका गृह शनि है , तत्व पृथ्वी है और वास्तविक / मूल धर्मों में , यह नई शुऱुआतों को प्रकट करता है . सेटेनिक रस-विधा में , काला रंग रिक्त ध्यान अर्थात वोयड मैडिटेशन की स्टेप्स को और परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है .


नीला रंग -
सत्य , बुद्धिमता , सुरक्षा , अंदरूनी शांति , वफादारी , गुप्त ज्ञान और विस्तार . बृहस्पति / गुरु नीले रंग का स्वामी है - भाग्य , विस्तार , प्रचुरता (बहुत मात्रा में किसी का होना ), लम्बी दूरी की यात्रायें , ऊंची शिक्षा , कचहरी सम्बन्धी मामले , कर अर्थात टैक्स मामले (हरे रंग के साथ उपयोग करें ) निवेश , आधार , समृद्धि और अवसर . आध्यात्मिकता , डीमॉन्स का आव्हान करना , चंगाई करना , प्रेरणा , भक्ति, शांति, ईमानदारी और सत्य , सत्य के प्रति निष्ठा / स्वामिभक्ति , अंदरूनी शांति , ज्ञान और बुद्धिमता , घर में सामंजस्य / एकता , गुप्त / जादुई शक्ति और विस्तार . नीले रंग का जादू में उपयोग किया जा सकता है , जब रंग दूसरों को लगाया जाता है अर्थात दूसरों पर इस रंग का उपयोग किया जाये और उसका निर्देशन तनाव , दुःख , निराशा , सहानुभूति की कमी करने , उदासी , खिन्नता पैदा करने हेतु करना हो .

नीला रंग विशुद्ध अर्थात थ्रोट चक्र का स्वामी है . नीला रंग पानी अर्थात जल तत्व का है .

सुन्हेरा अर्थात गोल्ड -
महान सौभाग्य , , अंतर्ज्ञान, , समझ , भविष्य के बारे में जानने , तेज़ी से सौभाग्य प्राप्ति , वित्तीय लाभ , (मुझे विश्वास है सोने का रंग अर्थात सुन्हेरा रंग बहुत बड़ी मात्रा में धन को आकर्षित करता है .(हरे रंग का उपयोग जगमगाते हुए सुनहरे रंग के साथ करें धन के ध्यान अर्थात मनी मैडिटेशन के लिए ). सुनहरे रंग का उपयोग चंगाई , ख़ुशी , अधिकार , प्रसिद्धि / साख / ख्याति , सम्मान और व्यक्तिगत शक्तिओं को प्राप्त करने के लिए होता है . सुनहरे रंग का उपयोग करें , आत्मविश्रास , यश , जुएं में सफलता , सुख/प्रसन्नता , लोकप्रियता / प्रतिभा बनाने के लिए ., स्वास्थ्य एवं जीवन शक्ति बढ़ने हेतु , चंगाई , सुरक्षा , सफलता और जादुई शाक्दी बढ़ाने हेतु .

गोल्ड अर्थात सुन्हेरा रंग सबसे शक्तिशाली रंगों में से एक है . सेटन की आभा अर्थात औरा सुनहरी अर्थात सोने के रंग की है . सुन्हेरा अर्थात गोल्ड रंग सूर्य का रंग है , और इस रंग का तत्व अग्नि है . सेटेनिक रस-विधा में , सुन्हेरा अर्थात गोल्ड रंग आत्मा की पूर्णता / प्रवीणता का प्रतिनिधित्व करता है . सुन्हेरा एवं सफ़ेद - सुन्हेरा दोनों रंग प्राचीन मिस्र (इजिप्ट ) की चित्रलिपिओं में , मंदिरों और पिरामिड की , में हर तरफ ये दोनों रंग सुन्हेरा एवं सफ़ेद - सुन्हेरा का उपयोग हुआ है . गोल्ड अर्थात सुन्हेरा रंग धन संपत्ति एवं शक्ति का रंग है .

हरा रंग -
धन . उपजाऊपन ,प्रचुरता , भौतिक लाभ , धन / संपत्ति , चंगाई , प्राकृतिक आत्माओं के साथ संपर्क स्थापना , सूजन / प्रदाह का नाशक . शुक्र हरे रंग का स्वामी है - प्यार , प्यार बढ़ाना (स्नेही; लाल रंग होता है यौन क्रिया / काम - वासना के लिए ) , स्वामीभक्ति/ सत्य के प्रति निष्ठा , सुलह / विरोध की शान्ति , सुंदरता , जवानी , मित्रता , आकर्षण , सामंजस्य , वित्तीय लाभ , कमाई का बढ़ना , सामाजिक कार्य , संपत्ति/जायदाद , धन / दौलत , आसक्ति , सुख प्रसन्नता . बढ़ाने एवं शुऱुआतों के लिए अच्छा होता है . शुक्र हरे रंग का स्वामी है - प्रचुरता , उपजाऊपन , सफलता , सामान्य अच्छा भाग्य , सामंजस्य , अमरता , उदारता/दानशीलता , भौतिक लाभ , नवीकरण, शादी , संतुलन और चंगाई . हरे रंग का उपयोग ईर्ष्या पैदा करने , लालच , संदेह , रोष /नाराज़गी , बीमारी , रोग , असामंजस्य / कलह पैदा करने के लिए भी किया जा सकता है जब इस रंग को दूसरों की ओर लगाया / उपयोग किया जाये और निर्देशित किया जाये . हरा रंग हार्ट अर्थात अनाहत चक्र का स्वामी है .

इंडिगो रंग [नीला - बैंगनी ]-
मैडिटेशन (ध्यान ) , आत्मिक / अलौकिक / मानसिक / पारलौकिक सामर्थ्य , टेलीपैथी अर्थात दूर संवेदन , मन पढ़ने में , आत्माओं से संपर्क स्थापित करने के लिए , दूर संवेदन अर्थात टेलेपथिकली ज्ञान प्राप्त करने / सोखने में . चन्द्रमा इंडिगो रंग का स्वामी है . इंडिगो रंग का तत्व है मर्म अथवा सार / व्योम / आत्मा का . इंडिगो रंग तीसरी आँख का स्वामी है , चांदी और सफ़ेद रंग के साथ , और छटवें चक्र का .


संतरा रंग -
रचनात्मकता, उत्साह, ऊर्जा, सहनशक्ति और संतरा रंग एक शक्तिशाली रंग है प्रमुख परिवर्तनों का . संतरा रंग सहायक होता है ,अनुकूलन क्षमता, आकर्षण, अचानक परिवर्तन, उत्तेजना/प्रोत्साहन , उत्साह, रचनात्मकता, ऊर्जा , नियंत्रण प्राप्त करना , भाग्य बदलना , और न्याय प्रकट करने में . सूर्य संतरे रंग का स्वामी है . संतरा रंग स्वामी है रचनात्मक / यौनिक (यौन समबन्धी ) चक्र जिसे दूसरा चक्र कहते हैं , और संतरे रंग का तत्व अग्नि है .

बैंगनी रंग अर्थात पर्पल कलर -
आत्मिक / अलौकिक / मानसिक / पारलौकिक सामर्थ्य , बुद्धिमता , अनजान एवं भविष्य का ज्ञान प्राप्त करने में पारलौकिक सहायता के द्वारा , श्राप हटाने में , चंगाई में , आत्मिक / अलौकिक / मानसिक / पारलौकिक कार्यों में , व्यापार की सफलता हेतु , शक्तिशाली लोगों पर प्रभाव डालने के लिए. ऊर्जाओं और उन शक्तिशाली रंगों को नियंत्रित करने के लिए जो की संभालने में बहुत कठिन होते हैं . इसका उपयोग दूसरों में उत्पीड़न पैदा करने , शक्ति का दुरुपयोग करने , आदर्शवाद पैदा करने और वे लोग जो आप के ऊपर कार्य करते हैं अर्थात आपको नियंत्रण में रखते हैं उनको प्रभावित करने के लिए . दूसरों में विश्वासघात और दुःख पैदा करने हेतु अच्छा है . बृहस्पति बैंगनी रंग का स्वामी है . बैंगनी रंग क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र का स्वामी है .

लाल रंग -
ऊर्जा , जूनून , क्रोध , दाहक , काम वासना , शक्ति , और आत्मिक / अलौकिक / मानसिक / पारलौकिक हमलों से सुरक्षा करता है . मंगल लाल रंग का स्वामी है - प्रतिशोध , क्रोध , शुद्ध यौन वासना, एवं शारीरिक संतुष्टि, साहस , दृढ़ संकल्प , शत्रुओं के साथ व्यवहार करना . लाल रंग का उपयोग किया जाता है दुर्घटना पैदा करने में , आग और चोट पैदा करने में . लाल रंग का उपयोग , स्वंय के आत्मविश्वास हेतु , शक्ति हेतु , व्यायाम / खेलकूद / दंगल हेतु , काले /नकारत्मक जादू हेतु जादुई शक्ति बनाने के लिए , (यह काले / नकारत्मक जादू के कार्यचालन के पहले स्वयं को शक्तिशाली बनाने हेतु अच्छा होता है. ) और प्रचंडता / तीव्रता उत्पन्न करता है . काम वासना , ऊर्जा , शक्ति , यौन ऊर्जा , गतिशीलता, जुनूनी प्रेम, भौतिक इच्छा, साहस, इच्छाशक्ति , व्यायाम / खेलकूद / दंगल हेतु (विशेषकर जिसमे प्रतिस्पर्धा हो ) और जीवन शक्ति बढ़ाने / बनाये रखने हेतु . जब लाल रंग का काले / नकारत्मक जादू में उपयोग किया जाता है तो , काले रंग से उलट , लाल रंग एकाएक / अचानक हमले करता है , दुर्घटना करता है , खून बहता है , हिंसा और नफरत करता / फैलाता है . लाल रंग का उपयोग युद्ध , अराजकता और दुष्टता पैदा करने हेतु भी किया जा सकता है . मंगल लाल रंग का स्वामी है . लाल रंग का तत्व अग्नि है . लाल और काले दोनों रंग मूलाधार चक्र के स्वामी हैं .

चांदी का रंग -
आत्मिक / अलौकिक / मानसिक / पारलौकिक सामर्थ्यों का विकास करता है , परिस्थतिओं को बेअसर कर देता है , विनाशकारी शक्तिओं को खदेड़ देता / पीछे धकेल देता है , स्त्री देवी के साथ कार्य करता है . चन्द्रमा चांदी रंग का स्वामी है - घर और उसके चारों ओर का परिवेश , कल्पना , स्मृति , आत्मिक / पारलौकिक / अलौकिक / मानसिक जानकारी अर्थात जागरूकता/ स्वप्न , अधयात्मिक्ता , मैडिटेशन अर्थात ध्यान . आत्मिक / अलौकिक / मानसिक / पारलौकिक से सम्बंधित , आध्यात्मिक / सम्मोहिक . चन्द्रमा चांदी रंग का स्वामी है . चांदी रंग तीसरी आँख का स्वामी है .

सफ़ेद
सभी उद्देश्य में कार्य करता है , आभा अर्थात औरा को संतुलित करता है क्यूंकि सभी रंग सफ़ेद रौशनी / प्रकाश से उत्पन्न होते हैं . शक्तिदायक , सुरक्षात्मक , उत्तेजक /प्रोत्साहक , प्रेरक , विनाशकारी ऊर्जाओं का नाश करता है , आभा अर्थात औरा को साफ़ करता है . जब दूसरों पर इस रंग को लगाया या इस रंग का उपयोग किया जाता है और उन पर निर्देशित किया जाता है तो यह रंग दूसरों को सुरक्षा प्रदान करता है . चन्द्रमा सफ़ेद रंग का स्वामी है . सफ़ेद रंग तीसरी आँख का स्वामी है , इंडिगो रंग और चांदी रंग के साथ .

पीला रंग -
पीला रंग है , बुद्धि /बुद्धिमता , कंप्यूटर, संचार, ऑडियो (आवाज़ / ध्वनियां ), वीडियो (चलचित्र ), टीवी, इलेक्ट्रॉनिक्स, पुस्तकों, और साहित्य का . पीला रंग स्वामी है सोलर चक्र का . बुध गृह स्वामी है पीले रंग का - पीले रंग का उपयोग परीक्षा पास करने के लिए अर्थात परीक्षा में सफलता हेतु , मन के सुधार हेतु , गहरी एकाग्रता के लिए , मानसिक शक्ति हेतु , सीखने के सामर्थ्य हेतु , भाषण / बोलने की कला , लिखना , प्रकाशन , मीडिया के मामलों हेतु , गपशप के लिए , बदनामी , साक्षात्कार अर्थात इंटरव्यू हेतु , भाई , बहन , पड़ौसी , अफवाहें , चोरी , पढाई एवं संचार / संपर्क के सभी क्षेत्र , नाक्षत्रिक प्रक्षेपण अर्थात एस्ट्रल प्रोजेक्शन हेतु , व्यसन / लत से छुटकारा हेतु , आदतों को तोड़ने हेतु पीले रंग का उपयोग किया जा सकता है . यह रंग अच्छा है दोस्ती, कल्पना, रचनात्मकता (संतरा रंग रचनात्मकता हेतु अधिक शक्तिशाली है ), प्रेरणा और प्रतिभा हेतु . पीले रंग का उपयोग किया जा सकता है , दूसरों में बेवफाई /विश्वासघात , कायरता, क्षय , मृत्यु , पागलपन, और असंगति /विसंगति पैदा करने के लिए .

पीले रंग का तत्व वायु है . पीला रंग सोलर प्लेक्सस चक्र का स्वामी है .

ग्रे अर्थात धुमैला रंग -
कभी भी धुमैले रंग का उपयोग स्वयं पर न करें ! धुमैला रंग है बीमारी और बुरी ऊर्जा का . आप जिससे नफरत करते हैं , उसकी आभा अर्थात औरा पर बार बार धुमैला रंग लगाएं / उपयोग करें और इससे आपके उस शत्रु की धीमी मृत्यु आ सकती है ,अगर उसे ऐसा करने के लिए क्रमोदेशित किया जाये तो .

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Post Fri Dec 11, 2015 3:08 am

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हिप्नोसिस अर्थात सम्मोहन के बारे में जानकारी

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हम सब के पास हमारे मस्तिष्क के दो भाग होते हैं , सीधे हाथ वाला साइड / भाग और उलटे हाथ वाला साइड / भाग. हमारे मस्तिष्क का उल्टा भाग हमारा सचेत / जागरूक मन होता है जिसका हम प्रति दिन उपयोग करते हैं सचेत निर्णय लेने हेतु और तर्क देने में . यह मस्तिष्क का सक्रिय पुरुषवाचक भाग होता है . मस्तिष्क का सीधा भाग / साइड निष्क्रिय होता है . यह ग्रहणशील स्त्रीवाचक भाग / साइड भी है . मस्तिष्क का सीधा साइड , प्रस्तावों / सुझावों के प्रति अत्यंत खुला हुआ रहता है और यही साइड का उपयोग हम मैडिटेशन अर्थात ध्यान एवं सम्मोहन अर्थात हिप्नोसिस में करते हैं .

निष्क्रिय सीधे साइड को उपयोग करने के लिए , सक्रिय उलटे साइड को वश में करने / जीतने की आवश्यकता होती है . यह इसी की समान है की आपको एक बिल्डिंग या घर की बिजली बंद करनी होती है ताकि आप वायरिंग तक पहुँच सकें . अगर बिजिली को बंद नहीं किया गया तो , उसके झटके के कारन आप वायर तक नहीं पहुँच पाएंगे . मन भी इसी तरीके में कार्य करता है .

जितना अधिक वश में सक्रिय उलटे साइड वाला मस्तिष्क का भाग होगा , उतनी गहरी समाधी की अवस्था होगी , और जितनी गहरी समाधी की अवस्था होगी , उतना अधिक ग्रहणशील निष्क्रिय सीधे हाथ वाला साइड होगा मस्तिष्क का .

स्वयं को प्रभावी रूप से सम्मोहित करने के लिए , आपको एक गहरी समाधी की अवस्था में जाना चाहिए. दूसरे व्यक्ति को सम्मोहित करने के लिए , आपको उस व्यक्ति को एक गहरी समाधी की अवस्था में ले जाना होगा , जितनी गहरी समाधी , उतना बेहतर .

किसी को सम्मोहित करने के लिए , प्रचालक को कुछ प्रकार की घनिष्ठता बढ़ानी चाहिए . वे लोग जो बहुत ग्रहणशील , शीघ्र संस्‍कार ग्रहण करने वाले , भोले भाले , सुझावों के प्रति खुले , ऐसे लोग सबसे अच्छे विषय होते हैं . अर्थात इन्हे आसानी से सम्मोहित किया जा सकता है . वे लोग जो जो परेशान , चालाक और सम्मोहन के प्रति असुखद / असुविधा महसूस करते या रहते हैं उनके साथ कार्य करना कठिन होता है . सी आई ए अर्थात CIA अमरीका की ख़ुफ़िया एजेंसी है , ये और इनके साथी शामक दवाओं का उपयोग करते हैं ताकि लोगों को सम्मोहित किया जा सके . यह अनैतिक है . वे सिर्फ इतना ही इन शामक दवाओं का उपयोग करते हैं की मन शांत हो जाये और सुझावों के प्रति खुल जाये . अगर अत्यधिक मात्र में शामक दवा का उपयोग किया गया , तो सम्मोहन का सत्र / सेशन निरर्थक हो जायेगा.

सेशन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है की किस प्रकार मन को स्थापित किया गया है सुझावों को ग्रहण करने के प्रति . पुरानी और लम्बे समय से चली आ रही समस्याएं , गहरी बो दी गयी आशंकाएं , और मानसिक रुकावटें / रोड़े , इन सब के लिए बहुत सारे सेशनों की आवश्यकता पड़ती ताकि इन सबसे पार पाया जा सके / निकला जा सके . अफर्मेशंस अर्थात दृढ़ता के साथ कहना और सुझावों को बार बार दोहराया जाना चाहिए ताकि मन की दीवारें तोड़ी जा सकें .

सम्मोहन के साथ , प्रचालक नियंत्रण में रहता है . यह नियंत्रण इस हद तक रहता है की जिसको सम्मोहित किया गया हो वह अपने सम्पूर्ण जीवन को प्रचालक के हाथ में रख देता है और प्रचारक उसे जैसा आदेश देगा / करने को करेगा वह व्यक्ति (जिसको सम्मोहित किया गया है ) वह वैसा ही करेगा. बहुत सारी रिपोर्ट / न्यूज़ आदि आयीं है की मनोचिकित्सक अपने मरीज़ों को अपने नियंत्रण में रख कर उनके साथ यौन सम्बन्ध बनाते हैं . मरीज़ को सम्मोहन सत्र के दौरान कहा जाता था की जागने पर उसे कुछ भी याद नहीं रहेगा . यह एक आम उदाहरण है . जब आप एक व्यक्ति को आज्ञा देते हैं की वह आपको सम्मोहित करे तो आप एक तरीके से अपना सारा जीवन उस व्यक्ति के हाथ में रख रहे होते हैं और हर सम्मोहन सत्र /सेशन के साथ आप उस व्यक्ति के और अधिक नियंत्रण में आ जाते हैं .


ऐसा रोकने के लिए , की कोई भी व्यक्ति आपको सम्मोहित ना कर पाये , इसके लिए आपको अपने मन को ऐसा क्रमोदेशित करना होगा की कोई व्यक्ति आपको सम्मोहित न कर पाये. इससे एक रोड़ा बन जाता है . यह बात पता है , की सम्मोहन करने वाले अपने स्वयं के रोड़ों को विषयों के मन में (विषय अर्थात जिसको वे सम्मोहित करते हैं वे व्यक्ति ) रख देते हैं. कुछ सम्मोहन करने वालों ने बहुत सारे रखे हैं . सबसे आम है की वह विषय अर्थात व्यक्ति जिसको सम्मोहित किया जा रहा है , उस व्यक्ति का सेशन के दौरान स्मृति का लोप हो जाता है . दूसरे रोड़े जो अनैतिक सम्मोहक / सम्मोहन करने वाले उपयोग में लाते हैं , उनमे शामिल है - की उनका विषय सिर्फ उस विशेष सम्मोहक / सम्मोहन करने वाले से सम्मोहित हो सकेगा और किसी से नहीं . ऐसा कोर्ट कचहरी के मामलों में शामिल होता हैं जहाँ प्रचालक अपने सम्मोहित व्यक्ति अर्थात सम्मोहित विषयों से जुर्म करवाता है . मानव मस्तिष्क को क्रमोदेशित किया जा सकता है की उसकी स्मृति का लोप हो जाये किसी भी दी हुई परिस्थिति में .

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Post Sat Dec 12, 2015 6:12 am

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समाधी की गहराई का निश्चय करना -

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समाधी की गहराई का निश्चय करना / पता लगाना -

हलकी समाधी अवस्था -

* विषय / व्यक्ति आरामदायक अवस्था में रहता है शारीरिक रूप से .
*विषय / व्यक्ति की पलकें फड़फड़ा सकती हैं अथवा ऐंठ सकती हैं .
* ध्वनियां दर्दनाक हो सकती हैं .

हलकी से माध्यम समाधी अवस्था -

*विषय / व्यक्ति के अंग भारी महसूस हो सकते हैं .
*विषय / व्यक्ति की सांस गहरी और धीमी हो हो जाती हैं .
* गहरे आराम की प्रचंड/तीव्र अनुभूति (विषय / व्यक्ति को चलना , बोलना , सोचना आदि महसूस नहीं होते )
*विषय / व्यक्ति महसूस करता है की वो उसके वातावरण से अलग /जुदा हो गया है .

मध्यम समाधी अवस्था -

*विषय / व्यक्ति समाधी की अवस्था के बारे में जानता है , परन्तु उसका विवरण नहीं कर पाता.
*विचारोत्तेजक अवस्था अर्थात / बतलाने योग्य अवस्था (उदाहरण के लिए - प्रचालक बतलाता है विषय / व्यक्ति को की एक चींटी तुम्हारी भुजा पर चल रही है और वह व्यक्ति / विषय उस चीटी के चलने को वास्तव में महसूस कर सकता है , भले ही वहां कुछ न हो या प्रचालक बतलाता है की वहां कमरे में धुँआ है और विषय / व्यक्ति उस धुंए को सूंघ सकता है , हालाँकि वहां कोई धुँआ नहीं है )
* कैटेलिप्सी (Catelpsy) - यह एक अवस्था होती है जिसमे अंग उसी जगह रहते हैं जैसा वे स्थित हैं और उन्हें कोई बाहरी उत्तेजना और मांसपेशियों में कठोरता के कारन वे (अंग ) रिस्पांस अर्थात प्रतिक्रिया नहीं कर पाते .

गहरी या निद्राभ्रमणविषयक समाधी अवस्था -

*विषय / व्यक्ति आँखों को खोल सकता है समाधी अवस्था को प्रभावित किये बगैर .
*स्थिर टकटकी और पुतली (आँख का काला गहरा भाग ) फ़ैल जाता है जब आँखें खोली जाती हैं .
*सम्पूर्ण शब्द स्मिृति का लोप हो जाता है .
*व्यवस्थित सम्मोहन के बाद का शब्दस्मृतिलोप
* नेत्र गोलकों की अनियंत्रित चाल .
* हल्केपन , तैरने , झूलने या गिरने की अनुभूति .
*विषय / व्यक्ति महसूस करता है ध्वनि का विरूपण अर्थात बिगड़ी हुई ध्वनि
* विषय / व्यक्ति नियंत्रित कर सकता है उसके अनैच्छिक शरीर के कार्य - जैसे हिर्दय अर्थात दिल की गति , रक्त चाप
* गुमी हुई स्मृतियाँ फिरसे याद आ जाती हैं.
* समय का प्रतिगमन /प्रतीपगमन .
* मतिभ्रम दिखने लगते हैं .
* मतिभ्रम सुनाई देने वाले .
* सम्पूर्ण बेहोशी.

समाधी अवस्था की गहराई का पता लगाने के लिए विधियां -

प्रचालक को समधी अवस्था की गहराई को स्थापित करना चाहिए ताकि वह सत्र / सेशन को अपने नियंत्रण में रख सके . ऐसा किया जाता है , विषय / व्यक्ति की प्रचालक के सुझाव / संकेतों को ग्रहण करने के सामर्थ्य को जांच करने के द्वारा . सबसे साधारण विधि जिसका उपयोग किया जाता है , जिसमे प्रचालक उसके विषय / व्यक्ति से कहता है की वह (विषय / व्यक्ति ) अपनी भुजा नहीं हिला सकता . उदाहरण के लिए -

"तुम्हारी भुजा कुर्सी में फंस गयी है , तुम उसे उठा नहीं सकते , जब मैं पांच तक / को गिनु , मैं चाहता हूँ की तुम उसे उठाने का प्रयत्न करो . अगर तुमने सहयोग किया अर्थात मैंने जो कहा वैसा किया , तुम पाओगे की तुम अपनी भुजा को उठाने का जितना कठिन प्रयास करते हो , वह उतनी ही अधिक तीव्रता से कुर्सी मैं फंसी रहती है . "

प्रचालक फिर पांच तक गिनता है , हर संख्या के बाद कहता है , "तुम्हारी भुजा कुर्सी में फंसी है . "
जब पांच की गिनती पहुँच जाती है , और यदि विषय / व्यक्ति अपनी भुजा को नहीं हिला पाता, तो यह बात का पाता चल जाता है की वे समाधी अवस्था में हैं . अगर विषय / व्यक्ति अपनी भुजा को हिला लेता है , तो उसने सुझावों / संकेतों को स्वीकार्य नहीं किया है और वह समाधी अवस्था में नहीं है . प्रचालक को अब फिरसे शुरू करना होगा और विषय / व्यक्ति को बताना पड़ेगा समझाना पड़ेगा की वह विषय / व्यक्ति के सहयोग के बिना कुछ नहीं कर सकता . यह हमेशा महत्वपूर्ण है की विषय / व्यक्ति का विश्वास सुरक्षित किया जाये / जीता जाये.

दूसरी स्टेज / अवस्था यह है की जहाँ प्रचालक समाधी की अवस्था को और गहरा कर देता है और फिरसे देखता है की विषय / व्यक्ति कितनी गहराई में गया है . प्रचालक उसके विषय / व्यक्ति से यह कहता है की वह विषय के हाथ के पीछे आघात करेगा और विषय बधिति हुई संज्ञान हीनता और अनुभूति की कमी महसूस करेगा उस हाथ में . कुछ मिनिट आघात करने के बाद , और बोलने के बाद , प्रचालक विषय के हाथ के पीछे चिकोटी काटेगा और यही वह विषय के दूसरे हाथ के साथ करेगा जिसपर उसने आघात नहीं किया था और विषय से पूछेगा अगर उसे कोई अंतर महसूस होता है की नहीं . अगर विषय कहता है की हाँ अंतर है , तो समाधी की अवस्था में वह आ गया है ; अगर वह कहता है नहीं , तो प्रचालक समझायेगा विषय को की और आगे समाधी अवस्था को गहरा करने पर कार्य किया जाना है . और सत्रों / सेशनों की आवश्यकता पड़ेगी ताकि विषय को गहरे और गहरे समाधी की अवस्था में ले जाया जा सके .

अगली अवस्था अर्थात स्टेज में , प्रचालक एक और अधिक गहरी समाधी की अवस्था को जंचता है . अगर विषय इस अवस्था तक पहुँच गया है , तो वह शबस्मृतिलोपग्रस्त रहेगा . प्रचालक कहता है विषय से की वह कल्पना करे की वह एक ब्लैकबोर्ड के सामने खड़ा है सफ़ेद चाक लेकर और उसे निर्देशित करता है की वह चक ले और ब्लैकबोर्ड पर तीन शब्द लिखे . "अब मैं चाहता हूँ की तुम चाक लो और ये तीन शब्द ब्लैकबोर्ड पर लिखो : पहला , पेड़ ; दूसरा , घांस और आखिरी बादल . तुम अपनी भुजा उठा लेना जब तुमने ये तीन शब्द ब्लैक बोर्ड पर लिख लिए हों ." जब विषय ने संकेत कर दिया है के उसने शब्द लिख लिए हैं , की वहां एक रबड़ है ब्लैकबोर्ड के हाशिये / किनारे पर और कहता है "मैं चाहता हूँ की तुम वह रबड़ को लो और पेड़ और घांस नाम के शब्द मिटा दो . सिर्फ 'बादल ' को रहने देना " . जैसे जैसे तुम शब्द मिटाते हो , मैं चाहता हूँ की तुम उन्हें अपने मन से मिटा दो , ताकि तुम अब बादल के बारे में सोच सको 'बादल ' . तुम गहरी और अधिक गहरी नींद में जा रहे हो . तुम एक गहरी, गहरी नींद में हों और तुम सिर्फ 'बादल' के बारे में सोच सकते हो . अब , वो तीन शब्द क्या थे जो तुमने ब्लैकबोर्ड पर लिखे ? अगर विषय तीनो शब्दों को याद करने में समर्थ हो जाता है , तो वह समाधी की शब्दस्मृतिलोप वाली अवस्था में नहीं पहुंचा है . अगर वह समर्थ नहीं होता , तो विषय गहरी समाधी की इस अवस्था में पहुँच गया है . प्रचालक को तब कहना चाहिए "जब मैं तीन तक / को गिनुंगा , तब तुम उन तीन शब्दों को याद कर लोगे और तुम उन्हें मुझे बता दोगे. " तब विषय को ये शब्द याद कर उन्हें बताने में समर्थ होना चाहिए.

विषय को समाधी की इस अवस्था में रखने के लिए , अगली बार प्रचालक सम्मोहन की क्रिया करता है , उसे विषय को वापस लाने के पहले बता देना चाहिए " अब से , जब भी मैं तुम्हे समाधी अवस्था में रखूँगा , तुम समाधी की इसी इतनी गहरी अवस्था में पहुंचोगे जितने में तुम अभी हो जब भी मैंने दस तक गिन लिया हैं ."

प्रचालक फिर विषय को समधी की अवस्था से बाहर ले आता है - "अब मैं पांच तक / को गिनने जा रहा हूँ . जब मैं पांच पर पहुंच जाओं , तुम एकदम जाग जाओगे और बढ़िया और ताजा महसूस करोगे ."

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Post Sun Dec 13, 2015 4:38 am

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स्वयं को सम्मोहन करना -

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स्वयं को सम्मोहित करने के लिए , आपको एक गहरी समाधी की अवस्था में जाने की आवश्यकता होगी . नीचे दिया हुआ एक अंश है - "ए ट्रीटाइज़ ऑन एस्ट्रल प्रोजेक्शन " से रोबर्ट ब्रूस के द्वारा :

"समाधी की अवस्था में कैसे जाया जाये "
अपने मन को शांत करें सांस की सहायता से . कल्पना करें की आप एक सीढ़ी चढ़ रहे हैं अँधेरे में . सीढ़ी का दृश्य नहीं बनाना है ; सिर्फ कल्पना करें की आप उस पर चढ़ते हुए स्वयं को महसूस कर रहे हैं . सांस को बाहर छोड़ने पर , महसूस करें की आप एक या दो कदम सीढ़ी पर चढ़ रहे हैं . सांस को अंदर लेते समय , आप महसूस करने स्वयं को की आप सीढ़ी पर शांत खड़े हैं .

हमारे मन के अंदर इस मानसिक गिरने के प्रभाव की ज़रुरत होती है . यह हमारे मस्तिष्क के मस्तिष्क - लहर गतिविधि के स्तर को बदलता है जागृत स्तर बेटा (BETA) से सुप्त स्तर अल्फा (ALPHA) में या गहरे सुप्त स्तर थीटा (Theta) में. जैसे ही आपके मस्तिष्क तरंग अथवा लहर की गतिविधि अल्फा में पहुँचती है तो आप समाधी की अवस्था में प्रवेश कर जाते हैं . ऐसा करते रहें जितना भी समय वह लेता है . समाधी की अवस्था में जाने में कितना समय लगेगा यह भिन्न होगा , यह निर्भर करता है आपके गहरे आराम और मानसिक शांति के अनुभवों पर .

नोट - जब आपको एक भारी अनुभूति होने लगे तब आप मानसिक गिरने वाले व्यायाम को रोक दें . अगर आपको सीढ़ी पसंद नहीं है तो आप कल्पना करिये की आप एक लिफ्ट में अर्थात एलेवटर में हैं , महसूस कीजिये स्वयं को की आप सांस बाहर छोड़ते समय गिर रहे हैं और सांस को अंदर लेते समय स्थिर रुके हुए हैं . या आप कल्पना करिये की आप एक पंख हैं , और स्वयं को महसूस करवाएं की आप सांस को बाहर छोड़ते समय तैर रहें हैं और सांस को अंदर लेते समय आप स्थिर हैं . आपको एक मानसिक गिरने वाले प्रभाव की आवश्यकता होगी ताकि आप अपने मस्तिष्क तरंगो के स्तर को कम कर सकें .ये मानसिक गिरने का प्रभाव जब आपके गहरे आराम के साथ और मानसिक शांति के साथ मिलता है तो ये आपको समाधी की अवस्था में ले जाने का कारण बनता है . आप किसी भी परिदृश्य का उपयोग कर सकते हैं जिससे आप वाकिफ हैं ताकि आप इस गहरी अनुभूति को ला सकें .

एक समाधी की अवस्था ऐसी महसूस होती है - सब कुछ शांत हो जाता है और आपको ऐसा लगता है की आप एक बहुत बड़े स्थान पर हैं . आपके शरीर में हलकी गिनगिनाने वाली अनुभूति होती है . सब कुछ बहुत अलग महसूस होता है . ऐसा लगता है किसी ने आपके सर पर अँधेरे में एक कार्ड का डिब्बा सा रख दिया है , और आप महसूस कर सकते हैं की वातावरण बदल रहा है . ऐसा लगता है की सब कुछ अस्तव्यस्त और हल्का धुंधला सा हो गया है. किसी भी प्रकार की नुकीली आवाज़ें समाधी की अवस्था में दर्द देने वाली होती हैं .

गहरी समाधी की अवस्था -
आप समाधी के किस स्तर पर रहेंगे यह निर्भर करता है आपके आराम स्तर पर , आपकी एकाग्रता सामर्थ्य पर और आपकी इच्छा शक्ति पर . एक गहरी समाधी की अवस्था में जाने के लिए - जो की है , थीटा स्तर और उसके परे, आपको और अधिक एकाग्रित होना है और , और अधिक समय के लिए होना है , आपकी सांस की सहायता से किये जा रहे मानसिक गिरने की अनुभूति पर . समाधी का प्रथम स्तर , जो की है , जब आप थोड़े भारी हो जाते हैं , यह एकदम पर्याप्त गहरा है की आप प्रक्षेपण कर सकें . मैं पुरज़ोर तरीके से सलाह देती हूँ की आप स्वयं को एक हलकी समाधी अवस्था से गहरी समाधी अवस्था में जाने के लिए ज़ोर ना डालें , जब तक आपके पास समाधी अवस्था का अच्छा अनुभव नहीं हो जाता .

आप कैसे कह सकते हैं की आप एक गहरी समाधी की अवस्था में प्रवेश कर रहे हैं ? वहां चार बहुत ध्यान देने योग्य लक्षण होते हैं -

1 . एक असुविधाजनक अनुभूति ठण्ड की , जिससे आप कांपते नहीं हैं , इसके साथ आपके शरीर की गर्मी का नियमित नुक्सान होता है .

2 . मानसिक रूप से ,आप बहुत विचित्र महसूस करेंगे , और सब कुछ बहुत धीमा हो जायेगा. आपकी वैचारिक अर्थात विचार प्रक्रिया धीमी पढ़ जाएगी अगर आपको एक तेज़ दर्द निवारक इंजेक्शन दिया गया था .

3 . आपको महसूस होगा की आप अपने शरीर से अलग पड़ गए हैं , अर्थात एक तीव्र तैरने की अनुभूति और सबकुछ बहुत दूर प्रतीत होगा.

4 . सम्पूर्ण शारीरिक लकवा. नोट - ये चार चीज़ें , सब एक साथ , इस बात को darshati हैं की आप एक गहरी समाधी अवस्था में प्रवेश कर रहे हैं . गलती मत करिये , की एक हल्का तैरने का अहसास जो आपको कभी कभी हलकी समाधी अवस्था में होता है उससे जिसमे आपका एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक शरीर ढीला हो जाता है . या फिर एक हल्का गर्मी का नुक्सान आपके शरीर की जो की लम्बे समय तक शांत बैठने से होता है और हल्का लकवा अर्थात भारीपन, गहरी समाधी अवस्था के लिए. गहरी समधी की अवस्था की अनुभूति बिलकुल असुविधाजनक होती है और इसमें गलती की कोई गुंजाईश नहीं होती .

यह बहुत कठिन होता है की आप एक गहरी समाधी की अवस्था में जाएँ , क्यूंकि इसमें आपको बहुत उन्नत आराम अर्थात रिलैक्ससेशन की , एकाग्रता की और समाधी की अवस्था वाले सामर्थ्यों की आवश्यकता पड़ती हैं . इसमें बहुत अधिक इच्छा शक्ति और मानसिक ऊर्जा की भी आवश्यकता पड़ती है . आप इसमें धोके से नहीं गिरेंगे . अगर आप चिंतित हैं की आप बहुत गहरा जा रहे हैं , इस बात को याद रखें - आप स्वयं को किसी भी समय वापस खींच सकते हैं . आपको अपनी सारी इच्छा शक्ति को एकगारित करना है अपने हाथ और पैरों की उँगलियाँ हिलाने के लिए. जब आप एक बार अपनी पैर या हाथ की ऊँगली को हिलाने में समर्थ हो जाएँ , आप अपने हाथों को हिलाएं , अपनी भुजाओं को हिलाएं , अपना सिर हिलाएं अर्थात अपने शरीर को पुनः सजीव करें ; उठ जाएँ और कुछ मिनिटों के लिए चलें . इन व्यायामों में , गहरी समाधी में गिरना एक समस्या नहीं होनी चाहिए.

एनर्जी बॉडी एक्सपेंशन -

समाधी की अवस्था में प्रवेश करने के कुछ समय पर , आपको महसूस होगा की एक हल्का लकवा आपके ऊपर आ गया है . इसके साथ एक गहराता हुआ कम्पन्न और बज्ज अर्थात भनभनाने की अनुभूति होगी आपके हर ओर शरीर में . आपको ऐसा भी महसूस हो सकता है की आप सूज गए हैं और बड़े हो गए हैं . लकवा , कम्पन्न और बड़े होने वाली अनुभूतियाँ , ये लक्षण है की ऊर्जा शरीर फ़ैल रहा अर्थात विस्तृत हो रहा है और नाक्षत्रिक शरीर अर्थात एस्ट्रल शरीर ढीला हो रहा है . यह आम सोने की प्रक्रिया का हिस्सा है . ऊर्जा शरीर अर्थात ऊर्जा का शरीर विस्तृत होती है अर्थात फैलती है ताकि ऊर्जा को एकत्रित कर रख सके . इस दौरान , एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक शरीर का स्वतंत्र संचय होता है , शारीरिक शरीर से थोड़ा सा बाहर की तरफ .

[अंश समाप्त ]

कुछ लोग एक टेप रिकॉर्डर का उपयोग करते हैं और बातचीतों को वाक्यों में से होकर सुनते हैं . यहाँ पर त्रुटि / कमी यह है की जब कोई एक गहरी समाधी की अवस्था में होता है , ध्वनिया / आवाज़ें दर्दनाक हो सकती हैं और तंत्रिका तंत्र को नुक्सान कर सकती हैं . हर कोई व्यक्ति है और सबको प्रयोग करना चाहिए की कौन सी विधि व्यक्तिगत रूप से किस को सही बैठती है . जो एक व्यक्ति लिए कार्य करे , वह दूसरे व्यक्ति के लिए वह विधि कार्य नहीं कर सकती .

इस अवस्था में , आप पिछले जीवन में प्रतीपगमन कर सकते हैं , अपने मन में एक द्वार या "पोर्टल " अर्थात प्रवेश मार्ग में से.


गहरी समाधी की अवस्था वह समय होता हैं जहाँ आप अफर्मेशंस अर्थात दृढ़ता के साथ कहना , को दोहराते हैं और अपने मन को क्रमोदेशित करते हैं . स्वयं को सम्मोहित करना दूसरों को सम्मोहित करने से बहुत मिलता जुलता है , पर इसमें आप स्वयं को कथन करते हैं .

फिरसे , कई सारें सत्रों / सेशनों की आवश्यकता पड़ सकती है .

स्वयं को धीरे धीरे और क्रम से लाएं , जैसा आप एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक से वापस होने में करते हैं / करेंगे.

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दूसरों को सम्मोहित करना -

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यह महत्वपूर्ण है की आप सम्मोहन से सम्बंधित सभी लेख पढ़ें , ताकि दूसरे व्यक्ति को सम्मोहित करने के पहले आपको पता रहे की आप क्या कर रहे हैं . एक व्यक्ति को प्रभावी रूप से सम्मोहित करने के लिए , उस व्यक्ति का सम्पूर्ण और गहरायी के साथ रिलैक्स्ड अर्थात आरामदायक रहना आवश्यक है . व्यक्ति को आराम से पीठ पर पीछे का सहारा लिए बैठना चाहिए . लेटने से , विषय / व्यक्ति सो सकता है .

आपको हर समय शांत और नियंत्रण में रहना है .

शुरू करें , विषय से बात करना उसके शरीर को सम्पूर्ण आराम देते हुए . उसके पंजों से शुरू करें , की विषय ने उन्हें तनाव में रखा है और उन्हें फिर आराम दायक स्थिति में ले आया है , फिर उसके टखने , पिंडली , घुटने और आगे यह उसके आप चहरे और सिर तक करें . (हर अंग आराम वाली स्थिति में हो जाये )

जब विषय पूरा आरामदायक स्थिति में आ जाये , उसे कहें की वह याद करे कोई एक अच्छी घटना जो उसके अतीत में हुई थे . उससे प्रश्न करने , की वो घटना कहाँ हुई थी , वहां कौन था , उसे कैसा महसूस हुआ , उस कमरे या जगह जहाँ पर वो घटना हुई वहां क्या था और इस तरह . यह इसीलिए किया जाता है ताकि विषय / व्यक्ति के मस्तिष्क के अंतर्ज्ञानी सीधे हाथ / ओर वाले भाग को एवं स्मृति के अचेतन / अवचेतन को सक्रिय किया जा सके.

जब आपने यह कर लिया है जो ऊपर बताया गया है , आप फिर विषय / व्यक्ति को कहें की तुम उलटी गिनती करोगे . हर गिनती के साथ वह और अधिक और , और अधिक रिलैक्स्ड अर्थात आरामदायक हो जायेगा.

* "दस; तुम और अधिक आरामदायक हो रहे हो , बहुत अधिक पहले की अपेक्षा "
* "नौ; तुम नीचे और अधिक गहरे बहुत गहरे सम्पूर्ण आरामदायक स्थिति में आ रहे हो "
* "आठ; तुम्हारा शरीर सम्पूर्ण आरामदायक स्थिति में है ; तुम कठनाई से ही अपना शरीर महसूस कर सकते हो "
* "सात; तुम पूरी तरह आरामदायक स्थति में हो और बहुत शान्ति महसूस करते हो "
* "छह; हर सांस के साथ . तुम और अधिक से अधिक आराम दायक स्थिति में आ रहे हो सांस को बाहर छोड़ने के साथ. "
* "पांच; हम सब आराम के सबसे गहरे स्तर में जा रहे हैं . "
* "चार ; आराम करो ...... तीन , दो , एक "

इस अवस्था में आपको समाधी की गहराई का निश्चय करना है . अगर विषय / व्यक्ति सम्मोहन में नया है , तो अक्सर और अधिक सत्रों की आवश्यकता पड़ती है , इसके पहली की वे (विषय ) एक गहरी समाधी की अवस्था में प्रवेश करने में समर्थ हो सकें . समाधी अवस्था को गहरा करने के लिए -

* "दस; तुम और अधिक आरामदायक हो रहे हो , बहुत अधिक पहले की अपेक्षा "
* "नौ; तुम और अधिक से अधिक गहराई में जा रहे और उतर रहे हो "
* "आठ; तुम्हारा शरीर सम्पूर्ण और समस्त आरामदायक स्थिति में है "
"सात; हर सांस के साथ . तुम और अधिक से अधिक आराम दायक स्थिति में आ रहे हो सांस को बाहर छोड़ने के साथ. "
* "छह; हम सब आराम के और आगे के आगे गहरे से गहरे स्तर में जा रहे हैं "
* "पांच; चार ; आराम करो .... तीन , दो , एक "

फिरसे , इस अवस्था में आपको समाधी की गहराई का निश्चय करना है . अगर विषय / व्यक्ति सम्मोहन में नया है , तो अक्सर और अधिक सत्रों की आवश्यकता पड़ती है , इसके पहली की वे (विषय ) एक गहरी समाधी की अवस्था में प्रवेश करने में समर्थ हो सकें . इस पैराग्राफ / लेख के ठीक ऊपर दी हुई स्टेप्स को दोहराएं अगर विषय अभी भी समाधी के ऐच्छिक स्तर पर नहीं आया है .

यह वहीँ है जहाँ आप विषय के मन को कर्मोदेशित करेंगे. आपको छोटे और केंद्रित वचन कहने हैं जो विशेष क्षेत्र या समस्या से व्यवहार करते हैं /रखते हैं . प्रति सत्र / सेशन में केवल एक ही समस्या पर कार्य करें और इस बात को निश्चित करलें की समस्या हल हो गयी है अगली समस्या पर जाने के पहले . सारे वचनों को वर्तमान काल में कहें . "हो जायेगा / हो जाएगी " यह कभी नहीं आता और मन भविष्य काल को नहीं समझता .

पिछले जीवन में प्रतीपगमन हेतु -

विषय को एक गहरी समाधी की अवस्था में रखें और कहें -
"मैं दस से एक तक की उलटी गिनती करने जा रहा हूँ ."
"मेरी प्रत्येक गिनती के साथ , तुम एक गहरी और अधिक गहरी आरामदायक स्थिति में प्रवेश करोगे ."
"जब मैं एक तक पहुँच जाऊं ,तुम एक द्वार के सामने खड़े होगे . "

धीरे धीरे उलटी गिनती करें .

"तुम एक बंद द्वार के सामने खड़े हो . मैं दस से एक तक की उलटी गिनती करने जा रहा हूँ और जब मैं एक पर पहुँच जाऊं , मै चाहता हूँ की तुम घुंडी (दरवाज़े की सटकनी आदि ) को घूमना और द्वार को खोल देना " "........... तीन ,दो ,एक ."
अब विषय से पूछें की अगर उसने द्वार खोला की नहीं. अगर नहीं खोला तो , वह अभी समधी के प्रयप्त गहरे स्तर पर नहीं है की सत्र / सेशन प्रभावी हो . या तो आप उसे और अंदर गहरी समाधी की अवस्था में ले जाएँ या उसे बाहर ले आएं समाधी की अवस्था से और सत्र / सेशन को समाप्त कर दें .
अगर उसने द्वार खोल दिया , तो कहें -
"मैं चाहता हूँ की तुम उस द्वार से होकर जाओं . अब तुम अपने पिछले जीवन में हो ." "चारों ओर देखो , तुम क्या देखते हो ?"

उससे लगातार बात करते रहें , उसके अनुभवों में से / के साथ / द्वारा (जो वो आपको बताता है )

जब आप उस व्यक्ति को बाहर लाने के लिए तैयार हैं - "मैं एक से पांच तक गिनने जा रहा हूँ .""पांच की गिनती पर , तुम अपनी आँखें खोल लोगे , और एकदम जाग जाओगे , चौकन्ने और अच्छा महसूस करोगे . " "एक ..... दो ........ तीन ...... चार ........ पांच " "अपनी आँखे खोलो ."

अगर आप स्मृति को मिटाना चाहते हैं , जहाँ विषय उस सत्र का कुछ भी याद नहीं रखेगा , तो इस बात को निश्चित करलें की आप उसे यह सत्र के अंत पर कहें "जब तुम जाग जाओगे , तुम इस सत्र का कुछ भी याद नहीं रखोगे . " "तुम्हारी आखिरी स्मृति द्वार में से होकर बाहर आएगी ." (जो कुछ भी सत्र के पहले हुआ ).

पेशेवर सम्मोहन के साथ , स्मृति मन को मिटाना अक्सर आवश्यक होता है नहीं तो विषय एक अभिघात अर्थात ट्रॉमा में चला जाता है प्रतीपगमन के कारण .


उदाहरण -

धन आकर्षित करने के लिए -

"तुम अधिक से अधिक पैसा आकर्षित कर रहे हो ." "तुम्हारा जीवन धन संपत्ति से भर गया है और अब तुम्हारे पास वह सब है जो तुम चाहते हो ." (पैसे के लिए भी समान वचन )

चंगाई के लिए -

विषय से कहें की वह सूर्य के जैसी एक चमकदार मेधावी रौशनी /प्रकाश की गेंद का दृश्य बनाये . उससे कहें की वह दृश्य बनाये इस प्रकाश का उसके शरीर के रोग ग्रस्त भाग में . "यह रौशनी /प्रकाश चंगा करने वाली ऊर्जा है जो तुम्हारी _____________ को चंगा कर रही है ."

विषय से कहें - "की वह सूर्य के जैसी एक चमकदार मेधावी रौशनी /प्रकाश की गेंद का दृश्य बनाये . क्या तुम प्रकाश / रौशनी की गेंद को देखते हो ? "

विषय को "हाँ " उत्तर देना चाहिए .

"मैं चाहता हूँ की तुम प्रकश की गेंद को तुम्हारे (अंग का नाम ) पर रख दो ."

"(अंग का नाम ) को सम्पूर्णतः घेर लो उस रौशनी की गेंद से / के साथ , महसूस करो गर्म ऊर्जा को जो चंगा कर रही है तुम्हारी _________ ."

" यह रौशनी /प्रकाश चंगा करने वाली ऊर्जा है जो तुम्हारी _____________ को चंगा कर रही है ."

"तुम्हारा _______ठीक और स्वस्थ हो रहा है "

चंगाई की प्रक्रिया के दौरान विषय से बात करते रहें . विशेषकर जब समस्या पुरानी हो , तो इसे कई बार किया जाना आवश्यक हो सकता है .

सम्मोहन कई क्षेत्रों में उपयोगी है . इसका उपयोग एकाग्रता को शक्तिशाली बनाने , बुद्धि एवं स्मृति बढ़ाने , एक (व्यक्ति ) को स्वयं के डरों से छुटकारा दिलाने , बुरी आदतों से छुटकारा दिलाने और अच्छी आदतों को स्थापित करने और आदि के लिए किया जा सकता है .

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सेटेनिक सम्मोहन

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सेटेनिक सम्मोहन स्वयं-सम्मोहन का एक प्रकार है जो बहुत अधिक प्रभावी होता है . साधारण स्वयं - सम्मोहन के मामले में , एक (व्यक्ति ) समाधी की अवस्था में प्रवेश करता है और अफर्मेशंस अर्थात दृढ़ता के साथ कहना , को दोहराता है व्यवहार / बर्ताव बदलने के लिए . सेटेनिक सम्मोहन में , एक (व्यक्ति ), एक विशेष रंग की ऊर्जा को सांस में अंदर लेता है जो ऐच्छिक उद्देश्य के अनुरूप होती है . साधारण स्वयं - सम्मोहन की अपेक्षा , सेटेनिक सम्मोहन में परिणाम बहुत अधिक व्यापक और शक्तिशाली होते हैं . सेटेनिक सम्मोहन में , हम हमारी आभा अर्थात औरा के साथ कार्य करते हैं .

यहाँ सेटेनिक सम्मोहन का एक उदाहरण है -

अगर आप धन आकर्षित करना चाहते हैं -
एनर्जी मैडिटेशन अर्थात ऊर्जा ध्यान में जैसे आप सांस लेते हैं , वैसे ही आपको सांस लेना है , एक ही समय में अपने शरीर के हर साइड अर्थात ओर से आपको सांस लेना है हरे रंग को . एक मेधावी चमकीला जीवंत हरा (रंग ). ऐसा आपको एक गहरी समाधी की अवस्था में रह कर करना है , जितनी संभव हो सकते उतनी गहरी समाधी अवस्था .
हरे रंग को सांस लेने के दौरान और अपने औरा अर्थात आभा को चमकदार मेधावी करने के साथ आपको अफर्म करना अर्थात दृढ़ता के साथ कहना है -
"मैं एक शक्तिशाली ऊर्जा सांस में अंदर ले रहा हूँ / रही हूँ जो मुझे बहुत सारा आसानी से उपलब्ध होने वाला धन दे रही है एक बहुत सकारत्मक ढंग में . यह पैसा मुफ्त का है और सारा मेरा है रखने के लिए . "

ऐसा कई बार कहें दृढ़ता के साथ सांस के साथ हरे (रंग ) की ऊर्जा को लेते हुए अंदर. हरा रंग शुक्र का रंग है और हार्ट अर्थात अनाहत चक्र का रंग है जो धन का स्वामी है . यह वास्तव में कार्य करता है , परन्तु इसे प्रतिदिन किया जाना चाहिए ताकि धन आता रहे .

इसके बाद , सांस के साथ एक जीवंत सफ़ेद प्रकाश / रौशनी को सांस के साथ अंदर लें , कई साँसों के लिए , अपनी आभा को संतुलित करने हेतु .

अगर आपको वजन कम करना है -
आपको आसमानी नीले (रंग) का उपयोग करना है ताकि आपका चयापचय तेज़ किया जा सके और आपको फिर दृढ़ता के साथ कहना अर्थात अफर्म करना है -
"मैं एक नीली ऊर्जा सांस में ले रहा हूँ जो मेरा चयापचय तेज़ कर रही है एक स्वस्थ तरीके में और इसके कारण मेरे शरीर में जमा अधिक चर्बी कम हो रही है . "
आपको इसे कई बार दोहराना है पांच से दस बार और लगातार सांस के साथ अंदर नीली ऊर्जा को लेना है . इसे आपको प्रतिदिन करना है जब तक आप अपने परिणाम नहीं देख लेते . जहाँ भी आवश्यक हो इसे दोहराएं .

हमेशा , आप इस बात को समझ लें की आपको ये कहना है "एक सकारात्मक तरीके में " या "एक स्वस्थ तरीके में ." मन के कार्यचालन हमेशा सबसे सरल मार्ग लेती हैं और आप नहीं चाहेंगे की आप पतले होने के लिए या वजन घटाने के लिए बीमार पड़ जाएँ या आपको धन की प्राप्ति बीमा से मिले जिसमे आपका कोई चहेता अपनी जान गंवा बैठे . इस बात को समझ लें की अपने मन के साथ कार्य करते समय ये सब का आप ध्यान रखें .

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Post Mon Dec 14, 2015 5:50 am

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जैव बिजली तकनीक और सम्मोहन की काली कलाएं -

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हम में से प्रत्येक के पास विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र होता है हमारे शरीर के चारों ओर. इसे ही हम आभा अर्थात औरा के रूप में जानते हैं . हमारे विचार और हमारी मस्तिष्क की गतिविधियाँ एक परिधि अर्थात सर्किट बनाती हैं उस आभा के अंदर में . चूंकि विचार और मस्तिष्क गतिविधि विद्युत आवेग होते हैं , इसीलिए उन्हें समझा जा सकता है और पढ़ा जा सकता है . विश्व की शक्तियां इस बात को जानती हैं , और उन्नत कंप्यूटर तकनीक की सहायता के साथ , वे एक व्यक्ति के विचारों को पढ़ने में समर्थ हैं , जहाँ वे , उन विचारों को एक विशेष यंत्र के साथ प्राप्त करते हैं और उसका उपज ऐसा ही होता है जैसे की जब सेटेलाइट के सिग्नल हमारे टीवी पर एक चित्र बना देते हैं .

वहां माइक्रो चिप्स भी होती हैं जिनका उपयोग प्रत्यारोपण के रूप में किया जाता है निश्चित तंत्रिका के मार्गों में ताकि मस्तिष्क तक विद्युत आवेगों को भेजा जा सके , जिससे निश्चित विचार , अनुभूतिओं , विश्वास या को प्रोत्साहित / उत्तेजित किया जा सके या फिर निश्चित स्मृतिओं का प्रत्यारोपण किया जा सके . हालांकि यह तकनीक शानदार हैं , अब वहां वास्तविक विचार पढ़ने वाली मशीने हैं , जो समय के साथ , हर अन्य चीज़ की तरह , उत्तम हो जाएँगी . एक यंत्र को रखा जाता / लगाया जाता है विषय / व्यक्ति की चमड़ी पर निश्चित बिन्दुओं पर , जो जैव - विद्युत उपज को पढता है और इन आवेगों को समझता है ताकि वे आसानी से एक विशेष कंप्यूटर द्वारा पढ़ी जा सकती हैं .

1970 के दौरान विश्व शक्तिओं ने प्रमुख उन्नति और सफलताओं को हासिल कर लिया मन नियंत्रण वाली तकनीक में . सम्मोहन के बहुत सारे सकारत्मक उपयोग हैं , जैसे की चंगाई , या निश्चित आदतों को तोडना . अधिकतर "पेशेवर " सम्मोहन करने वाले स्वीकार करते हैं की एक सम्मोहन वाली अवस्था की समाधी के दौरान , विषय / व्यक्ति कभी भी उसकी इच्छा के विरुद्ध कार्य नहीं करेगा , या वो ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जो उसकी प्रकृति के विरुद्ध हो . यह , वास्तविकता में झूठ है . एक अभ्यस्त और आत्मविश्वासी प्रचालक उसके विषय / व्यक्ति को कुछ भी करने के लिए प्रेरित कर सकता है जैसा वह उसे करने को आदेश दे. हाँ , अगर विषय अत्यंत शक्तिशाली हो या वहां को अत्यधिक शक्तिशाली अनिच्छा हो विषय के अंदर , तो बात अलग है .

आम जनता का बीस प्रतिशत सम्मोहन के लिए उत्तम है . औसत बुद्धिमता के ऊपर , एक काल्पनिक मित्र का अस्तित्व बचपने में , एक तीव्र प्रवृत्ति दिन में सपने देखने की और कल्पना की , और पालन करने की इच्छा बना देती है एक व्यक्ति को ऐच्छिक उम्मीदवार .

सम्मोहन की काली कलाओं में , सम्मोहन करने वाला और उसका विषय / व्यक्ति जिसे सम्मोहित किया जा रहा है , ये एक मालिक / गुलाम का सम्बन्ध बनाते हैं . विषय को उसके मित्र और परिवार से अलग रहकर और अधिक समय प्रचालक के साथ रहना चाहिए , जहाँ एक घनिष्ठता स्थापित हो जाये , जैसा सरकारी प्रयोगों में होता या कभी कभी जेल में कैदिओं के साथ होता है . एक भावनातक घनिष्ठता बहुत महत्वपूर्ण होती है विशवास एवं आज्ञाकारिता स्थापित करने के लिए . प्रचालक के लिए यह आवश्यक है की वह एक अच्छा सुनने वाला हो और सच्ची दिलचस्पी दिखाए विषय / व्यक्ति में . विषय को प्रचालक के साथ आरामदायक बनाया जाता है ताकि वह प्रचालक के साथ अच्छे से खुल सके .

प्रारम्भिक सम्मोहिक अधिष्ठापन / आगमन सबसे महत्वपूर्ण होती है , क्यूंकि यह विषय के मन को तोड़ देती है और सम्मोहन करने वाले के लिए एक द्वार खोल देती है . अल्फा / Alfa अवस्था में , तार्किक मन निष्क्रिय रहता है , और एक व्यक्ति सभी सुझावों के प्रति खुला रहता है . प्रचालक विषय को सुझाव देता / बतलाता है के वह (विषय ) अति गहराई से सम्मोहित हो जायेगा फिरसे , जब कभी भी प्रचालक अधिष्ठापन संकेत दे . यह शब्दों में या संकेत में हो सकता है . प्रत्येक सत्र / सेशन एक गहरा और अधिक गहरा सम्मोहन की अवस्था को लता है जहाँ विषय प्रचालक के सम्पूर्ण नियंत्रण में फिसल जाता है . गहरी और अधिक गहरी समाधी की अवस्था में , विषय प्रचालक के विरुद्ध और अधिक और आदिक शक्तिहीन हो जाता है .

कृत्रिम शब्दस्मृतिलोप जिसे "स्मृति / मन मिटाना " भी कहते हैं , ऐसा प्रचालक इसीलिए लाता है ताकि विषय को सत्र / सेशन के सचेत ज्ञान का कुछ भी ज्ञात न रहे . इसके आगे , महत्वपूर्ण सुझावों में शामिल होता है की िशय किसी भी रूप में किसी अन्य द्वारा सम्मोहित नहीं होगा , और वह समाधी अवस्था में वैसा ही कार्य करेगा , जैसा जागृत अवस्था में करता है / या मानो वह जागृत अवस्था में है .

एक बार विषय प्रचालक द्वारा सरलता से सम्मोहित हो जाये , मन और व्यक्तिव को तब प्रभावित किया जा सकता है . बचपन के जोड़ीदार (जिनके साथ बच्चा खेलता है ) अक्सर एक व्यक्ति के व्यक्तित्व के विस्तार / फैलाव होता हैं , विशेषकर उन लोगों में , जो कमज़ोर चरित्र के होते हैं और व्यक्तिगत रूप से वापस लड़ाई नहीं करेंगे या स्वयं की सुरक्षा करेंगे . काल्पनिक जोड़ीदार वापस लड़ सकता है और गुस्सा हो सकता है , जहाँ एक बच्चा नहीं लड़ सकता . अक्सर , वहां एक निंदापूर्ण माता पिता होते हैं , जिनके खिलाफ विचार और कार्य / चाल चलन जोड़ीदार के निर्देशित होते हैं .
सत्र के प्रारंभिक प्रभाव डालने वाली अवस्था में , प्रचालक विषय को बचपने में भेजता है / प्रतीपगमित करता है .प्रतीपगमन एक महत्वपूर्ण भाग खेलता है ताकि विषय के ऊपर नियंत्रण स्थापित किया जा सके . एक प्रचालक जो सरकार के लिए कार्य करता है जासूसों के उत्पादन के जैसे , वह सबसे आक्रामक काल्पनिक मित्रों के लिए देखेगा , कृत्रिम रूप से व्यक्तित्व को विभाजित करने के प्रयास में .व्यक्तित्व के सबसे आक्रामक पहलू आदर्श होते हैं सभी संकोचों को विनाश करने के लिए .

व्यक्तित्व का कृत्रिम विभाजन होता है जिसमे , काल्पनिक जोड़ीदार को विषय में बाहर लाया जाता है और विषय इशारों पर जोड़ीदार बन जाता है . जोड़ीदार अक्सर विषय के कोई एक चक्र में से निकलता है / उभरता है . प्रचालक विषय को जानकारी देता है की "जोड़ीदार का नाम " विषय के पेट , तीसरी आँख , गले आदि से निकलेगा / उभरेगा . विषय को आगे कहा जाता है की वह सत्र का या निकल रहे व्यक्तित्व का कुछ भी याद नहीं रखेगा . वास्तविक मामलों में , निकल रहा / उभर रहा शक्तिशाली व्यक्तित्व को क्रमोदेशना और सुझावों / बतलाकर प्रभावित किया जाता है की वह विषय के मूल व्यक्तित्व के प्रति प्रतिरोधी / शत्रुतापूर्ण रहे .

आक्रामक व्यक्तित्व लगभग सारे मामलों में और अधिक शक्तिशाली होता है और वह और गाली / दुष्प्रयोग झेल सकता है . विश्व शक्तियां विषय को रोबोट के जैसे वाले जासूसों की तरह उपयोग करती हैं . विस्तृत क्रमोडेशना आक्रामक व्यक्तित्व पर डाली जाती है , ताकि वे कभी भी निश्चित जानकारी , यहाँ तक की यातना सहते समय भी ना प्रकाशित करें . मूल व्यक्तित्व , जो सारे अनुभव के प्रति अनजान रहता है , अक्सर यही सारी व्यवस्थित यातना झेलता है , और उसे कोई भी जानकारी या स्मृति पुनः याद नहीं आती जो यातना देने वाला / या सवाल पूछने वाला उससे ज़बरदस्ती बताने को कह रहा है .

बार बार सत्रों को दोहराकर , व्यक्तित्व को और अधिक से अधिक उभारा / निकाला जाता है और वह और अधिक शक्तिशाली बन जाती है , और सम्पूर्ण रूप से मूल (व्यक्तित्व ) से विभाजित हो जाती है . विषय , जिसे क्रमोदेशित किया गया है की वह कुछ भी याद न रखे , उसको कोई ज्ञान नहीं होता , सिर्फ समय में फासले और स्मृति के खोये हुए टुकड़े बचते हैं . बहुत सारा समय ध्यान न देने में फिसल जाता है और उसका कोई खाता नहीं रखता .

आगे के प्रभाव डालने वाले सत्रों में , विषय (व्यक्ति ) से एक ऐसे विषय की बात शामिल होती है जो उस विषय अर्थात व्यक्ति के प्रकृति के सम्पूर्ण उलट है अर्थात एकदम घिनौना है , यहाँ विषय अर्थात व्यक्ति को उसके मन में ऐसा करवाया जाता है जो की वह सचेत अवस्था में कभी नहीं करेगा . विषय वास्तविकता में वह अनुभव करता है जो उसे प्रचालक कहता है . बार बार सत्र दोहराकर , सारे संकोचों को हटा दिया जाता है और व्यक्तित्व को जैसा प्रचालक चाहता है वैसे आकार में बना दिया जाता है . यह वहीं है , जहाँ विषय , उदाहरण के लिए , किसी की हत्या कर सकता है बिना संकोच / झिझक के या कोई अन्य चीज़ जैसा प्रचालक आज्ञा दे . हर चीज़ की तरह , क्रमोदेशना को बार बार दोहराते हुए डाला जाता है और बनाये रखा जाता है आगामी सत्रों में .

बार्बीटुरेट्स (एक शामक ड्रग ) को हठी विषय में इंजेक्ट किया जाता अर्थात डाला जाता है इंजेक्शन आदि से , जिससे उसका मन खुल जायेगा जो कुछ भी सुझाव प्रचालक उसमे डालना चाहे , उसके प्रति . इसको "मिलिट्री साइकोलॉजी " कहते हैं . वे लोग जो मनोरंजन हेतु ड्रग्ज़ या मनोरंजन ड्रग्ज़ आदि का उपयोग करते हैं वे नियंत्रित करने के लिए अत्यधिक सरल होते हैं , या तो मानसिक रूप से जिसमे एक अभ्यस्त जादूगर नियंत्रित करे , या एक वास्तविक क्लीनिकल जगह / सेटिंग पर . ड्रग्ज़ के कारण सुरक्षा करने वाली आभा में गड्ढे हो जाते हैं , जिन्हे / जिनमे एक निपुण आसानी से हेरफेर कर सकता है .

बिजली के झटके वाला उपचार कार्य करता है स्मृतिओं का विनाश करने हेतु और इसका उपयोग मन को एकदम साफ़ मिटाने हेतु किया जा सकता है विष की शक्तिओं द्वारा . मन को फिर पुनः क्रमोदेशित किया जाता है , मान्यताओं, विचारों, सोच स्वरूपों , और आदतों को फिर डाला जाता है , अक्सर ड्रग्ज़ का उपयोग कर समाधी की आस्था में लेजाकर , जब तक एक नए व्यक्तित्व का जन्म नहीं हो जाता और फिर ड्रग्ज़ की कोई और आवश्यकता नहीं होती . इसको "ब्रैनवॉशिंग " कहते हैं और यह हर उद्देश्य के लिए की जा सकती है.

बहुत सारे लोग इस बात के प्रति अनजान रहते हैं की उनके मन से / के साथ क्या क्या नहीं किया जा सकता उन लोगों के द्वारा जिनके पास अधिक ज्ञान और नियंत्रण होता है . स्वयं को सम्मोहित करना उपयोगी होता है जिसमे , हम खुद , हमारे मन को क्रमोदेशित करते हैं . हम हमारे मन को क्रमोदेशित कर सकते हैं की वह हर प्रकार के अनचाहे प्रभावों के प्रति प्रतिरोधी रहे . इसके साथ , दूसरे हमारे मन को कभी प्रभावित करने में समर्थ नहीं हो सकेंगे और ना ही तो वे हमारे ऊपर नियंत्रण किसी भी रूप में स्थापित कर पाएंगे .

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Post Tue Dec 15, 2015 9:59 am

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आभा अर्थात औरा को शक्तिशाली बनाने हेतु मैडिटेशन अर्थात ध्यान -

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यह मैडिटेशन अर्थात ध्यान अति उत्तम है अतिरिक्त ऊर्जा के लिए जब इसे लगातार किया जाये. यह बहुत शक्तिशाली है और समय के साथ शक्ति को बढ़ता चला जाता है . इस मैडिटेशन को बाहर भी किया जा सकता है ; सूर्य से ऊर्जा को खींच / सोख कर . यह गंभीरता से ऊर्जा को बढ़ा देता है / विस्तृत कर देता है .

1 . एक समाधी की अवस्था में जैन , जितनी गहरी समाधी अवस्था उतना बेहतर और शुरू करें अपनी आभा और चक्रों को साफ़ करने के साथ .

2 . ऊर्जा को अंदर सांस में लें , छह साँसों के लिए , दृश्य बनाएँ / कल्पना करें एक मेधावी चमकदार सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) रौशनी / प्रकाश का जो आपके सारे सिर को घेरे हुए है अंदर और बाहर दोनों , और आपकी गरदन के नीचे में . तब आररम यक्रेन और ध्यान केंद्रित करें उसे महसूस करने पर / उस अनुभूति पर और दृश्य बनायें / कल्पना करें इस ऊर्जा का लगभग पांच मिनिट के लिए . यह आप म्यूजिक को सुनते समय भी कर सकते हैं क्यूंकि म्यूजिक आपकी टाइमिंग अर्थात समय-निर्धारण में सहायक हो सकती है . इसके बाद , ऊर्जा को अंदर सांस में लें और अपने क्राउन अर्थात सहस्रार को चार्ज अप अर्थात शक्ति डालें उसमे (सहस्रार में . ), आपकी तीसरी आँख में और आपकी तीसरी आँख के पीछे स्थित छटवें चक्र में , इन चक्रों पर एक और अधिक मेधावी चमकदार रौशनी की कल्पना कर / दृश्य बनाकर इन्हे चार्ज अप करें अर्थात शक्ति डालें इनमे .

3 . अब अपनी गर्दन पर जाएँ और यही करें . छह सांसों के लिए ऊर्जा को अंदर सांस में लें और अपने थ्रोट अर्थात अनाहत चक्र को चार्ज अप करें / शक्ति डालें .

4 . अब अपने कन्धों की ओर बढ़ें और उन्हें वैसे ही चार्ज अप / शक्ति डालें , जैसा आपने अन्य चक्रों के साथ किया था , ऊर्जा को छह साँसों के लिए , सांस के साथ अंदर लें और फिर आराम करें उस पर ध्यान केंद्रित करते हुए पांच मिनिट के लिए . (पांच मिनिट ध्यान केंद्रित करना है )
आपके सारे जोड़ों में छोटे / लघु अर्थात अंग्रेजी में लैसर चक्र होते हैं . अपनी भुजाओं के नीचे आप यही अपनी कोहनिओं के साथ करें और फिर यही अपनी कलाईयाँ के साथ करें . कोहनियां एवं कलाईयाँ लघु अर्थात छोटे चक्रों को रखती हैं और इनको चार्ज अप अर्थात शक्ति डालने के माध्यम से और उन्हें शक्तिशाली बनाने से ; आप एक बेहतर ऊर्जा प्रवाह के लिए स्वयं को खोलते हैं . अब अपने हाथ पर से नीचे जाएँ और कल्पना करें सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) ऊर्जा की गेंदों को अपनी हथेलिओं में . एकाग्रित करें / ध्यान केंद्रित करें और आराम करते हुए अर्थात रिलैक्स्ड रहते हुए ,कई मिनिटों के लिए इस मेधावी चमकदार रौशनी / प्रकाश के ऊपर की वो आपकी भुजाओं और आपके हाथों को प्रजव्व्लित कर रही अर्थात प्रकाशमान बन रही है .

5 . अब अपने धड़ पर जाएँ , और यही करें , और अपने हार्ट अर्थात अनाहत , सोलर ,सेक्शुअल अर्थात यौनिक और मूलाधार अर्थात बेस चक्रों को मेधावी चमकदार ऊर्जा के साथ चार्ज अप करें / शक्ति डालें . इस पर कई मिनिटों के लिए ध्यान केंद्रित करें एकाग्रित होकर .

6 . अपनी कमर पर जाएँ और अपनी कमर में चक्रों को ऊर्जा के साथ चार्ज अप करें / शक्ति डालें उनमे और फिर अपनी जाँघों और घुटनो पर जाकर ऐसा करें . अपने टखनों पर जाएँ और वहां पर चक्रों को चार्ज अप करें / उनमे शक्ति डालें और फिर अपने तलवों में (पैरों के ) पर जाकर उन्हें भी चार्ज अप करें . दृश्य बनायें / कल्पना करें चमकदार मेधावी सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) प्रकाश / रौशनी के गेंदों की आपके प्रत्येक तलवे के नीचे , ठीक वैसे ही जैसा आपने हाथों के साथ किया था .

इस व्यायाम को रात को सोने जाने या सिर्फ कभी भी सोने जाने के पहले नहीं करना चाहिए क्यूंकि ऊर्जा आपको जागृत रख सकती है .

चंगाई के लिए , यह ऊपर जो बताया है उसे पूर्ण करने के बाद , सिर्फ ध्यान केंद्रित करें और ऊर्जा / प्रकाश (रौशनी ) को अस्वस्थ शरीर के भाग पर रख दें दस से पंद्रह मिनिट के लिए . अगर आप यह किसी भी चंगाई के लिए कर रहे हैं , तो इसे प्रति दिन किया जाना चाहिए और कभी भी एक दिन छोड़ना नहीं चाहिए अन्यथा प्रगति वापस जा सकती है .

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Post Tue Dec 15, 2015 10:51 am

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रौशनी / प्रकाश के गेंद का मेडिटेशन अर्थात ध्यान -

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चक्र रीढ़ के साथ साथ पर स्थित होते हैं , परन्तु वे हमारे शरीर के सामने की ओर भी फैले / विस्तृत होते हैं क्राउन अर्थात सहस्रार एवं बेस अर्थात मूलाधार को छोड़ कर . प्रत्येक चक्र में , दूसरे से छटवें चक्र तक के में हर एक चक्र का एक विपरीत चक्र होता है शरीर के सामने (के भाग में ) पेट के साथ में . छटवें चक्र के तीन विस्तार होते हैं . पीछे का छटवां चक्र स्थित होता है सिर के पीछे के ओस्सीपिटल अर्थात पश्चकपाल पालि में ,बीच का छटवां चक्र स्थित होता है तीसरी आँख और पश्चकपाल पालि छटवें चक्र के बीच में .

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मैडिटेशन अर्थात ध्यान करने के लिए , कल्पना करें / दृश्य बनायें एक मेधावी चमकदार रौशनी की छोटी गेंद का , उसका आकार एक पिंग - पांग गेंद के जितने का होगा , और आप अपनी रीढ़ पर एक चक्र को प्रकाशमान करें उससे और फिर उसे सामने के चक्र पर जो ठीक उसके विपरीत है उस पर ले आएं और उसे प्रकाशमान करें , फिर उसे आपकी रीढ़ पर चक्र पर वापस ले जाएँ . उसे पास करते रहें अर्थात ले जाते लाते रहें पीछे और आगे प्रत्येक चक्र में , फिर ऊपर या नीचे लेजाएं अगले चक्र पर (जिस कोई भी चक्र पर जिस पर आप कार्य करना चाहते हों उस पर ले जाएं ). आपको ऊपर चित्र में बतलाया गया है की छटवां चक्र कैसा होता है उसके विस्तार सहित .

आप अपनी गेंद का दृश्य एक सफ़ेद - सुनहरी अर्थात सोने के रंग की रौशनी / प्रकाश के जैसा कर सकते हैं , या तो आप उस चक्र का रंग लेकर कर सकते हैं जिस चक्र के साथ आप कार्य कर रहे हैं , आप उसका रंग लेकर गेंद बना सकते हैं .

आप क्राउन अर्थात सहस्रार को बेस अर्थात मूलाधार से भी जोड़ सकते हैं . मैंने पाया है की ऊर्जा का केंद्र जो मूलाधार में स्थित होता है वह इसके साथ विशेष शक्तिशाली होता है . सिर्फ आप उसे ऊपर नीचे पास करते जाएँ अर्थात लाते ले जाते जाएँ .

अब एक दूसरी रोचक चीज़ जो आप इसके साथ कर सकते हैं , वह यह है की आप इसे दूसरे व्यक्ति के साथ जोड़ें और इससे टेलीपैथी अर्थात दूर संवेदन (विचारों की सहायता से संपर्क साधन / साधना )बहुत बढ़ जाती है . उदाहरण के लिए , गेंद को उनके (दूसरे व्यक्ति ) हार्ट अर्थात अनाहत चक्र से आपकी इच्छा तक पास करने से अर्थात आगे और पीछे ले जाने से , आपको उस व्यक्ति के मानसिक अनुभवों और चरित्र का पता चल जायेगा.

अब , यह ज़ाहिर है की आप अनुभव के साथ , दूसरों की प्राइवेसी अर्थात एकांत को भेद सकते हैं और इसमें आप स्वयं भी शामिल हैं - अगर आप किसी को भी अपने व्यक्तिगत व्यापार / मामलों में नहीं चाहते . ऐसे मामले में , आप अपने चक्रों को बंद कर दें , अगर आपके साथ कोई ऐसा आपकी इच्छा के विरुद्ध करे अर्थात वो आपके व्यक्तिगत मामले में दखल दे.

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Post Tue Dec 15, 2015 11:38 am

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नीले प्रकाश / रौशनी का मैडिटेशन अर्थात ध्यान -

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... ation.html

डीमॉनिक अर्थात डीमॉन्स की ऊर्जा नीले है . नीला रंग आराम अर्थात रिलैक्सेशन का भी रंग है . अपनी आँखों को बंद करें और आराम करें अर्थात रिलैक्स करें जब तक आप अपने शरीर को और अधिक महसूस नहीं कर पाते (अर्थात समाधी अवस्था ). नीले रंग को अंदर सांस में लें और स्वयं को एक नीले प्रकाश / रौशनी में घेर लें और फिर एक तैरने की सी अनुभूति में ले मिलाएं . नीले रौशनी / प्रकाश इसे प्राप्त करने में सहायक होता है .यह मैडिटेशन अर्थात ध्यान आपको दूसरे आयामों में एवं और अधिक ऊँचे स्तरों पर ले जा सकता है.

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Post Wed Dec 16, 2015 9:55 am

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चक्र सांस - अज़ाज़ेल के द्वारा

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इस मैडिटेशन अर्थात ध्यान को करने के लिए , आपको आधार ध्यान अर्थात फाउंडेशन मैडिटेशन में / का पहले ही अनुभव होना चाहिए.

आराम करें और एक समाधी की अवस्था में जाएँ , तब , एनर्जी मैडिटेशन अर्थात ऊर्जा ध्यान में हैसे आप ऊर्जा को अपने सम्पूर्ण शरीर में अंदर सांस लेते हैं , उसके बजाये , आपको ऊर्जा को आपके प्रत्येक चक्रों में सांस के साथ अंदर लेना है , हर चक्र पर सात साँसों हेतु . सात साँसें सिर्फ दिशानिर्देश हेतु हैं; आप अधिक या कम कर सकते हैं , परन्तु यह महत्वपूर्ण है की आपके चक्र संतुलन में हैं . सिर्फ ऊर्जा को अंदर सांस में लेना ही महत्वपूर्ण नहीं है , परन्तु आपको उसकी कल्पना करनी / दृश्य भी बनाना है .

आप सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) ऊर्जा जो की सबसे शक्तिशाली है , उसे अंदर सांस में ले सकते हैं , अन्यथा आप अपने चक्रों के रंग की ऊर्जा को अंदर सांस में ले सकते हैं .

जब आपने अपने प्रत्येक चक्रों पर सांस ले ली है , अपने सारे सात चक्रों में से ऊर्जा को अंदर सांस में लें , सामने और पीछे और उसे मध्य में मिला दें .

यह करने के बाद , आधार ध्यान अर्थात फाउंडेशन मैडिटेशन करें .

टिप्स -

इस मैडिटेशन अर्थात ध्यान को आप केवल एक चक्र पर भी कर सकते हैं जिसमे ऊर्जा की कमी है या उसमे कोई रुकावट है . केवल आपको सांस को एक या अधिक बार एक दिन में लगानी है / लेनी है . बाकी का मैडिटेशन अर्थात ध्यान अनावश्यक है अगर आप एक विशेष कमज़ोर चक्र पर कार्य कर रहे हों तो .

अज़ाज़ेल ने मुझे सूर्य की शक्ति दिखाई है . हम में से अधिक इस बात से परिचित हैं की चन्द्रमा एवं और अन्य ग्रहों से ऊर्जा को कैसे खींचा / सोखा जाता है . सूर्य सौ गुना अधिक शक्तिशाली है . सूर्य की ऊर्जा रखती है स्पेक्ट्रम अर्थात वर्णक्रम के सारे रंगों को उनके सबसे शुद्ध रूप में . इस ऊर्जा को आपके दरवाज़े / द्वार से बाहर सूर्य के नीचे करने से आपको आश्चर्यजनक शक्ति दे सकता है और बहुत चंगाई भी दे सकता है . केवल अफर्म करना अर्थात दृढ़ता के साथ कहना है "मैं एक शक्तिशाली सफ़ेद - सुनहरी (सोने के रंग की ) ऊर्जा को सूर्य से अंदर सांस में ले रहा हूँ / रही हूँ , मेरे _________ चक्र में ." इसे कई बार दोहराएं और फिर कल्पना करें / दृश्य बनांयें स्वयं को ऊर्जा सोखते हुए और अपने चक्रों को उससे चमकदार मेधावी करते / बनाते हुए .

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Post Thu Dec 17, 2015 10:30 pm

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I am traveling out to some old pagan temples in South India , a thousand miles away from my home town . I will begin with translations again by 29 of Dec 2015, as I will be unavailable all this coming week .

Much thanks ....

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Post Thu Dec 17, 2015 10:59 pm
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Take pic and post them up, of the temples!

roadtorevolution wrote:
I am traveling out to some old pagan temples in South India , a thousand miles away from my home town . I will begin with translations again by 29 of Dec 2015, as I will be unavailable all this coming week .

Much thanks ....

Post Fri Dec 18, 2015 6:32 am

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of course SLOTHZ , will post them , actually I wanted to see specially that Padmanabhaswamy temple a. The temple is built in an intricate fusion of the indigenous Kerala style and the Dravidian style of architecture associated with the temples located in the neighboring state of Tamil Nadu, featuring high walls, and a 16th-century Gopuram.

The principal deity Vishnu is enshrined in the "Anantha Shayanam" posture, the eternal yogic sleep on the serpent Adisheshan

They have discovered under 20 feet of the ground approximately $ 22 BILLION WORTH OF HIGHLY VALUABLE GOLD in the form of, diamond jewellary, golden utencils, weapons, goden idols, golden elephents idols and diamond necklaces having 500 kilograms weight and 18 feet lentgh and bags full of golden coins of different nations, including NAPOLEON and ITALIAN coins in the last one week. With this Sri Anantha Padmanabha Swamy of Tiruvnanthapura m has emerged the richest God on the earth. And this world is looking at the opulance of this God with the mouths opened in a great shock and surprise.

This chamber is being considered by the Trust members and other learned Astrologers of India, as highly mysterious, sacred and risky and dangerous to unveil it. Because the steel door of the Chamber-B is having two big COBRA PORTRAITS on it and this door as no nuts, bolts or other latches.

It is considered to be fixed to the secret chamber with the ‘NAGA BANDHAM’ or ‘NAGA PAASAM’ ‘MANTRAS’ by the then ‘SIDDA PURASHAS’ who lived during the reign of KING MARTHANDAVARMA in the 16th CENTURY.

A door of such a secret vault can be opened by a highly erudite ‘SADHUS’ or ‘MANTRIKAS’ who are familiar with the knowledge of extricating ‘NAGA BANDHAM’ or ‘NAGA PASAM’ by chanting a ‘GARUDA MANTRA'; So except in this way, the door can't be opened by any means by anyone. At present NO WHERE IN INDIA or in the WORLD such a highly sacred and powerful ‘SIDDHAPURSHAS’ or ‘Y0GIS’ or ‘MANTRIKAS’ who does know how to execute highly sacred ‘GARUDA MANTRA’ are EXISTING.

If any human attempts are made with man-made technology to open the mysterious Chamber-B other than by chanting highly sacred and powerful ‘GARUDA MANTRAS’ by a highly sacred ‘SADHUS’ or ‘MANTRIKAS’, catastrophes are likely to occour in and around the Temple premisis or through out India or even through out the world according to VEDIC ASTROLOGERS OF INDIA, who also revealed their inability to open the door by chanting the secret ‘GARUDA MANTRA’.

If ‘GARUDA MANTRA’ is chanted by any powerful ‘SADHU’ or ‘YOGI’ or ‘MANTRIKA’ the door proceeds to automatically open and no human effort is needed toopen it in any further .

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This is that door slothz

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Post Fri Dec 18, 2015 6:04 pm

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Okay Slothz and my satanic comrades , I will see you all laterzzzzzz just leaving ...... and wishing you all a very divine yule !!! May Father Satan and Powers of Hell give us strength to crush the shit out of enemy !!!


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Post Tue Dec 29, 2015 1:13 am

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beginning again tom . , I will just go and grab my camera and post those pics in a newer thread , pics are lots of guess over n nos , so my all of today might go into it :mrgreen:

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Post Tue Dec 29, 2015 7:40 am

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Slothz , help your brah out here , I just checked my camera and lmaao , thers over 160 or so images . How do you want me to upload , I guess I will upload them to sky drive and post a link here in a new thread ?

THanks !

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Post Mon Jan 18, 2016 7:59 am

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ऊर्जा को प्रसारित करना


Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... nergy.html

यह मैडिटेशन अर्थात ध्यान अत्यंत शक्तिशाली है . इसे मार्शल आर्टिस्ट अर्थात मार्शल कलाकार (जुडो कराटे आदि करने वाले ) और उन्नत साधक करते हैं . इस मैडिटेशन को करने से (मैडिटेशन करने वाला ) ऊर्जा को महसूस करने , नियंत्रित करने और निर्देशित करने में समर्थ हो जाता है .

धैर्य रखें . आपको पंद्रह मिनिट से अधिक से लेकर आधे घंटे निकालने होंगे ताकि आप इस मैडिटेशन को शुरू कर सकें . , फिरसे ,यह व्यक्ति पर निर्भर करता है की आपको कितना समय निकलना होगा . . शुरुआत में , अधिकतर लोगों के लिए , ऊर्जा धीरे धीरे आएगी और धीमे धीमे चलेगी , परन्तु यह इस बात पर निर्भर करता है की आप अपने पिछले जीवनों में कितने उन्नत थे . आमतौर पर बार बार लगातार मैडिटेशन करने से , इस गति मिलने लगेगी और आप ऊर्जा को अपनी इच्छा पर निर्देशित करने में समर्थ हो जायेंगे .

इस अभ्यास / व्यायाम में , आपको अधिक महसूस करना है और कम दृश्य बनाने / कल्पना करनी है .

1 .) अपने क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र पर ध्यान केंद्रित करें . आप सिर्फ बैठ जाएँ और तीन से चार मिनिट तक इस चक्र पर मैडिटेशन करें. आपको इसमें एक प्रकार की घसीटने / रेंगने की सी अनुभूति हो सकती है . ऐसा होना आम है . जब एक व्यक्ति उन्नति करता है या अवसरों पर , आपको एक परमानंद की तीव्र अनुभूति होती है . आप एक दबाव को भी महसूस कर सकते हैं वहां .

2 .) अब अपनी तीसरी आँख पर ध्यान केंद्रित करें . अपनी तीसरी आँख पर कई मिनिटों के लिए मैडिटेशन करें . यहाँ पर एक दबाव को महसूस करना आम है .

3 .) अब अपने ध्यान को अपने थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र में ले जाएँ और वैसा ही करें जैसा आपने ऊपर दोनों चक्रों के साथ किया था .

4 .) अब अपनी ऊर्जा को अपने हार्ट अर्थात अनाहत चक्र में ले जाएँ और कुछ मिनिटों के लिए ध्यान केंद्रित करें .

5 .) अब आप अपने सोलर प्लेक्सस अर्थात मणिपूर चक्र पर ध्यान केंद्रित करें और वैसा ही करें जैसा आपने ऊपर के चक्रों के साथ किया था .

6 .) यही आप अपने दूसरे / सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र के साथ करें .

7 . ) अब आप अपने पेरिनियम अर्थात गुदा और अंडकोष या योनिमुख के बीच के भाग वाली जगह पर ध्यान केंद्रित करें . पुरषों के लिए यह मलाशय और अंडकोश के बीच में होता है , और स्त्रिओं के लिए यह मलाशय और योनि के बीच में होता है . यह शक्ति का स्थान है . दृश्य बनायें / कल्पना करें की ऊर्जा यहाँ सूर्य के जैसी चमकदार / मेधावी प्रज्वल्लित / दीप्तिमान हो रही है अर्थात चमक रही है .

8 .) ऊर्जा को अपने बेस अर्थात मूलाधार चक्र पर लेजाएं और तीन से चार मिनिट के लिए आप अपने बेस अर्थात मूलाधार चक्र पर मैडिटेशन करें .

9 .) अब , ऊर्जा को आपकी रीढ़ के ऊपर आपके दूसरे चक्र में निर्देशित करें . (दूसरा चक्र आपकी रीढ़ पर स्थित होता है - पहले प्रसारण में , हमने सामने के चक्रों में ध्यान केंद्रित किया था , अब हम ऊर्जा को निर्देशित कर रहें हैं वापस ऊपर पीछे पर . )

10 .) ऐसा करते रहें , ऊर्जा को प्रत्येक चक्र में ऊपर की ओर निर्देशित करते रहें . एक के बाद एक जो की (चक्र )आपकी रीढ़ पर स्थित हैं , जब तक आप अपने क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र तक नहीं पहुँच जाते .

11 .) इस बार , आप ऊर्जा को बिना रुके निर्देशित कर सकते हैं , उसे आपके शरीर के सामने में चलाते हुए एक के बाद एक चक्र करते हुए , जब तक आप अपने पेरिनियम पर फिरसे नहीं रुक जाते और ऊर्जा को आपकी रीढ़ की ऊपर वापस निर्देशित नहीं करते .

ऊर्जा को आप प्रसारित करते रहें जब तक आप चाहें . यह व्यायाम आपको समर्थ बनाएगा की आप अपनी ऊर्जा को नियंत्रित कर सकें और ऊर्जा को निर्देशित कर सकें . यह सर्व शक्ति का आधार है . आप एक मानसिक संपर्क स्थापित कर लेंगे जिससे आप ध्यान केंद्रित करने में समर्थ हो जाते हैं और ऊर्जा उसी तरह चलेगी जैसा आप चाहते हैं . इसका उपयोग चंगाई , शक्तिशाली बनाने या अन्य किसी कार्य के लिए किया जा सकता है .

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Post Tue Jan 19, 2016 9:30 am

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रंग ध्यान अर्थात कलर मैडिटेशन

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* इस मैडिटेशन अर्थात ध्यान को करने में ऊर्जा को अंदर "सांस " में लेने की आवश्यकता होती है . आपको आधार मैडिटेशन अर्थात फाउंडेशन मैडिटेशन / ध्यान का अनुभव होना चाहिए इस मैडिटेशन को करने से पहले .

दुर्भाग्य से , "सफ़ेद प्रकाश " का बहुत से विक्कन (Wiccan) और नए समय के लोग (अर्थात आज के तथाकथित जादू विद्या करने वाले ) ने अति उपयोग किया है और वे नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं . ये लोग सफ़ेद प्रकाश का उपयोग अन्य सभी रंगो का बहिष्कार करने को करते हैं , और इसके परिणाम स्वरुप वे रंगो के साथ कार्य करने में सक्षम नही होते . क्यूंकि सफ़ेद प्रकाश रखता है स्पेक्ट्रम अर्थात वर्णक्रम के *सभी * रंगों को , वे इन सभी रंगों को अंदर ले रहे होते हैं और वे रंग जिनके साथ कार्य करने में (अर्थात कार्यचालन में ) या इन रंगों को नियंत्रित करने में असमर्थ होते हैं , ऐसे लोग बिना निर्देश / दिशा के अपने आप पर छूट जाते हैं / अकेले हो जाते हैं गलतियां दोहराते हुए. प्रत्येक रंग प्रतिनिधित्व करता है ऊर्जा की एक विशेष आवृत्ति का , जिसे हम में से अधिकतर उपयोग करते हैं हमारे दैनिक जीवनों में . अगर एक व्यक्ति प्रत्येक रंग को सँभालने के सामर्थ्य में सक्षम नहीं होता है , तो इससे अक्सर सफ़ेद प्रकाश का सही उपयोग करना असमर्थ हो जाता है .

सफ़ेद प्रकाश का उपयोग सरल होता है और यह नए लोगों के लिए बहुत अच्छा है , परन्तु समस्या यह होती है की उसका अति उपयोग कर दिया जाता है . सफ़ेद प्रकाश बहुत अच्छा होता है आभा अर्थात औरा को साफ़ करने में और ऊर्जाओं को संतुलित करने के लिए. यह (सफ़ेद प्रकाश ) सुरक्षा करने के लिए भी बहुत अच्छा होता है .

जब एक व्यक्ति के चारों / हर ओर सफ़ेद प्रकाश को रखा जाता है , तो यह एक अवरोध बन जाता है जो दूसरों से बातचीत / मिलान आदि को रोकता है . यह इसीलिए होता है क्यूंकि सफ़ेद प्रकाश रिफ्लेक्ट करता है अर्थात प्रतिबिंबित करता है . अगर आप अकेले छोड़ दिए जाना चाहते हैं , तब आप अपने आप को सफ़ेद प्रकाश में घेर लें . स्वयं को सफ़ेद प्रकाश से भरना अंदरूनी रूप से / अंदर पर से , यह आपको शक्तिशाली बनता है और सुरक्षा करता है आपकी दूसरों के प्रति बिना अवरोध बने , अगर आप सामजिक मेल / बातचीत आदि चाहते हैं तो यह अच्छा होता है .

सफ़ेद प्रकाश का अति उपयोग रवैये को अभिमानी बना सकता है , विशेष कर जहाँ आध्यात्मिकता का मामला है , यह आपके मन को हठी कर देता है अर्थात इससे आपका मन कुछ ग्रहण नहीं करता अपनी चलाता है , और रवैये में कठोरता का कारण बनता है . ये अक्सर उन लोगों में देखा जाता है जो एंजल मैजिक अर्थात एंजल जादू का अभ्यास करते हैं .सब मिलाकर परिणाम यह होता है की वह जीव / व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति / विकास के एक निचले स्तर पर रहता है .

रंग ध्यान -

शुरू करने आरामदायक स्थिति में आते हुए और सांस सम्बन्धी व्यायाम करते हुए या जो कुछ भी आप करें अपने मन पर ध्यान केंद्रित करने / अर्थात मन को केंद्रित करने के लिए और स्वयं को शांत करने के लिए समाधी की अवस्था में आपके जाने के पहले .

सांस को अंदर लें और स्वयं को भरें , प्रत्येक सांस के साथ स्पेक्ट्रम / वर्णक्रम के विशेष रंग के साथ (स्वयं को भरना है ) , उसका दृश्य बनाते हुए / कल्पना करते हुए की वह हर बार और अधिक चमकदार मेधावी होता जा रहा है एवं और तीव्र होता जा रहा है .

लाल, नीले, पीले, नारंगी, बैंगनी, हरे, नील (नीला - बैंगनी , छटवें चक्र का रंग ) या काला. इस मैडिटेशन को आप एक विशेष चक्र पर मैडिटेशन करने के पश्चात भी कर सकते हैं . आप फिर स्वयं को उस चक्र के रंग के साथ भर सकते हैं .

अगर आप कलर मैडिटेशन अर्थात रंग ध्यान में नए हैं , आप रंग को पकड़ के रखें दो से चार मिनिटों के लिए . अगर आपको रंग सुखद / रुचिकर महसूस होता है , तो आप उस रंग को और अधिक लम्बे समय के लिए पकड़ के रख सकते हैं . वे लोग जो रंगों की ऊर्जा के उपयोग के आदि हैं वे कई अधिक समय तक पकडे रख सकते हैं . आपका बढ़ा हुआ समय आरामदायक और क्रमिक (क्रमशः ) होना चाहिए.

प्रत्येक रंग को उसके पवित्र / विशुद्ध / निर्दोष रूप में होना चाहिए और मेधावी / चमकदार होना चाहिए. बाद में , यह अच्छा होता है की (आप ) विभिन्न रंगों / शेड्स आदि के साथ प्रयोग करें जब निपुण हो जाएँ .

अगर आपको एक रंग नकारात्मक लगता है , उसके साथ क्रमशः कार्य करें . अपने मन से पूछें की ऐसा क्यों है . यह रंग आपके लिए क्या अर्थ रखता है ? आपके एक विशेष रंग के साथ क्या सम्बन्ध है ? यह एक बहुत अच्छा तरीका है की आप स्वयं के बारे में और पता लगा सकें . आपको कौन से रंग सुखद / रुचिकर लगते अर्थात महसूस होते हैं . ये वो रंग हैं जिनका उपयोग आप अपने जीवन में सर्वाधिक करते आ रहें हैं अन्य (रंगों ) का बहिष्कार कर . इसे जाने से यह जानकारी मिलती है की कोनसे चक्र पर और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है ताकि उन्हें (चक्रों को ) उनके सम्पूर्ण शक्ति पर लाया जा सके .

इस मैडिटेशन अर्थात ध्यान का सबसे महत्वपूर्ण ध्येय यह है की आप रंगों को *महसूस* करें . प्रत्येक रंग के साथ समय व्यतीत करें , और यह जाने की कैसा महसूस होता है . एक लिखित रिकॉर्ड रखें आपकी डायरी (जिसे काली किताब / छाया की किताब भी कहेंगे ) में .

आप स्वयं के बाहर भी रंगों पर मैडिटेशन कर सकते हैं ताकि उसकी ऊर्जा को महसूस कर सकें . यह हमेशा आवश्यक नहीं होता की आप रंगों को सोखें , विशेषकर जब आप निश्चित रंगों के साथ आरामदायक महसूस नहीं करते तब . याद रखें , अगर कुछ आपको आरामदायक नहीं लगता या नकारत्मक लगता है , तब रुक जाएँ . जब आपने यह मैडिटेशन कर लिया हो , अपनी आभा को सफ़ेद प्रकाश के साथ साफ़ करें क्यूंकि यह आपकी आभा अर्थात औरा में सभी रंगों को संतुलित करने का कार्य करेगा .

इस मैडिटेशन के लाभ हैं रंगों को महसूस करने , निर्देशित करने और लगाने के सामर्थ्य की प्राप्ति . रंगों की ऊर्जा विशेषकर शक्तिशाली होती है जब हम जादू में इनका उपयोग करते हैं . प्रत्येक रंग में विशेष ऊर्जाएं होती हैं और यह उस ऊर्जा से संबंध्ति अद्वितीय / अनोखे परिणाम लाने का कार्य करती है .


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Post Wed Jan 20, 2016 2:37 am

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चक्रों की ध्वनि पर मैडिटेशन / ध्यान - अज़ाज़ेल द्वारा

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प्रत्येक चक्र की एक मानक / स्टैण्डर्ड ध्वनि होती है . इन ध्वनिओं पर मैडिटेशन करने एवं विशेष चक्रों पर ध्यान केंद्रित करने के द्वारा , यह एक तरीका है की हम हमारी एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक श्रवण शक्ति को खोल सकते हैं .


*बेस अर्थात मूलाधार चक्र , भौतिक/शारीरिक स्तर -
इसकी ध्वनि में शामिल है गर्जन (आकाशीय बिजली ) या एक मृदु फुफकार / सिसकार . लाल .

* सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र , एस्ट्रल / नाक्षत्रिक स्तर -
समुद्र के जैसे गर्जन या हवा / वायु की ध्वनि . संतरा (रंग ).

* तीसरा चक्र , इच्छा (शक्ति ) स्तर -
ह -ह -ह -अ - अ -ह - ह - ह (H-h-h-a-a-h-h-h) ध्वनि , (शांत , जैसे की सांस बाहर छोड़ने पर - बिना आवाज़ के , लम्बी और लगातार )या "औम" (ॐ ) को कम्पन्न / गिनगिनाने की ध्वनि . पीला .

* हार्ट अर्थात अनाहत चक्र , अंतर्ज्ञान स्तर -
एक बी (Bee) अर्थात मधुमक्खी के जैसे की भिनभिनाहट , या एक बांसुरी की ध्वनि . हरा .

*थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र , मानसिक स्तर -
अज़ाज़ेल ने मुझे एक ध्वनि बताई . इसका मैं सबसे अच्छा वर्णन इस तरह से कर सकती हूँ की यह एक फुग्गे को मरोड़ने के जैसी है . गिनगिनाने की ध्वनि का भी उपयोग किया जा सकता है . नीला .

*छटवां चक्र , आत्मा स्तर -
वुडविंड यंत्रों की ध्वनिया. (वुडविंड अर्थात वे यंत्र जिसमे वायु का उपयोग किया जाता है ध्वनि निकलने के लिए .) नीला बैंगनी (रंग ) अर्थात इंडिगो .

*क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र , परमानंद स्तर -
फुसफुसाहट या कोई ध्वनि नहीं - इसे महसूस किया जाता है सुनने के बजाये . बैंगनी .

ऊपर बतलाये स्तर और ध्वनियाँ केवल दिशा निर्देश हैं ताकि एक व्यक्ति शुरू कर सके . एक विशेष चक्र पर ध्यान केंद्रित करें , और उससे सम्बंधित ध्वनि की कल्पना करें जितनी अच्छी आप कर सकते हैं . उसे अपने शरीर में से होकर महसूस करने की कोशिश करें और उस सतह पर ध्वनि से एकदम गहरा भर लें (स्वयं को .). यह मैडिटेशन आपकी परोक्षश्रवण शक्ति को खोलेगा . (परोक्षश्रवण अर्थात आम श्रवण शक्ति से कहीं अधिक .)

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Post Thu Jan 21, 2016 9:26 am

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राजा एवं रानी मैडिटेशन / ध्यान

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अब , हम जानते हैं की आत्मा का एक पुरुष और स्त्री पहलू होता है . कारण की शत्रु हार्ट अर्थात अनाहत चक्र पर इतना बल देता है , वह कारण यह है की मूल रूप से अनाहत चक्र शक्तिहीन एवं अकर्मक है . यह एक जोड़नेवाला है और कुछ अधिक नहीं , एंटन लावै ने उसकी किताब "दि सैटेनिक रिचुअल्स " में "सेटन के सात मीनारों / खम्भो के बारे में लिखा है "

"इस पट्टी पर कुछ अंतरालों पर वहां सात मीनारें / खम्बे थे - सेटन के खम्बे / मीनारें (ज़िआरहस /Ziarahs) - उनमे से छह समलम्बाकार (चतोर्भुज के आकार के ) आकार में , और एक , लालेश पर्वत पर केंद्र , एक पैने बांसुरी के बिंदु के आकार का था "

यह ऊपर बताया एक दृष्टान्त अर्थात एलेगोरी है . (एलेगोरी का अर्थ वे दृष्टान्त जिनमे छुपा हुआ अर्थ रहता है .), यहाँ पर "केंद्र " हार्ट अर्थात अनाहत चक्र है , जो दूसरों से भिन्न आकार का है . गहरे मैडिटेशन में , हम में से बहुत से इस अलग चक्र को देख सकते हैं , जो की योनि (स्त्री गुप्तांग ) के आकार का होता है .

अब इनांना (Inanna) कोण है ? वह "स्वर्ग की रानी है ", "स्वर्ग/ हेवन (heaven) " का वास्तविक हरथ होता है छटवें और सातवें ऊपर के चक्र एवं उनके विस्तार जैसे की सर्व महत्वपूर्ण पीनियल ग्रंथि . जैसा की मैंने अपने पिछले उपदेश में ऊर्जा को फिक्स / ठीक करने के बारे में जो था .... , जैसा की आप जानते हैं वैलेंटाइन डे वाले दिल को जिसमे एक तीर होता है उस दिल में से होकर , यह भी हालाँकि एक एलेगोरी है और यह प्रतीक है सर्पेंटाइन अर्थात सर्प की ऊर्जा को फिक्स / ठीक करने का . हार्ट अर्थात दिल हमारी छाती में नहीं है जैसा की शत्रु कोशिश करता है की हम यह विश्वास करलें , परन्तु दिल हमारे सर में है और यह इडा(Ida), पिंगाला (pingala ) और सुषुम्ना (sushumna) का बना होता है , और यह नीचे उसका चित्र बतलाया गया है -
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जैसा की हम जानते हैं इनांना (Inanna) जिन्हे एस्टेरोथ (Astaroth) के रूप में भी जाना जाता है , ईश्तर (Ishtar) और उनके दूसरे बहुत से नाम हैं , वे हार्ट अर्थात अनाहत चक्र की स्वामिनी हैं . अनाहत चक्र सर में होता है , छाती में नहीं होता , क्यूंकि शत्रु ने इसे खंडित कर दिया है (इसीलिए ऐसा बताते हैं की दिल सीने में होता है ) और ईसाईयत कलाओं के साथ जहाँ यशु मसीह अर्थात नाज़रीन की भुजाएं हमेशा खुली होती हैं जहाँ पर वो चाहती पर हार्ट अर्थात अनाहत चक्र को दिखता है , यहाँ हम इस धोखे का एक अन्य बदसूरत पहलू देख सकते हैं . इसके अलावा , जो मैं व्यक्तिगत रूप से विश्वास करती हूँ की हमारी भावनाओं की कुर्सी सीने / छाती में नहीं होती (जिसे अज्ञानी 'अनाहत ' चक्र कहते हैं ), परन्तु भावनाओं की कुर्सी थ्रोट अर्थात विशुध्द चक्र (गले ) में होती है . आप कितनी बार दुखी महसूस करते हैं या रोने को आपका मन होता है , यह आपके विशुद्ध अर्थात थ्रोट चक्र पर ही प्रभाव डालता है ? आप गले में एक गांठ पड़ जाती है आपके रोने के पहले . तो हमारे भावनाओं की वास्तविक कुर्सी कहाँ है ? इसके अलावा , सेटन ने मुझे विशुद्ध चक्र के बारे / सम्बन्ध में बताया था , हाँ , यह मरकरी अर्थात बुध चक्र है जो संचार/संपर्क - व्यवस्ता का स्वामी है और उसका ऊँचा सप्टक गृह यूरेनस अर्थात अरुण गृह , यह ऊपर पीनियल ग्रंथि के पास में होता है और टेलीपैथिक अर्थात दूर संवेदन संचार का स्वामी है , दूर संवेदन मौखिक बातचीत का एक ऊँचा सप्टक है .


वे एलेगोरी जो बच्चों की परी वाली कहानिओं में संरक्षित हैं जैसे की "स्लीपिंग ब्यूटी ", इसमें अक्सर राजकुमार सोती हुई राजकुमारी को चूमता है उसे जगाने के लिए . इसके पीछे का अर्थ है - सोलर 666 [देवताओं / भगवानों के राजा ] का सक्रियण एवं सशक्तिकरण , यह छटवें चक्र के साथ जुड़ता है ; पीनियल ग्रंथि के साथ और इसकी सहायता से यह इस ग्रंथि को सक्रिय करता है की यह ग्रंथि अमृत निकाले जो अमरता को संभव बनती है और भौतिक / शारीरिक उम्र को पलट देती है . तिब्बती मन्त्र औम मणि पद्मे हौम का अर्थ होता है "नगीना कमल के दिल में है ," और "नगीना / (कीमती पत्थर) पीनियल ग्रंथि है यहाँ पर . " यह मन्त्र सही है इसके लिए . परन्तु शत्रु ने सर्व महत्वपूर्ण "औम "को "ओम" से बदल दिया . ओम में को वास्तविक शक्ति नहीं . जैसा की हम सब जानते हैं की कमल / लिली प्रतीकात्मक है सहस्रार अर्थात क्राउन चक्र का और लिलिथ इसकी स्वामिनी हैं ; मूलाधार अर्थात बेस चक्र के स्वामी सेटन हैं [यह चक्र सर्प को रखता है ] , और सेटन और लिलिथ का एकीकरण दर्शाता है उत्थित सर्पेंट / सर्प को ; पुरुष एवं स्त्री.

अब , मैडिटेशन अर्थात ध्यान के लिए जो राजा को अर्थात तीसरा सोलर 666 चक्र को एवं रानी को अर्थात छटवां चक्र और पीनियल ग्रंथि को जोड़ता है ; मैग्नम ओपुस को कार्य करने के लिए , राजा एवं रानी का एकीकरण होना चाहिए. लिलिथ ने मुझे बताया है की यह मैडिटेशन, अधिकतर मामलों में थोड़ा सा समय लेता है की एक ऊर्जा का संपर्क स्थापित हो जाये .

नोट - यह मैडिटेशन नए लोगों के लिए नहीं है .

इस मैडिटेशन में सेटेनिक माला का उपयोग किया जाता है . इस मैडिटेशन को करने के लिए एक व्यक्ति को चाहिए की वह १०८ बार कम्पन्न करे राजा के लिए और फिर दूसरे १०८ कम्पन्न करे रानी के लिए . १०८+१०८ = २१६ यह बहुत ही पवित्र नंबर / संख्या है .

राजा एवं रानी के एकीकरण के लिए -

1 .) कम्पन्न करें "RAUM / रौम " -- राह --ऊ-म्म्म्म (RAH—UU—MM) अपने सोलर चक्र में १०८ बार .

2 .) आराम दायक रहें और शांत /स्थिर रहें और इसकी ऊर्जा को महसूस करें आपके अंदर कुछ मिनिटों के लिए .

3 .) कम्पन्न करें "AUM / औम "-- आह-उ-मम्म ( AH—UU—MM) अपनी पीनियल ग्रंथि में १०८ बार . [इसे करने के पहले , आप अपनी पीनियल ग्रंथि का पता लगाने की कोशशि करें महसूस करने के माध्यम से . यह छटवें चकर से नीचे सीधे हाथ तरफ होती है या उसके आस-पास.इसकी अनुभूति एक खोखले के जैसे की होती है . आप जितना अच्छा कर सकते हैं उतना अच्छा करें . ]

4 .) आराम दायक रहें और स्थिर / शांत रहें और ऊर्जा को महसूस करें कुछ मिनिटों के लिए .

5 .) अब कम्पन्न करें "इनांना /Inanna " आपके छटवें चक्र में सात बार. यीईईई - नाह-नाह ( YEEE—NAH---NAH )

6 .) दस - पंद्रह और मिनिटों के लिए ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करें . अगर आपने अपनी पीनियल ग्रंथि को सक्रिय कर लिया है , तो आप उसे जान जायेंगे. यह आपको प्रचंड तीव्र परमानंद के साथ उड़ा देगा अर्थात आपको ऐसे परमानंद की अनुभूति होगी जो कहीं नहीं होती .

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Post Mon Jan 25, 2016 5:13 am

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औम ॐ

Source URL - http://hailtosatansvictory666.angelfire.com/AUM.html

आध्यात्मिक ज्ञान को भ्रष्ट कर दिया गया है , इसका एक ज़बरदस्त उदाहरण यह है की संस्कृत "औम ॐ (AUM)" को 'ओम /OHM' में भ्रष्ट कर दिया गया . यह बहुत सारी आम मुख्यधाराओं की किताबों एवं सूत्रों में किया गया है . इसे हमें आहह -ऊऊऊऊऊ -म्म्म्म्म ('AHH - UUUUU - MMMM' ) ऐसा उच्चारण किया जाना चाहिए न की ओह्ह -मम (OHHH - MM') !!! . यह "ओम /Ohm" एक जान बूझ कर किया गया खंडन / भ्रष्टाचार है ताकि शब्द में कोई अधिक आध्यात्मिक शक्ति न रहे . ["UUU /ऊऊऊ " का उच्चारण किया जाता है जैसा की शब्द " ट्यून " में .]

यहीं विज्ञानं आध्यात्मिकता के साथ मिलता है . विशेष धन्यवाद पंडित /पुजारिन ज़िल्दार (Zildaar) को जिन्ह्नोने इसे रौशनी में लाया ,.. इस सर्व महत्वपूर्ण ॐ औम के मामले को . ) रसायनशास्त्र में एलिमेंट्स के पीरियाडिक टेबल में AU (ए यू ) सोने के लिए खड़ा होता है / उसका चिन्न्ह है .मैग्नम ओपुस के कार्य चालन में एक पूरी तरह से सम्पूर्ण उत्थित / चढ़े हुए सर्पेंट के साथ साथ "बेस मेटल्स / आधार (मूल ) धातुओं " को सोने में बदलना होता है . ये "बेस मेटल्स " चक्रों के "मेटल्स" अर्थात धातु होते हैं . आप में से वे लोग जिन्होंने सेटन को आमने सामने देखा है , वे जानते हैं की सेटन की आभा अर्थात और सुनहरी अर्थात सोने के रंग की है . AU /ए यू का आभा के साथ लेना देना है .

औम ॐ मिस्री अर्थात इजिप्शियन भगवान "आमोन रा /AMON RA" भी हैं . आमोन को "भगवानों के महाराज " के रूप में जाना जाता है . जैसा की आप में से अधिकतर जानते हैं , कोड वर्ड - "भगवन / गोड्स (Gods) " का अर्थ होता है चक्र . सर्व महत्वपूर्ण "666" चक्र , जो की सोलर प्लेक्सस चक्र है , यह "किंग ऑफ़ गोड्स " अर्थात "भगवानों का महाराज /राजा " है . यहीं से यहूदिओं एवं ईसाईयों ने उनका 'आमीन / आमेन' चुराया , इस "औम ॐ" को 'आमेन /आमीन' में भ्रष्ट कर दिया . चूंकि , यहूदी / ईसाई बाइबिल यहूदी जादूगरी की किताब है , तो एक संपर्क को बनाया जाना था . इस पर अधिक जानकारी के लिए http://www.exposingchristianity.com पर जाएँ . साथ ही यह भी देखें - http://www.angelfire.com/dawn666blacksu ... urder.html


"औम ॐ" का अर्थ यह भी होता है - "सो मोट इट बी " अर्थात तो यह हो सकता है निश्चित ही . मैं हमेशा "औम ॐ" का कम्पन्न करती हूँ किसी भी कार्यचालन के बाद में जहाँ मैं एक सेटेनिक माला का उपयोग कर रही होती हूँ या अन्य किसी भी चीज़ के साथ जहाँ मैं संस्कृत का उपयोग कर रही होती हूँ. लगभग सभी आधुनिक युग की किताबें और आम अनुदेश जिनका सम्बन्ध मन्त्रों के साथ है वे कहते हैं की मन्त्र को शुरू करने के पहले "औम ॐ" का उपयोग करें . इसका उपयोग मन्त्र को शुरू करने के पहले एवं समाप्त करने पर , वास्तव में अधिक शक्तिशाली है ; किसी भी कार्यचालन के अंत में .


संस्कृत एक आध्यात्मिक भाषा है और जैसा की मैंने पहले बतलाया , मैंने हमारे बहुत सारे गोएशिया डीमॉन्स के नाम संस्कृत शब्दकोशों में पाये हैं . उनके नामों को संस्कृत में देखने पर , यह आपको आध्यात्मिक स्तर पर कहीं अधिक जानकारी देता है .भगवानों की किंवदंतीयां / उपाख्यान अर्थात लेजेंड्स ये सब सारी महत्वपूर्ण एलेगोरीज़ अर्थात (एलेगोरी का अर्थ वे दृष्टान्त जिनमे छुपा हुआ अर्थ रहता है .) हैं जो छुपा हुआ ज्ञान रखती हैं .

खूब सारी संख्याओं में दोहराना , जैसा की बहुत सारी आम मुख्यधाराओं के सूत्रों में बतलाया जाता है , की हमें मन्त्र को खूब अधिक संख्याओं में दोहराना है , यह ज़रूरी नहीं होता . कारण की वे आपसे कहते हैं की आप हज़ारों बार दोहराएं वह है .... खंडित / भ्रष्ट ज्ञान . सेटन हमें बताते हैं की मन्त्रों को कम्पन्न करना है उनके एक के बाद एक शब्दांश को कम्पन्न करते हुए . नए ज़माने के लोग और दूसरे बेवकूफ वे सिर्फ मन्त्रों के सभी शब्दों को दोहराते रहते हैं और उसे कम्पन्न नहीं करते हैं . शक्ति कम्पन्न में है . वहां आपको कोई ज़रुरत नहीं है की आप मन्त्रों या शक्ति के शब्दों को बार बार कई सौ से लेकर हज़ारों बार दोहराएं .

"औम ॐ" को देखा गया था प्राचीन पश्चिम की बहुत सारी रस-विधा/ गुप्त कलाओं के कार्यों में . अब शत्रु ने [हमेशा की तरह ] कलाओं और अर्थों को खंडित / भ्रष्ट कर दिया है . शत्रु ने बहुत भारी कष्ट उठायें है की वो इस "ए/A " को प्राचीन चित्रों से हटा दे और आधुनिक समय में , "औम ॐ/AUM" को "ओम /OHM" के साथ बदल दिया .

एक और चीज़ , लगभग सभी शब्द संस्कृत में के अक्षर "ए /A" पर समाप्त होते हैं . मेरे पास एक किताब है लय योग पर . [लययोग - दि डेफीनेटिव गाइड टू दि चक्रास एंड कुण्डलिनी - श्याम सुन्दर गोस्वामी ] , और लेखक ने सारे मूल पाठ में , अक्षर ए /A को तिरछे अक्षर में अर्थात इटैलिक में लिखा है , जैसे की यह कोई कोड है .

अब इस प्राचीन चित्र को देखें , इसे "हाईएरोग्लिफिका साक्रा " 1764 डायोनिसियस एंड्रेअस फ्रेहर के द्वारा , से लिया गया है , जो की जैकब बोह्म [ये ईसाई और मनीषी दोनों था ] को मानने वाला था , यह रूब किताब में भी है ; ए /A को शीर्ष क्षेत्र से हटा दिया जा चुका है .
मैं यह इसीलिए जानती हूँ क्यूंकि मैंने समान चित्र देखें हैं जहाँ ए /A बराबर लगा हुआ है , जैसा की नीचे चित्र में बतलाया गया है . वहां सिर्फ एम /M और यू/U हैं .

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एलेग्जेंडर रूब ने उसकी किताब - "अल्केमी एंड मिटीसिस्म " में लिखा [मैं नहीं जानती की वह जान-बूझकर झूठ बोल रहा है , या सिर्फ एक ऐसा व्यक्ति है जो भ्रष्ट जानकारी देता है ]; उसने इन दो चित्रों के लिए शीर्षक में लिखा -

" शुरुआती स्थिति दिखती है दिव्य त्रिमूर्ति का निवास स्थान जिसमे स्वर्गीय मेज़बान की लपटें शामिल हैं . वे प्रधान स्वर्गदूतों - माइकल एम /M और उरीअल यू /U के पदानुक्रम (स्वर्गदूतों का का वर्ग) में विभाजित हैं " तीसरा और सबसे ऊपर का खुला हुआ है , क्यूंकि उसके पहले का निवासी , यशु मसीह का प्रतिनिधि , ने बहुत बड़ा राज-द्रोह कर लिया है उसकी मनमानी से . लूसिफ़र उत्थित होते अर्थात ऊपर चढ़ते हैं , उनकी अभिमान युक्त मनमानी के द्वारा नीचे जाते हुए , परन्तु माइकल और उरिअल उन्हें आग में से होकर नीचे डाल देते हैं. "

यह एक ज़बरदस्त खंडन / भ्रष्टाचार है और इन पवित्र अक्षरों का उपयोग यहूदी गंदगी के प्रतिनिधित्व के लिए उपयोग करना ; यही कारण है की वह कोई भी जो विश्वास करता है की यह सच है और /या वो इन यहूदी एसईई ऊर्जाओं में बंधता है वह कभी भी आध्यात्मिक शक्ति में उन्नति नहीं करता . ऐसे मोहित लोग शत्रु के नियंत्रण में रहते हैं जब वे इस भ्रष्ट और अपवित्र जानकारी में खुद को बांधते हैं .

यहाँ एक दूसरा चित्र हैं जिसमे ए / A गायब है . ध्यान दें - इस चित्र का आकार बिलाएल /Belial की सिजिल (अर्थात प्राचीन प्रतीक जिनमे जादुई शक्ति होती है ) के बहुत समान है :

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बिलाएल /Belial

अन्य चित्रों को हिब्रू अक्षरों से भ्रष्ट किया गया है , और उन अन्य यहूदी प्रतीकों से भ्रष्ट किया गया है जो उनकी हर चीज़ की तरह चोरी के हैं . नाइन्थ गेट /Ninth Gate मूवी में , जो मेरी सबसे फेवरेट मूवी में से एक है , उस किताब में , वो चित्र जिनमे "एल सी ऍफ़ /लसफ" ये थे , ये वही थे जिनमे सटीक शुद्ध जानकारी है . हालाँकि भले ही यह मूवी एक उपन्यास / कल्पना थी , लेकिन वहां कुछ सत्य "हैं " इसमें . वह द्वार मार्ग जो की उस मेज़ / Maze (अर्थात भूल-भुलैया ) के अंत में जो था उसे ईंट लगा कर बंद कर दिया गया था एक चित्रण में , यह सन्देश देता है की सच्चाई का मार्ग बंद कर दिया गया था अर्थात उसे भ्रष्ट कर दिया गया था और वहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं है . इस मूवी को अवश्य देखें अगर आपने नहीं देखी है तो .उन्होंने एक सीन मिटा दिया था , बैरोनेस केस्लर एक जर्मन थीं और एक सेटनिस्ट थीं :

७६ केस्लर बिल्डिंग - ऑफिस ईंट / डे (दिन )

एक ब्लैक एंड वाइट फोटो स्क्रीन को भर देती है ; वह दिखाता है एक जवान और सुन्दर बैरोनेस केस्लर जो दो पुरुषों से घिरी हुई हैं ये पुरुष एसएस (SS) यूनिफार्म में हैं . उनमे से एक हेनरिक हिम्म्लर हैं .

बैरोनेस केस्लर भौं चढ़ाये हुए देख रही हैं एक युद्ध के समय के संख्या के "सिग्नल " पर , जो की नाज़ी प्रचार की पत्रिका है . यह उनकी डेस्क पर पड़ी हुई है और बलकन का लिफाफा उसके बाजू में रखा है .

वास्तविक लिपि के लिए देखें - sfy.ru/?script=ninth_gate

नाइन्थ गेट मूवी पर और अधिक जानकारी के लिए देखें - http://www.imdb.com/title/tt0142688/?ref_=sr_1

अब इन चित्रों को देखें - ...

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ए /A अभी भी तल पर है .


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दूसरी एक , जहाँ उन्होंने ए /A को नहीं मिटाया .


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और ... ध्यान दें ए /A पर जो मुकुट के नीचे है .


मैंने फ्रीमेसन /Freemason चित्रों पर भी औम ॐ को नोट किया है ; वे जिनमे आत्मा के खम्बे हैं . फ्रीमेसन का अर्थ उन लोगों से जो विस्तृत छुपे हुए समारोह करते हैं . शत्रु ने पहले भी और अब भी कार्य कर रहा है की आध्यात्मिक ज्ञान को हटाया जा सके , यह बहुत कठिन है की एक उदाहरण पाया जा सके यहाँ ऑनलाइन , मैंने कोशिश करने में कुछ समय व्यतीत किया . मैंने यह एक किताब में देखा . अगर आप अपनी स्वयं का अनुसन्धान करें , आप इसे या तो ऑनलाइन इंटरनेट पर या फिर किताबों में पा लेंगे .

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Post Mon Jan 25, 2016 8:35 am

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सेटन पर मैडिटेशन / ध्यान

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... Satan.html

हम में से बहुतों ने पिता सेटन की ऊर्जा को महसूस किया है . उनकी ऊर्जा शक्तिशाली है और वह हमें आत्मविश्वास एवं कभी कभी ज़िंदादिली की अनुभूति देती है . हम उनकी ऊर्जा पर मैडिटेशन कर सकते हैं और उसे हमारे जीवन में और अधिक शक्तिशाली बना सकते हैं . ऐसा करने से , हम सेटन के और करीब आ जाते हैं , इसके साथ हमारे सेटन के साथ सम्बन्ध /बंधन बहुत मज़बूत हो जाते हैं . अपनी साँसों को ताल / ले में लाएं या कुछ भी करें जो आप करते हैं रिलैक्स अर्थात आराम करने के लिए और अपने विचारों को बंद करने के लिए. उनकी ऊर्जा को महसूस करें की वह आपमें गुज़र रही है . आप उनकी सिजिल या उनके कोई भी प्रतीक का दृश्य बना / कल्पना कर सकते हैं . आप उनके चहरे का भी दृश्य बना / कल्पना कर सकते हैं अगर आपने उन्हें देखा है . इसे सबसे अच्छा एक अनुष्ठान के बाद करतें हैं जब हम उनकी ऊर्जा का आव्हान करते हैं .

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Post Mon Jan 25, 2016 12:57 pm

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एस्ट्रल प्रोजेक्शन अर्थात नाक्षत्रिक प्रक्षेपण हेतु मैडिटेशन / ध्यान

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... ction.html

एस्ट्रल प्रोजेक्शन अर्थात नाक्षत्रिक प्रक्षेपण में आपकी आत्मा वास्तव में आपका शरीर छोड़ देती है . यह दूरस्थ दर्शन से भिन्न होता हैं जिसमे आप एक समाधी की अवस्था में प्रवेश करते हैं स्वयं को एक विशेष जगह पर अपनी स्वयं की इच्छा (शक्ति ) के माध्यम से ले जाते हैं . नीचे बतलाये गए दो मेडिटेशन्स अर्थात ध्यान सिर्फ मूलभूत दिशानिर्देश हैं . मैं आपको सलाह देती हूँ की नीचे हमने पी डी ऍफ़ लिंक्स दी हैं , आप इंटरनेट पर उन्हें पढ़ लें .

मैडिटेशन एक

इस मैडिटेशन में विचत्र (अनुभूति ) होती है . इस बात को निश्चित कर लें की आप प्रक्षेपण करने के लिए गंभीर हैं , नहीं तो , किसी भी प्रकार का संकोच आपको आपके शरीर में रख सकता है . आपको आराम दायक रहना है , दोनों मानसिक एवं शारीरिक रूप से . पहले कुछ समय सबसे कठिन होते हैं . किसी भी अन्य चीज़ की तरह ही , अविरोधी बारम्बार अभ्यास इसे और सरल बना देगा , इससे आपको और अधिक गहरी समाधी की अवस्था में जाने के आवश्यकता नहीं होगी , पर आप स्वयं को अपनी इच्छा अनुसार किसी भी समय प्रक्षेपित कर सकेंगे . कुछ लोगों के लिए प्रक्षेपण सरल रहता है अन्य लोगों की अपेक्षा , क्यूंकि ऐसा उन्होंने अपने पिछले जीवनों में किया है .

1 .) एकदम आरामदायक हो जाएँ बिलकुल और एक समाधी की अवस्था में जाएँ . जब आप इतने आरामदायक हो जाएँ की आप अपने शरीर को और अधिक महसूस नहीं कर सकते , आप तैयार हो गए हैं .

2 .) दृश्य बनायें / कल्पना करें आपके एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक शरीर का आपके शारीरिक / भौतिक शरीर के अंदर में , जो वहां आपके सात चक्रों के द्वारा वहां पकड़ा / रखा हुआ है . चक्रों का दृश्य बनाया / कल्पना की जा सकती है रंगीन उभार / घुंडीओं के जैसे.

3 .) प्रत्येक घूमते हुए / स्पिन (spin) करते हुए चक्र को लें और उसे घूमने से रोकें और उसे एक चतुर्थांश / क्वार्टर मोड़ें उस दिशा के उलट में जिस (दिशा ) में वह घूम रहा अर्थात स्पिन कर रहा था , जैसे की हम एक दरवाज़े की घुंडी को घूमते हैं दरवाज़ा खोलने के लिए .

4 .) आराम करें और उसे जाने दें और बाहर निकलने की कोशिश करें .

मैडिटेशन दो

यह एक प्रारंभिक अभ्यास के जैसे है . यह हालाँकि उतना शक्तिशाली नहीं है जैसा की मैडिटेशन एक है , पर यह कम तीव्र हैं आपमें से उन लोगों के लिए जो बल्कि इसे क्रमशः करेंगे .

1 .) एकदम आरामदायक हो जाएँ बिलकुल और एक समाधी की अवस्था में जाएँ . इतना आराम दायक हो जाएँ की आपको ऐसा लगे की आप तैर रहे हों .

2 .) अब अपनी उलटी / बांयी एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक भुजा को ऊपर उठाएं . इसका दृश्य बनायें / कल्पना करें . आपको इसकी कल्पना करने की आवश्यकता होगी , परन्तु ऊर्जा वहीँ जाती है जहाँ उसे जाने के लिए निर्देशित किया जाता है .

3 .) अपनी बायीं एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक भुजा को उठायें और अपने चहरे को छुएं .

4 .) अपने दोनों एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक हाथों को इक्कठा / साथ में छुएं .

5 .) यही अपने प्रत्येक पैर एवं पद (फुट /foot) के साथ करें .

6 .) कल्पना करें आपका सम्पूर्ण एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक शरीर आपके भौतिक / शारीरिक शरीर के ऊपर तैर रहा है , या कमरे में कहीं और (तैर रहा है ) और एकाग्रित करें / ध्यान केंद्रित करें वहां रहने पर . सिर्फ वहां लेट जाएँ और इस पर कुछ समय के लिए ध्यान केंद्रित करें .

इस व्यायाम को अक्सर दोहराते रहें और अंततः . नाक्षत्रिक प्रक्षेपण अर्थात एस्ट्रल प्रोजेक्शन में आपको सफलता मिल जाएगी .

और गहरी जानकारी के लिए -

ट्रीटिस ऑन एस्ट्रल प्रोजेक्शन बी रोबर्ट ब्रूस - पीडीएफ - http://www.itajos.com/x%20sezione%20med ... 0Bruce.pdf

सी आई ए रिमोट व्यूइंग मैन्युअल - पीडीएफ - http://eridu666.webs.com/CIA%20Remote%2 ... Manual.pdf

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Post Tue Jan 26, 2016 3:48 am

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एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक चेतना का विलय

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... sness.html

* जब आपने एक मानव या जानवर का विलय कर लिया हो , तो इस बात को समझ लें की आपको अपनी आभा अर्थात औरा एवं चक्रों को सर्वथा साफ़ करना है अच्छे से क्यूंकि उनके विचार और विश्वास आप पर उनकी छवि छोड़ सकते हैं. हमेशा एक स्वस्थ जीव को चुने जब आप इसमें नए हों , भले ही वो कोई पौधा या एक मानव हो .

मैडिटेशन एक

1 .) एक वास्तु को चुने यह एक क्रिस्टल अर्थात माणभ हो सकता है , या एक टेबल - या आपके कमरे में और कुछ भी . नए लोगों को एक ऐसी वास्तु के साथ शुरू करना चाहिए जो सिर्फ एक मटेरियल / पदार्थ की बनी है , जैसे की एक चट्टान या एक खेलने वाला पासा .

2 .) आराम दायक हो जाएँ और एक समाधी की अवस्था में जाएँ .

3 .) एक या दो मिनिट के लिए वस्तु को देखें आपके सामने है और फिर अपनी आँखें बंद कर लें . दृश्य बनायें / कल्पना करें उस वस्तु का .

4 .) अब उस वस्तु को बड़ा करें इतना की आप उस पर चल सकें अपने मन में और उसमे प्रवेश करें .

5 .) एक हो जाएँ उस वस्तु के साथ और अपने एस्ट्रल अर्थात नाक्षत्रिक चेतना / बुद्धि / समझ को खोलें . आप क्या देखते , सुनते , सूंघते , महसूस करते हैं ? क्या वह ठंडा या गरम है अंदर ? आपको क्या अनुभूतियाँ महसूस होती हैं ? अगर वस्तु एक टेबल या किसी ठोस सतह पर है , तो उस सतह को *महसूस * करें .

मैडिटेशन दो

जैसा ऊपर बताया गया है वैसा ही करें , सिर्फ इस बार आपको एक पौधे का उपयोग करना है . यह एक पेड़ या सिर्फ एक घांस की पत्ती / तिनका हो सकता है . अगर आपके पास घर में कोई पौधे नहीं है , तो आप इस व्यायाम को घर के बाहर कर सकते हैं . यह महत्वपूर्ण है की पौधा जीवित हो .

पौधे के व्यायाम के साथ , *महसूस * करें पृथ्वी / धरती को पौधे की जड़ों में से होकर . अगर वह पौधा बाहर है , तो यह दूसरे पौधे जो उस पौधे के चारों तरफ हैं , इसके सम्बन्ध में यह पौधा कैसा महसूस होता है ?

मैडिटेशन तीन

अब , वैसा ही करें जैसा आपने ऊपर किया था , परन्तु इस बार आपको एक जानवर के साथ विलय करना है . आप जानवर की कल्पन कर सकते / दृश्य बना सकते हैं अगर आप किसी जानवर के पास नहीं हैं . अगर आपके पास कोई पालतू जानवर है , तो आपके पालतू जानवरों में से कोई एक को चुने और अपने पालतू जानवर के साथ स्वयं को विलय करें . उसकी आँखों में से देखें , उसके कानों में से सुने ; महसूस करें फर्श या ज़मीन को उसके पंजों के नीचे . आपको अपने पालतू जानवर का शरीर कैसा महसूस होता है ? क्या आपका पालतू जानवर गरम है ? ठंडा ? भूखा ? आपका पालतू जानवर वातावरण में क्या सूंघता है ? उसकी नाक का उपयोग करें . आपके पालतू जानवर के मन में क्या है ? जानवर दृष्टिगोचर / नज़र अर्थात विज़न (vision) में सोचते हैं .

मैडिटेशन चार

अब जैसा आपने ऊपर किया है , वैसा एक व्यक्ति के साथ करें जिसे आप जानते हैं . आप एक विभिन्न व्यक्ति चुन सकते हैं हर दिन के लिए . उनके मन से सोचें .

ऊपर दिए हुए व्यायाम क्या करते हैं -

बहुत कुछ . वे *अत्यंत * महत्वपूर्ण हैं . जब आप इनमे निपुण हो जाते हैं , तो ये व्यायाम आपको सामर्थ्य / कौशल देंगे की आप -

* आकार परिवर्तन कर सकते हैं .
* जानवरों के साथ बात चीत / संपर्क कर सकते हैं .
* दूसरों के मन में विचार दाल सकते हैं और यहाँ तक उनको पोसेस (possess) अर्थात उन पर कब्ज़ा भी कर सकते हैं .
* बिजिली की सामग्री एवं उपकरणों को ठीक कर सकते हैं - आपको उनमे विलय करने में समस्या हो सकती है .
* इंसानों एवं जानवरों में बीमारी का निदान कर सकते / पता लगा सकते हैं .
* विद्यार्थी इसका उपयोग अपने शिक्षकों के साथ विलय होने के लिए आकर सकते हैं ताकि वे उन प्रश्नों का पता लगा सकें जो एक महत्वपूर्ण परीक्षा में पूछे जायेंगे .

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“It is necessary that I should die for my people; but my spirit shall rise from the grave, and the world will know that I was right.” -Adolf Hitler.
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Post Wed Jan 27, 2016 12:08 pm

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नेक्रोनोमिकोन मेडिटेशन्स / ध्यान

SOURCE URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... tions.html

सर्वाधिक प्रभाव के लिए , नेक्रोनोमिकोन मेडिटेशन्स को ग्रहों के अनुसार किया जाना चाहिए . दिनांक एवं समय कुछ मेडिटेशन्स के नीचे दिए गए हैं वे ग्रीनविच स्टैण्डर्ड टाइम अर्थात विश्वव्यापी (स्वीकार ) समय में दिए गए हैं . ये मेडिटेशन्स १५८६ कॉपी ऑफ़ दि नेक्रोनोमिकोन से लिए गए हैं . इस पर अधिक जानकारी के लिए देखें - http://booksforsatanspeople.files.wordp ... hn-dee.pdf

नेक्रोनोमिकोन की सत्यता के सम्बन्ध में एक पूरा लेख आगे बताया गया है . जब इन मेडिटेशन्स के साथ हम कार्य कर रहे होते हैं , तो आप पाएंगे की नेक्रोनोमिकों बहुत ही वास्तविक एवं बहुत शक्तिशाली है . ये शीर्षक "नेक्रोनोमिकोन / Necronomicon" का अनुवाद होता है - "मृत नामों की किताब " . यह एक नेक्रोमेंसी /Necromancy की किताब नहीं हैं . केवल वे लोग जिन्होंने आरम्भ नहीं किया है अर्थात जो नए हैं वे ऐसा विश्वास करते हैं , या बदतर देखा जाये तो , सम्पूर्ण बेवकूफ विश्वास करते हैं की यह एक "कल्पना मात्र " है , परन्तु वास्तव में , यह एक गरिमोएर अर्थात जादूगरी एवं आव्हान करने वाली किताब है जिसमे अनुदेश / निर्देश बताये गए हैं आत्मा को खोलने के लिए कम्पन्नों [नाम ] को उपयोग करने के द्वारा. ये नाम "मृत " हैं इस अर्थ में की वे हज़ारों सालों से उपयोग नहीं किये गए , विशेषकर जबसे ईसाईयत एवं इस्लाम के झूठे कार्यक्रम आये हैं . चक्रों को खोलने की बहुत सारी मुख्यधारा एवं आम विधिओं से अलग , जो अनुदेश देती हैं की हमें बेस अर्थात मूलाधार से ऊपर की और करना है [जो की अत्यधिक बेवकूफी से भरा एवं बहुत खतरनाक है ], यह छोटी किताब बहुत ही सटीक शुद्ध एवं सुरक्षित तरीके / विधियां बतलाती है और ये बहुत ही उत्तम एवं विस्तृत हैं की हम हमारे चक्रों को उनके ग्रहों के सम्बन्ध में जो उन चक्रों के स्वामी हैं , एवं उनके इष्टतम/ सर्वोत्तम समय में खोलना सिखाती हैं .

नेक्रोनोमिकोन मैडिटेशन तीसरी आँख को खोलने के लिए -

नीचे दिया हुआ मैडिटेशन एक शक्तिशाली वैक्सिंग सम्पूर्ण चन्द्रमा पर करना चाहिए . सम्पूर्ण चन्द्रमा अर्थात पूर्णिमा में . नोट - जब चन्द्रमा नए से सम्पूर्ण की ओर जा रहा है और सरल शब्दों में जब चन्द्रमा अपनी रौशनी में बढ़ता है तो उसे वैक्सिंग या वैक्स चन्द्रमा कहते हैं . चन्द्रमा को दुर्बल नहीं होना चाहिए या उसके क्षति के चिंन्हों में जैसे की कैप्रीकॉर्न अर्थात मकर राशि एवं गिरावट की चिंन्ह जैसे की स्कार्पियो अर्थात वृश्चक राशि में नहीं होना चाहिए. यह मैडिटेशन सर्वाधिक शक्तिशाली होता है जब इसे एक शक्तिशाली फुल मून अर्थात पूर्णिमा में किया जाये , जब चन्द्रमा अपने गृह चिंन्ह कैंसर अर्थात कर्क राशि में हो या जब वह टॉरस अर्थात वृषभ के ऊँचे / गौरवान्वित स्थान में हो , नहीं तो , आप अपना समय बर्बाद कर रहे होंगे . प्राचीन (अर्थात पूर्वज ) जानते थे धैर्य (के महत्व) को शक्ति के मामलों में .
इस मैडिटेशन को रात को किया जाना चाहिए विशेषतः पूर्ण चन्द्र (अर्थात पूर्णिमा )की ठीक रौशनी के नीचे .

1 .) शांत बैठ जाएँ और अपनी तीसरी आँख पर ध्यान केंद्रित करें .

2 .) सांस को अंदर लें और सांस को बाहर छोड़ने पर गुंजन करें नन्ना / Nanna - न-न-न-न-न-न-न-न-आह-आह-आह-न-न-न-न-न-न-न-न-आह-आह-आह (N-N-N-N-N-N-N-N-AH-AH-AH-N-N-N-N-N-N-N-N-AH-AH-AH )

3 .) यह अति महत्वपूर्ण है की आप गुंजन को महसूस करें अपनी तीसरी आँख में और ताल को उसी प्रकार से एडजस्ट /समायोजित करें .

4 .) अपनी साँसों पर ज़ोर ना दें . आप चाहें तो आप एक्स्ट्रा (और अधिक ) साँसे ले सकते हैं गुँजनों के बीच में .

5 .) ऐसा तीस बार करें .

6 .) दृश्य बांयें / कल्पना करें आपकी तीसरी आँख का की आपकी तीसरी आँख चांदी की रौशनी के साथ प्रक्षेपित /पेश हो रही है. तीसरी आँख का रंग होता है सिल्वर अर्थात चांदी .

स्टेप्स एक से छह तक सब एक साथ एक ही समय में किये जाने चाहिए , एक ही स्टेप के रूप में .

7 .) जब आपने कम्पन्न कर लिया हो , तो कुछ मिनिटों के लिए सिजिल (प्राचीन जादुई शक्ति वाले प्रतीक ) पर मैडिटेशन करें .

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नेक्रोनोमिकोन थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र मैडिटेशन

इस मैडिटेशन को करने का प्रयास न करें जब तक आपने पहली ही इस कार्यक्रम का उपयोग अपनी तीसरी आँख पर नहीं किया हो . इसे नीचे दी गयी कोई भी दिनांकों में किया जाना चाहिए . मरकरी अर्थात बुध शक्तिशाली होना चाहिए अन्यथा आप सर अपना समय बर्बाद कर रहे होंगे . बुध को उसके गृह चिन्हों में जो हैं या तो जैमिनी अर्थात मिथुन राशि या विर्गो अर्थात कन्या राशि में होना चाहिए या उसे एक्वेरियस अर्थात कुंभ राशि के ऊँचे / गौरवान्वित चिंन्ह पर होना चाहिए. इस कभी भी नहीं करना है जब मरकरी अर्थात बुध पतित (समय ) में है , या वह सेगीटेरीअस अर्थात धनुराशि , पीसेस अर्थात मीन राशि या लियो अर्थात सिंह राशि में हो .

स्टेप्स जिनको साथ करना है एक ही समय पर वे हैं -

1 .) अपने हाथों को मोड़ लें , परन्तु सिरे पर अपनी छोटी उंगलिओं (कनिष्ठा) को विस्तृत करें / बढ़ाएं और उनको जोड़ें , पूरा नीचे , छोटी उँगलियाँ (कनिष्ठा) एवं आपकी हथेलिओं के बुध पर्वत अच्छे से ठोसपन के साथ जुड़े होने चाहिए.

2 .) ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें अपने विशुद्ध अर्थात थ्रोट चक्र पर और कल्पना करें / दृश्य बनायें उसका की आपका विशुद्ध चक्र एक घूमता हुआ नीला भंवर है.

3 .) पूर्ण चन्द्रमा (पूर्णिमा ) से ऊर्जा को सीठे अपने विशुद्ध चक्र में सांस में अंदर लें .

4 .) सांस को बाहर छोड़ते समय गुंजन / कम्पन्न करें "नेबो "(Nebo)

न-न-न-न-ऍह-ऍह-ऍह-ऍह-बी-बी-बी-बी-ओह-ओह-ओह-ओह (N-N-N-N-EH-EH-EH-EH-B-B-B-B-OH-OH-OH-OH )

इसे बारह बार कम्पन्न करें , अपने विशुद्ध अर्थात थ्रोट चक्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए और हाथों में मुद्रा बनाये रखते हुए . इस मैडिटेशन को पूर्ण वैक्सिंग मून पर करना है जब बुध सर्वाधिक शक्तिशाली है .वैक्सिंग मून का अर्थ ऊपर बतलाया जा चुका है .

5 .) जब आपने कम्पन्न कर लिया हो तब आप कुछ मिनिटों के लिए सिजिल पर मैडिटेशन करें .

परिवर्तन - मुझे अधिक सफलता मिली जब मैं ने "निन्नगिज़हीद्दा (NINNGHIZHIDDA)" को कम्पन्न किया . थोथ /THOTH [निन्नगिज़हीद्दा (NINNGHIZHIDDA)] विशुद्ध अर्थात थ्रोट चक्र के स्वामी हैं . थ्रोट चक्र संपर्क / बातचीत अर्थात कम्युनिकेशन का चक्र है .
आपको जैसा अच्छा लगा आप उसका प्रयोग करें . यह मेरी सलाह मात्र है .

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नेक्रोनोमिकोन हार्ट अर्थात अनाहत चक्र मैडिटेशन

इस मैडिटेशन को करने का प्रयास न करें जब तक आप पहले से ही कार्यक्रम में है और आपने इसका उपयोग आपने अन्य चक्रों के लिए [तीसरी आँख , विशुद्ध ] के लिए कर लिया हो .

मुख्य/ प्राथमिक मैडिटेशन -
मुख्य / प्राथमक मैडिटेशन को तब करें जब वीनस अर्थात शुक्र शक्तिशाली है . शुक्र शक्तिशाली तब होता है जब वह उसके गृह चिंन्हों में होता है जो की टॉरस अर्थात वृषभ एवं लिब्रा अर्थात तुला में हो , या वह पीसेस अर्थात मीन राशि में ऊँचे / गौरवान्वित स्थान में हो .

1 .) अपने हार्ट अर्थात अनाहत चक्र पर ध्यान केंद्रित करें .

2 .) शक्ति को अंदर सांस में लें और कल्पना करें / दृश्य बनायें ऊर्जा का की वह उज्ज्वलित / प्रज्वल्लित हो रही है सफ़ेद प्रकाश के साथ . "उसका रंग अत्यंत शुद्ध सफ़ेद होता है. "

3 .) सांस को बाहर छोड़ने पर , अपने सर को गिराएं ताकि आप कम्पन्न को अपने अनाहत चक्र में महसूस कर सकते हैं , उसे टाइट (ज़ोर से ) नहीं गिरना है , सिर्फ रख देना है और कम्पन्न करें / गुंजन करें - इनांना (Inanna) - ई-ई-ई-ई-ई-ई-न-न-न-न-आह-आह-आह-आह[एक बार में इस बड़े आह को कम्पन्न करें ]--न-न-न-न-आह-आह-आह-आह [एक बार में इस बड़े आह को कम्पन्न करें ]-ह-ह-ह-ह-ह-ह" ( “E-E-E-E-E-E-N-N-N-N-A-A-A-A-A-H-H-H-H-H-N-N-N-N-N-A-A-A-A-H-H-H-H-H.” )

4 .) इसे ठीक पंद्रह बार करें .

जब आपने ऊपर बतलाये मुख्य मैडिटेशन को कर लिया तो फिर आप इस सिजिल पर कुछ मिनिटों के लिए मैडिटेशन करें .

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अतिरिक्त मैडिटेशन : इस मैडिटेशन को करने की दो स्टेप्स होती हैं ,चूंकि यह चक्र एक हटने वाला अर्थात स्टेपिंग ऑफ बिंदु है और एक कनेक्टर अर्थात जोड़ने वाला है ऊँचे और निचले चक्रों को और इसका प्रतीक है यह - पानी का आग में विलय - यह प्रतीक है इस चक्र का और इसका मूल रूप से रियून है गेबो /GEBO . एस्टेरोथ / इनांना इस चक्र की स्वामिनी हैं .

1 .) बाहर जाएँ पूर्ण चन्द्रमा के नीचे जब वह सबसे अधिक चमकदार हो [विशेषतः ].

2 .) सांस को अंदर लेते समय , अंदर सांस में लें और कल्पना करें / दृश्य बनायें की चन्द्रमा से चमकदार चांदी के रंग की तरल /द्रव्य ऊर्जा का जो आपके अनाहत अर्थात हार्ट चक्र में जा रही है और उसे मेधावी चमकदार बना रही है . यह ऊर्जा एक तरल पारे की तरह दिखती है और चन्द्रमा से की एक धारा (के रूप) में है .

3 .) सांस को बाहर छोड़ने पर , अपना सिर गिरा दें ताकि आप कम्पन्न को अपने अनाहत चक्र में महसूस कर सकें , परन्तु उसे टाइट अर्थात ज़ोर से नहीं गिरना है सिर्फ रख देना है और कम्पन्न करें इनांना /inanna - ई-ई-ई-ई-ई-ई--न-न-न-न-आह-आह-आह-आह [एक बार में इस बड़े आह को कम्पन्न करें ]--न-न-न-न-आह-आह-आह-आह- [एक बार में इस बड़े आह को कम्पन्न करें ]- ह-ह-ह-ह-ह-ह" (“E-E-E-E-E-E-N-N-N-N-A-A-A-A-A-H-H-H-H-H-H-N-N-N-N-N-A-A-A-A-H-H-H-H.”)

4 . इसे ठीक पंद्रह बार करें .

फिर एकदम अगले दिन , सूर्य के नीचे जाएँ , और ठीक वैसा ही करें जैसा ऊपर किया था , इस बार आपको परन्तु तरल / द्रव्य सुनहरी अर्थात सोने के रंग की ऊर्जा का उपयोग करना है :

1 .) बाहर जाएँ सूर्य के नीचे जब वह सर्वाधिक मेधावी चमकदार हो [विशेषतः ].

2 .) सांस को अंदर लेते साया , सांस को अंदर लें और कल्पना करें / दृश्य बनायें की सूर्य से तरल सुनहरी अर्थात सोने के रंग की ऊर्जा आपके अनाहत अर्थात हार्ट चक्र में जा रही है और उसे चमकदार मेधावी बना रही है जैसे की सफ़ेद - सुन्हेरा .

3 .) सांस को बाहर छोड़ते समय अपने सिर को नीचे गिरा लें ताकि आप कम्पन्न को महसूस कर सकें अपने हार्ट चक्र में , उसे टाइट अर्थात ज़ोर से नहीं गिराएं , सिर्फ रख दें और कम्पन्न / गुंजन करें इनांना /Inanna

ई-ई-ई-ई-ई-ई--न-न-न-न-आह-आह-आह-आह [एक बार में इस बड़े आह को कम्पन्न करें ]--न-न-न-न-आह-आह-आह-आह- [एक बार में इस बड़े आह को कम्पन्न करें ]- ह-ह-ह-ह-ह-ह" (“E-E-E-E-E-E-N-N-N-N-A-A-A-A-A-H-H-H-H-H-H-N-N-N-N-N-A-A-A-A-H-H-H-H.”)

4 .) इसे ठीक पंद्रह बार करें .


नेक्रोनोमिकोन मणिपूर अर्थात सोलर चक्र मैडिटेशन

इस मैडिटेशन को करने का प्रयास न करें जब तक आप पहले ही कार्यक्रम में हैं और आपने इसका उपयोग अन्य चक्रों को खोलने के लिए कर लिया है [तीसरी आँख , विशुद्ध एवं अनाहत ].

इस मैडिटेशन को दिन के दौरान किया जाना चाहिए विशेषतः ठीक सूर्य के नीचे सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे के बीच जब सूर्य उसकी सर्वाधिक शक्ति पर होता है . सूर्य उसकी सर्वाधिक शक्ति पर तब होता है जब वह उसके गृह चिंन्ह लियो अर्थात सिंह में हो या वो उसके ऊँचे / गौरवान्वित स्थान में हो एरीज अर्थात मेष राशि में . यहाँ पर सिर्फ एकमात्र अन्य अपवाद है समर सोल्स्टिस (Summer Solstice) जब सूर्य कैंसर अर्थात कर्क राशि के शून्य डिग्री में प्रवेश करता है .कभी भी इस मैडिटेशन को ना करें जब सूर्य लिब्रा अर्थात तुला राशि में हो या एक्वेरियस अर्थात कुंभ राशि में हो .

1 .) अपने हाथों को मोड़ लें . अब सिर्फ अपनी अनामिका अर्थात रिंग फिंगर को सीधा करें ताकि वे छु रही हों . आपकी अन्य उंगलियां मुड़ी हुई रहनी चाहिए .

2 .) अपने सोलर प्लेक्सस अर्थात सोलर चक्र / मणिपूर पर ध्यान केंद्रित करें और दृश्य बनायें / कल्पना करें की वह घूम रहा है . इस बाद को निश्चित कर लें की वह ठीक से संरेखित है ,.. अर्थात ऊपर की ओर नोक किये हुए है .

3 .) सूर्य से ऊर्जा को अपने सोलर चक्र में अंदर सांस लें .

4 .) सांस को बाहर छोड़ने पर , अपना सिर को गिरा लें ताकि आप कम्पन्न को महसूस कर सकते हैं अपने सोलर चक्र में ओर कम्पन्न करें "शमाश /Shamash". श-श-श[एक बार में बड़ा श कम्पन्न करना है ]-ह-ह-आह-आह-आह--आह [यहाँ एक बार में बड़ा आह कम्पन्न करें ] -म-म-म-म-म [यहाँ एक बार में लम्बा म कम्पन्न होगा ]-आह-आह-आह-आह-[फिर से एक बार में बड़ा आह ] -श-श-श-श " (S-S-H-H-H-H-H-AH-AH-AH-AH-M-M-M-M-M-AH-AH-AH-AH-S-S-H-H-H-H )

5 .) ऊपर बतलाया हुआ कम्पन्न सांस को बाहर लेते एवं छोड़ते हुए बीस बार करें .

जब आपने ऊपर बतलाया मैडिटेशन कर लिया हो , तो इस सिजिल पर कुछ मिनिटों के लिए मैडिटेशन करें .

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2013
मार्च
सूर्य एरीज अर्थात मेष राशि में ऊँचे / गौरवान्वित स्थान पर है बीस मार्च सुबह ग्यारह बजकर तीन मिनिट से लेकर अप्रैल उन्नीस रात दस बजकर चौबीस मिनिट तक .

जुलाई
सूर्य गृह पर है लियो अर्थात सिंह राशि में बाईस जुलाई दोपहर तीन बजकर सातवां मिनिट से लेकर बाईस अगस्त रात ग्यारह बजकर तीन मिनिट तक .

नेक्रोनोमिकोन स्वाधिष्ठान चक्र अर्थात सेक्रल चक्र मैडिटेशन

इस मैडिटेशन को करने का प्रयास न करें जब तक आप पहले सी ही कार्यक्रम में है ओर आपने उसका उपयोग अन्य चक्रों को खोलने के लिए कर लिया हो [तीसरी आँख , विशुद्ध , अनाहत , एवं मणिपूर चक्र ]

इस मैडिटेशन को रात में किया जाना चाहिए , जब मार्स अर्थात मंगल सर्वाधिक शक्तिशाली होता है . मंगल शक्तिशाली होता है जब वह उसके गृह चिंन्ह एरीज अर्थात मेष राशि में हैं , जब वह उसके सह सत्तारूढ़ / स्वामी चिन्ह स्कार्पियो अर्थात वृश्चिक में हो , या जब वह उसके ऊँचे / गौरवान्वित चिन्ह (स्थान )में हो कैप्रीकॉर्न अर्थात मकर राशि के . इस मैडिटेशन को कभी भी नहीं करें जब मंगल पतित (समय ) में हो , या लिब्रा अर्थात तुला राशि , टॉरस अर्थात वृषभ राशि या कैंसर अर्थात कर्क राशि के चिन्हों में हो . अपना स्थानीय समय देखें ताकि आप ठीक सही गृह सम्बन्धी मार्गरेखा जान सकें .

1 .) अपने सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र पर ध्यान केंद्रित करें . इस चक्र में ऊर्जा को सांस के साथ अंदर लें ओर सांस को बाहर छोड़ने पर , अपने सिर को गिराएं ताकि आप कम्पन्न को अपने सोलर चक्र में महसूस कर सकें ओर कम्पन्न करें - "नेरगल/NERGAL" "न-न-न-ऍ-ऍ-र-र-र(र को लुढ़काना है ) ग-ग-ग-ग-ऍ-ऍ-ल-ल-ल" (N-N-N-AY-AY-R-R-R-G-G-G-AY-AY-L-L-L)

2 . ऊपर बतलाया हुआ आठ बार करें .

जब आपने यह मैडिटेशन कर लिया हो तो इस सिजिल पर मैडिटेशन करें कुछ मिनिटों के लिए .

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नवंबर : मंगल कैप्रीकॉर्न अर्थात मकर राशि के ऊँचे / गौरवान्वित स्थान में है सत्रह नवम्बर रात दो बजकर छत्तीस मिनिट (अर्थात सुबह के 02:36 am ) से लेकर दिसंबर छब्बीस रात के बारह बजकर अड़तालीस मिनिट तक (अर्थात सुबह के 00:48 am ) तक

2013 मार्च : मंगल अर्थात मार्स उसके गृह चिन्ह में है एरीज अर्थात मेष राशि के बारह मार्च सुबह छह बजकर सत्ताईस मिनिट से लेकर अप्रैल बीस सुबह ग्यारह बजकर उनचास मिनिट तक .


नेक्रोनोमिकोन सहस्रार अर्थात क्राउन चक्र मैडिटेशन

इस मैडिटेशन को किया जाना चाहिए जब जुपिटर अर्थात बृहस्पति शक्तिशाली हो . बृहस्पति उसकी सर्वाधिक शक्ति पर तब होता है जब वह उसके गृह चिंन्ह सेगीटेरीअस अर्थात धनुराशि में हो , उसके सह सत्तारूढ़ / स्वामी चिन्ह पीसेस अर्थात मीन राशि में है , या वह कैंसर अर्थात कर राशि के ऊँचे / गौरवान्वित चिन्ह (स्थान ) में हो . इस मैडिटेशन को कभी भी नहीं करना है जब बृहस्पति पतित (समय ) में है , या वह जैमिनी अर्थात मिथुन राशि , विर्गो अर्थात कन्या राशि या , कैप्रीकॉर्न अर्थात मकर राशि में है .

इस मैडिटेशन को करने का प्रयास न करें जब तक आप पहले सी ही कार्यक्रम में हैं और आपने इस कार्यक्रम का उपयोग अन्य चक्रों के लिए नहीं कर लिया है [तीसरी आँख , विशुद्ध , अनाहत , मणिपूर एवं स्वाधिष्ठान चक्र ].

1 .) अपने क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र पर ध्यान केंद्रित करें . ऊर्जा को अंदर सांसलें इस चक्र में और सांस को बाहर छोड़ने पर कम्पन्न करें " मरडुक /MARDUK" म-म-म-आह-आह-र-र-र(र को लुढ़काना है )- थ-थ-थ-ऊ-ऊ-ऊ--क-क-क. क कण्ठस्थ है अर्थात कंठ से उच्चारण किया जाता है इसका और इसकी ध्वनि एक कोमल खुश्की की सी होती है गले के पीछे .

2 .) ऊपर बतलाया हुआ दस बार करें .

जब आपने ऊपर बतलाया हुआ मैडिटेशन कर लिया है , आप इस सिजिल पर कुछ मिनिटों के लिए मैडिटेशन करें .

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2013 - 2014 जून :
जून छब्बीस रात एक बजकर इकतालीस मिनिट अर्थात (सुबह के 01:41 am) से ;एलआर सोलह जुलाई दो हज़ार चौदह , जुपिटर अर्थात बृहस्पति ऊँचे / गौरवान्वित स्थान में है .

नेक्रोनोमिकोन मूलाधार अर्थात बेस चक्र मैडिटेशन

इस मैडिटेशन को कभी भी नहीं करना है जब सैटर्न अर्थात शनि पतित (समय) में है, या वह एरीज अर्थात मेष राशि , लियो अर्थात सिंह राशि , या कैंसर अर्थात कर्क राशि में है .

इस मैडिटेशन को करने का प्रयास तब तक ना करें जब तक आप पहले से ही कार्यक्रम में है और आपने उसका उपयोग अन्य चक्रों के लिए कर लिया है [[तीसरी आँख , विशुद्ध , अनाहत , मणिपूर स्वाधिष्ठान एवं सहस्रार चक्र ]

1 .) ध्यान केंद्रित करें अपने मूलाधार चक्र पर . ऊर्जा को अंदर सांस लें इस चक्र में और सांस को बाहर छोड़ने के समय अपनी ठोड़ी को अपनी छाती /सीने पर गिरा लें और कम्पन्न करें "निनिब /NINIB" "न-न-न-न-ई-ई-ई-ई-न-न-न-ई-ई-ई-ब-ब-ब-ब-" "N-N-N-N-E-E-E-E-N-N-N-E-E-E-B-B-B- "

2 .) ऊपर बतलाया हुआ चार बार करें .

जब आपने यह मैडिटेशन कर लिया है तो फिर मैडिटेशन के बाद आप इस सिजिल पर कुछ मिनिटों के लिए मैडिटेशन करें

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Post Thu Jan 28, 2016 11:56 am

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दि नेक्रोनोमिकोन

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... micon.html

मैं यह बहुत सारी पोस्ट्स जिनका नेक्रोनोमिकोन की सत्यता से लेना देना है जो की जॉय ऑफ़ सेटन ई - ग्रुप्स में पूछी गयी थी उनके उत्तर में लिख रही हूँ .


बहुत सारे लोग वही विश्वास करते हैं जैसा उन्हें कहा जाता है या वे जो कुछ भी पढ़ते हैं वे उसे तथ्य के रूप में ले लेते हैं . यह वह है जिसे हम कहते हैं "मस्तिष्क का भगवान वाला हिस्सा ". गुलामी प्रवृत्ति एवं अन्य से निर्देश लेने की ज़रुरत जिसे हम कहते हैं "प्राधिकारी " अर्थात अथॉरिटी. मैं जानती हूँ नेक्रोनोमिकोन के बारे में अधिक बकवास की यह नेक्रोनोमिकोन काल्पनिक हैं / परिकल्पना का काम है ,ये कहाँ से आती है . यह वही पूरी बकवास है उसी तरह की जैसे वे दावा करते हैं की सेटन एक "आदिरूप " है .

नेक्रोनोमिकोन एक परिकल्पना / कल्पना का कार्य नहीं है , ना ही उसका " अविष्कार किया गया था होवार्ड फिलिप्स लोवरक्राफ्ट द्वारा. " इसके बारे में और जानकारी के लिए देखें - http://www.hplovecraft.com/ . अब नए लोगों के लिए , ये एच पी लोवरक्राफ्ट का जन्म हुआ था 20 अगस्त 1890 में और वह 15 मार्च 1937 में मर गया .

ठीक है , अब उन स्व-नियुक्त प्राधिकारिओं के लिए , अगर वह 1890 में पैदा हुआ तो ये बताओ की उसने 1586 नेक्रोनोमिकोन का आविष्कार कैसे कर लिया ? और अधिक जानकारी के लिए देखें - http://booksforsatanspeople.files.wordp ... hn-dee.pdf

हाँ यह सही है , 1586 , सिर्फ एक . यह सिर्फ एक है . वहां अन्य कॉपियां भी हैं जो इस कॉपी से भी पहले की हैं . यह 1586 कॉपी के लेखक थे डॉक्टर जॉन डी, आप जानते हैं , यह वह शक्श हैं जिन्होंने हमें इनोकीयान (Enochian) भेंट की . अगर कोई भी समय निकल कर इस किताब की " प्रस्तावना " को पढ़े , जिसके लेखक डॉक्टर जोसफ टालबेट , पी एच डी , डी. लिट्ट, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी , तो इस शक्तिशाली गरिमोइर् अर्थात जादूगरी एवं आव्हानो की किताब का सच्चा इतिहास सामने आ जायेगा :

यहाँ कुछ अंश हैं नेक्रोनोमिकोन की 1586 कॉपी से :

"नेक्रोनोमिकोन मुख्य रूप से आम लोगों को पता है होवार्ड फिलिप्स लोवरक्राफ्ट की लिखावटों / लेखों के कारण. यह शब्द "नेक्रोनोमिकोन " यह एक ग्रीक अनुवाद जिसे 950 ए.डी . में बनाया गया था यह उसका शीर्षक है . इस अनुवाद को बनाया गया था थेओडोरस फिलेटस ने मूल अरबी हस्तलिपि से . इस ग्रीक (Greek) अनुवाद का एक लैटिन संस्करण बनाया गया था ओलॉस वोर्मिअस के द्वारा 1228 ए .डी में . कार्य का वास्तविक अरबी शीर्षक था "किताब अल अज़ीफ़ ". जिसका मोटे तौर पर अनुवाद किया जा सकता है "रेगिस्तानी जिन्न (या डीमॉन्स ) की गर्जन की किताब ". यह नाम , "नेक्रोनोमिकोन ", जिसे लैटिन संस्करण बरकरार रखता है ,इसका अर्थात होता है कुछ चीज़ जैसे की चीज़ें जिनका सम्बन्ध मृतिकों के कानूनों , प्रथाओं , एवं रिवाज़ों से है . नेक्रोस का लैटिन में अर्थ होता है "मृत " और नोमोस का अर्थ होता है रिवाज़ , प्रथाएं , या क़ानून ."


मूल लेखक का नाम होना चाहिए था एक अरबी नाम अब्दुल अल अज़रद जो माना जाता है कि 738 ए डी . में मर गया डामासेकस में . मृत्यु का कारण था की उसे स्ट्रीट / गली में ना देखी जा सकने वाली एन्टिटीज़ अर्थात जीव ने फाड़ कर अलग कर दिया था . शायद नाम का गलत अनुवाद हुआ है क्यूंकि कोई भी स्वयं - का आदर करने वाला अरब ऐसा नाम नहीं रखेगा . सच्चा नाम शायद था अब्द अल अज़रद . अरबी में नाम बहुत अधिक शीर्षक का है जिसका अर्थ होता है "भक्षक का गुलाम " या "महान भक्षक का पुजारी ", माना जाता है की यह इशारा करता है महान प्राचीनों / पुराने (लोगों या जीवों ) अर्थात ओल्ड ओनेस की तरफ ."

जॉन डी का नेक्रोनोमिकोन का अनुवाद जो इस कार्य में फिरसे छापा गया वह आता है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की वाइडनर पुस्तकालय के संग्रह से . यह किताब हैरी एल्किन्स वाइडनर की व्यक्तिगत लाइब्रेरी अर्थात पुस्तकालय का हिस्सा थी . हैरी एल्किन्स वाइडनर अमरीकी करोड़पति और संस्थापक वाइडनर पुस्तकालय का . मिस्टर वाइडनर ने यह टेक्स्ट अर्थात मूलपाठ को 1912 में प्राप्त किया उसके टाइटैनिक पर चढ़ने के कुछ देर पहले . इस किताब की binding अर्थात बंधन वास्तिविक / मूल है परन्तु यह बुरी तरह से कटा और विभाजित है . यह टेक्स्ट अर्थात मूलपाठ सम्पूर्ण है परन्तु बहुत सारे पन्ने अलग हो गए है और टुकड़े टुकड़े हो गए हैं . मरम्मत के प्रयास वर्तमान में जारी हैं , और किता को डिजिटली अर्थात (कंप्यूटर आदि में ) संरक्षित कर रख दिया गया है जो की इस मरम्मत के प्रयास का ही एक हिस्सा है ."

नेक्रोनोमिकोन का इतिहास

"अल अज़ीफ़ - अरबी में , अब्द अल - हज़रद द्वारा लिखित c. 730 ए डी . वास्तविक / मूल का पता नहीं परन्तु बहुत संख्याओं में हस्तलिपि के संस्करण बहुत सारे मध्यकालीन विद्वानों के बीच में लम्बे समय तक परिचालित / प्रसारित किये गए थे . बारहवीं शताब्दी तक , यह संस्करण को लुप्त संदर्भित गर दिया गया . "


"नेक्रोनोमिकोन - ग्रीक में अनुवादित की गयी थेओडोरस फिलेटस द्वारा c. 950 ए डी. में .पहले की हस्त लिखित कॉपियां का अस्तित्व का पता नहीं है . इटली में 1501 के ग्रीष्म ऋतू के दौरान बड़े स्तर पर कॉपियों की छपाई एक पन्ने अर्थात फोलियो आकार के संस्करण में , इसने कर्च द्वारा धार्मिक दमन की बाढ़ सी ला दी . चर्च द्वारा इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया गया और इसे इंडेक्स इपुरगेटोरीअस अर्थात प्रतिबंधित पुस्तकों के सूचकांक में शामिल कर लिया पोप ग्रेगोरी IX द्वारा . आखिरी ज्ञात संस्करण के बारे में जाना जाता है की उसे सालेम में 1692 में जला दिया गया था . "

"वोयनिच हस्तलिपि - अरबी लिपि का उपयोग करते हुए लैटिन और ग्रीक में . अनुवादक का पता नहीं , c. 1020 . इस हस्तलिपि की अज्ञात संख्याओं का उत्पादन हुआ था शायद रोमानिया में . ऐसा जाना जाता है की केवल तीन कॉपियां ही अस्तित्व में थीं ."

"नेक्रोनोमिकोन - लैटिन में , ओलॉस वोर्मिअस द्वारा , c. 1228 ए डी . में . पहले तो यह हस्तलिपि रूप में परिचालित/ प्रसारित हुई , फिर जर्मनी के मैन्ज़ में चापि गयी पंद्रहवीं शताब्दी के आसपास काले अक्षर पन्ने अर्थात फोलियो के रूप में ."

"नेक्रोनोमिकोन - अंग्रेजी में , जॉन डी द्वारा अनुवाद की गयी , c. 1586 में . एक शुद्ध परन्तु ग्रीक संस्करण का शोधित रूप / संस्करण . निजी प्रकाशकों द्वारा सिर्फ छोटी संख्यानों में छापी गयी, ऐसा जाना जाता है की इसकी हस्तलिपि कॉपियां अस्तित्व में हैं . यह वह संस्करण है जिससे यह पुनर्मुद्रण / अर्थात रीप्रिंट आता है . :

"अल अज़ीफ़ - ये बुके ऑफ़ ये अरबे (Ye Booke Of Ye Arabe) - अंग्रेजी में , अनुवादक का पता नहीं , c. 1590 में . एक अधूरा एवं गड़बड़ / अव्यवस्थित टेक्स्ट अर्थात मूलपाठ . हस्तलिपि रूम में परिचालित / प्रसारित हुआ , शायद वहां दस से भी कम हस्तलिपियां थीं जो कभी लिखी गयी."

"कलटस मेलाफिकेरम - अंग्रेजी में , अनुवाद की गयी बैरन फ्रेडरिक द्वारा , c. 1597 में . लैटिन टेक्स्ट / मूलपाठ का आंशिक अनुवाद . इंग्लैंड के ससेक्स में प्रकाशित ."

"नेक्रोनोमिकोन " का अर्थ होता है "मृत नामों की किताब " . ईसाईयत के घुसपैठ और प्रभुत्व के साथ , वास्तिवक सच्चे पैगन अर्थात बुतपरस्त भगवानों को ख़त्म कर दिया गया . दूसरे शब्दों में बहुत थोड़े ही लोग इनका उपयोग करते थे . उन लोगों के लिए ही जो मामूली रूप से साक्षर हैं गुप्त विधा अर्थात Occult के सम्बन्ध में , यह उज्ज्वलता से स्पष्ट है की यह मूलपाठ अर्थात टेक्स्ट एक परिकल्पना / कल्पना का कार्य नहीं है .
इसके साथ साथ , वहां कुछ लोगों के लिए जिन्होंने इस किताब के साथ गलत रूप में प्रयोग किया उन लोगों को भयंकर परिणाम भुगतने पड़े . "गोड्स अर्थात भगवान " वास्तविक जीव हैं , परन्तु गुप्त जादुई विधा अर्थात Occult , पर अन्य प्राचीन मूलपाठों / टेक्स्ट्स के साथ , वहाँ एक दूसरा पहलू है इन लिखावटों का - एलेगोरीज़ अर्थात वे रूपक या दृष्टांत जो छुपा अर्थ रखते हैं . वे लोग जो इन लिखावटों को एक शाब्दिक रूप में लेते हैं उन्हें अक्सर परिणाम नहीं मिलते जैसे उन्होंने उम्मीद किया या चाहा था . इस तथाकथित रिलिजन अर्थात धर्म की प्रत्येक चीज़ के साथ , वहां एक सच्चा और वहां एक झूठा पहलू होता है ; वास्तविक और कृत्रिम . यह बहुत अच्छे से देखा जा सकता है सेटनइज़्म vs ईसाईयत में . ईसाईयत में का सब कुछ झूठा और कृत्रिम है .

नेक्रोनोमिकोन का सच्चा उद्देश्य है की वह एक गरिमोइर् के रूप में कार्य करे आत्मा को खोलने के लिए . "लेवियाथन /लेवित्थं," "सटहुलहू/Cthulhu," ये नाम हैं कुण्डलिनी सरपेंट अर्थात सर्प के "जो पड़ा रहता है सोते और स्वप्न देखते हुए ". "नारायणा /नारायण " शायद "सटहुलहू/Cthulhu, के सबसे प्राचीनतम नामों में से एक है जो हिन्दू "महाभारत" में भी देखा जाता है और यह " महाभारत "कई हज़ार साल पुरानी है .

नेक्रोनोमिकोन एक बहुत ही शक्तिशाली गरिमोइर् है . बहुत सारे ज्ञान को योजनाबद्ध तरीके से नष्ट कर दिया गया और जब्त कर लिया गया , परन्तु सेटन और उनके डीमॉन्स ने लगभग सब कुछ संरक्षित करके रखा है इस दिन तक . वे लोग जिन्होंने आरम्भ नहीं किया है अर्थात जो नए हैं , वे लिखावटों को शाब्दिक रूप में लेते हैं . आप सेटन के जितना अधिक करीब आएंगे और आप जितना अधिक सेटेनिक प्रतीकों एवं सच्चे सेटनइज़्म को जानेंगे , आप देखेंगे चीज़ों को की वे वाकई में क्या हैं : एलेगोरीज़ जो खुलासा करती हैं प्राचीन और शक्तिशाली ज्ञान का .

नेक्रोनोमिकोन का अनुवाद होता है "मृत नामों की किताब " . वे लोग जो सेटन के बिना हैं , वे इस नेक्रोमैन्सी के रूप में लेते हैं . वे लोग , जो जानते हैं , वे समझते हैं की किताब नेक्रोमैन्सी के बारे में नहीं है , परन्तु नामों के साथ कार्य करना जिनका उपयोग हज़ारों सालों से नहीं किया गया है ; इस तरह : "मृत " . ये "नाम" शक्ति के शब्द हैं , जब इन्हे ठीक से अर्थात सही ढंग से कम्पन्न किया जाता है .

बहुत सारी गरिमोइर्स कोड वर्ड्स अर्थात संकेत शब्दों का उपयोग करती हैं . सिर्फ एक ही तरीका इन्हे समझने का है वह यह है की आप या तो दिव्य मार्गदर्शन लें सेटन और उनके डीमॉन्स से , या उस एक शिष्य से जिसने यह पहले ही प्राप्त कर लिया है . 1586 नेक्रोनोमिकोन के अधिक (निर्देश) का लेना देना चक्रों को खोलने एवं कुण्डलिनी को उत्थित करने अर्थात ऊपर उठाने से है . "पागल अरब " उसने अपनी कुण्डलिनी को ऊपर उठाया , जिसने उसके मन और आत्मा को खोल दिया और वह "पागल " बन गया . दूसरे शब्दों में बहुत अधिक मात्रा में मानसिक /अलौकिक / पारलौकिक को अंदर घुसाना बहत जल्द समय में , यह मानसिक स्वास्थ्य बनायें रखने में समस्या हो सकता है . सील्स अर्थात मोहर / मोहरों का "जलना " और इस प्रकार की चीज़ें , नेक्रोनोमिकोन में प्रतिनिधित्व करती हैं चक्रों के मोहरों का जलना और इस प्रकार से कुण्डलिनी से होकर चक्रों की सफाई . अब्द अल -हज़रद का पागलपन और अनुभव परिणाम हैं उसके खुले हुए चक्रों और कुण्डलिनी का .

1586 नेक्रोनोमिकोन में जिन प्रतीकों का उपयोग किया गया है वे वास्तविक रस-विधा के प्रतीक हैं , और वे गोएटिक डीमॉन्स की सिजिल्स अर्थात ऐसे प्राचीन चिन्ह जिनमे जादुई शक्ति होती है , से अलग नहीं हैं . ठीक से अर्थात उचित रूप से उपयोग किये जाने पर , उनमे शक्ति होती है .

टैरो के साथ भी ऐसा ही है . वे लोग जो सेटन के बिना हैं (बहुत सारे कहीं ज़्यादा पवित्र होते हैं इन नए ज़माने के लोगों की अपेक्षा ) वे सदा ढूँढ़ते रहते हैं और प्राचीन मिस्री अर्थात इजिप्ट के मकबरों के आसपास एवं प्राचीन मुर्तिओं (अर्थात ) के नीचे खुदाई करते रहते हैं उन सूचीपत्रों को ढूंढने के लिए जिन्हे कथित तौर पर थोथ /Thoth ने छुपाई हैं . हम में से वे लोग जो सेटन के करीब हैं , जानते हैं की थोथ की लिखावटें और उनके सन्देश हमारे सामने ही हैं यहाँ एवं वहां , और ये एक के लिए टैरो में रखे हैं . वे लोग जो सेटन के बिना हैं , वे गहरे अर्थ में नहीं देख सकते , क्यूंकि यह केवल सेटन से होकर ही आता है .

इतिहासकार तर्क करते हैं प्रश्न उठाते हैं आखेनाटोन /Akhenaton के कथित बिमारी के ऊपर , जो उनके सर्प के से रूप का कारण बनी. कोई भी नहीं देख सकता इस पुरुष / स्त्री द्विलिंग के रस-विधा सन्देश को , जो प्रतीकात्मक है पुरुष एवं स्त्री चक्रों के मिलान का , जो मैग्नम ओपुस अर्थात ईश्वरत्व तक ले जाता है . वे लोग जो सेटन के बिना हैं , वे चीज़ों को शाब्दिक रूप में लेते हैं . वे सरपेंट अर्थात सर्प के अर्थ को भी सम्पूर्ण तरीके से (समझने ) में चूक जाते हैं .

एल्डर्स एंड थे ऐंशीएन्ट्स (पुराने और प्राचीन ) यह एक एलेगोरी है . "गोड्स / भगवान " यह कोड वर्ड अर्थात संकेत शब्द है चक्रों के लिए .

यह सब उन्नत है . एक बार आप कोड वर्ड्स को जान जाते हैं , आप अर्थों को देखने में समर्थ हो जायेंगे . यह पढ़ने का एक अलग तरीका है .

अब नेक्रोनोमिकोन पर वापस आते हुए , साइमन /Simon कॉपी से छेड़खानी की गयी है और प्रतीकों अर्थात सिम्बल्स के साथ भी यही किया गया है . इसका यह अर्थ नहीं की यह किताब एक परिकल्पना /कल्पना है ; सिर्फ इसके साथ छेड़खानी की गयी और इसे भ्रष्ट कर दिया गया.

इसको लपेटते हुए , इस बिंदु पर (मैं इस पर बाद में और लिखूंगी ) , लगभग occult / गुप्त रहस्य्मयी ज्ञान का सब , इनका आधार है आध्यात्मिक रस विधा में . गोड्स अर्थात भगवानों की जितनी भी कहानियां हैं , ये सब एलेगोरी हैं . एलेगोरी का अर्थ ऐसे दृष्टांत या रूपक जिनमे छुपा हुआ अर्थ होता है . यह आपको पहले भी कई बार बताया जा चुका है. वे लोग जो ज्ञान में उन्नत हैं इस बात को जानते हैं . आध्यात्मिक ज्ञान को कई सदिओं से छुपाया गया था हमलों के कारण जैसे की ईसाईयत के विशाल धब्बे के कारण जो इस संसार पर आज है और यह आध्यात्मिकता को आज के दिन तक सड़ता है .

बहुत सारे सेटनिस्ट अनजान हैं , जड़ें एवं आधार सेटनिज़्म के दूर पूर्व में संरक्षित किये जा चुके हैं . इनमे से बहुत इजिप्ट अर्थात मिस्र में बाद में आये , जैसे की मन्त्र "ओम /Ohm" जिसका उचित रूप से कम्पन्न किया जाता है "औम /Aum " जिसका विकास आमोन/Amon में हुआ और फिर बाद में चोरी करके और उसे भ्रष्ट करके आमीन /आमेन अंग्रेजी में Amen कर दिया गया. "उलटे हाथ मार्ग " की उत्पत्ति तंत्र के साथ हुई , जिसका अर्थ होता है - कार्य करने का तरीका परहेज़ के "सीधे हाथ मार्ग " से उलट / विरोध में .

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HAIL SATAN AND ALL GODS OF HELL !!!!!

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Hail Satan Hail Peacock Lord Hail Shiva Hail Kartikey HAIL all demon friends

“It is necessary that I should die for my people; but my spirit shall rise from the grave, and the world will know that I was right.” -Adolf Hitler.
Heil mein Führer I know you were right -roadtorevolution
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HEY HAVE
Image Poo people...

Post Fri Jan 29, 2016 12:04 pm

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वॉचटॉवर्स अर्थात पहरे की मीनारों को खोलना

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... owers.html

*कृपया ध्यान दें :
सेटेनिक पावर मैडिटेशन वॉल्यूम तीन से [दो में से एक , जो कभी भी जॉय ऑफ़ सेटन वेबसाइट पर नहीं डाले गए थे क्यूंकि मेरे पास समय की कमी थी ], इस मैडिटेशन के लिए बहुत सारी संख्या में लोग पूछ रहे थे , उसके उत्तर में यह लेख है मैंने रखा है , परन्तु , यह पुराना हो चुका है इस तरीके में की सेटन और लिलिथ ने मुझे नया ज्ञान दिया है , इसके फलस्वरूप चक्र मेडिटेशन्स / ध्यान के परिणाम और अधिक शक्तिशाली हो गए हैं . नीचे जो कम्पन्न दिए गए हैं , वे कमज़ोरन संस्करण हैं , परन्तु वे वास्तविक / मूल मैडिटेशन से हैं . अगर आपको अत्यधिक /चरम परिणामों की इच्छा है , तो आप नए कम्पन्नों का उपयोग करें प्रत्येक चक्र के लिए . ये नए कम्पन्न आपको अगले लेख में बतलाये गए हैं .

तीन "क्नॉट " अर्थात "गांठ" चक्र जिनको संस्कृत में संदर्भित किया गया है वे हैं , बेस अर्थात मूलाधार चक्र , हार्ट अर्थात अनाहत चक्र [प्रमुख क्नॉट / गाँठ चक्र ] एवं छटवां चक्र , तीसरी आँख के पीछे - अनाहत उसके बाजू अर्थात साइड के विस्तार (के साथ ) शोल्डर (कन्धों के ) चक्र में , मूलाधार उसके विस्तारों के साथ हिप (नितंब/कमर ) चक्रों में एवं छटवां चक्र उसके विस्तारों के साथ टेम्पल अर्थात मंदिर / देवालय चक्रों में . ये तीन चक्र एक दूसरे से भिन्न हैं की वे ग्रन्थियां हैं , जहाँ पर सरपेंट अर्थात सर्प एक बड़ी बाधा का सामना कर सकता है , इससे उसका उत्थान अर्थात ऊपर उठना रुक सकता है जब तब उसे (बाधा को ) खोला नहीं जाता . इन तीनों में से , दिल अर्थात अनाहत / हार्ट के पास सबसे शक्तिशाली बाधा है , जो सर्पेंट को निचले चक्रों में रखती है , इससे विस्तृत चेतना / अवचेतन और अन्य मानसिक / अलौकिक / पारलौकिक सामर्थ्य में समस्या खड़ी होती है . इसे बड़े अच्छे से बारबाटोस/Barbatos की सिजिल में देखा जा सकता है नीचे . सिजिल अर्थात प्राचीन प्रतीक जिनमे अत्यधिक जादुई शक्ति होती है .

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यह वह भी है जहाँ पर कलुषित यशु मसीह अर्थात नाज़रीन के सूली पर चढ़ाये जाने वाली काल्पनिक कहानी चुराई गयी थी इस कांसेप्ट अर्थात सिद्धांत से ; यहसु मसीह दो अन्य के बीच में था जिन्हे कथित तोर पर सूली पर चढ़ाया गया था . हम जितना अधिक ओकल्ट अर्थात गुप्त रहस्य्मयी ज्ञान या विधा के बारे में सीखते हैं , इसमें कोई शक की बात नहीं की ईसाईयत और कुछ नहीं परन्तु एक धोखा है और सम्पूर्ण तरह से झूठा है हर पहलू में . मैंने सेटन से सीखा है की एनोचिअन (Enochian) वॉचटॉवर्स अर्थात पहरे के खम्बे , तीन गांठे एवं नेक्रोनोमिकों में की गुप्त शिक्षाएं यह सब एलेगोरीज़ हैं . (एलेगोरीज़ अर्थात वे दृष्टान्त जिनमे छुपा हुआ अर्थ रहता है .). शत्रु मानवता को भ्रम में डालता एवं मोहित करता है की ये सब भौतिक हैं , जैसे की ये किरदार एवं स्थान , परन्तु सच्चाई यह है की ये सब आध्यात्मिक सिद्धांत हैं . सच्चा आध्यात्मिक मार्ग हमें ईश्वरत्व (ईश्वर हो जाना / बन जाना )अर्थात गोडहेड की और लेजाता है जहाँ हम हमारे लक्ष्यों , इच्छाओं की प्राप्ति करते हैं और हम हमारी स्वयं के भाग्य के मालिक बन जाते हैं .

सेट /सेट की सिजिल भी तीन ग्रंथियों को दिखाती है . देंखे कैसे क्रॉसेस /सलीब चोर पर और चौड़े हैं , ये चक्र को दर्शाते हैं . इन चक्रों को सम्पूर्ण रूप से शक्तिशाली बनाने हेतु एक (व्यक्ति ) को उन चारों को कम्पन्न करना है और इसके साथ साथ बीच में जो पांचवां है उसको भी कम्पन्न करना है , प्रत्येक की बारी बारी से और यह वहीँ है जहाँ से स्वास्तिका /swastika वास्तव / मूल में आया , क्यूंकि स्वास्तिका आध्यात्मिक ऊर्जा के अकार में है . एक बार जब सारी तीन ग्रन्थियां पूरी तरह से खुल जाती हैं , तो एक (व्यक्ति ) एक नए स्टार पर पहुंचेगा आध्यात्मिक ज्ञान एवं समझ के . सेटन का सरपेंट अब स्वतंत्र है उत्थित होने के लिए अर्थात ऊपर उठने के लिए .

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अपना सबसे अच्छा प्रयास करें की आप कोई भी चक्र जिस पर आप कार्य कर रहे हों , उस पर कम्पन्न को महसूस करने का . सिर्फ तीव्रता / प्रचंडता के साथ ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें . यह कठिन है , परन्तु आप अपना सबसे अच्छा करें जितना आप कर सकते हैं .

ये प्रत्येक मेडिटेशन्स अर्थात ध्यान बहुत शक्तिशाली हैं और केवल एक ही चक्र को खोलना चाहिए एक समय पर और अगले पर जाने के पहले यहाँ 48 घंटे का रुकने का समय होना चाहिए . दबाव या दर्द की एक अनुभूति दर्शाती है की आप इन बिन्दुओं को खोलने में सफल रहे थे , परन्तु अनुभव इस बात को बतलाता है की ये बंद हो सकते हैं एवं व्यायामों को दोहराने की आवश्यकता पड़ सकती है जब तक वे स्थाई रूप से खुल न जाएँ . तो भी एक व्यक्ति को चाहिए की वह इन्हे दोहराये .

तीसरी गाँठ के वॉचटॉवर्स को खोलना

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ऊपर बताया हुआ डायग्राम / चित्र बताता है एक ऐसे दृष्टिकोण से की हम सर के ऊपर के भाग को देख रहें हैं . ध्यान दें चार क्वार्टर्स अर्थात चतुर्थांशों पर . इनमे होते हैं छटवें चक्र के चार वॉचटॉवर्स. बीच की तीसरी आँख के पीछे छटवां चक्र केंद्र है .

1 .) शुरू करें सामने में तीसरी आँख के साथ , ऊर्जा को अंदर सांस में लें अपनी तीसरी आँख में जब तक आपके फेफड़े पूरी तरह से नहीं भर जाते (आरामदायक रूप में ) और सांस को बाहर छोड़ने पर , कम्पन्न करें "थोथ/THOTH" "थ्थ्थ्थ्थ्थ्थ्थ्थ.... ओओओओओओह ... थ्थ्थ्थ्थ्थ्" ("TH - TH - TH – TH - OH - OH - OH - OH - TH - TH - TH - TH -TH) . ऐसा किया जा है थ /TH एवं ओह / OH को एक ही समय पर कम्पन्न करते हुए जब आपने पहली बार अपनी तीसरी आँख को खोल लिया है. जब आप ऊर्जा को सांस में लेते हैं , दृश्य बनायें / कल्पना करें की प्रत्येक चक्र उचित रूप से संरेखित है [चार बिंदु / नोक अंदर की ओर मुख किये हुए हैं , और छटवां चक्र नीचे के ओर बिंदु / नोक किये हुए है ] और उसे ऊर्जा के साथ प्रकाशित / उज्ज्वलित कर दें .

2 .) नंबर 1 में दी हुई स्टेप्स को अब दौड़ाएं अपने उलटे (ओर के ) टेम्पल अर्थात मंदिर / देवालय चक्र के साथ .

3 .) नंबर 1 में दी हुई स्टेप्स को अब दोहराएं आपके पीछे के चक्र के साथ जो आपके सिर की पीछे पर होता है , ठीक आपके छटवें चक्र के पीछे .


4 .) ऐसा ही अपने सीधे (ओर के ) टेम्पल चक्र के साथ करें .

5 .) अब ऐसा ही अपने छटवें चक्र के साथ करें जो आपके सिर के केंद्र में होता है ठीक तीसरी आँख के पीछे .

6 .) स्टेप्स एक से छह को दोहराएं , सात बार.


दूसरी गाँठ के वॉचटॉवर्स खोलना

1 .) शुरू करें अनाहत चक्र के विस्तार से आपकी छाती/सीने के सामने में . इस चक्र में ऊर्जा को अंदर सांस में लें जब तक आपके फेफड़े आरामदायक (रूप से ) भर नहीं जाते और सांस को बाहर छोड़ने पर , कम्पन्न करें "आमोन /AMON" - आह -आह-आह-आह-म-म-म-म-उह-उह-न-न-न-न". जब आप ऊर्जा को अंदर सांस में लें , दृश्य बनायें / कल्पना करें प्रत्येक चक्रो को की वह उचित रूप से संरेखित है [बिंदु अंदर की ओर मुंख किये हैं ] और उसे ऊर्जा के साथ प्रकाशित / उज्ज्वलित कर दें . केंद्रीय हार्ट अर्थात अनाहत चक्र के बिंदु दोनों ऊपर एवं नीचे मुख किये होते हैं योनि के आकार में . योनि अर्थात स्त्री का गुप्तांग इसे एक टैरो कार्ड द्वारा दिखाया गया है नीचे .

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2 .) स्टेप्स जो की 1 नंबर में दी गयी हैं उन्हें दोहराएं इस बार अपने कन्धों के अर्थात शोल्डर चक्रों के साथ .

3 .) नंबर 1 में दी हुई स्टेप्स को दोहराएं अपने पिछले अनाहत चक्र के साथ जो की पीछे होता है आपकी रीढ़ पर , ठीक आपके मुख्य अनाहत चक्र के पीछे .

4 .) ऐसा ही करें अपने सीधे (ओर वाले ) शोल्डर चक्र के साथ .

5 .) अब यही अपने अनाहत चक्र के साथ करें जो आपके छाती / सीने के केंद्र में है .

स्टेप्स एक से पांच को दोहराएं , सात बार .

पहली गाँठ के वॉचटॉवर्स को खोलना

1 .) शुरू करें अपने बेस अर्थात मूलाधार चक्र के साथ सामने में . यह स्त्रीओं के लिए ठीक भगांकुर/भगशिश्निका अर्थात क्लाइटोरिस की जड़ पर होता है और पुरुषों के लिए यह शिश्न में होता है . ऊर्जा को अंदर सांस में लें इस चक्र में जब तक आपके फेफड़े आरामदायक (रूप से ) भर नहीं जाते और साँस को बाहर छोड़ने पर , अपनी ठोड़ी को अपनी छाती पर गिराएं और कम्पन्न करें "अडर/ADAR" "अह-अह-अह-अह-थ-थ-थ-थ-अह-अह-र-र-र-र [र को लुढ़काना है ]". कबलिस्टिक "स्पीच /भाषा " में , अक्षर D / डी को थ /TH के जैसे कम्पन्न किया जाता है , परन्तु जीभ थोड़ा आगे ऊपर की ओर रहते है जहाँ आपके दोनों दांत आपके मसूड़ों के साथ मिलते हैं . यह ऊर्जा के एक शक्तिशाली सर्किट अर्थात परिधि को पूरा कर देता है . र को हमेशा लुढ़काया जाता है कम्पन्न के दौरान .

2 .) जब आप ऊर्जा को अंदर सांस में इन लेते हैं , दृश्य बनायें / कल्पना करें की प्रत्येक चक्र उचित रूप से संरेखित हैं [बिंदु / नोक नीचे मुख किये हुए हैं ] , और उसे ऊर्जा के साथ प्रकाशित / उज्ज्वलित करें . केंद्रीय बेस अर्थात मूलाधार चक्र का बिंदु / नोक ऊपर की ओर मुख किये हुए होता है .

3 .) जो स्टेप्स नंबर 1 में दी गयी हैं उन्हें दोहराएं इस बार अपने उलटे (ओर के ) हिप अर्थात नितम्ब / कमर चक्र के साथ .

4 .) जो स्टेप्स नंबर 1 में दी गयी हैं उन्हें अबपने पिछले बेस चक्र के साथ दोहराएं जो आपकी रीढ़ पर पीछे की ओर है , ठीक आपकी टेलबोन पर होता है . टेलबोन मतलब आपके मलछिद्र के ऊपर जो हड्डी होती है वहां पर.

5 .) ऐसा ही अपने सीधे (ओर के ) हिप चक्र के साथ करें .

6 .) अब यही अपने केंद्रीय बेस अर्थात मूलाधार चक्र के साथ करें जो आपके पेरिनियम पर स्थित होता है . [पेरिनियम अर्थात गुदा और अंडकोष या योनिमुख के बीच का भाग].

दोहराएं स्टेप्स एक से पांच , सात बार .

बचे हुए चक्रों को खोलना

थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र

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1 .) शुरू करें अपने थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र के साथ . ऊर्जा को अंदर सांस में ले आपके सामने के थ्रोट चक्र के विस्तार में और कम्पन्न करें " निन्नघिज़्हीद्दा (NINNGHIZHIDDA)". " न-न-न-न-न-ई-ई-ई-ई-न-न-न-न-न-घ-घ-घ-घ-ई-ई-ई-ई-ज़्ह-ज़्ह-ज़्ह-ज़्ह-ई-ई-ई-थ-थ-थ-थी-थी-आह-आह-आह " याद रखें कबलिस्टिक "स्पीच / भाषा " अलग होती है हमारे प्रतिदिन के शब्दों से .

आई /I को उच्चारण किया जाता है ई /EE के जैसे , जैसे के शब्द "सी /See " में . "घ/GH"कंठस्थ होता है अर्थात कंठ से उच्चारण किये जाने वाला और इसे गले के पीछे से बनाया जाता है , परन्तु यह K /क के जैसे कठिन कंठस्थ नहीं होता , परन्तु एक कोमल ध्वनि के जैसे होता है . "ज़्ह /ZH" इसे फ्रेंच "J /जे" के जैसे उच्चारण किया जाता है जैसे की फ्रेंच शब्द "जैकुइस/Jacques " में . फिरसे , डी /D का उच्चारण जैसे का ऊपर "THE /थ /थी " के जैसे उच्चारण किया जाता है हैसा की ऊपर दिया गया है . अपने चक्रों को संरेखित करें जैसा की ऊपर चित्र में दिया है .

2 .) अब अपने मध्य के थ्रोट चक्र में ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें और वैसा ही करें जैसा स्टेप एक में किया था .

3 .) फिर , ऐसा ही अपने रीढ़ पर पीछे के विस्तार के साथ करें अपनी गर्दन की पीछे पर .

4 .) स्टेप्स एक से तीन को दोहराएं सात बार .


सोलर प्लेक्सस [666] अर्थात मणिपूर चक्र

1 .) ऊर्जा को अंदर सांस में लें सामने के सोलर प्लेक्सस चक्र में और सांस को बाहर छोड़ने पर , अपनी ठोढ़ी को अपनी छाती पर गिराएं और कम्पन्न करें : रा र-र-र-आह-आह-आह-आह-आह-आह . इस बात को निश्चित कर लें की आप अपने र को लुढ़ काते हैं . नीचे जैसा चित्र में दिया गया है वैसे अपने चक्र को संरेखित करें अर्थात पंक्ति में लाएं .

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2 .) स्टेप 1 को दोहराएं अपने मध्य चक्र के साथ और फिर अपने पीछे के चक्र के साथ .

3 .) ऊपर बताया हुआ सात बार करें .


सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र

1 .) ऊर्जा को अंदर सांस में लें आपके सामने के सोलर प्लेक्सस चक्र में और सांस को बाहर छोड़ने पर अपनी ठोड़ी को अपनी छाती पर गिराएं और कम्पन्न करें - ""नेरगल/NERGAL" "न-न-न-ऍ-ऍ-र-र-र(र को लुढ़काना है ) ग-ग-ग-ग-ऍ-ऍ-ल-ल-ल" (N-N-N-AY-AY-R-R-R-G-G-G-AY-AY-L-L-L)" . अब अपने चक्र को संरेखित करें जैसा नीचे चित्र में बतलाया गया है -

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2 .) स्टेप 1 को दोहराएं अपने मध्य चक्र के साथ और फिर अपने पीछे के अर्थात रियर , चक्र के साथ .

3 .) ऊपर जो बताया गया है उसे सात बार करें .

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Post Sat Jan 30, 2016 7:41 am

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चक्रों को कम्पन्न की सहायता से समायोजित करना अर्थात लय में लाना

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हमारे प्रत्येक चक्र एक निश्चित पिच (स्वरमान) के अंदर प्रतिक्रिया करते हैं एवं उस गहरी प्रतिबिंबित ध्वनि के साथ भर जाते हैं . एक सरल तरीका जिससे हम यह पता लगा सकते हैं की टोन राग / ध्वनि सही है वह तरीका है की हम उसे महसूस करें . जब हम सही राग को पकड़ लेते हैं , हम उसे अपने चक्र में महसूस करने लगते हैं . इसके परिणाम स्वरुप चक्र कम्पन्न होने लगता है एवं ऊर्जा को छोड़ने लगता है .

कृपया ध्यान दें - निम्न बतलाये गए कम्पन्न [शक्ति के शब्द ] इन्हे संशोधित किया गया है. संस्कृत में के जो परंपरागत शब्द हैं उन्हें भ्रष्ट कर दिया गया है और उनके प्रभाव कम हो गए हैं . नीचे दिए कम्पन्न केंद्रित हैं एवं विशेषकर शक्तिशाली हैं , एवं ये नए / अनुभवहीन मेडिटेटर्स अर्थात ध्यान करने वालों के लिए नहीं हैं . मैं पूरे ज़ोर के साथ सुझाव देती हूँ नए / अनुभवहीन लोगों को की वे सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन / ध्यान करें और शुरू करें कुछ मध्यम शक्ति के शब्दों से , जब तक उनकी आत्मा और अधिक शक्ति को संभालना सकती है .

*बेस अर्थात मूलाधार चक्र : लौम/Laum , कम्पन्न किया जाता है - ललआहहह -ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म 1 ( LLAHHH – UUU – MMM* )

*सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र : वौम/Vaum , कम्पन्न किया जाता है - वाहहह -ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म(VAHHH – UUU – MMM )

*सोलर प्लेक्सस "666" अर्थात मणिपूर चक्र : रौम/Raum , कम्पन्न किया जाता है - राहहह -ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म 2(RAHHH – UUU – MMM** )

*हार्ट अर्थात अनाहत चक्र :यौम /Yaum , कम्पन्न किया जाता है - ययाहहह -ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म ( YYAHHH – UUU – MMM )

*थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र : हौम/Haum , कम्पन्न किया जाता है - हाहहह - ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म ( (HAHHH – UUU – MMM ))

*छटवां चक्र : औम (ॐ) / Aum , कम्पन्न किया जाता है - आहहह - ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म (AHHH – UUU – MMM )

* सातवां चक्र : मौम/Maum , कम्पन्न किया जाता है - ममाहहह -ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म ( MMAHHH – UUU – MMM )

1 ऊ /U का उच्चारण किया जाता है अंग्रेजी शब्द 'ब्लू/blue ' के जैसे
2 'र/R ' को लुढ़कना है

नीचे दिए कम्पन्न विशेषकर शक्तिशाली हैं , और जैसा की ऊपर कम्पन्न दिए हैं , इन कम्पन्नों को भी नए / अनुभवहीन मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ता द्वारा उपयोग नहीं करना चाहिए . इस बात को समझ लें . चेतावनी - बेस अर्थात मूलाधार चक्र सैटर्न /शनि के कम्पन्न अप्रिय ऊर्जाओं को पुकार सकते हैं , तो आप इस बात को समझ लें और सोच समझकर आगे बढ़ें . यह सबके साथ नहीं हुआ है , और कुछ लोगों के अनुभव इसके साथ सकारत्मक थे , परन्तु फिर भी एक संभावना है . अगर आपको कोई भी समस्याएं आपके जीवन में प्रकट होती दिखती हैं , तो यह बहुत अच्छा हो सकता है की आप ऊपर बताये हुए कम्पन्नों का उपयोग करें , इसके बजाये की आप नीचे दिए कम्पन्न करें .

*बेस अर्थात मूलाधार चक्र : शनिश्वरा/Shaniswara , कम्पन्न किया जाता है - श - आह - नई - स्स - वाह -रर -आह (SH-AH-NEE-SS-VAH-RR-AH )


*सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र : भौमाया /BHAUMAYA , कम्पन्न किया जाता है - बब -आहह - ऊऊऊ- मम - आह - याह ( BB-AHH-UUU-MM-AH-YAH )


*सोलर प्लेक्सस "666" अर्थात मणिपूर चक्र : सूर्याऐ /सूर्ये , कम्पन्न किया जाता है - सूऊऊ (लंबा सू ) -रर-याह-यय (SUUU-RR-YAH-YAY )


*हार्ट अर्थात अनाहत चक्र : शुक्राया /SHUKRAYA , कम्पन्न किया जाता है - शह -ऊऊऊ -ककक -रर-आह-याह (SHH-UUU-KKK-RR-AH-YAH )


*थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र : बुधाया/BUDHAAYA , कम्पन्न किया जाता है - बूऊ (लंबा बू ) -दद-हाह-आह-याह (BUU-DD-HAH-AH-YAH )


*छटवां चक्र : चंद्रामासे /CHANDRAMASE , कम्पन्न किया जाता है - च -आह -नन - द -रर-आह-मम-आहसेय ( CH-AH-NN-D-RR-AH-MM-AHSAY )

* * सातवां चक्र : गुरुआवे /GURUAVE , कम्पन्न किया जाता है - गग -ऊऊऊ - रर- ऊऊऊ -आह - वेय (GG-UUU-RR-UUU- AH-VAY )

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Post Sun Jan 31, 2016 7:28 am

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सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन / ध्यान

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इस मैडिटेशन को बेहतर रूप से करने के लिए , यह महत्वपूर्ण है की आपकी आत्मा पहले से ही खुली हुई है . अगर आपने पहले ही "आत्मा को खोलने / ओपनिंग दि सोल " वाले मैडिटेशन नहीं किये हैं , तो मैं आपको ज़ोरदार तरीके से प्रोत्साहित करुँगी की आप पहले उन्हें करें , नीचे दिए हुए मैडिटेशन करने के पहले .

प्राचीन ग्रिमोइर् (जादू एवं आव्हानो की किताब ) में , चक्रों के लिए गुप्त संकेत शब्द हैं "गोड्स /भगवान ". सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन में हम हमारे सभी सात चक्रों पर कार्य करते हैं प्रत्येक मैडिटेशन सेशन /सत्र में . उदहारण के लिए , आप अपने क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र से शुरू करेंगे , इस चक्र का दृश्य बनायें / कल्पना करें , इस बात को निश्चित कर लें की यह उचित रूप से संरेखित है , तब फिर आप विशेष ब्रीथिंग अर्थात सांस लेना करेंगे क्राउन चक्र के लिए. इसके बात , आप क्राउन चक्र के लिए कम्पन्न करेंगे , और फिर आप अपने क्राउन चक्र पर मैडिटेशन करेंगे. अपने क्राउन चक्र पर कार्य करने के बाद , आप अपने छटवें चक्र पर जायेंगे और ऐसा ही करेंगे , फिर अपने थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र पर जायेंगे और ऐसा करते हुए नीचे अपने बेस अर्थात मूलाधार चक्र तक करेंगे. यह है सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन . आप अपनी इच्छा के अनुसार सिर्फ एक या अधिक चक्रों पर कार्य कर सकते हैं , परन्तु अगर आप ऐसा करने की इच्छा रखते हैं , तो मैडिटेशन के अंत पर , यह महत्वपूर्ण है की आप इस बात को निश्चित कर लें की आपकी ऊर्जाएं संतुलित हैं और ऐसा किया जा सकता है प्रत्येक चक्र का दृश्य बना कर / कल्पना कर या उसे संरेखित कर और उसके शक्ति के शब्द को कम्पन्न करने के द्वारा .

अगर आपका कोई चक्र कमज़ोर है और आप अपने किसी एक चक्र की शक्ति को बढ़ाना / विस्तृत करना चाहते हैं, तो यह महत्वपूर्ण है की आप उस विशेष चक्र के दिन एवं घंटों / समय के दौरन मैडिटेशन करें . जब आप यह कर रहे हों , भले ही आप आपने सभी सात चक्रों पर कार्य कर रहे हैं , उस विशेष चक्र की ऊर्जा प्रभुत्व रखेगी / श्रेष्ठ होगी . आप अपने विशेष स्थान (जहाँ आप रहते हैं ) के गृह सम्बन्धी घड़ियाँ ढूंढ़ना चाहते हैं , तो मैं बहुत ज़ोरदार सिफारिश करुँगी की आप यह फ्री प्रोग्राम डाउनलोड कर लें . अनुसन्धान ने साबित किया है की प्राचीन चैलडीअन (Chaldean) गृह सम्बन्धी घंटे / समय / घड़ियाँ अत्यंत शुद्ध हैं . आप इस वेबसाइट से इस क्रोनोस प्रोग्राम को डाउनलोड कर लें . इस लिंक पर जाकर - http://chronosxp.sourceforge.net/

वहां विभिन्न शब्द हैं शक्ति की जिन्हे आप चुन सकते हैं अपने चक्रों को शक्तिशाली बनाने हेतु . इस बात को निश्चित कर लें की आप अविरोधी रहें , लगातार करें , उदाहरण के लिए , अगर आप रियून कम्पन्नों का उपयोग कर रहे हैं , तो फिर आपको रियून कम्पन्न ही करने हैं सम्पूर्ण सेशन अर्थात सत्र के लिए , आपको सभी सात चक्रों के लिए रियून कम्पन्नों का उपयोग करना है .

शक्ति के शब्द स्तरों में दिए गए हैं . "परंपरागत " कम्पन्न अभी भी कार्य करते हैं , परन्तु उन्हें भ्रष्ट कर दिया गया है और उनकी शक्तियां काफी कम हो गयी हैं . कारण की मैं उन्हें यहाँ छोड़ रही हूँ वह यह है की संस्कृत में कम्पन्न एक (व्यक्ति ) की आत्मा को अभिभूत / व्याकुल कर सकती हैं अगर वह आत्मा ऊर्जा को सँभालने में उतनी शक्तिशाली नहीं हुई है . 1586 नेक्रोनोमिकोन से शब्द , परंपरागत शक्ति के शब्दों के साथ , इनका उपयोग नए / अनुभवहीन लोगों द्वारा किया जा सकता है . रियूनिक अर्थात रियून वाले कम्पन्न सीधे सेटन एवं लिलिथ से ए हैं , क्यूंकि मैंने इनका उपयोग उनके प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में किया है एक मानव आत्मा जो की स्पिरिट (भूत / आत्मा ) वाले रूप में थी उसे शक्तिशाली बनाने हेतु , यह आत्मा पृथ्वी से जा चुकी है और अब हेल (HELL) में रहती है .

"विषय प्राकृतिक रूप से पंडितइपन अर्थात स्कालरशिप /scholarship जो अभी तक जितना समझता जानता है , उसके लिए यह विषय सबसे अस्पष्ट विषयों में से एक है , और अभी तक किसी ने भी इस पर सही / वास्तविक प्रकाश नहीं डाला है . वह , मगर , वहां पर एक बार इजिप्ट अर्थात मिस्र में और चैलडीआ /Chaldea में , इस "प्राकृतिक भाषा " का या "भगवानों की वाणी " का एक विज्ञान था .

"प्राचीन मिस्र में , पादरी / पुरोही भगवानों का भजन करते हैं सात स्वरों की सहायता से , उन्हें क्रम बद्ध रूप से गुंजन करते थे ; पाइप और वीणा के बजाये , इन अक्षरों का संगीतमय गुंजन सुना जाता है. "

स्वरों या "ध्वनि वाली अक्षरों " को बोलने में - सात क्षेत्रों में से प्रत्येक , ऐसा कहा जाता है की ये एक विभिन्न स्वर या प्राकृतिक - सुर देते हैं - निकोमकुस/Nicomachus हमें जानकारी देता है की ये मूल - ध्वनिया निश्चित भौतिक तत्वों के साथ मिलायी जाती हैं (एक साथ )हैं , जैसे की वहां बोलने वाली भाषा में {14} व्यंजन हैं ; परन्तु "जैसे शरीर के साथ आत्मा , और वीणा के साथ संगीत - श्रंखला बनाते हैं , एक बनाता है जीवित रचनाएँ और दूसरा संगीतमय साधन एवं धुन , इसीलिए वे मूल - ध्वनिया जन्म देते हैं निश्चित ऊर्जाओं को एवं दिव्य संचलनों की शुरूआती शक्तिओं को ."

- एक मिथ्राइक /Mithraic अनुष्ठान से .

सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन अत्यंत शक्तिशाली है .

प्रत्येक सत्र को शुरू किया जाना चाहिए अपने चक्रों को उचित रूप से संरेखित करने के द्वारा. चक्रों को संरेखित करने वाला लेख देखें . आदर्शरूप से , आपको आत्मा को खोलने वाले सारे मेडिटेशन्स अर्थात ध्यानों को कर लेना चाहिए . प्रत्येक चक्र के लिए सम्पूर्ण मैडिटेशन चार स्टेप्स में होता है .

1 .) दृश्य बनाना / कल्पना करना एवं उचित रूप से संरेखित करना विशेष चक्र को जिस पर आप कार्य कर रहे हैं .

2 .) ब्रीथिंग टेचनीक्स अर्थात सांस सम्बन्धी तकनीकों को करना जो उस विशेष चक्र से सम्बंधित हैं जिस पर आप कार्य कर रहे हैं .

3 .) चक्र के लिए शक्ति के शब्द को कम्पन्न करना .

4 .) कुछ मिनिटों के लिए चक्र पर मैडिटेशन करना [दृश्य बनाना / कल्पना करना , अनुभव लेना , महसूस करना . ]


यह महत्वपूर्ण है की प्रत्येक चक्र को आपको दिए हुए क्रम अनुसार कार्य करना है उन पर . जैसे क्राउन अर्थात सहस्रार से मूलाधार अर्थात बेस चक्र पर . या आप इसे उल्टा भी कर सकते हैं जैसे की मूलाधार अर्थात बेस चक्र से क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र तक , अगर आपके चक्र पूरी तरह से खुल गए हैं .

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क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र मैडिटेशन / ध्यान
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सातवां क्राउन चक्र , ईश्वरत्व अर्थात गोडहेड [ईश्वर जैसे बन जाना ] की कुर्सी [सहस्रार] हज़ार बार (से )अधिक

क्राउन चक्र को "हज़ार-पत्ती कमल /लोटस " के नाम से जाना जाता है . लोटस अर्थात कमल को लिली /Lily भी कहते हैं . Lily = "लिलिथ / Lilith ." इसके अलावा की प्रत्येक डीमोन एक वास्तिवक जीवित जीव है , प्रत्येक डीमोन का उनका अपना आध्यात्मिक सन्देश होता है . लिलिथ क्राउन चक्र की स्वामी हैं . सेटन बेस अर्थात मूलाधार चक्र के स्वामी हैं . बेस और क्राउन चक्र दोनों पुरुष एवं स्त्री जोड़े हैं जो एक साथ कार्य करते हैं .

स्थान : सिर के ऊपर
तत्व : पानी
रंग : बैंगनी
पत्तीओं की संख्या : हज़ार - पत्ती कमल
गृह : बृहस्पति
लिंग : स्त्री
दिन : गुरुवार
धातू : टिन /TIN
कार्य : प्रबोधन / आलोक
अंदरूनी अवस्था / राज्य : परमानन्द

कम्पन्न [निम्न में से कोई एक चुने ]

* " मरडुक /MARDUK" [नेक्रोनोमिकोन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ता , कर सकते हैं . म-म-म-आह-आह-र-र-र(र को लुढ़काना है )- ढ-ढ -ढ-ऊ-ऊ-ऊ--क-क-क. ("M-M-M-AH-AH-AH-R-R-R-DH-DH-DH-OO-OO-OO-K-K-K" )
इस बात को निश्चित कर लें की आप अपनी जीभ को 'ढ /DH ' भाग के कम्पन्न के लिए तुरंत अपने दो सामने के दांतों के ऊपर रख दें , जैसे की आप अंग्रेजी में शब्द "डॉग/Dog" को कहेंगेऔर इसे कम्पन्न करें . यह बहुत सामान है परन्तु थोड़ा अधिक अतिरंजित (बढ़ा कर कहा जाता है ) "थ / TH" कम्पन्न की अपेक्षा .

* इंग /ING [रियूनिक ] यह कम्पन्न मध्यवर्ती है उन्नत की अपेक्षा , परन्तु इसका उपयोग दोनों नए एवं अनुभवी मेडिटेटर्स कर सकते हैं .
"ई-ई-ई-ई-ई-न-न-न-ग-ग-ग-ग-" ("E-E-E-E-E-N-N-N-G-G-G-G-" )

* मौम / MAUM [संस्कृत ] यह कम्पन्न उन्नत है एवं विशेषकर शक्तिशैली है , और इसका उपयोग केवल अनुभवी मेडिटेटर्स के द्वारा किया जाना चाहिए .
"ममाहहह -ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म ( MMAHHH – UUU – MMM )"
ऊ /U गाया जाता है जैसा की अंग्रेजी शब्द टू/too .

* इस चक्र का कोई परंपरागत गुंजन नहीं है .


ध्यान दें - हमेशा सामान श्रेणी रखें आपके शक्ति के शब्द के सम्बन्ध में , अगर आप सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन कर रहे हैं , उदाहरण के लिए , अगर आप रियूनिक कम्पन्न का उपयोग कर रहे हैं , तो इसी को करें , और अन्य चक्रों के लिए भी रियूनिक कम्पन्नों का उपयोग करें .

इस चक्र के लिए कोई ब्रीथिंग (सांस लेने छोड़ने वाला ) व्यायाम नहीं है .

मैडिटेशन - यह मैडिटेशन को सबसे अच्छा गुरुवार के दिन करना चाहिए , बृहस्पति के घंटों में , परन्तु अगर आप सम्पूर्ण मैडिटेशन कर रहे हैं ; अर्थात सभी चक्रों पर कार्य कर रहे हैं , तो फिर कोई भी समय अच्छा है .

1 .) संरेखित करें [कल्पना करते / दृश्य बनाते हुए ] अपने सातवें चक्र को की वह नीचे की और मुख / बिंदु किया हुआ है जैसा की इस लेख के ऊपर चित्र में बताया गया है .

2 .) सांस को अंदर लें , ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें अपने सातवें चक्र पर और महसूस करें अपने सातवें चक्र को और सांस को बाहर छोड़ते समय , अपने चुने हुए शक्ति के शब्दों को [जो ऊपर दिए गए हैं ]कम्पन्न करें.

3 .) सांस अंदर लें , ध्यान केंद्रित करें अपने सातवें चक्र पर , और महसूस करें अपने सातवें चक्र पर , और अपने चुने हुए शक्ति के शब्द को कई बार कम्पन्न करें .

4 .) हिले डुले नहीं , ध्यान केंद्रित करते रहें अपने सातवें चक्र पर और महसूस करें अपने सातवें चक्र को कई मिनिटों के लिए .

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छटवां चक्र मैडिटेशन / ध्यान

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छटवां चक्र [अज्न/Ajna]

स्थान : ठीक क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र के नीचे
तत्व : ईथर /Ether
रंग : इंडिगो /नीला - बैंगनी
पत्तीओं के संख्या : दो / 2
गृह : चन्द्रमा
लिंग : स्त्री
दिन : सोमवार
धातु : चांदी
कार्य : मानसिक /पारलौकिक / अलौकिक दृष्टि
अंदरूनी अवस्था / राज्य : अंतर्ज्ञान/प्रतिभाज्ञान
ब्रीथिंग (सांस लेना छोड़ना ) तकनीक : कुम्भाका लूनर ब्रेथ अर्थात कुम्भका चन्द्र सांस.


कम्पन्न [निम्न में से कोई एक चुने ]:

* "इनांना /Inanna " [नेक्रोनोमिकोन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ता दोनों कर सकते हैं . "ई-ई-ई-न-न-न-न-आह-आह-न-न-न-आह-आह " ("EE-EE-EE-N-N-N-N-AH-AH-N-N-N-AH-AH" )

* औम (ॐ)/AUM [परंपरागत गुंजन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स कर सकते हैं . "आहहह - ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म (AHHH – UUU – MMM )"


* थॉर /THOR [रियूनिक ] यह कम्पन्न मध्यवर्ती है उन्नत के बीच का है , इसका उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटैशर्स कर सकते हैं .
"थ-थ-आह-आह-ऊ-ऊ-ऊ-र-र-र " (TH-TH-AH-AH-U-U-U-R-R-र) [र/R को लुढ़काना है ]
ऊ /U को अंग्रेजी शब्द टू /too के जैसे गाया जाता है .
इस बात को निश्चित कर लें की आपकी जीभ कम्पन्न के "थ /TH" भाग के लिए , आप उसे ठीक अपने सामने के दो दातों के ठीक पीछे रख लें , ठीक वहां जहां आपके दांत आपके मसूड़ों पर मिलते हैं .

* थौम/THAUM [संस्कृत ] यह कम्पन्न उन्नत है एवं विशेषकर शक्तिशाली है , और इसका उपयोग केवल अनुभवी मेडिटेटर्स को करना चाहिए.
"थ-थ-आह-आह-आह-ऊ-ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म " (TH-TH-AH-AH-AH-U-U-U-U-M-M-M-M )
ऊ /U को अंग्रेजी शब्द टू /too के जैसे गाया जाता है .
इस बात को निश्चित कर लें की आपकी जीभ कम्पन्न के "थ /TH" भाग के लिए , आप उसे ठीक अपने सामने के दो दातों के ठीक पीछे रख लें , ठीक वहां जहां आपके दांत आपके मसूड़ों पर मिलते हैं .

ध्यान दें - हमेशा सामान श्रेणी रखें आपके शक्ति के शब्द के सम्बन्ध में , अगर आप सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन कर रहे हैं , उदाहरण के लिए , अगर आप रियूनिक कम्पन्न का उपयोग कर रहे हैं , तो इसी को करें , और अन्य चक्रों के लिए भी रियूनिक कम्पन्नों का उपयोग करें .

मैडिटेशन -
इस मैडिटेशन अर्थात ध्यान को सबसे अच्छा सोमवार के दिन किया जाता है चन्द्रमा के घंटों / घडिओं के समय में , परन्तु अगर आप सम्पूर्ण मैडिटेशन कर रहे हैं , अर्थात अपने सभी चक्रों पर कार्य कर रहे हैं , तो कोई भी दिन अच्छा है .

1 .) संरेखित करें [कल्पना करें / दृश्य बनायें ] अपने छटवें चक्र का ऐसे की आपके छटवें चक्र का मुख / नोक नीचे की और है , जैसा इस लेख के ऊपर चित्र में बताया गया है .

2 .) कुम्भाका लूनर ब्रेथ अर्थात कुम्भका चन्द्र सांस करें .

3 .) सांस को अंदर लें , ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें अपने छटवें चक्र पर , और अपने छटवें चक्र को महसूस करें , और सांस को बाहर छोड़ने पर , कम्पन्न करें अपने चुने हुए शक्ति के शब्दों को कई बार .

4 .) हिले डुले नहीं , ध्यान केंद्रित करते रहें अपने छटवें चक्र पर , और अपने छटवें चक्र को महसूस करें कई मिनिटों के लिए .

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थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र मैडिटेशन / ध्यान

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पांचवा ,थ्रोट चक्र [विशुद्ध]

स्थान : गला
तत्व : वायु
रंग : आसमानी नीला
पत्तीओं की संख्या : सोलह /16
गृह : शुक्र
लिंग :स्त्री
दिन : शुक्रवार
धातू : तांबा
कार्य : संपर्क / बातचीत , भावनात्मक स्व - अभिव्यक्ति
अंदुरनी अवस्था / राज्य : मानसिक / पारलौकिक / अलौकिक श्रवण (सुनना ) , भावनाएं
ब्रीथिंग अर्थात सांस लेने छोड़ने की तकनीक : योगिक हमिंग (गिनगिनानेवाली ) सांस अर्थात ब्रेथ . [ब्रह्मारी ]

कम्पन्न [निम्न में से कोई एक चुने ] :

* नान्ना /NANNA [नेक्रोनोमिकोन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ता कर सकते हैं . "न-न-न-न-आह-आह-न-न-न-आह-आह " (N-N-N-N-AH-AH-N-N-N-AH-AH )

* हम /HAM या हंग/HANG [परंपरागत गुंजन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ता कर सकते हैं .
"ह-ह-आह-आह-आह-म-म-म-म "("H-H-AH-AH-AH-M-M-M-M") या "ह-ह-आह-आह-आह-न-न-ग-ग " ("H-H-AH-AH-AH-N-N-G-G" )

* कौन /KAUN (रियूनिक ) यह कम्पन्न मध्यवर्ती है उन्नत के बीच का है , परन्तु इसका उपयोग नए और अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स कर सकते हैं .
"क-क-आह-आह-ऊ-ऊ-ऊ-न-न " (K-K-AH-AH-AH-U-U-U-N-N )

*हौम/HAUM [संस्कृत ] यह कम्पन्न उन्नत है एवं विशेषकर शक्तिशाली है , एवं इसका उपयोग सिर्फ अनुभवी मेडिटेटर्स को करना चाहिए.

ध्यान दें - हमेशा सामान श्रेणी रखें आपके शक्ति के शब्द के सम्बन्ध में , अगर आप सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन कर रहे हैं , उदाहरण के लिए , अगर आप रियूनिक कम्पन्न का उपयोग कर रहे हैं , तो इसी को करें , और अन्य चक्रों के लिए भी रियूनिक कम्पन्नों का उपयोग करें .

मैडिटेशन :
यह मैडिटेशन को सबसे अच्छा शुक्रवार के दिन करना चाहिए शुक्र के घंटों / घड़िओं के दौरान , परन्तु अगर आप सम्पूर्ण मैडिटेशन कर रहे हैं , अर्थात अपने सभी चक्रों पर कार्य कर रहे हैं तो , कोई भी समय अच्छा है .

1 .) संरेखित करें [कल्पना करते हुए /दृश्य बनाते हुए ] अपने थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र को की आपके विशुद्ध चक्र का मुख / नोक नीचे की और बिंदु किये हुए है , ठीक जैसा इस लेख के ऊपर चित्र में बताया गया है .

2 .) योगिक हमिंग (गिनगिनानेवाली ) सांस (सांस अर्थात ब्रेथ ) को करें .

3 .) सांस को अंदर लें , फोकस करें अर्थात ध्यान केंद्रित करें अपने थ्रोट चक्र पर , और अपने थ्रोट चक्र को महसूस करें , फिर सांस को छोड़ने पर , कम्पन्न करें अपने चुने हुए शक्ति के शब्दों को कई बार .

4 .) हिले डुले नहीं , ध्यान केंद्रित करते रहें अपने थ्रोट चक्र पर और अपने थ्रोट चक्र को महसूस करें कई मिनिटों के लिए .

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हार्ट अर्थात अनाहत चक्र मैडिटेशन / ध्यान

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चौथा , हार्ट चक्र का केंद्र [अनाहत ]

स्थान : सीने /छाती का केंद्र
तत्व : अग्नि / वायु
रंग : हरा
पत्तीओं की संख्या :बारह / 12
गृह : बुध
लिंग : अकर्मक
दिन : बुधवार
धातू : पारा
कार्य : हार्ट चक्र अकर्मक कनेक्टर अर्थात जोड़ने वाला है ऊपर के एवं निचले चक्रों को .
अंदरूनी अवस्था / राज्य : छिछोरापन , लघुपं , एस्ट्रल प्रोजेक्शन अर्थात नाक्षत्रिक प्रक्षेपण
ब्रीथिंग अर्थात सांस लेने छोड़ने की तकनीक - वैकल्पिक नथनी श्वास / सूर्य - चन्द्र श्वास / अनुलोम विलोम

कम्पन्न [निम्न में से कोई एक चुने ] :

* नेबो /NEBO [नेक्रोनोमिकोन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ता कर सकते हैं .
"न-न-न-नैय-ऍय-ऍय-ब-ब-ब-ब-ओह-ओह-ओह " ("N-N-N-NAY-AY-AY-B-B-B-B-OH-OH-OH" )

* यम/YAM और यांग /YANG [परंपरागत गुंजन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी मेडिटेटर्स दोनों कर सकते हैं .
"य-य-आह-आह-म-म-म-म " ("Y-Y-AH-AH-AH-M-M-M-M" ) या "य-य-आह-आह-आह-न-न-ग-ग " ("Y-Y-AH-AH-AH-N-N-G-G" )

* गेबो [रियूनिक ] यह कम्पन्न मध्यवर्ती है उन्नत के बीच का है , परन्तु इसका उपयोग नए और अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स कर सकते हैं .
"ग-ग-ग-ग-ऍय-ऍय-ऍय-ब-ब-ब-ब-ओह-ओह-ओह-ओह " ("G-G-G-G-AY-AY-AY-B-B-B-B-OH-OH-OH-OH" )

*यौम /यौम [संस्कृत ] यह कम्पन्न उन्नत है एवं विशेषकर शक्तिशाली है , इसका उपयोग सिर्फ अनुभवी मेडिटेटर्स को करना चाहिए .
"य-य-य-आह-आह-आह-ऊ-ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म-म " ("Y-Y-Y-AH-AH-AH-U-U-U-U-M-M-M-M" )

ध्यान दें - हमेशा सामान श्रेणी रखें आपके शक्ति के शब्द के सम्बन्ध में , अगर आप सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन कर रहे हैं , उदाहरण के लिए , अगर आप रियूनिक कम्पन्न का उपयोग कर रहे हैं , तो इसी को करें , और अन्य चक्रों के लिए भी रियूनिक कम्पन्नों का उपयोग करें .

मैडिटेशन :
इस मैडिटेशन को सबसे अच्छा बुधवार के दिन करना चाहिए बुध के घंटों / घड़िओं में , परन्तु अगर आप सम्पूर्ण मैडिटेशन कर रहे हैं , अर्थात अपने सभी चक्र पर कार्य कर रहे हैं , तो कोई भी समय अच्छा है .

1 .) अपने हार्ट अर्थात अनाहत चक्र का दृश्य बनायें / कल्पना करें एक योनि के जैसे :
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2 .) वैकल्पिक नथनी श्वास / सूर्य - चन्द्र श्वास / अनुलोम विलोम करें .

3 ,) सांस को अंदर लें , और ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें अपने हार्ट चक्र पर , और अपने हार्ट चक्र को महसूस करें , और सांस को बाहर छोड़ने पर , कम्पन्न करें अपने चुने हुए शक्ति के शब्द को कई बार.

4 .) हिले डुले नहीं , ध्यान केंद्रित करें अपने हार्ट चक्र पर और अपने हार्ट चक्र को महसूस करें कई मिनिटों के लिए .

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सोलर 666 चक्र मैडिटेशन / ध्यान

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तीसरा , सोलर चक्र (मणिपूर)

स्थान : नाभि के थोड़ा ऊपर सोलर प्लेक्सस के पास
तत्व : अग्नि
रंग : सफ़ेद -सुन्हेरा (सोने के रंग का ) [मेधावी चमकदार सूर्य के जैसे ]
पत्तीओं की संख्या : दस 10
गृह : सूर्य
लिंग : पुरुष
दिन : रविवार
धातू : सोना अर्थात गोल्ड
कार्य : यह चक्र शक्तिगृह है आत्मा का ; इच्छा शक्ति का , शक्ति का , हस्तकौशल अर्थात मैनीपुलेशन का
अंदरूनी अवस्था / राज्य : इच्छा शक्ति , समय निर्धारण . यह चक्र ग्रेल अर्थात (कप ) है लूसीफ़र का .
ब्रीथिंग अर्थात सांस लेने छोड़ने की तकनीक : अग्नि श्वास /योगिक अग्नि श्वास (कपालभाति )

कम्पन्न [निम्न में से कोई एक को चुने ] :

* उददू /UDDU [नेक्रोनोमिकोन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ता कर सकते हैं .
"ऊ-ऊ-ऊ-ऊ-ढ-ढ-ढ-ढ-ऊ-ऊ-ऊ-ऊ" ("OO-OO-OO-OO-DH-DH-DH-DH-OO-OO-OO-OO" )
ऊ /U गाया जाता है जैसा की अंग्रेजी शब्द टू/too .
इस बात को निश्चित कर लें की आप अपनी जीभ को 'ढ /DH ' भाग के कम्पन्न के लिए तुरंत अपने दो सामने के दांतों के ऊपर रख दें , जैसे की आप अंग्रेजी में शब्द "डॉग/Dog" को कहेंगे और इसे कम्पन्न करेंगे . यह बहुत सामान है परन्तु थोड़ा अधिक अतिरंजित (बढ़ा कर कहा जाता है ) "थ / TH" कम्पन्न की अपेक्षा .

* राम /RAM या रंग /रंग [परंपरागत गुंजन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स कर सकते हैं .
"र-र-आह-आह-आह-म-म-म-म " ("R-R-AH-AH-AH-M-M-M-M" ) या "र-र-आह-आह-आह-न-न-ग-ग " ("R-R-AH-AH-AH-N-N-G-G") [र/R को लुढ़काना है ]

* रेडा/REDA [रियूनिक ] यह कम्पन्न मध्यवर्ती है उन्नत के बीच का है , परन्तु इसका उपयोग नए और अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स कर सकते हैं .
"र-र-ऍय-ऍय-ढ-ढ-आह-आह " (R-R-AY-AY-DH-DH-AH-AH) [र/R को लुढ़काना है ]
इस बात को निश्चित कर लें की आप अपनी जीभ को 'ढ /DH ' भाग के कम्पन्न के लिए तुरंत अपने दो सामने के दांतों के ऊपर रख दें , जैसे की आप अंग्रेजी में शब्द "डॉग/Dog" को कहेंगे और इसे कम्पन्न करेंगे . यह बहुत सामान है परन्तु थोड़ा अधिक अतिरंजित (बढ़ा कर कहा जाता है ) "थ / TH" कम्पन्न की अपेक्षा .

परिवर्तन [कहीं अधिक शक्तिशाली है एवं गोथिक /GOTHIC पर आधारित है ] : रौडा/RAUDA
"र-र-र-आह-आह-ऊ-ऊ-ऊ-ढ-ढ-आह-आह " (R-R-R-AH-AH-U-U-U-DH-DH-AH-AH) [र/R को लुढ़काना है ]
ऊ /U गाया जाता है जैसा की अंग्रेजी शब्द टू/too .
इस बात को निश्चित कर लें की आप अपनी जीभ को 'ढ /DH ' भाग के कम्पन्न के लिए तुरंत अपने दो सामने के दांतों के ऊपर रख दें , जैसे की आप अंग्रेजी में शब्द "डॉग/Dog" को कहेंगे और इसे कम्पन्न करेंगे . यह बहुत सामान है परन्तु थोड़ा अधिक अतिरंजित (बढ़ा कर कहा जाता है ) "थ / TH" कम्पन्न की अपेक्षा .

* रौम /RAUM [संस्कृत ] यह कम्पन्न उन्नत है एवं विशेषकर शक्तिशाली है , और इसका उपयोग केवल अनुभवी मेडिटेटर्स द्वारा किया जाना चाहिए
"र-र-आह-आह-आह-ऊ-ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म-म " ("R-R-AH-AH-AH-U-U-U-U-M-M-M-M" ) [र/R को लुढ़काना है ]
ऊ /U गाया जाता है जैसा की अंग्रेजी शब्द टू/too .

ध्यान दें* हमेशा सामान श्रेणी रखें आपके शक्ति के शब्द के सम्बन्ध में , अगर आप सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन कर रहे हैं , उदाहरण के लिए , अगर आप रियूनिक कम्पन्न का उपयोग कर रहे हैं , तो इसी को करें , और अन्य चक्रों के लिए भी रियूनिक कम्पन्नों का उपयोग करें .

मैडिटेशन :

यह मैडिटेशन अर्थात ध्यान सबसे अच्चा रविवार के दिन किया जाता है , सूर्य के घंटे / घड़िओं में , परन्तु अगर आप सम्पूर्ण मैडिटेशन कर रहे हैं ; अर्थात अपने सभी चक्रों पर कार्य कर रहे हैं , तो कोई भी समय अच्छा है .

1 .) संरेखित करें [दृश्य बनायें /कल्पना करें ] की आपका सोलर 666 चक्र नीचे की और बिंदु / मुख किये हुए है , जैसा की इस लेख के ऊपर चित्र में बतलाया गया है . [यह सर्व महत्वपूर्ण चक्र एक "कप " है और यह पीनियल ग्रंथि अर्थात पीनियल ग्लैंड के अमृत को पकड़ता है , जो अमरता प्रदान करती है
.]

2 .) अग्नि श्वास /योगिक अग्नि श्वास (कपालभाति ) करें .

3 .) सांस को अंदर लें , ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें अपने सोलर 666 चक्र पर और महसूस करें अपने सोलर 666 चक्र को , एवं सांस को बाहर छोड़ने पर , कम्पन्न करें अपने चुने हुए शक्ति के शब्दों को कई बार.

4 .) हिले डुले नहीं , ध्यान केंद्रित करते रहें अपने सोलर 666 चक्र पर और उसे महसूस करते रहें कई मिनिटों के लिए.

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सेक्रल चक्र (स्वाधिष्ठान) मैडिटेशन / ध्यान

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Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... hakra.html

स्थान : शिश्नरोम /जघनरोम अर्थात प्यूबिक /PUBIC हड्डी और नाभि के बीच का आधा रास्ता
तत्व : पृथ्वी
रंग : संतरा
पत्तीओं की संख्या : छह 6
गृह : मंगल
लिंग : पुरुष
दिन : मंगलवार
धातू : लोहा
कार्य : कामुकता, खुशी, उत्पत्ति, रचनात्मकता, यौन ऊर्जा की कुर्सी .
अंदरूनी अवस्था / राज्य : रचनात्मक क्षमता
ब्रीथिंग अर्थात सांस लेने छोड़ने की तकनीक : सेक्रल ब्रेथ / सांस [नीचे देखें ]


कम्पन्न [निम्न में से कोई एक चुने ]

*"नेरगल/NERGAL" [नेक्रोनोमिकोन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ता कर सकते हैं .
"न-न-न-एयर -एयर-एयर-ग-ग-ग-आह-आह-आह-ल-ल-ल " ("N-N-N-AIR-AIR-AIR-G-G-G-AH-AH-AH-L-L-L" )

*वाम /VAM या वांग /VANG [परंपरागत गुंजन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स कर सकते हैं .
"व-व-आह-आह-आह-म-म-म-म " ("V-V-AH-AH-AH-M-M-M-M") या "व-व-आह-आह-आह-न-न-ग-ग " ( "V-V-AH-AH-AH-N-N-G-G" )

* डगुर/DAGUR [रियूनिक ] यह कम्पन्न मध्यवर्ती है उन्नत के बीच का है , परन्तु इसका उपयोग नए और अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स कर सकते हैं .
"ढ-ढ-आह-आह-ग-ग-ऊ-ऊ-ऊ-र-र-र " (DH-DH-AH-AH-G-G-U-U-U-R-R-R ) [र/R को लुढ़काना है ]
इस बात को निश्चित कर लें की आप अपनी जीभ को 'ढ /DH ' भाग के कम्पन्न के लिए तुरंत अपने दो सामने के दांतों के ऊपर रख दें , जैसे की आप अंग्रेजी में शब्द "डॉग/Dog" को कहेंगे और इसे कम्पन्न करेंगे . यह बहुत सामान है परन्तु थोड़ा अधिक अतिरंजित (बढ़ा कर कहा जाता है ) "थ / TH" कम्पन्न की अपेक्षा .

*वौम/VAUM [संस्कृत ] यह कम्पन्न उन्नत है एवं विशेषकर शक्तिशाली है , एवं इसका उपयोग केवल अनुभवी मेडिटेटर्स द्वारा किया जाना चाहिए.
"व-व-आह-आह-आह-ऊ-ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म-म " ("V-V-AH-AH-AH-U-U-U-U-M-M-M-M" )
ऊ /U को अंग्रेजी शब्द टू /too के जैसे गाया जाता है .

ध्यान दें * हमेशा सामान श्रेणी रखें आपके शक्ति के शब्द के सम्बन्ध में , अगर आप सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन कर रहे हैं , उदाहरण के लिए , अगर आप रियूनिक कम्पन्न का उपयोग कर रहे हैं , तो इसी को करें , और अन्य चक्रों के लिए भी रियूनिक कम्पन्नों का उपयोग करें .

मैडिटेशन :

इस मैडिटेशन को सबसे अच्छा मंगलवार के दिन किया जाता है , मंगल के घंटों / घड़िओं में , परन्तु अगर आप सम्पूर्ण मैडिटेशन कर रहे हैं ; अर्थात अपने सभी चक्रों पर कार्य कर रहे हैं , तो कोई भी समय अच्छा है .

1 .) संरेखित करें [दृश्य बनायें / कल्पना करें ] की आपका सेक्रल चक्र ऊपर की और नोक / मुख किये हुए है , एक पिरामिड के जैसे , जैसा की इस लेख के ठीक ऊपर चित्र में दर्शाया गया है .

2 .) सेक्रल (स्वाधिष्ठान) ब्रेथ / सांस करें .
अपनी नाक से अंदर सांस लें और ध्यान केंद्रित करें की आप अपने बेस अर्थात मूलाधार चक्र कसे ऊर्जा को खींच रहे हैं अपने सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र में ; ऊर्जा को अपने सेक्रल चक्र में अंदर सांस लें और छह की गिनती तक रोके रहें . [यह विभिन्न हो सकता है अर्थात आप जितना आरामदेय रहें आप सांस को रोके रख सकते हैं , लेकिन सांस रोकना इसे कभी भी धकेले नहीं अर्थात खुद को तकलीफ देके सांस न रोकें अधिक देर के लिए ] चार या आठ की गिनती यह अच्छी है जब तक आप इस गिनती के साथ रुक सकते हैं और अपने सांस वाली अर्थात ब्रीथिंग एक्सरसाइज / व्यायाम को याद रख सकते हैं [अर्थात सांस की गिनती याद रखना ].
फिर सांस को बाहर छोड़ दें और सिर्फ आपको हवा को अपने फेफड़ों के बाहर अनायास गिरने देना है. यह एक दौरा है . ऐसे कई दौरे करें .

3 .) सांस अंदर लें , ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें अपने सेक्रल चक्र पर और उसे महसूस करें , एवं सांस को बाहर छोड़ने पर , कम्पन्न करें अपने चुने हुए शक्ति के शब्दों को .

4 .) हिले डुले नहीं, ध्यान केंद्रित करते रहें अपने सेक्रल चक्र पर और उसे महसूस करते रहें कई मिनिटों के लिए .

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बेस चक्र मैडिटेशन
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पहला , बेस चक्र , "मूलाधार " अर्थात , "रुट / जड़ / मूल "

तत्व : पृथ्वी
रंग : लाल
पत्तीओं की संख्या : चार 4
गृह : शनि
लिंग : पुरुष
दिन : शनिवार
धातु : लेड अर्थात सीसा
कार्य : उत्तरजीविता अर्थात सर्वाइवल , मूल-सिद्धांतों की पूर्ण शिक्षा
अंदरूनी अवस्था / राज्य : स्थिरता
ब्रीथिंग अर्थात सांस लेने छोड़ने की तकनीक : [नीचे देखें ]

कम्पन्न [निम्न में से कोई एक चुने ] :

* निनिब/NINIB [नेक्रोनोमिकोन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ता कर सकते हैं .
"न-न-न-न-ई-ई-ई-न-न-न-न-ई-ई-ई-ब-ब-ब-ब-ब " ("N-N-N-N-EE-EE-EE-N-N-N-N-EE-EE-EE-B-B-B-B-B")

* लाम/LAM या लांग/लांग [परंपरागत गुंजन ] इस कम्पन्न का उपयोग नए एवं अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स कर सकते हैं .
"ल-ल-आह-आह-आह-म-म-म-म " ("L-L-AH-AH-AH-M-M-M-M") या "ल-ल-आह-आह-न-न-ग-ग " ("L-L-AH-AH-AH-N-N-G-G" )

* सोविलो/SOWILO [रियूनिक ] यह कम्पन्न मध्यवर्ती है उन्नत के बीच का है , परन्तु इसका उपयोग नए और अनुभवी दोनों मेडिटेटर्स कर सकते हैं .
"स-स-ओह-ओह-व-व-ई-ई-ल्ल-ओह-ओह " ("S-S-OH-OH-V-V-EE-EE-LL-OH-OH" )

*लौम/LAUM [संस्कृत ] यह कम्पन्न उन्नत है एवं विशेषकर शक्तिशाली है , एवं इसका उपयोग केवल अनुभवी मेडिटेटर्स को करना चाहिए .
ऊ /U को अंग्रेजी शब्द टू /too के जैसे गाया जाता है .

ध्यान दें * हमेशा सामान श्रेणी रखें आपके शक्ति के शब्द के सम्बन्ध में , अगर आप सम्पूर्ण चक्र मैडिटेशन कर रहे हैं , उदाहरण के लिए , अगर आप रियूनिक कम्पन्न का उपयोग कर रहे हैं , तो इसी को करें , और अन्य चक्रों के लिए भी रियूनिक कम्पन्नों का उपयोग करें .

मैडिटेशन :

यह मैडिटेशन सबसे अच्छा शनिवार के दिन किया जाता है , शनि के घंटे / घड़िओं में , परन्तु अगर आप सम्पूर्ण मैडिटेशन कर रहे हैं ; अर्थात अपने सभी चक्रों पर कार्य कर रहे हैं , तो कोई भी समय अच्छा है .

1 .) संरेखित करें [कल्पना करें / दृश्य बनायें ] की आपका बेस अर्थात मूलाधार चक्र ऊपर की ओर मुख / नोक किये हुए है , एक पिरामिड के जैसे , जैसा की इस लेख के ऊपर चित्र में बतलाया गया है .

2 .) नीचे दी हुई ब्रीथिंग अर्थात सांस लेने छोड़ने वाली एक्सरसाइज अर्थात व्यायाम को करें :

*अपनी नाक में से सांस लें धीरे धीरे , अपने मलद्वार / गुदा को सिकोड़ें और दृश्य बनायें / कल्पना करें एवं ध्यान केंद्रित करें की ऊर्जा आपके बेस चक्र में खींची जा रही है , और सांस को अंदर लेने के साथ इस ऊर्जा को आप अपने सभी चक्रों में से होकर क्राउन अर्थात सहस्रार तक खींचे , प्रत्येक (चक्र ) को ज्योतिमय करते हुए .

* नए लोग चार की गिनती तक रोके रहें , औसत के लिए दस की गिनती तक एवं उन्नत मेडिटेटर्स अर्थात ध्यानकर्ताओं के लिए आप जितना लम्बा (जिसमे आप आरामदायक रहें )रोक सकते हैं रोके रहें. यह समान (एक सी ) गिनती अर्थात काउंट होना चाहिए सम्पूर्ण मैडिटेशन अर्थात ध्यान के दौरान.

* धीरे धीरे सांस को बाहर छोड़ें अपनी नाक से , और दृश्य बनायें / कल्पना करें और ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें ऊर्जा के ऊपर की ऊर्जा आपे क्राउन अर्थात सहस्रार चक्र से खींची जा रही है , इस ऊर्जा को निर्देशित करें वापस नीचे अपने सभी चक्रों में बेस अर्थात मूलाधार चक्र तक , प्रत्येक को ज्योतिमय अर्थात प्रकाशमय करते हुए .

3 .) अंदर सांस लें , ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें अपने बेस चक्र पर और अपने बेस चक्र को महसूस करें , एवं सांस को बाहर छोड़ने पर , कम्पन्न करें अपने चुने हुए शक्ति के शब्दों को कई बार.

4 .) हिले डुले नहीं , ध्यान केंद्रित करें अपने बेस चक्र पर और उसे महसूस करें कई मिनिटों के लिए.

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अवरुद्ध चक्रों को खोलना

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... akras.html

अक्सर , एक व्यक्ति का बेस अर्थात मूलाधार चक्र खुला हुआ होता है . एक जलने की सी अनुभूति या एक प्रचंड दबाव की अनुभूति एक व्यक्ति के चक्रों में अक्सर इस बात का संकेत है की चक्र जो उसके ऊपर है वह अवरुद्ध है . उदाहरण के लिए , कुछ लोगों को जलने की सी अनुभूति होती है थ्रोट अर्थात विशुद्ध में , जो इस बात को संकेत करता है की छटवां चक्र अवरुद्ध है .

1 .) चक्र ब्रीथिंग अर्थात चक्र सांस .

* अंदर सांस में लें या तो सफ़ेद - सुनहरी अर्थात सोने के रंग की रौशनी / प्रकाश या रंग ऊर्जा को अवरुद्ध चक्रों में . इस ऊर्जा का रंग समान होना चाहिए आपके उस चक्र के रंग से जिस पर आप कार्य रहे हैं . मैंने पाया है की सफ़ेद - सुनहरी अर्थात सोने के रंग की रौशनी बहुत प्रभावी होती है . दोनों का उपयोग एक साथ किया जा सकता है एक ही समय पर .

* अपनी सांस को छह की गिनती तक रोकें और दृश्य बनायें / कल्पना करें की आपका चक्र रौशनी / प्रकाश या रंग में घिरा हुआ है .

* सांस को बाहर छोड़ें एवं अपने चक्र को मेधावी चमकदार बनाते हुए उसे विस्तृत करें / बढ़ाएं .

* अपने बेस अर्थात मूलाधार चक्र में से सांस लें अंदर सफ़ेद - सुनहरी ऊर्जा को और उसे विस्तृत करें अर्थात बढ़ाएं . आप मन्त्रों को भी कम्पन्न कर सकते हैं सांस को बाहर छोड़ते समय. ये मन्त्र निम्न दिए हैं .

* ऊपर बतलाया व्यायाम कई बार दोहराएं . आपको जितना आरामदायक लगे , तब तक आप इस व्यायाम को कितनी भी बार कर सकते हैं .

2 .) सबसे प्रभावी अर्थात शक्तिशाली तरीका है कप्म्पन्न के माध्यम से करना -

*बेस अर्थात मूलाधार चक्र : लौम/Laum , कम्पन्न किया जाता है - ललआहहह -ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म 1 ( LLAHHH – UUU – MMM* )

*सेक्रल अर्थात स्वाधिष्ठान चक्र : वौम/Vaum , कम्पन्न किया जाता है - वाहहह -ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म(VAHHH – UUU – MMM )

*सोलर प्लेक्सस "666" अर्थात मणिपूर चक्र : रौम/Raum , कम्पन्न किया जाता है - राहहह -ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म 2(RAHHH – UUU – MMM** )

*हार्ट अर्थात अनाहत चक्र :यौम /Yaum , कम्पन्न किया जाता है - ययाहहह -ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म ( YYAHHH – UUU – MMM )

*थ्रोट अर्थात विशुद्ध चक्र : हौम/Haum , कम्पन्न किया जाता है - हाहहह - ऊ-ऊ-ऊ-म-म-म ( (HAHHH – UUU – MMM ))

*छटवां चक्र : औम (ॐ) / Aum , कम्पन्न किया जाता है - आहहह - ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म (AHHH – UUU – MMM )

* सातवां चक्र : मौम/Maum , कम्पन्न किया जाता है - ममाहहह -ऊ-ऊ-ऊ- म-म-म ( MMAHHH – UUU – MMM )

1 ऊ /U का उच्चारण किया जाता है अंग्रेजी शब्द 'ब्लू/blue ' के जैसे
2 'र/R ' को लुढ़काना है

रियून्स का उपयोग भी किया जा सकता है , एवं निश्चित कम्पन्न संस्कृत में के , ये चक्रों को बहुत जल्दी खोल देंगे. ध्यान केंद्रित करें अर्थात फोकस करें और कम्पन्न करें [ऊँचे स्वर से / चिल्लाकर ] अपने चक्र में जिसे आप खोलने की इच्छा रखते हैं , यह करते हुए आपको एक सफ़ेद - सुनहरी शक्तिशाली ऊर्जा का दृश्य बनाना है / कल्पना करनी है चक्र के ऊपर . थॉर /THOR रियून बहुत प्रभावी होता है ज़िद्दी क्षेत्रों को खोलने हेतु . इस कार्यचालन को प्रत्येक रात्रि दोहराना आवश्यक होता है , विशेषतः वैक्सिंग मून में अर्थात चन्द्रमा नए से सम्पूर्ण की ओर जा रहा है और सरल शब्दों में जब चन्द्रमा अपनी रौशनी में बढ़ता है तो उसे वैक्सिंग या वैक्स चन्द्रमा कहते हैं ]

अंततः , चक्र पर्याप्त शक्तिशाली हो जायेगा की वह प्राकृतिक रूप से ऊर्जा को लेने लगे स्वयं खुद . शक्तिशाली चक्र ऊर्जा को सोंख सकते हैं . कमज़ोर चक्र जो अवरुद्ध है वे क्षीण हो जाते हैं और वे ऊर्जा को स्वयं खुद सोखने एवं आकर्षित करने में असमर्थ होते हैं . कमज़ोर और अवरुद्ध चक्र बिमारिओं को पैदा करते हैं जो उस विशेष चक्र से सम्बंधित है और बीमारियां भी चक्रों को कमज़ोर बनाती हैं .

ऊपर दिए व्यायामों में से कोई एक या अधिक को चुने और उन्हें तब तक करें जब तक समस्या का हल न हो जाये.

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पीनियल ध्यान

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यह ध्यान अंतर्ज्ञान और रचनात्मकता को बढ़ाता है और एक (व्यक्ति ) के मन को खोलने में मदद करता है ताकि हम जानकारी को और अच्छे से समझ सकें .

1 . आराम करें और एक समाधी की अवस्था में जाएँ .

2 . सांस अंदर लें यह कल्पना करते हुए की एक सफ़ेद सुनहेरी(सोने के रंग की ) रौशनी आपकी तीसरी आँख में से होकर आपकी पीनियल ग्रंथि में जा रही है .

3 . हर सांस अंदर लेने के साथ उस ऊर्जा को अंदर खींचे , और उसे और अधिक चमकदार बनाते जाएँ , और आपकी प्रत्येक सांस को बाहर छोड़ने पर अपनी पीनियल ग्रंथि का विस्तार करें अर्थात उसे बढ़ाएं उस ऊर्जा के साथ

4 . पहले कुछ समय के लिए जब आप ऐसा करते हैं तो उस समय आप स्वयं को दृढ़ता के साथ कहें - "मै एक शक्तिशाली सफ़ेद सुनहेरी ऊर्जा अंदर ले रहा / रही हूँ अपनी सांस के साथ जो मेरी पीनियल ग्रंथि को सुरक्षा के साथ उभार रही है और उद्दीप्त कर रही है ".

5 . जब आपने ये कर लिया हो , तब आप उस ऊर्जा को कुछ समय के लिए महसूस करें और उस पर ध्यान करें . यह बहुत आनंदमयी होना चाहिए .

यह ध्यान पीनियल ग्रंथि को सक्रिय करता है और उसे शक्तिशाली बनता है . पीनियल ग्रंथि पारलौकिक / औलौकिक / आत्मा सम्बन्धी शक्ति ग्रह होता है मस्तिष्क का . सफ़ेद सुन्हेरा सबसे शक्ति शैली होता है हर रंग में . यह सूर्य का रंग होता है और यही एक बड़ा कारण है की वास्तविक धर्मो में सूर्य की पूजा की जाती थी .

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HEY HAVE
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Post Thu Feb 04, 2016 10:35 am

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तत्वों का आव्हान करने के लिए प्रारंभिक मैडिटेशन / ध्यान

Source URL - http://www.angelfire.com/empire/serpent ... aring.html

वास्तव में निपुण होने के लिए , एक व्यक्ति को तत्वों अर्थात एलिमेंट्स पर महारत हासिल करनी चाहिए. टैरो के मेज कार्ड का भी यही सन्देश है . आपको स्वस्थ होना चाहिए की आप तत्वों का आव्हान कर सकें . आप में से वे लोग जो धीरे धीरे जाना चाहे हैं , ये प्रारंभिक मेडिटेशन्स आपको मदद कर सकते हैं .

अग्नि के लिए :

1 .) शांत बैठ जाएँ .

2 .) दृश्य बनायें / कल्पना करें एक विशाल अलाव का . *सुनें * कुरकुरी ध्वनि को और *महसूस * करें गर्मी को , फिर *सूंघें * गर्मी को .

ऐसा पांच मिनिटों के लिए करें .

जल के लिए :

1 .) शांत बैठ जाएँ एवं आराम करें .

2 .) दृश्य ब